29 Sep नीति आयोग ने विकसित पंचायतों के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की
✎ नीति आयोग की 'विकसित पंचायत' कार्यशाला का उद्देश्य 73वें संविधान संशोधन के तहत पंचायतों को 'विकसित भारत @2047' के अनुरूप समावेशी विकास, प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण और जमीनी स्तर पर सतत प्रगति के लिए सक्षम बनाना है, जिसमें…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और आधारभूत संरचना। | GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ। | GS Paper II — शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय। | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
- Prelims: नीति आयोग, राज्य सहायता मिशन (SSM), विकसित पंचायत, पंचायती राज संस्थाएँ, संविधान का 73वाँ संशोधन, ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), स्थानिक नियोजन (Spatial Planning), ई-ग्राम स्वराज, पंचायत उन्नति सूचकांक (PMI)
- Essay: स्थानीय स्वशासन: समावेशी विकास का आधार, विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में पंचायतों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: नीति आयोग की ‘विकसित पंचायत’ कार्यशाला का उद्देश्य 73वें संविधान संशोधन के तहत पंचायतों को ‘विकसित भारत @2047’ के अनुरूप समावेशी विकास, प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण और जमीनी स्तर पर सतत प्रगति के लिए सक्षम बनाना है, जिसमें विकेंद्रीकृत और स्थानिक नियोजन, क्षमता विकास तथा डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नीति आयोग ने अपने राज्य सहायता मिशन (State Support Mission – SSM) के अंतर्गत ‘विकसित पंचायत: व्यक्तियों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों का संयोजन’ विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला असम सरकार के गोलप बोरबोरा राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (GBSIPRD) के सहयोग से 28 सितंबर, 2026 को आयोजित की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप पंचायतों को समावेशी विकास, प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण और जमीनी स्तर पर सतत प्रगति को बढ़ावा देने में सक्षम बनाना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में स्थानीय स्वशासन (Local Self-Governance) की अवधारणा प्राचीन काल से विद्यमान है, जिसे आधुनिक रूप में संवैधानिक दर्जा 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा दिया गया।
- इस संशोधन ने संविधान में भाग IX जोड़ा और पंचायतों को संवैधानिक मान्यता प्रदान की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण (Democratic Decentralization) की नींव मज़बूत हुई।
- पंचायती राज संस्थाएँ (Panchayati Raj Institutions – PRIs) जमीनी स्तर पर विकास योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुरूप विकास सुनिश्चित होता है।
- ‘विकसित भारत @2047’ का लक्ष्य देश के समावेशी और सतत विकास पर केंद्रित है, जिसमें पंचायतों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक मानी गई है।
- नीति आयोग (NITI Aayog) देश के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देने के लिए राज्यों के साथ मिलकर कार्य करता है, जिसमें स्थानीय निकायों को सशक्त करना भी शामिल है।
- पारंपरिक क्षेत्रीय नियोजन (Sectoral Planning) के स्थान पर स्थानिक नियोजन (Spatial Planning) को अपनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सके और एकीकृत विकास सुनिश्चित हो सके।
पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण और स्थानिक नियोजन
- संविधान के 73वें संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया, जिससे उन्हें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने का अधिकार मिला।
- कार्यशाला में ‘विकसित पंचायत’ की अवधारणा पर बल दिया गया, जिसका अर्थ है व्यक्तियों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों का प्रभावी संयोजन कर समावेशी विकास सुनिश्चित करना।
- विकेंद्रीकृत नियोजन (Decentralized Planning) और स्थानिक नियोजन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया, ताकि स्थानीय संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाएँ बनाई जा सकें।
- ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan – GPDP) प्रक्रिया में स्थानिक नियोजन को एकीकृत करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई, जिसमें GIS और भू-स्थानिक डेटा (Geospatial Data) का उपयोग शामिल है।
- पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के लिए क्षमता विकास (Capacity Building) को महत्त्वपूर्ण बताया गया, ताकि वे डेटा की व्याख्या, निवेश प्राथमिकता और संसाधन प्रबंधन में कुशल हो सकें।
- वित्तीय संसाधनों की पर्याप्तता, स्वयं के स्रोतों से राजस्व संग्रहण, उचित कर्मचारी संख्या और निर्णय लेने के अधिक अधिकारों के विकेंद्रीकरण पर भी विचार-विमर्श किया गया।
- ग्राम सभा (Gram Sabha) की भागीदारी और संस्थागत जवाबदेही (Institutional Accountability) को मजबूत करने पर बल दिया गया, जो जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की आधारशिला है।
- ई-ग्राम स्वराज (e-Gram Swaraj) और पंचायत उन्नति सूचकांक (PMI) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों का उपयोग कर साक्ष्य-आधारित और अभिसरण-उन्मुख योजना को सुदृढ़ करने पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विकेंद्रीकृत और स्थानिक नियोजन | स्थानीय संसाधनों, अवसंरचना की कमियों और विकास के अवसरों की पहचान कर साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण। |
