02 Aug पीएम मोदी ने लॉन्च किया ‘नशा मुक्त युवा अभियान’, जानिए कैसे बनाएगा विकसित भारत का आधार
✎ नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान का लक्ष्य युवाओं को मादक पदार्थों से दूर रखकर विकसित भारत की नींव को मजबूत करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — समाज एवं सामाजिक मुद्दे | GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: नशा मुक्त युवा अभियान, विकसित भारत @2047, मादक पदार्थों का दुरुपयोग, राष्ट्रीय औषधि दुरुपयोग सर्वेक्षण, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
- Essay: विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका, मादक पदार्थों का दुरुपयोग: एक सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती
त्वरित पुनरावृत्ति: नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान का लक्ष्य युवाओं को मादक पदार्थों से दूर रखकर विकसित भारत की नींव को मजबूत करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना आवश्यक है, और इसके लिए उन्हें मादक पदार्थों के दुरुपयोग से दूर रहना होगा। यह अभियान देश भर में 28,000 से अधिक स्थानों पर आयोजित किया गया, जिसमें एक करोड़ से अधिक युवाओं ने भाग लिया।
पृष्ठभूमि
- भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
- मादक पदार्थों का दुरुपयोग (Drug abuse) न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि परिवारों और समाज को भी कमजोर करता है।
- यह अभियान 125 से अधिक आध्यात्मिक और सार्वजनिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक संघों के समर्थन से चलाया जा रहा है।
- अभियान के तहत अगले 100 हफ्तों तक हर रविवार को कला, संस्कृति, खेल, ध्यान, आध्यात्मिकता और सेवा से संबंधित गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।
नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान क्या है?
- यह एक राष्ट्रीय अभियान है जिसका उद्देश्य भारत के युवाओं को मादक पदार्थों के दुरुपयोग से मुक्त करना और उन्हें ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाना है।
- अभियान का मुख्य फोकस युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने पर है, ताकि वे देश के भविष्य को आकार दे सकें।
- इसमें सामुदायिक भागीदारी और निरंतर कार्रवाई पर जोर दिया गया है, जिसमें विभिन्न संगठन, शैक्षणिक संस्थान और औद्योगिक संघ शामिल हैं।
- अभियान के तहत, युवा मादक पदार्थों से मुक्त रहने और भारत को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लेते हैं।
- यह अभियान कला, संस्कृति, खेल, ध्यान और आध्यात्मिकता जैसी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा में संलग्न करने का प्रयास करता है।
- यह अभियान विशेष रूप से 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए युवाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नशा मुक्त युवा अभियान | विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखना। |
| सामुदायिक भागीदारी | नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के लिए निरंतर कार्रवाई और व्यापक जनभागीदारी पर जोर। |
| 100 सप्ताह की गतिविधियाँ | कला, संस्कृति, खेल, ध्यान, आध्यात्मिकता और सेवा से संबंधित साप्ताहिक कार्यक्रम, नशा मुक्त जीवन का संदेश फैलाने हेतु। |
| व्यापक पहुंच | 125 से अधिक आध्यात्मिक और सार्वजनिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों तथा औद्योगिक संघों का समर्थन; 28,000 से अधिक स्थानों पर 1 करोड़ से अधिक युवाओं की भागीदारी। |
| राष्ट्रीय संकल्प | 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं को सशक्त और नशा मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- युवाओं को नशीले पदार्थों के चंगुल से बचाकर उनके व्यक्तिगत भविष्य और परिवारों को टूटने से रोकना।
- समाज में नशीले पदार्थों के कारण होने वाली समस्याओं, जैसे अपराध और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को कम करना।
आर्थिक महत्व
- स्वस्थ और उत्पादक युवा कार्यबल (Workforce) का निर्माण, जो देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
- नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं और कानून प्रवर्तन पर होने वाले खर्च में कमी।
रणनीतिक महत्व
- देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना, क्योंकि शत्रु देश अक्सर युवाओं को नशीले पदार्थों की लत में फंसाकर देश को कमजोर करने की साजिश करते हैं।
- युवाओं की ऊर्जा, कल्पना और प्रतिभा को स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, खेल, विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक रूप से लगाना।
नैतिक महत्व
