17 Sep स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026: सामाजिक न्याय विभाग की बड़ी पहल, जानिए क्या है लक्ष्य
✎ स्वच्छता ही सेवा अभियान स्वच्छ भारत मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाने और प्रत्येक नागरिक को प्रति वर्ष 100 घंटे स्वैच्छिक स्वच्छता कार्य में समर्पित करने के लिए प्रेरित…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- Prelims: स्वच्छता ही सेवा अभियान, स्वच्छ भारत मिशन, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, जनभागीदारी, स्वच्छता शपथ, गांधी जयंती
- Essay: स्वच्छता एक राष्ट्रीय कर्तव्य: जनभागीदारी का महत्व, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में स्वच्छता की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: स्वच्छता ही सेवा अभियान स्वच्छ भारत मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाने और प्रत्येक नागरिक को प्रति वर्ष 100 घंटे स्वैच्छिक स्वच्छता कार्य में समर्पित करने के लिए प्रेरित करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (Department of Social Justice and Empowerment) ने 17 सितंबर, 2026 को ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2026 का शुभारंभ किया। यह अभियान 2 अक्टूबर, 2026 तक चलेगा, जिसका उद्देश्य स्वच्छता के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना है। इस अवसर पर विभाग के सचिव ने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई, जिसमें प्रति वर्ष 100 घंटे स्वैच्छिक स्वच्छता कार्य में समर्पित करने का संकल्प शामिल था।
पृष्ठभूमि
- स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) का शुभारंभ 2 अक्टूबर, 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर किया गया था, जिसका उद्देश्य देश भर में स्वच्छता को बढ़ावा देना था।
- इस मिशन का लक्ष्य भारत को खुले में शौच मुक्त (Open Defecation Free – ODF) बनाना और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना था।
- ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान स्वच्छ भारत मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाने पर केंद्रित है।
- यह अभियान आमतौर पर महात्मा गांधी की जयंती से पहले शुरू होता है, ताकि स्वच्छता के प्रति जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके।
- विभिन्न मंत्रालय और विभाग इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, अपने-अपने कार्यस्थलों और अधिकार क्षेत्र में स्वच्छता गतिविधियों का आयोजन करते हैं।
- यह पहल नागरिकों को व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है, जिससे एक स्वच्छ राष्ट्र के निर्माण में योगदान मिलता है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान क्या है?
- यह ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत एक राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान है, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
- यह अभियान आमतौर पर 15 सितंबर से 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) तक आयोजित किया जाता है, जिसमें विभिन्न स्वच्छता गतिविधियों को शामिल किया जाता है।
- इसका मुख्य लक्ष्य लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करना है।
- अभियान के तहत प्रतिभागियों को प्रति वर्ष 100 घंटे (यानी प्रति सप्ताह दो घंटे) स्वैच्छिक स्वच्छता कार्य में समर्पित करने का संकल्प दिलाया जाता है।
- इसमें स्वयं कूड़ा न फैलाने और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकने का संकल्प शामिल है।
- यह अभियान स्वच्छ कार्यस्थलों, मोहल्लों, गांवों, कस्बों और एक स्वच्छ राष्ट्र के निर्माण के लिए निरंतर व्यक्तिगत प्रयास और सामुदायिक भागीदारी पर जोर देता है।
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग जैसे सरकारी विभाग और उनके अंतर्गत आने वाले संगठन इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, स्वच्छता शपथ और अन्य गतिविधियां आयोजित करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 का शुभारंभ | सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| अभियान की अवधि | 17 सितंबर, 2026 से 2 अक्टूबर, 2026 तक, महात्मा गांधी की जयंती के साथ समापन। |
| स्वच्छता की शपथ | विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता बनाए रखने और दूसरों को प्रेरित करने का संकल्प। |
| स्वैच्छिक स्वच्छता कार्य | प्रति वर्ष 100 घंटे (प्रति सप्ताह दो घंटे) स्वच्छता के लिए समर्पित करने का संकल्प। |
| जनभागीदारी पर जोर | स्वच्छ भारत मिशन में व्यक्तिगत प्रयास और सामुदायिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित करता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह अभियान स्वच्छता को एक सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करता है, जिससे समाज के सभी वर्गों में जागरूकता और भागीदारी बढ़ती है।
- स्वच्छता की शपथ और स्वैच्छिक कार्य के माध्यम से नागरिकों में कर्तव्य की भावना और सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा मिलता है।
- स्वच्छ वातावरण बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक है, विशेषकर कमजोर वर्गों के लिए।
प्रशासनिक महत्व
- सरकारी विभागों और उनके संस्थानों में स्वच्छता मानकों को बनाए रखने के लिए एक आंतरिक तंत्र को मजबूत करता है।
- यह अभियान सरकारी कर्मचारियों को सार्वजनिक सेवा के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में स्वच्छता के प्रति संवेदनशील बनाता है।
- यह स्वच्छ भारत मिशन के व्यापक लक्ष्यों के साथ विभागीय प्रयासों को संरेखित करता है, जिससे समग्र राष्ट्रीय उद्देश्यों की प्राप्ति में मदद मिलती है।
नैतिक महत्व
- महात्मा गांधी के स्वच्छता के सिद्धांतों को स्मरण कराता है और उन्हें आधुनिक संदर्भ में लागू करने के लिए प्रेरित करता है।
- यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर जोर देता है, जो एक सभ्य समाज के लिए आवश्यक है।
- स्वच्छता को एक नैतिक मूल्य के रूप में स्थापित करता है, जो नागरिकों को अपने परिवेश और राष्ट्र के प्रति सम्मान रखने के लिए प्रोत्साहित करता है।
चुनौतियाँ
1. व्यवहार परिवर्तन में निरंतरता
- स्वच्छता को एक आदत बनाने और निरंतर बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक प्रयासों की आवश्यकता होती है।
- केवल अभियानों तक सीमित न रहकर दैनिक जीवन में स्वच्छता को आत्मसात करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, शासन
2. अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ
- ठोस और तरल अपशिष्ट के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे और प्रौद्योगिकी की आवश्यकता।
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करना।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, शासन
3. संसाधनों का प्रभावी उपयोग
- स्वच्छता अभियानों के लिए आवंटित वित्तीय और मानव संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना।
- स्थानीय निकायों और समुदायों को स्वच्छता पहल के लिए पर्याप्त सहायता प्रदान करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, अर्थव्यवस्था
4. जनभागीदारी का विस्तार
- समाज के सभी वर्गों, विशेषकर हाशिए पर पड़े और वंचित समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
- स्वच्छता के प्रति उदासीनता को दूर करने और सभी को अभियान से जोड़ने की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| व्यवहार परिवर्तन | स्वच्छता को एक स्थायी आदत बनाने में कठिनाई, अभियानों के बाद उत्साह में कमी। |
| बुनियादी ढाँचा | अपशिष्ट संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए पर्याप्त और आधुनिक सुविधाओं की कमी। |
| संसाधन आवंटन | स्वच्छता पहलों के लिए वित्तीय और मानव संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और उपयोग। |
| जागरूकता का स्तर | कुछ समुदायों में स्वच्छता के महत्व और प्रथाओं के बारे में जागरूकता की कमी। |
| सामुदायिक स्वामित्व | स्वच्छता को सरकारी कार्यक्रम के बजाय एक सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने में चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission)
आगे की राह
- स्वच्छता अभियानों को केवल प्रतीकात्मक न बनाकर, उन्हें व्यवहार परिवर्तन के दीर्घकालिक कार्यक्रमों से जोड़ना।
- अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों और विकेन्द्रीकृत समाधानों को बढ़ावा देना, जिसमें कचरा पृथक्करण और पुनर्चक्रण शामिल हो।
- स्थानीय निकायों और स्वयं सहायता समूहों को स्वच्छता पहलों में अधिक सशक्त बनाना और उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना।
- शैक्षणिक संस्थानों में स्वच्छता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना और बच्चों में बचपन से ही स्वच्छता की आदतों को विकसित करना।
- स्वच्छता चैंपियंस और रोल मॉडल को पहचानना और पुरस्कृत करना, ताकि दूसरों को प्रेरित किया जा सके।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके स्वच्छता से संबंधित जानकारी, सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रगति की निगरानी को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छ भारत मिशन · स्वच्छता ही सेवा अभियान · सामुदायिक भागीदारी · सतत विकास लक्ष्य · सार्वजनिक स्वास्थ्य · अपशिष्ट प्रबंधन · व्यवहारिक परिवर्तन · सामाजिक न्याय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 21’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा।’}
- {‘अनुच्छेद 47’: ‘राज्य का कर्तव्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार।’}
- {‘अनुच्छेद 51A (g)’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार नागरिक का कर्तव्य।’}
अवधारणा प्रवाह
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का शुभारंभ। → विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता की शपथ लेना। → प्रति वर्ष 100 घंटे स्वैच्छिक स्वच्छता कार्य करने का संकल्प। → व्यक्तिगत प्रयासों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देना। → स्वच्छ कार्यस्थलों, मोहल्लों, गांवों और एक स्वच्छ राष्ट्र का निर्माण। → स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान। → बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
2. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों में ही लागू होता है।
3. इस अभियान के तहत प्रतिभागियों को प्रति वर्ष 100 घंटे स्वैच्छिक स्वच्छता कार्य में समर्पित करने का संकल्प लेना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि अभियान का मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ावा देना है। कथन 2 गलत है, क्योंकि यह अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू होता है। कथन 3 सही है, प्रतिभागियों को प्रति वर्ष 100 घंटे स्वैच्छिक स्वच्छता कार्य में समर्पित करने का संकल्प लेना होता है।
Q2. स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- इसका शुभारंभ वर्ष 2014 में किया गया था।
- इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खुले में शौच मुक्त (Open Defecation Free – ODF) बनाना है।
- यह केवल ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
- यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
उत्तर: यह केवल ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। — स्वच्छ भारत मिशन का कार्यान्वयन शहरी क्षेत्रों के लिए आवास और शहरी कार्य मंत्रालय तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया जाता है, न कि केवल ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने में ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियानों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। सार्वजनिक स्वच्छता सुनिश्चित करने में सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: स्वच्छ भारत मिशन (SBM) और ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का संक्षिप्त परिचय, उनके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए।
2. ