तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र से अधिक कर हिस्सेदारी की मांग का सर्वसम्मति से किया प्रस्ताव पारित

Tamil Nadu Assembly adopts unanimous resolution on fair share of Central tax devolution — diagram

तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र से अधिक कर हिस्सेदारी की मांग का सर्वसम्मति से किया प्रस्ताव पारित

Map of Tamil Nadu highlighted on the map of India — Central tax devolution formula UPSC
मानचित्र व माइंड-मैप: तमिलनाडु विधानसभा का केंद्र को कर-वितरण में न्यायपूर्ण हिस्सा देने का प्रस्ताव

✎ राजकोषीय संघवाद भारत में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण का सिद्धांत है, जिसमें वित्त आयोग कर हस्तांतरण के लिए मानदंड निर्धारित करता है, और हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा ने इन मानदंडों में निष्पक्षता की मांग की…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, वित्त आयोग के कार्य और जिम्मेदारियाँ  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: संसाधन जुटाना, राजकोषीय संघवाद
  • Prelims: राजकोषीय संघवाद, वित्त आयोग, कर हस्तांतरण, अनुच्छेद 280, राज्यों का वित्तीय स्वायत्तता, जनसंख्या स्थिरीकरण मानदंड
  • Essay: भारत में राजकोषीय संघवाद की चुनौतियाँ और भविष्य, केंद्र-राज्य संबंधों में वित्तीय असंतुलन का प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: राजकोषीय संघवाद भारत में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण का सिद्धांत है, जिसमें वित्त आयोग कर हस्तांतरण के लिए मानदंड निर्धारित करता है, और हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा ने इन मानदंडों में निष्पक्षता की मांग की है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र सरकार से केंद्रीय करों के हस्तांतरण (devolution) में राज्य को उसका उचित हिस्सा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव अपनाया है। इस प्रस्ताव में वित्तीय संघवाद (fiscal federalism), इक्विटी और निष्पक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप एक पारदर्शी, वस्तुनिष्ठ और न्यायसंगत पद्धति अपनाने की मांग की गई है, जो राज्यों के योगदान, राजकोषीय प्रयास, शासन प्रदर्शन और विकासात्मक आवश्यकताओं को उचित रूप से मान्यता दे।

पृष्ठभूमि

  • भारत में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों का वितरण संविधान द्वारा निर्धारित किया गया है, जिसका उद्देश्य राजकोषीय संघवाद को बनाए रखना है।
  • संविधान का अनुच्छेद 280 एक वित्त आयोग (Finance Commission) की स्थापना का प्रावधान करता है, जो हर पाँच साल में राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • वित्त आयोग की मुख्य जिम्मेदारी केंद्र और राज्यों के बीच करों की शुद्ध आय के वितरण और राज्यों के बीच ऐसे राजस्व के संबंधित शेयरों पर सिफारिशें करना है।
  • कर हस्तांतरण (tax devolution) के मानदंड समय-समय पर वित्त आयोगों द्वारा संशोधित किए जाते हैं, जिसमें जनसंख्या, क्षेत्रफल, आय असमानता, राजकोषीय क्षमता और प्रदर्शन जैसे कारक शामिल होते हैं।
  • कुछ दक्षिणी राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु, ने जनसंख्या स्थिरीकरण और मानव विकास में अपनी उपलब्धियों के कारण कर हस्तांतरण में तुलनात्मक नुकसान का अनुभव करने की चिंता व्यक्त की है, क्योंकि जनसंख्या को एक प्रमुख मानदंड के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • राज्यों का तर्क है कि उनके राजकोषीय प्रयासों और केंद्र के राजस्व में उनके योगदान को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