| जमीनी स्तर पर क्षमता विकास | निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों को डेटा व्याख्या, संसाधन प्रबंधन और परिणाम निगरानी में कुशल बनाना। |
| प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए स्थानिक नियोजन | मानव एवं सामाजिक पूंजी तथा स्थानीय आर्थिक समूहों के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित करना। |
| ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) में स्थानिक नियोजन का एकीकरण | जीआईएस (GIS), भू-स्थानिक डेटा और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर एकीकृत विकास योजनाएँ बनाना। |
| संविधान का 73वाँ संशोधन | पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक आधार प्रदान करना, जिससे स्थानीय स्वशासन मजबूत हो। |
महत्व
शासन
- यह कार्यशाला पंचायतों को समावेशी विकास, प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण और जमीनी स्तर पर सतत प्रगति को बढ़ावा देने में सक्षम संस्थाओं के रूप में मजबूत करने पर केंद्रित है।
- विकेंद्रीकृत शासन और स्थानिक नियोजन के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास सुनिश्चित करना।
- ग्राम सभा की भागीदारी और संस्थागत जवाबदेही पर जोर देकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करना।
सामाजिक
- स्थानीय संसाधनों और अवसरों को एकीकृत करके व्यक्तियों और स्थानों के बीच संयोजन स्थापित करना।
- क्षमता विकास और डिजिटलीकरण के माध्यम से अंतिम छोर तक तकनीकी सहायता सुनिश्चित करना, जिससे सामाजिक समावेशन बढ़ेगा।
आर्थिक
- स्थानीय विकास के लिए पारंपरिक क्षेत्रीय दृष्टिकोण से हटकर एक स्थानिक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
- ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) प्रक्रिया में स्थानिक नियोजन के एकीकरण से साक्ष्य-आधारित और अभिसरण-उन्मुख योजना को मजबूत करना, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. कार्यात्मक विकेंद्रीकरण का अभाव
- पंचायतों को पर्याप्त अधिकार और कार्य सौंपने में कमी।
- गतिविधि मानचित्रण (Activity Mapping) की स्पष्टता का अभाव।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान: स्थानीय स्वशासन
2. वित्तीय संसाधनों की कमी
- पंचायतों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव।
- स्वयं के स्रोतों से राजस्व संग्रहण में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था: राजकोषीय संघवाद
3. क्षमता और तकनीकी सहायता की कमी
- निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों में डेटा व्याख्या और संसाधन प्रबंधन कौशल का अभाव।
- डिजिटल और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग में प्रशिक्षण की कमी।
यूपीएससी लिंक: शासन: ई-शासन और क्षमता निर्माण
4. जिला योजना समितियों की निष्क्रियता
- जिला योजना समितियों (District Planning Committees) का प्रभावी ढंग से कार्य न करना।
- विभिन्न विभागों और योजनाओं के बीच अभिसरण (Convergence) का अभाव।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान: स्थानीय स्वशासन
5. डेटा का उपयोग और सामुदायिक भागीदारी
- स्थानिक और प्रशासनिक डेटा के उपयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता।
- ग्राम सभा और सामुदायिक भागीदारी को प्रभावी बनाने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: शासन: भागीदारी शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अस्पष्ट कार्यात्मक विकेंद्रीकरण | पंचायतों को पर्याप्त अधिकार और जिम्मेदारियाँ न मिलना। |
| अपर्याप्त वित्तीय संसाधन | स्थानीय विकास पहलों के लिए धन की कमी और राजस्व संग्रहण में बाधाएँ। |
| कमजोर क्षमता निर्माण | पंचायत प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों में आवश्यक कौशल और ज्ञान का अभाव। |
| अप्रभावी जिला योजना समितियाँ | विभिन्न स्तरों पर योजनाओं के एकीकरण और समन्वय में कमी। |
| सीमित डिजिटल एकीकरण | भू-स्थानिक डेटा और डिजिटल प्लेटफॉर्म का पूरी तरह से उपयोग न हो पाना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राज्य सहायता मिशन (State Support Mission – SSM)
- ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan – GPDP)
- ई-ग्राम स्वराज (e-Gram Swaraj)
- पंचायत उन्नति सूचकांक (Panchayat Unnati Index – PMI)
आगे की राह
- स्पष्ट कार्यात्मक विकेंद्रीकरण और गतिविधि मानचित्रण को लागू करना, जिससे पंचायतों की भूमिका और जिम्मेदारियाँ स्पष्ट हों।
- पंचायतों के लिए वित्तीय संसाधनों को बढ़ाना और स्वयं के स्रोतों से राजस्व संग्रहण को मजबूत करने के उपाय करना।
- निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों के लिए व्यापक क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित करना, जिसमें डेटा व्याख्या, निवेश प्राथमिकता और संसाधन प्रबंधन शामिल हो।
- क्रियाशील जिला योजना समितियों को मजबूत करना और विभिन्न विभागों तथा योजनाओं के बीच बेहतर अभिसरण सुनिश्चित करना।
- ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) में स्थानिक और प्रशासनिक डेटा के उपयोग को सुदृढ़ करना तथा भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना।
- ग्राम सभा और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना ताकि स्थानीय विकास योजनाओं में जन-भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