- एक ऐसे समाज का निर्माण करना जो अपने नागरिकों, विशेषकर युवाओं के कल्याण और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है।
- नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाली नैतिक गिरावट और मानवीय त्रासदी को रोकना।
चुनौतियाँ
1. नशीले पदार्थों की उपलब्धता
- अवैध नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों और शहरी केंद्रों में।
- नशीले पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को तोड़ना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन
2. युवाओं में जागरूकता की कमी
- नशीले पदार्थों के सेवन के दीर्घकालिक हानिकारक प्रभावों के बारे में युवाओं में अपर्याप्त जानकारी।
- पीयर प्रेशर (Peer Pressure) और जिज्ञासा के कारण नशीले पदार्थों के प्रति आकर्षण।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, शिक्षा
3. पुनर्वास और उपचार की कमी
- नशीले पदार्थों की लत से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए पर्याप्त पुनर्वास (Rehabilitation) केंद्रों और उपचार सुविधाओं का अभाव।
- पुनर्वास के बाद सामाजिक पुनर्मिलन (Social Reintegration) में आने वाली चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय
4. सामाजिक कलंक और गोपनीयता
- नशीले पदार्थों की लत को एक बीमारी के बजाय नैतिक विफलता के रूप में देखने का सामाजिक दृष्टिकोण।
- परिवारों द्वारा लत के मामलों को छिपाना, जिससे समय पर मदद नहीं मिल पाती।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, नैतिकता
5. कानूनी और प्रवर्तन चुनौतियाँ
- नशीले पदार्थों से संबंधित कानूनों का प्रभावी ढंग से प्रवर्तन (Enforcement) करना।
- नशीले पदार्थों के व्यापार में शामिल अपराधियों को पकड़ना और दंडित करना।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, कानून और व्यवस्था
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| नशीले पदार्थों की तस्करी | अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट्स (Syndicates) द्वारा भारत को पारगमन मार्ग (Transit Route) के रूप में उपयोग करना। |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग | ऑनलाइन माध्यमों से नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री और प्रचार। |
| मानसिक स्वास्थ्य मुद्दे | नशीले पदार्थों का सेवन अक्सर अवसाद (Depression) और चिंता (Anxiety) जैसे मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों से जुड़ा होता है। |
| सीमा पार से घुसपैठ | पड़ोसी देशों से नशीले पदार्थों की आसान आपूर्ति, विशेषकर पंजाब और पूर्वोत्तर राज्यों में। |
| कृषि में विकल्प का अभाव | अफीम (Opium) और भांग (Cannabis) की अवैध खेती में किसानों की संलिप्तता, वैकल्पिक आजीविका की कमी के कारण। |
आगे की राह
- नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को तोड़ने के लिए सीमा सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझाकरण को मजबूत करना।
- युवाओं और उनके परिवारों के लिए नशीले पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
- नशीले पदार्थों की लत से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए सुलभ और गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास तथा उपचार सुविधाओं का विस्तार करना।
- स्कूलों और कॉलेजों में नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए पाठ्यक्रम और परामर्श कार्यक्रम (Counselling Programs) शुरू करना।
- नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और नागरिक समाज संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाना।
- नशीले पदार्थों की खेती वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
- नशीले पदार्थों की लत से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने के लिए सार्वजनिक संवाद और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नशा मुक्त युवा अभियान · विकसित भारत · मादक द्रव्यों का दुरुपयोग · सामुदायिक भागीदारी · राष्ट्रीय दृष्टि · युवा शक्ति · सामाजिक बुराई · मानसिक स्वास्थ्य · शारीरिक स्वास्थ्य · नशीले पदार्थों की तस्करी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
नशीले पदार्थों का सेवन → युवाओं का शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित → व्यक्तिगत क्षमता का ह्रास → परिवार और समाज पर नकारात्मक प्रभाव → देश की प्रगति में बाधा → विकसित भारत के लक्ष्य में चुनौती → नशा मुक्त युवा अभियान की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ का उद्देश्य भारत को 2047 तक मादक द्रव्य मुक्त बनाना है।
2. इस अभियान में 125 से अधिक आध्यात्मिक और सार्वजनिक संगठन, शैक्षणिक संस्थान तथा औद्योगिक संघ शामिल हैं।
