22 Sep जल जीवन मिशन 2.0: कुशल कार्यबल निर्माण के लिए पहली वर्चुअल सम्मेलन आयोजित
✎ जल जीवन मिशन 2.0 के तहत 'नल जल मित्र' कार्यक्रम ग्रामीण पेयजल प्रणालियों के सतत संचालन और रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर कुशल कार्यबल तैयार करने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, विकास और उससे संबंधित मुद्दे | GS Paper III — आधारभूत संरचना, कौशल विकास
- Prelims: जल जीवन मिशन, नल जल मित्र कार्यक्रम, सुजलम शक्ति पहल, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (NCVET)
- Essay: ग्रामीण विकास और जल सुरक्षा में मानव संसाधन का महत्व, कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ‘नल जल मित्र’ कार्यक्रम ग्रामीण पेयजल प्रणालियों के सतत संचालन और रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर कुशल कार्यबल तैयार करने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय ने हाल ही में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ पहली राष्ट्रीय वर्चुअल सम्मेलन आयोजित की। यह सम्मेलन जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत ग्रामीण पेयजल अवसंरचना के सतत संचालन, रखरखाव और जल गुणवत्ता निगरानी के लिए आवश्यक कुशल ग्रामीण जल कार्यबल को मजबूत करने के रोडमैप पर केंद्रित थी। इसमें ‘नल जल मित्र’ (NJM) कार्यक्रम को शुरू करने और ‘सुजलम शक्ति’ जैसी पहलों को तेज करने पर जोर दिया गया।
पृष्ठभूमि
- जल जीवन मिशन (JJM) का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से जल का कनेक्शन प्रदान करना है, जिससे सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सके।
- मिशन का दूसरा चरण (JJM 2.0) अवसंरचना निर्माण के साथ-साथ निर्मित प्रणालियों के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव पर केंद्रित है।
- ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधनों की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है।
- पहले के विभागीय शिखर सम्मेलन (01-02 सितंबर 2026) में ग्रामीण जल क्षेत्र में कुशल कार्यबल की आवश्यकता पर चर्चा की गई थी।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने और स्थानीय युवाओं को सशक्त बनाने के लिए कौशल विकास को एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखा जा रहा है।
नल जल मित्र कार्यक्रम क्या है?
- यह ग्रामीण स्तर पर बहु-कौशल वाले तकनीशियनों (Multi-skilled Technicians) का एक समूह तैयार करने के उद्देश्य से शुरू किया गया एक कार्यक्रम है।
- इसका विकास पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (NCVET) के सहयोग से किया गया है।
- यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप ‘नल-जल मित्र’ योग्यता पर आधारित है।
- इन तकनीशियनों को ग्रामीण जल आपूर्ति अवसंरचना के नियमित संचालन, निवारक रखरखाव और प्राथमिक स्तर की मरम्मत करने में सक्षम बनाया जाएगा।
- प्रशिक्षण में पंप, पाइपलाइन, उपचार प्रणाली, विद्युत प्रतिष्ठापन और संबंधित अवसंरचना से जुड़े कौशल शामिल हैं।
- कार्यक्रम के तहत दो कार्यान्वयन मार्ग हैं: नए सदस्यों के लिए 510 घंटे का लघु अवधि प्रशिक्षण और मौजूदा कर्मियों के लिए 120 घंटे का ‘पूर्व शिक्षा की पहचान’ (Recognition of Prior Learning – RPL) कार्यक्रम।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नल जल मित्र (NJM) कार्यक्रम | ग्रामीण स्तर पर बहु-कुशल तकनीशियनों का समूह तैयार करना, जो जल आपूर्ति अवसंरचना का संचालन, रखरखाव और मरम्मत कर सकें। |
| NSQF-अनुरूप योग्यता | कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और NCVET के सहयोग से विकसित, यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के मानकों के अनुरूप है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और मान्यता सुनिश्चित होती है। |
| दो कार्यान्वयन मार्ग | नए सदस्यों के लिए 510 घंटे का लघु-अवधि प्रशिक्षण और मौजूदा कर्मियों के लिए 120 घंटे का ‘पूर्व शिक्षा की पहचान’ (RPL) कार्यक्रम, जिससे विभिन्न अनुभव स्तरों के लोगों को लाभ मिलता है। |
| स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता | ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर। |
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका | राज्यों को प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए मान्यता प्राप्त पुरस्कार देने वाले संस्थान बनने और जिला-आधारित प्रशिक्षण योजनाएं तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और भरोसेमंद पेयजल सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना, जिससे जन स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार होगा।
- स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और पलायन कम होगा।
आर्थिक महत्व
- जल जीवन मिशन (JJM) के तहत निर्मित ग्रामीण जल आपूर्ति अवसंरचना के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव को सुनिश्चित करके सार्वजनिक निवेश का अधिकतम उपयोग करना।
- कुशल कार्यबल की उपलब्धता से जल आपूर्ति प्रणालियों की दक्षता बढ़ेगी, जिससे पानी की बर्बादी कम होगी और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन होगा।
शासन और नीतिगत महत्व
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर कौशल विकास और जल सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
- जल जीवन मिशन 2.0 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक मजबूत और पेशेवर ग्रामीण जल कार्यबल का निर्माण करना, जो मिशन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. कौशल अंतराल और प्रशिक्षण की गुणवत्ता
- ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक कौशल सेट वाले प्रशिक्षित व्यक्तियों की कमी।
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करना ताकि वे वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, कौशल विकास
2. जागरूकता और भागीदारी का अभाव
- ग्रामीण समुदायों और संभावित लाभार्थियों के बीच ‘नल जल मित्र’ जैसे कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता की कमी।
- स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: पंचायती राज, सामुदायिक भागीदारी
3. दीर्घकालिक स्थिरता और वित्तपोषण