- डिजिटल और हाइब्रिड लर्निंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अंतिम छोर तक तकनीकी सहायता प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विकसित पंचायत · स्थानीय स्वशासन · पंचायती राज संस्थाएँ · विकेंद्रीकृत नियोजन · ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) · स्थानिक नियोजन · क्षमता विकास · 73वाँ संविधान संशोधन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243-G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243-H’, ‘note’: ‘पंचायतों को कराधान की शक्तियाँ’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243-D’, ‘note’: ‘पंचायतों में सीटों का आरक्षण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243-K’, ‘note’: ‘राज्य निर्वाचन आयोग’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243-I’, ‘note’: ‘राज्य वित्त आयोग’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243-ZD’, ‘note’: ‘जिला योजना समितियों का गठन’}
- {‘article’: ‘ग्यारहवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय’}
अवधारणा प्रवाह
नीति आयोग की पहल: राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन → पंचायतों को समावेशी विकास हेतु सशक्त बनाना → विकेंद्रीकृत और स्थानिक नियोजन पर जोर → क्षमता विकास और डिजिटलीकरण का महत्व → ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) में स्थानिक डेटा का एकीकरण → स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग और सतत प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नीति आयोग ने ‘विकसित पंचायत’ कार्यशाला का आयोजन असम सरकार के गोलप बोरबोरा राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (GBSIPRD) के सहयोग से किया।
2. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप सशक्त बनाना है।
3. संविधान का 73वाँ संशोधन पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि नीति आयोग ने असम सरकार के गोलप बोरबोरा राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (GBSIPRD) के सहयोग से इस कार्यशाला का आयोजन किया। कथन 2 भी सही है क्योंकि कार्यशाला का फोकस ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप पंचायतों को मजबूत करना था। कथन 3 भी सही है क्योंकि 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया।
Q2. ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. GPDP स्थानीय संसाधनों, अवसंरचना की कमियों और भूमि-उपयोग के पैटर्न की पहचान के लिए GIS और भू-स्थानिक डेटा का उपयोग करती है।
2. GPDP प्रक्रिया में ग्राम सभा की भागीदारी आवश्यक नहीं है।
3. पंचायत उन्नति सूचकांक (PMI) को GPDP के साथ एकीकृत किया जा रहा है ताकि साक्ष्य-आधारित नियोजन को मजबूत किया जा सके।
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि कार्यशाला में GPDP में GIS और भू-स्थानिक डेटा के उपयोग पर जोर दिया गया। कथन 2 गलत है क्योंकि ग्राम सभा की भागीदारी GPDP प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कथन 3 सही है क्योंकि PMI को GPDP के साथ एकीकृत करने पर चर्चा हुई ताकि नियोजन को मजबूत किया जा सके।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित नहीं है?
- अनुच्छेद 243A
- अनुच्छेद 243B
- अनुच्छेद 243C
- अनुच्छेद 243D
उत्तर: अनुच्छेद 243D — अनुच्छेद 243A ग्राम सभा से संबंधित है, अनुच्छेद 243B पंचायतों के गठन से संबंधित है, और अनुच्छेद 243D सीटों के आरक्षण से संबंधित है। अनुच्छेद 243C पंचायतों की संरचना से संबंधित है, जो पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित है। यह प्रश्न गलत है, क्योंकि सभी विकल्प पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित हैं। सही उत्तर के लिए, एक विकल्प ऐसा होना चाहिए जो पंचायती राज से संबंधित न हो।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने में स्थानिक नियोजन (Spatial Planning) की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) में स्थानिक डेटा के एकीकरण की चुनौतियों और अवसरों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और स्थानीय स्वशासन के महत्व का संक्षिप्त परिचय। ‘विकसित पंचायत’ की अवधारणा का उल्लेख।
2. स्थानिक नियोजन की भूमिका: स्थानीय विकास में पारंपरिक क्षेत्रीय दृष्टिकोण से हटकर स्थानिक नियोजन के महत्व पर चर्चा। संसाधनों, अवसंरचना, भूमि-उपयोग और विकास के अवसरों की पहचान में GIS, भू-स्थानिक डेटा, ग्राम मास्टर प्लान और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका।
3. GPDP में स्थानिक डेटा का एकीकरण: GPDP प्रक्रिया में स्थानिक डेटा के एकीकरण के लाभ (साक्ष्य-आधारित नियोजन, अभिसरण-उन्मुख योजना)। ई-ग्राम स्वराज और पंचायत उन्नति सूचकांक (PMI) के साथ एकीकरण।
4. चुनौतियाँ: क्षमता विकास की कमी, वित्तीय संसाधनों का अभाव, तकनीकी सहायता की कमी, डेटा की व्याख्या और उपयोग में कौशल की कमी, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का अभाव, ग्राम सभा की सीमित भागीदारी।
5. अवसर: विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करना, प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण, जमीनी स्तर पर सतत प्रगति को बढ़ावा देना, मानव एवं सामाजिक पूंजी तथा स्थानीय आर्थिक समूहों का विकास।
6. निष्कर्ष: पंचायती राज संस्थाओं को ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्थानिक नियोजन और GPDP के माध्यम से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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