3. प्रधानमंत्री ने युवाओं से हर रविवार को कला, संस्कृति, खेल, ध्यान, आध्यात्मिकता और सेवा से संबंधित गतिविधियों में भाग लेने का आग्रह किया।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अभियान का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित बनाना है, जिसके लिए नशा मुक्त युवा आवश्यक हैं, न कि सीधे तौर पर 2047 तक मादक द्रव्य मुक्त बनाना। कथन 2 सही है क्योंकि अभियान में विभिन्न संगठनों की भागीदारी का उल्लेख किया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि प्रधानमंत्री ने अगले 100 हफ्तों तक ऐसी गतिविधियों के आयोजन का आह्वान किया है।
Q2. अभिकथन (A): ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ भारत के युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने पर केंद्रित है।
कारण (R): एक विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए युवाओं का नशा मुक्त होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखना है। कारण (R) भी सही है क्योंकि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नशा मुक्त युवा महत्वपूर्ण हैं। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है क्योंकि युवाओं को स्वस्थ रखने का अंतिम लक्ष्य विकसित भारत का निर्माण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग की समस्या एक गंभीर सामाजिक चुनौती है, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न करती है। इस संदर्भ में, ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और समाज द्वारा किए जा सकने वाले अतिरिक्त उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** भारत में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग की वर्तमान स्थिति और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ इसके संबंध का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **’नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ का महत्व:**
* **लक्ष्य:** युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखना।
* **सामुदायिक भागीदारी:** 125 से अधिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक संघों की भूमिका।
* **दीर्घकालिक दृष्टिकोण:** अगले 100 हफ्तों तक कला, संस्कृति, खेल, ध्यान, आध्यात्मिकता और सेवा से संबंधित गतिविधियों का आयोजन।
* **राष्ट्रीय दृष्टि:** 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति की केंद्रीय भूमिका पर जोर।
* **सामाजिक प्रभाव:** परिवारों और समाज पर मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के नकारात्मक प्रभावों को कम करना।
* **सुरक्षा आयाम:** शत्रु देशों द्वारा युवाओं को नशीले पदार्थों की लत में फंसाने की साजिशों का मुकाबला करना।
3. **मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से निपटने के लिए अतिरिक्त उपाय:**
* **सरकारी उपाय:**
* **कानूनी और प्रवर्तन:** नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 का सख्त कार्यान्वयन।
* **पुनर्वास और उपचार:** अधिक नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना, उनकी गुणवत्ता में सुधार और पहुंच बढ़ाना।
* **जागरूकता अभियान:** स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में लक्षित जागरूकता कार्यक्रम।
* **सीमा पार तस्करी पर नियंत्रण:** अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सीमा सुरक्षा को मजबूत करना।
* **वैकल्पिक आजीविका:** प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसर।
* **सामाजिक उपाय:**
* **परिवार की भूमिका:** बच्चों में नैतिक मूल्यों का संचार और प्रारंभिक पहचान।
* **शैक्षणिक संस्थान:** पाठ्यक्रम में मादक द्रव्यों के दुष्परिणामों को शामिल करना, परामर्श सेवाएं प्रदान करना।
* **नागरिक समाज संगठन:** जमीनी स्तर पर जागरूकता और सहायता समूह बनाना।
* **मीडिया की भूमिका:** सकारात्मक संदेशों का प्रसार और गलत सूचनाओं का खंडन।
* **सामुदायिक पुलिसिंग:** स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर समस्या की पहचान और समाधान।
4. **निष्कर्ष:** एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जिसमें सरकार, समाज और व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास शामिल हों, ताकि भारत को वास्तव में ‘विकसित’ और ‘नशा मुक्त’ बनाया जा सके।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- दर्शनशास्त्र के स्नातकों के लिए AI नौकरियां: सच या कल्पना? - August 3, 2026
- Philosophy Graduates Can Excel in AI Careers: UPSC Exam Insights - August 3, 2026
- अग्नि संकट: एल नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी भीषण गर्मी, सूखा और बाढ़ - August 2, 2026

No Comments