भारत में राजकोषीय संघवाद और कर हस्तांतरण

  • भारत में राजकोषीय संघवाद केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों और जिम्मेदारियों के विभाजन को संदर्भित करता है, ताकि प्रत्येक स्तर पर सरकार अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके।
  • संविधान केंद्र और राज्यों दोनों को कर लगाने की शक्ति प्रदान करता है, लेकिन कुछ करों की आय केंद्र द्वारा एकत्र की जाती है और फिर वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्यों के साथ साझा की जाती है।
  • वित्त आयोग केंद्रीय करों की शुद्ध आय के एक हिस्से को राज्यों के बीच वितरित करने के लिए एक सूत्र (formula) तैयार करता है, जिसे ‘क्षैतिज हस्तांतरण’ (horizontal devolution) कहा जाता है।
  • यह सूत्र विभिन्न मानदंडों जैसे जनसंख्या (2011 की जनगणना), क्षेत्रफल, वन और पारिस्थितिकी, आय असमानता, राजकोषीय प्रयास और जनसांख्यिकीय प्रदर्शन पर आधारित होता है।
  • जनसंख्या स्थिरीकरण में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों का तर्क है कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग उन्हें दंडित करता है, क्योंकि उनकी जनसंख्या वृद्धि दर कम रही है, जिससे उन्हें कर हस्तांतरण में कम हिस्सा मिलता है।
  • राजकोषीय संघवाद का उद्देश्य राज्यों को उनकी विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना है, साथ ही केंद्र के साथ वित्तीय संतुलन बनाए रखना है।
  • राज्यों द्वारा उठाए गए प्रस्ताव केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और इक्विटी सुनिश्चित करने के लिए वित्त आयोगों के मानदंडों की निरंतर समीक्षा और समायोजन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं।
  • यह मुद्दा भारत में सहकारी संघवाद (cooperative federalism) की भावना को बनाए रखने और सभी राज्यों के संतुलित विकास को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सर्वसम्मत संकल्प यह केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों की एकजुटता और गंभीर चिंता को दर्शाता है।
वित्तीय हस्तांतरण में उचित हिस्सेदारी राज्य सरकारें केंद्र से अपने कर राजस्व के उचित हिस्से की मांग कर रही हैं, जो संवैधानिक सिद्धांतों पर आधारित हो।
पारदर्शी और न्यायसंगत कार्यप्रणाली संकल्प में केंद्र से कर हस्तांतरण के लिए एक ऐसी कार्यप्रणाली अपनाने का आग्रह किया गया है जो राज्यों के योगदान, राजकोषीय प्रयासों और विकास आवश्यकताओं को उचित रूप से मान्यता दे।
जनसंख्या स्थिरीकरण और मानव विकास यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है कि जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में राज्यों की उपलब्धियों के कारण उन्हें वित्तीय नुकसान न हो।
राजकोषीय संघवाद यह संकल्प भारत के राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) ढांचे के भीतर केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन और स्वायत्तता के महत्व पर प्रकाश डालता है।

महत्व

राजकोषीय संघवाद पर प्रभाव

  • यह संकल्प भारत में राजकोषीय संघवाद के सिद्धांतों पर बहस को फिर से शुरू करता है, विशेष रूप से कर हस्तांतरण (Tax Devolution) के मानदंडों के संबंध में।
  • यह राज्यों की बढ़ती आकांक्षाओं को दर्शाता है कि उन्हें केंद्र के कुल कर राजस्व में उनके योगदान के अनुपात में अधिक वित्तीय स्वायत्तता और उचित हिस्सा मिले।

केंद्र-राज्य संबंध

  • यह केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों में संभावित तनाव को उजागर करता है, खासकर जब राज्यों को लगता है कि उनके वित्तीय हितों की अनदेखी की जा रही है।
  • यह राज्यों द्वारा अपने वित्तीय अधिकारों की रक्षा के लिए विधायी मंचों का उपयोग करने के बढ़ते चलन को दर्शाता है।

जनसंख्या मानदंड का मुद्दा

  • यह उन राज्यों की चिंताओं को सामने लाता है जिन्होंने जनसंख्या स्थिरीकरण (Population Stabilisation) में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उन्हें डर है कि जनसंख्या के आधार पर कर हस्तांतरण में उन्हें दंडित किया जा सकता है।
  • यह मानव विकास संकेतकों को कर हस्तांतरण मानदंडों में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर देता है ताकि राज्यों को उनके सामाजिक-आर्थिक सुधारों के लिए पुरस्कृत किया जा सके।

