तमिलनाडु विधानसभा में शराब बिक्री पर पर्यावरण एवं कल्याण उपकर विधेयक प्रस्तुत

Tamil Nadu introduces Bill to levy environmental and social welfare cess on liquor sales — diagram

तमिलनाडु विधानसभा में शराब बिक्री पर पर्यावरण एवं कल्याण उपकर विधेयक प्रस्तुत

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Revenue from liquor cess

✎ तमिलनाडु सरकार द्वारा शराब की बिक्री पर लगाया गया 'पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर' शराब की खपत से उत्पन्न पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक विशिष्ट वित्तीय तंत्र है, जो राज्य के राजस्व को एक लक्षित…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — राजव्यवस्था और शासन, सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, भारतीय अर्थव्यवस्था
  • Prelims: उपकर (Cess), तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम 2006, शराब पर कर, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक कल्याण कार्यक्रम, पुनर्वास कार्यक्रम, राज्य वित्त, संघवाद
  • Essay: शराब की खपत: सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव, राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और सामाजिक कल्याण की चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: तमिलनाडु सरकार द्वारा शराब की बिक्री पर लगाया गया ‘पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर’ शराब की खपत से उत्पन्न पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक विशिष्ट वित्तीय तंत्र है, जो राज्य के राजस्व को एक लक्षित उद्देश्य के लिए समर्पित करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2006 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य शराब की बिक्री पर ‘पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर’ (Environmental and Social Welfare Cess) लगाना है। यह उपकर शराब के सेवन से उत्पन्न होने वाले सामाजिक और पर्यावरणीय परिणामों, विशेषकर अपशिष्ट प्रबंधन और शराब की लत से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए धन जुटाएगा।

पृष्ठभूमि

  • शराब की खपत से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दे लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं, जिसमें शराब की बोतलों और कंटेनरों का अनुचित निपटान पारिस्थितिक क्षरण का कारण बनता है।
  • शराब की लत व्यक्तियों और परिवारों पर गंभीर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव डालती है, जिससे पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों की आवश्यकता होती है।
  • राज्यों को संविधान के तहत शराब पर कर लगाने का अधिकार है, जो उनके राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
  • उपकर (Cess) एक प्रकार का कर है जो किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए लगाया जाता है और उसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि एकत्रित धन लक्षित कार्यक्रमों के लिए ही खर्च हो।
  • यह विधेयक राज्य सरकार की बढ़ती चिंता को दर्शाता है कि शराब की खपत से उत्पन्न अपशिष्ट और सामाजिक समस्याओं का समाधान किया जाए।
  • यह पहल पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के साथ-साथ शराब की लत से प्रभावित परिवारों के लिए कल्याणकारी उपायों और आजीविका सहायता को भी वित्तपोषित करेगी।

उपकर (Cess) क्या है?

