परिसीमन बिल: सरकार विशेष सत्र बुलाने की तैयारी, विपक्ष का विरोध

सरकार परिसीमन बिल पर विशेष सत्र बुला सकती है:रिजिजू की राहुल के साथ बैठक; सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला बि — concept mind map

परिसीमन बिल: सरकार विशेष सत्र बुलाने की तैयारी, विपक्ष का विरोध

✎ परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि न्यायिक दक्षता और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।

परिसीमन प्रक्रियापरिसीमन आयोगउच्च-शक्ति निकायकानून का बलजनगणना2001 आधार2026 तक स्थगितविधायी निकायलोकसभा/राज्य विधानसीटों का पुनर्गठनविधेयकराज्यसभा पारितलोकसभा विचाराधीन
परिसीमन प्रक्रिया

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ  |  GS Paper II — विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्तियाँ और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व  |  GS Paper II — संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय
  • Prelims: परिसीमन आयोग, अनुच्छेद 82, अनुच्छेद 170, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, न्यायिक स्वतंत्रता, संसद का विशेष सत्र
  • Essay: भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व का महत्त्व और चुनौतियाँ, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता

त्वरित पुनरावृत्ति: परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि न्यायिक दक्षता और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, सरकार ने परिसीमन पर चर्चा के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाने की संभावना पर विचार किया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर विपक्षी सांसदों से मुलाकात की। इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक राज्यसभा से पारित हो गया है, जिसे 3 अगस्त को लोकसभा से पारित किया गया था।

पृष्ठभूमि

  • परिसीमन का अर्थ है किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय वाले क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करना।
  • भारत में, परिसीमन का कार्य एक उच्च-शक्ति वाले निकाय, परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जिसके आदेशों को कानून का बल प्राप्त होता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
  • संविधान के अनुच्छेद 82 (Article 82) के तहत संसद प्रत्येक जनगणना के बाद एक परिसीमन अधिनियम बनाती है, जबकि अनुच्छेद 170 (Article 170) राज्यों को भी इसी तरह की प्रक्रिया के लिए अधिकृत करता है।
  • भारत में अब तक चार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है — 1952, 1963, 1973 और 2002 में।
  • वर्तमान में, लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों का परिसीमन 2001 की जनगणना के आधार पर किया गया है, और इसे 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
  • सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को संसद द्वारा कानून बनाकर बढ़ाया जा सकता है। मूल रूप से, संविधान में सर्वोच्च न्यायालय के लिए एक मुख्य न्यायाधीश और सात अन्य न्यायाधीशों का प्रावधान था।
  • समय-समय पर संसद ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम (Supreme Court (Number of Judges) Act) में संशोधन करके न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई है, जैसे कि 1950 में 8 से 11, 1956 में 11 से 14, 1960 में 14 से 18, 1978 में 18 से 26, 2009 में 26 से 31 और 2019 में 31 से 34।
  • न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि का उद्देश्य मामलों के बढ़ते बोझ को कम करना और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना है।

परिसीमन आयोग और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि

  • परिसीमन आयोग का मुख्य कार्य निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करना है ताकि जनसंख्या के अनुपात में सभी निर्वाचन क्षेत्रों में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
  • यह आयोग जनसंख्या में परिवर्तन, प्रशासनिक इकाइयों में बदलाव और भौगोलिक कारकों को ध्यान में रखता है।
  • आयोग के आदेश अंतिम होते हैं और किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दिए जा सकते, जिससे इसकी स्वायत्तता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
  • भारत में परिसीमन का उद्देश्य ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को बनाए रखना है।
  • सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि का निर्णय न्यायिक दक्षता और लंबित मामलों के निपटान में तेजी लाने के लिए किया जाता है।
  • न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से न्यायपालिका पर कार्यभार कम होता है और नागरिकों को समय पर न्याय मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
  • यह कदम न्यायिक स्वतंत्रता और न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
  • सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और ऐसे अन्य न्यायाधीशों के परामर्श से की जाती है, जिन्हें राष्ट्रपति आवश्यक समझें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
परिसीमन विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के आवंटन तथा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्गठन। यह जनसंख्या के समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करता है।
सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की कुल संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करना। यह न्यायिक कार्यभार को कम करने और मामलों के त्वरित निपटान में सहायक होगा।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 1891 के पुराने कानून का स्थान लेना और बैंकों के डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक, वर्चुअल तथा क्लाउड रिकॉर्ड को अदालत में वैध सबूत के रूप में मान्यता देना। यह न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक बनाता है।
संसद का विशेष सत्र महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर चर्चा और पारित करने के लिए सामान्य सत्रों के अतिरिक्त बुलाया गया सत्र। यह सरकार को आवश्यक विधेयकों पर तत्काल कार्रवाई करने का अवसर देता है।

महत्व

विधायी महत्व

  • परिसीमन विधेयक का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का न्यायसंगत पुनर्गठन करना है, जो ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को सुदृढ़ करता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से लंबित मामलों का बोझ कम होगा और न्याय वितरण प्रणाली की दक्षता में सुधार होगा।

न्यायिक महत्व

  • न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय की कार्यक्षमता बढ़ेगी, जिससे संवैधानिक मामलों और जनहित याचिकाओं पर त्वरित सुनवाई संभव हो सकेगी।
  • बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026, डिजिटल साक्ष्य को कानूनी मान्यता देकर न्यायिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाता है, जो डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुरूप है।

राजनीतिक महत्व

  • परिसीमन पर विशेष सत्र बुलाने का सरकार का प्रस्ताव राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बनाने के प्रयासों को दर्शाता है, हालांकि विपक्ष का रुख अभी भी पूर्ववत है।
  • संसद में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन और विभिन्न मुद्दों पर मार्च, संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका और सरकार पर दबाव बनाने के उनके प्रयासों को उजागर करता है।

चुनौतियाँ

1. परिसीमन पर राजनीतिक सहमति का अभाव

  • परिसीमन एक संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि यह राज्यों की राजनीतिक शक्ति और प्रतिनिधित्व को सीधे प्रभावित करता है।
  • विपक्षी दलों का परिसीमन पर पहले जैसा रुख बरकरार रखना विधेयक को पारित कराने में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

2. संसदीय कार्यवाही में व्यवधान

  • विपक्षी सांसदों द्वारा विरोध प्रदर्शन और वॉकआउट के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा बाधित होती है, जैसा कि बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल के मामले में देखा गया।
  • सदन में हंगामे के कारण बिना पर्याप्त चर्चा के विधेयकों का पारित होना विधायी गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

3. न्यायिक नियुक्तियों में देरी

  • न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के बावजूद, यदि नियुक्तियों की प्रक्रिया में देरी होती है, तो इसका अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं होगा।
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परिसीमन विधेयक राज्यों के प्रतिनिधित्व में संभावित असंतुलन, विशेषकर उन राज्यों के लिए जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा प्रदर्शन किया है।
संसदीय गतिरोध विपक्षी विरोध के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक चर्चा का अभाव और विधायी कार्यों में देरी।
न्यायिक कार्यभार न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि के बावजूद, यदि न्यायिक बुनियादी ढांचे और सहायक कर्मचारियों में सुधार नहीं होता है, तो लंबित मामलों की समस्या बनी रह सकती है।
डिजिटल साक्ष्य की स्वीकार्यता बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल में डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के साथ-साथ, साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

आगे की राह

  • परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच व्यापक विचार-विमर्श और आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
  • संसदीय कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक चर्चा हो सके।
  • सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ, न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
  • न्यायिक प्रणाली की दक्षता बढ़ाने के लिए ई-कोर्ट परियोजनाओं और अन्य तकनीकी समाधानों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए।
  • बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल जैसे कानूनों को लागू करते समय डिजिटल सुरक्षा और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नियामक ढांचा विकसित किया जाना चाहिए।
  • संसद के विशेष सत्रों का उपयोग केवल आवश्यक और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के लिए किया जाना चाहिए, जिससे उनकी प्रभावशीलता बनी रहे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