चुनौतियाँ

1. कर हस्तांतरण में असंतुलन

  • राज्यों को अक्सर यह महसूस होता है कि केंद्र के कर राजस्व में उनके योगदान की तुलना में उन्हें कर हस्तांतरण में कम हिस्सा मिलता है।
  • यह राज्यों की विकास आवश्यकताओं और केंद्र की राजस्व संग्रह क्षमता के बीच असंतुलन पैदा करता है।

2. जनसंख्या मानदंड का प्रभाव

  • जनसंख्या को कर हस्तांतरण का एक प्रमुख मानदंड बनाने से उन दक्षिणी राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त की है।
  • यह राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों से हतोत्साहित कर सकता है, जो राष्ट्रीय हित में नहीं है।

3. राजकोषीय प्रयास और प्रदर्शन की पहचान

  • राज्यों के अपने राजकोषीय प्रयासों और बेहतर शासन प्रदर्शन को कर हस्तांतरण के मानदंडों में पर्याप्त रूप से मान्यता नहीं मिलती है।
  • यह राज्यों को वित्तीय अनुशासन और सुशासन के लिए प्रोत्साहित करने में बाधा डालता है।

4. पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता की कमी

  • राज्यों को अक्सर लगता है कि कर हस्तांतरण के लिए अपनाई गई कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता की कमी है।
  • इससे केंद्र और राज्यों के बीच अविश्वास और विवाद पैदा होता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कर हस्तांतरण में हिस्सेदारी तमिलनाडु जैसे राज्यों को लगता है कि उन्हें केंद्र को दिए गए करों के अनुपात में उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है।
जनसंख्या मानदंड जनसंख्या स्थिरीकरण में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को डर है कि जनसंख्या के आधार पर उन्हें वित्तीय रूप से नुकसान होगा।
राजकोषीय प्रयास की अनदेखी राज्यों के अपने राजस्व जुटाने के प्रयासों और सुशासन को कर हस्तांतरण के मानदंडों में पर्याप्त मान्यता नहीं मिलती है।
पारदर्शिता का अभाव कर हस्तांतरण की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता की कमी पर राज्यों द्वारा सवाल उठाए जाते हैं।
संवैधानिक सिद्धांत राजकोषीय संघवाद, इक्विटी और निष्पक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों का पूर्ण रूप से पालन न होने की आशंका।

आगे की राह

  • वित्त आयोग (Finance Commission) को कर हस्तांतरण के लिए एक पारदर्शी, वस्तुनिष्ठ और न्यायसंगत कार्यप्रणाली विकसित करनी चाहिए।
  • जनसंख्या स्थिरीकरण और मानव विकास में राज्यों की उपलब्धियों को पुरस्कृत करने के लिए उपयुक्त मानदंड शामिल किए जाने चाहिए।
  • राज्यों के राजकोषीय प्रयासों और सुशासन प्रदर्शन को कर हस्तांतरण के मानदंडों में उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
  • केंद्र और राज्यों के बीच नियमित संवाद और परामर्श को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि वित्तीय मुद्दों पर आम सहमति बन सके।
  • राज्यों की विकास आवश्यकताओं और विशिष्ट चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कर हस्तांतरण के फार्मूले को लचीला बनाया जाना चाहिए।
  • राजकोषीय संघवाद के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक प्रावधानों की समीक्षा और आवश्यकतानुसार सुधार किया जा सकता है।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राजकोषीय संघवाद · कर विचलन · वित्त आयोग · अनुच्छेद 280 · राज्यों का वित्तीय स्वायत्तता · जनसंख्या स्थिरीकरण · मानव विकास · राजकोषीय प्रयास · राज्यों का योगदान · संविधान के सिद्धांत · केंद्र-राज्य संबंध · राजकोषीय असंतुलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 280: वित्त आयोग का गठन
  • अनुच्छेद 268-281: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
  • सातवीं अनुसूची: संघ और राज्य सूची में कराधान