  • उपकर (Cess) एक अतिरिक्त कर है जो किसी विशेष उद्देश्य के लिए लगाया जाता है।
  • यह केंद्र या राज्य सरकार द्वारा लगाया जा सकता है।
  • उपकर से प्राप्त आय को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) का हिस्सा नहीं माना जाता है, बल्कि इसे एक अलग निधि में रखा जाता है और केवल उसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है जिसके लिए इसे लगाया गया था।
  • यह करों (Taxes) से भिन्न होता है, क्योंकि करों से प्राप्त आय को सरकार किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग कर सकती है।
  • उपकर का उद्देश्य अक्सर किसी विशिष्ट क्षेत्र या सामाजिक समस्या के समाधान के लिए धन जुटाना होता है, जैसे शिक्षा उपकर, स्वच्छ भारत उपकर, आदि।
  • तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रस्तावित यह उपकर शराब की बिक्री से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के वित्तपोषण के लिए है।
  • यह उपकर शराब की बोतलों और कंटेनरों के पुनर्चक्रण (Recycling), सुरक्षित निपटान और पुन: उपयोग के साथ-साथ शराब की लत से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों को वित्तपोषित करेगा।
  • उपकर से प्राप्त राजस्व का उपयोग शराब की लत से प्रभावित परिवारों के लिए कल्याणकारी उपायों और आजीविका सहायता के लिए भी किया जाएगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर (Cess) शराब की बिक्री पर लगाया जाने वाला यह उपकर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए धन जुटाएगा।
तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2006 में संशोधन यह उपकर लगाने के लिए मौजूदा कानून में आवश्यक कानूनी बदलाव किए जाएंगे, जिससे इसकी वैधता सुनिश्चित होगी।
पर्यावरण संबंधी पहलें शराब की बोतलों और कंटेनरों के पुनर्चक्रण (recycling), सुरक्षित निपटान और पुन: उपयोग के लिए धन उपलब्ध कराएगा, जिससे पारिस्थितिकीय क्षरण कम होगा।
सामाजिक कल्याण कार्यक्रम शराब की लत से प्रभावित व्यक्तियों के लिए पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों को वित्तपोषित करेगा, साथ ही प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करेगा।
जन जागरूकता अभियान शराब के हानिकारक प्रभावों और इसके कंटेनरों के अनुचित निपटान से होने वाले पर्यावरणीय खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए धन का उपयोग किया जाएगा।

महत्व

पर्यावरण संरक्षण

  • यह उपकर शराब के कंटेनरों से उत्पन्न होने वाले कचरे के प्रबंधन, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन प्रदान करेगा, जिससे पारिस्थितिकीय क्षरण (ecological degradation) को रोकने में मदद मिलेगी।
  • वन, वन्यजीव और व्यापक पारिस्थितिकी (ecology) के संरक्षण और बहाली के लिए भी धन का उपयोग किया जाएगा, जो जैव विविधता (biodiversity) और पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।

सामाजिक कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य

  • शराब की लत से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों को मजबूत करेगा, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव कम होंगे।
  • शराब की लत से प्रभावित परिवारों को कल्याणकारी उपाय और आजीविका सहायता प्रदान करेगा, जिससे सामाजिक सुरक्षा जाल मजबूत होगा।
  • शराब के हानिकारक प्रभावों के बारे में जन जागरूकता अभियानों से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है और शराब के सेवन से जुड़ी सामाजिक समस्याओं को कम किया जा सकता है।

राजकोषीय स्वायत्तता और नवाचार

  • राज्य सरकारों को विशिष्ट सामाजिक और पर्यावरणीय उद्देश्यों के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने का एक अभिनव तरीका प्रदान करता है, जिससे उनकी राजकोषीय स्वायत्तता (fiscal autonomy) बढ़ती है।
  • यह उपकर ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ (Polluter Pays Principle) के अनुरूप है, जहां शराब उद्योग और उपभोक्ता पर्यावरणीय लागतों में योगदान करते हैं।

चुनौतियाँ

1. उपकर का बोझ और उपभोक्ता पर प्रभाव

  • शराब पर उपकर लगाने से इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
  • उच्च कीमतों से अवैध शराब के व्यापार में वृद्धि हो सकती है, जिससे राजस्व का नुकसान होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेंगे।

2. राजस्व का कुशल उपयोग और पारदर्शिता

  • यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि उपकर से प्राप्त राजस्व का उपयोग वास्तव में निर्दिष्ट पर्यावरणीय और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए ही किया जाए।
  • निधियों के आवंटन और व्यय में पारदर्शिता (transparency) और जवाबदेही (accountability) बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है।

3. अंतर-राज्यीय तुलना और प्रतिस्पर्धा

  • यदि पड़ोसी राज्यों में शराब पर समान उपकर नहीं लगाया जाता है, तो इससे सीमा पार से शराब की तस्करी बढ़ सकती है, जिससे राज्य के राजस्व को नुकसान होगा।
  • यह राज्य में शराब उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी प्रभावित कर सकता है।

4. लत और पुनर्वास कार्यक्रमों का प्रभावी कार्यान्वयन

  • नशामुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए पर्याप्त विशेषज्ञता, बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है।
  • शराब की लत से प्रभावित परिवारों को प्रभावी ढंग से लक्षित करना और सहायता प्रदान करना भी जटिल हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उपकर का उपभोक्ता पर बोझ शराब की कीमतों में वृद्धि से उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है और अवैध शराब के व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।
राजस्व के उपयोग में पारदर्शिता यह सुनिश्चित करना कि उपकर से प्राप्त धन का उपयोग केवल निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए हो और इसमें कोई दुरुपयोग न हो।
अवैध शराब व्यापार का जोखिम पड़ोसी राज्यों की तुलना में उच्च कर दरें अवैध शराब की तस्करी को प्रोत्साहित कर सकती हैं।
पुनर्वास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता नशामुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनके परिणामों को मापने की चुनौती।
पर्यावरणीय कचरा प्रबंधन की व्यापकता शराब की बोतलों से परे अन्य पर्यावरणीय कचरे के प्रबंधन के लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता।

आगे की राह

  • उपकर से प्राप्त राजस्व के उपयोग के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी ढांचा स्थापित किया जाए, जिसमें निधियों के आवंटन और व्यय की नियमित ऑडिटिंग (auditing) शामिल हो।
  • पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया जाए, जिसमें चिकित्सा सहायता, परामर्श, व्यावसायिक प्रशिक्षण और सामाजिक पुन: एकीकरण शामिल हो।
  • शराब के कंटेनरों के पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान के लिए एक मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए, जिसमें संग्रह, प्रसंस्करण और पुन: उपयोग की सुविधाएं शामिल हों।
  • शराब के हानिकारक प्रभावों और पर्यावरणीय खतरों के बारे में जन जागरूकता अभियानों को लगातार और प्रभावी ढंग से चलाया जाए, जिसमें विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग हो।
  • अवैध शराब के व्यापार को रोकने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए और प्रवर्तन (enforcement) एजेंसियों को मजबूत किया जाए।
  • उपकर के प्रभावों का नियमित मूल्यांकन किया जाए, जिसमें राजस्व संग्रह, पर्यावरणीय सुधार और सामाजिक कल्याण परिणामों का विश्लेषण शामिल हो, ताकि नीति में आवश्यक समायोजन किए जा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर · शराब की बिक्री पर उपकर · राजकोषीय संघवाद · राज्य वित्त · सार्वजनिक स्वास्थ्य · पर्यावरण संरक्षण · शराबबंदी कार्यक्रम · सामाजिक कल्याण पहल · अपशिष्ट प्रबंधन · कराधान नीति · राजस्व सृजन · नीतिगत हस्तक्षेप

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 265’, ‘note’: ‘कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से व्यय’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: “राज्य सूची में ‘शराब’ पर कर लगाने की शक्ति”}

अवधारणा प्रवाह

शराब की बिक्री में वृद्धि  →  शराब की बोतलों और कंटेनरों से कचरा  →  पर्यावरणीय क्षरण और सामाजिक समस्याएं (लत)  →  राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर का प्रस्ताव  →  उपकर से प्राप्त राजस्व का उपयोग  →  पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का वित्तपोषण  →  बेहतर पर्यावरण और सामाजिक परिणाम

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपकर (Cess) किसी विशेष उद्देश्य के लिए लगाया गया कर है और इसे भारत के समेकित कोष (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है।
2. उपकर से प्राप्त आय को राज्यों के साथ साझा नहीं किया जा सकता है।
3. तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रस्तावित पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर, शराब की बिक्री पर लगाया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि उपकर को भारत के समेकित कोष में जमा किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग केवल विशिष्ट उद्देश्यों के लिए होता है, न कि सामान्य राजस्व के रूप में। कथन 2 गलत है क्योंकि उपकर से प्राप्त आय को राज्यों के साथ साझा किया जा सकता है, यह केंद्र सरकार के विवेक पर निर्भर करता है। कथन 3 सही है क्योंकि तमिलनाडु सरकार ने शराब की बिक्री पर पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर लगाने का प्रस्ताव किया है।

Q2. अभिकथन (A): राज्य सरकारें सार्वजनिक स्वास्थ्य और नैतिकता के आधार पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध या उस पर उच्च कर लगा सकती हैं।
कारण (R): भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘शराब’ राज्य सूची का विषय है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि राज्य सरकारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य और नैतिकता के आधार पर शराब पर नियंत्रण करने का अधिकार है। कारण (R) भी सही है क्योंकि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 51 में ‘शराब’ शामिल है, जो राज्यों को इस पर कानून बनाने और कर लगाने की शक्ति देती है। कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है क्योंकि राज्य सूची का विषय होने के कारण ही राज्य सरकारें शराब पर नियंत्रण कर सकती हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राज्यों द्वारा लगाए गए उपकर (Cess) के माध्यम से राजस्व जुटाने के औचित्य का परीक्षण कीजिए। तमिलनाडु सरकार द्वारा शराब की बिक्री पर पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर लगाने के हालिया प्रस्ताव के संदर्भ में, इसके संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभावों और राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** उपकर की परिभाषा और इसके विशिष्ट उद्देश्य को संक्षेप में बताएं।
2. **उपकर के माध्यम से राजस्व जुटाने का औचित्य:**
* विशिष्ट सामाजिक या पर्यावरणीय उद्देश्यों के लिए धन जुटाना (जैसे शिक्षा उपकर, स्वच्छ भारत उपकर)।
* ‘उपयोगकर्ता भुगतान’ सिद्धांत को लागू करना (जैसे प्रदूषण फैलाने वालों पर)।
* राजकोषीय स्वायत्तता बढ़ाना, विशेषकर राज्यों के लिए।
* गैर-कर राजस्व स्रोतों पर निर्भरता कम करना।
3. **तमिलनाडु के प्रस्ताव का संदर्भ:**
* शराब की बिक्री पर पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर लगाने का उद्देश्य (शराब की बोतलों का पुनर्चक्रण, नशामुक्ति कार्यक्रम, जागरूकता अभियान)।
* सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करना।
4. **संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभाव:**
* **सकारात्मक:** सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार (नशामुक्ति), पर्यावरण संरक्षण (अपशिष्ट प्रबंधन), प्रभावित परिवारों को सहायता, जागरूकता में वृद्धि।
* **नकारात्मक:** शराब की अवैध बिक्री में वृद्धि, उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ, पर्यटन पर संभावित प्रभाव।
5. **राजकोषीय संघवाद पर निहितार्थ:**
* **राज्यों की स्वायत्तता:** राज्यों को अपने विशिष्ट मुद्दों के लिए राजस्व जुटाने की अधिक स्वतंत्रता।
* **राजस्व साझाकरण:** उपकर से प्राप्त राजस्व आमतौर पर केंद्र द्वारा राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है, लेकिन राज्य द्वारा लगाए गए उपकर के मामले में यह राज्य का अपना राजस्व होता है। यह राज्यों की वित्तीय स्थिति को मजबूत कर सकता है।
* **समानता के मुद्दे:** विभिन्न राज्यों में उपकर की दरें भिन्न हो सकती हैं, जिससे अंतर-राज्यीय व्यापार और कराधान में असमानता आ सकती है।
* **केंद्र-राज्य संबंध:** केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उपकर की भूमिका।
6. **निष्कर्ष:** उपकर एक प्रभावी उपकरण हो सकता है यदि इसे सावधानीपूर्वक और विशिष्ट उद्देश्यों के साथ लागू किया जाए, जो सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने और राजकोषीय संघवाद को मजबूत करने में सहायक हो।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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