परिसीमन आयोग · अनुच्छेद 82 · संसदीय विशेष सत्र · न्यायिक स्वतंत्रता · न्यायाधीशों की नियुक्ति · संवैधानिक संशोधन · संघवाद · लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम · न्यायिक सक्रियता · विधायी प्रक्रिया

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 82’, ‘note’: ‘प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 170’, ‘note’: ‘विधानसभाओं में सीटों का परिसीमन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 124’, ‘note’: ‘सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 134A’, ‘note’: ‘सर्वोच्च न्यायालय में अपील के लिए प्रमाण पत्र’}

अवधारणा प्रवाह

जनसंख्या वृद्धि और परिवर्तन  →  निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन (परिसीमन)  →  समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना  →  विधायी कार्यवाही पर प्रभाव  →  न्यायिक कार्यभार में वृद्धि  →  न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि  →  न्याय वितरण में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. परिसीमन आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत किया जाता है।
2. भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या संसद द्वारा कानून बनाकर बढ़ाई जा सकती है।
3. बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 ने 1891 के ब्रिटिश शासन के कानून का स्थान लिया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि परिसीमन आयोग का गठन प्रत्येक जनगणना के बाद संसद द्वारा बनाए गए परिसीमन अधिनियम के तहत किया जाता है, जो अनुच्छेद 82 के तहत आता है। कथन 2 सही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत संसद को न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का अधिकार है। कथन 3 भी सही है क्योंकि बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 ने 1891 के पुराने कानून की जगह ली है।

Q2. अभिकथन (A): भारत में परिसीमन प्रक्रिया का उद्देश्य सभी निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंख्या के समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है।
कारण (R): परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि परिसीमन का मुख्य उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को इस प्रकार समायोजित करना है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या लगभग समान हो। कारण (R) भी सही है क्योंकि परिसीमन आयोग के आदेशों को अंतिम माना जाता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है, हालांकि यह सीधे तौर पर अभिकथन की व्याख्या नहीं करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में परिसीमन की प्रक्रिया और इसके संवैधानिक आधारों पर चर्चा कीजिए। क्या यह प्रक्रिया देश के संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करती है? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: परिसीमन की परिभाषा और उद्देश्य (निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्समायोजन) से शुरुआत करें।
2. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 82 (संसद द्वारा परिसीमन अधिनियम) और अनुच्छेद 170 (राज्यों में विधानसभा सीटों का पुनर्समायोजन) का उल्लेख करें।
3. परिसीमन आयोग: इसके गठन, संरचना (सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त, संबंधित राज्य चुनाव आयुक्त) और कार्यों का संक्षिप्त विवरण दें। यह भी बताएं कि इसके आदेश अंतिम होते हैं और इन्हें न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
4. संघीय ढांचे पर प्रभाव: ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका बताएं। दक्षिणी राज्यों की चिंताएं (जनसंख्या नियंत्रण के बावजूद कम सीटें) और ‘फ्रीज’ (2026 तक) के प्रावधान पर चर्चा करें।
5. लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर प्रभाव: निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंख्या की समानता, अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए सीटों का आरक्षण, और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में निष्पक्षता सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका।
6. समालोचनात्मक परीक्षण: परिसीमन के लाभ (समान प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय) और चुनौतियों (राजनीतिक आरोप, जनसंख्या नियंत्रण वाले राज्यों पर नकारात्मक प्रभाव, ‘फ्रीज’ के बाद संभावित राजनीतिक उथल-पुथल) दोनों पर प्रकाश डालें।
7. निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें कि कैसे परिसीमन लोकतांत्रिक सिद्धांतों के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में संघीय चिंताओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।

स्रोत: bhaskar.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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