अवधारणा प्रवाह

राज्यों द्वारा केंद्र को करों का योगदान  →  केंद्र द्वारा राज्यों को करों का हस्तांतरण  →  राज्यों की चिंताएँ: उचित हिस्सेदारी, जनसंख्या मानदंड  →  तमिलनाडु विधानसभा का सर्वसम्मत संकल्प  →  राजकोषीय संघवाद और केंद्र-राज्य संबंधों पर बहस  →  वित्त आयोग की भूमिका और सिफारिशें

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 280 वित्त आयोग की स्थापना का प्रावधान करता है।
2. वित्त आयोग की सिफारिशें केंद्र सरकार के लिए बाध्यकारी होती हैं।
3. 15वें वित्त आयोग ने राज्यों को केंद्रीय करों में 41% हिस्सेदारी की सिफारिश की थी।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 280 वित्त आयोग के गठन का प्रावधान करता है। कथन 2 गलत है। वित्त आयोग की सिफारिशें केवल सलाहकारी प्रकृति की होती हैं और केंद्र सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होती हैं, हालांकि आमतौर पर इन्हें स्वीकार कर लिया जाता है। कथन 3 सही है। 15वें वित्त आयोग ने राज्यों को केंद्रीय करों के शुद्ध आगम में 41% हिस्सेदारी की सिफारिश की थी।

Q2. राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण से संबंधित है।
2. यह राज्यों को अपनी राजस्व आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक स्वायत्तता प्रदान करता है।
3. यह राज्यों के बीच क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने का प्रयास करता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — राजकोषीय संघवाद केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण (कथन 1 सही) और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने (कथन 3 सही) से संबंधित है। यह राज्यों को अपनी राजस्व आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक स्वायत्तता प्रदान करने का एक लक्ष्य हो सकता है, लेकिन यह इसकी अनिवार्य परिभाषा नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राजकोषीय संघवाद के सिद्धांतों के आलोक में, केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को कर विचलन (Tax Devolution) के लिए अपनाए गए मानदंडों की आलोचनात्मक जांच करें। क्या जनसंख्या स्थिरीकरण और मानव विकास में राज्यों की उपलब्धियों को विचलन के मानदंडों में पर्याप्त रूप से मान्यता दी जाती है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: राजकोषीय संघवाद और कर विचलन के संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 280, वित्त आयोग) का संक्षिप्त परिचय।
मुख्य भाग:
1. कर विचलन के मानदंड: वित्त आयोगों द्वारा अपनाए गए प्रमुख मानदंडों (जैसे जनसंख्या, क्षेत्रफल, आय अंतर, राजकोषीय क्षमता, राजकोषीय प्रयास, जनसांख्यिकीय प्रदर्शन) की व्याख्या करें।
2. आलोचनात्मक जांच: उन चिंताओं पर प्रकाश डालें जो तमिलनाडु जैसे राज्य व्यक्त कर रहे हैं। इसमें शामिल हो सकता है:
क. जनसंख्या स्थिरीकरण: उन राज्यों को दंडित करने का आरोप जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा प्रदर्शन किया है, क्योंकि जनसंख्या मानदंड उन्हें कम हिस्सा दिलाता है।
ख. मानव विकास: मानव विकास संकेतकों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के योगदान को पर्याप्त रूप से मान्यता न देना।
ग. राजकोषीय प्रयास और योगदान: राज्यों द्वारा केंद्र को दिए गए कर योगदान और उनके राजकोषीय प्रयासों को विचलन में उचित महत्व न मिलना।
घ. पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता: विचलन पद्धति में अधिक पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता की मांग।
3. संवैधानिक सिद्धांत: राजकोषीय संघवाद, इक्विटी और निष्पक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों के साथ इन मानदंडों के संरेखण पर चर्चा करें।
4. संभावित समाधान/सुधार: भविष्य के वित्त आयोगों के लिए संभावित सुधारों या वैकल्पिक मानदंडों पर सुझाव दें जो इन चिंताओं को दूर कर सकें (जैसे जनसांख्यिकीय प्रदर्शन के लिए विशेष भारांक, विकासशील राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर विचार)।
निष्कर्ष: केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक संतुलित और न्यायसंगत विचलन प्रणाली की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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