- प्रशिक्षित कार्यबल के लिए निरंतर रोजगार के अवसर और उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करना।
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों और ग्रामीण जल अवसंरचना के रखरखाव के लिए पर्याप्त और स्थायी वित्तपोषण।
यूपीएससी लिंक: ग्रामीण विकास, सार्वजनिक वित्त
4. प्रौद्योगिकी और नवाचार का एकीकरण
- आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों और उपकरणों के साथ कार्यबल को अद्यतन रखना।
- जल गुणवत्ता निगरानी और डेटा प्रबंधन में प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जल संसाधन प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कुशल कार्यबल की कमी | ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन, रखरखाव और मरम्मत के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मियों का अभाव। |
| प्रशिक्षण अवसंरचना | दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों और प्रशिक्षकों की उपलब्धता। |
| रोजगार के अवसर | प्रशिक्षित ‘नल जल मित्रों’ के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसरों की निरंतरता सुनिश्चित करना। |
| जल गुणवत्ता निगरानी | ग्रामीण स्तर पर जल गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी के लिए प्रशिक्षित प्रयोगशाला कर्मियों की कमी। |
| सामुदायिक स्वामित्व | ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव में स्थानीय समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
आगे की राह
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘नल जल मित्र’ कार्यक्रम को प्राथमिकता के आधार पर लागू करना चाहिए, जिसमें स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर जिला-आधारित प्रशिक्षण योजनाएं तैयार की जाएं, जिसमें आईटीआई, पॉलिटेक्निक और अन्य सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों का उपयोग किया जाए।
- प्रशिक्षित ‘नल जल मित्रों’ के लिए स्थायी रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने हेतु पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण विकास विभागों के साथ मिलकर कार्य किया जाए।
- जल गुणवत्ता निगरानी के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं।
- ग्रामीण जल क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘सुजलम शक्ति’ जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जाए।
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के लिए नियमित मूल्यांकन और अद्यतन किया जाए, ताकि वे नवीनतम तकनीकों और आवश्यकताओं के अनुरूप हों।
- ग्रामीण समुदायों और स्थानीय निकायों में जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के प्रति स्वामित्व की भावना को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जल जीवन मिशन 2.0 · ग्रामीण जल आपूर्ति · कुशल कार्यबल · नल जल मित्र कार्यक्रम · कौशल विकास · सतत संचालन एवं रखरखाव · जल गुणवत्ता निगरानी · स्थानीय रोजगार सृजन · पंचायती राज संस्थाएं · राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क
अवधारणा प्रवाह
जल जीवन मिशन (JJM) के तहत ग्रामीण जल अवसंरचना का निर्माण → अवसंरचना के सतत संचालन और रखरखाव के लिए कुशल कार्यबल की आवश्यकता → ‘नल जल मित्र’ कार्यक्रम का शुभारंभ → स्थानीय युवाओं का कौशल विकास और प्रशिक्षण → ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों का प्रभावी संचालन और रखरखाव → ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और सतत पेयजल की उपलब्धता → जन स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर में नल से जल का कनेक्शन उपलब्ध कराना है।
2. ‘नल जल मित्र’ कार्यक्रम ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के लिए कुशल तकनीशियनों के प्रशिक्षण पर केंद्रित है।
3. यह मिशन केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है और राज्यों की कोई वित्तीय भागीदारी नहीं है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि JJM का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण घरों में नल जल कनेक्शन प्रदान करना है। कथन 2 भी सही है, ‘नल जल मित्र’ कार्यक्रम कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए है। कथन 3 गलत है क्योंकि JJM में केंद्र और राज्य दोनों की वित्तीय भागीदारी होती है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय ‘नल जल मित्र’ योग्यता के विकास में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ सहयोग कर रहा है?
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
- जल शक्ति मंत्रालय
- ग्रामीण विकास मंत्रालय
- पंचायती राज मंत्रालय
उत्तर: जल शक्ति मंत्रालय — प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ मिलकर ‘नल जल मित्र’ योग्यता विकसित की है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत ग्रामीण जल क्षेत्र में कुशल कार्यबल के महत्व का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में ‘नल जल मित्र’ कार्यक्रम ग्रामीण पेयजल अवसंरचना के सतत संचालन और रखरखाव में किस प्रकार सहायक सिद्ध होगा? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत जल जीवन मिशन 2.0 के उद्देश्यों और ग्रामीण जल आपूर्ति के महत्व से करें। फिर ग्रामीण जल क्षेत्र में कुशल कार्यबल की आवश्यकता पर प्रकाश डालें, जिसमें अवसंरचना के निर्माण के साथ-साथ उसके संचालन, रखरखाव और जल गुणवत्ता निगरानी के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की भूमिका शामिल हो। ‘नल जल मित्र’ कार्यक्रम का विस्तृत विवरण दें, जिसमें इसके लक्ष्य, प्रशिक्षण मॉड्यूल (510 घंटे का शॉर्ट-टर्म प्रशिक्षण और 120 घंटे का RPL कार्यक्रम), शामिल कौशल (पंप, पाइपलाइन, उपचार प्रणाली, विद्युत प्रतिष्ठापन) और ग्रामीण स्तर पर मल्टी-स्किल तकनीशियनों के निर्माण पर जोर दें। यह बताएं कि यह कार्यक्रम स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे बढ़ावा देगा। अंत में, कार्यक्रम की सफलता के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, कौशल विकास मिशनों और पंचायती राज संस्थाओं के बीच तालमेल की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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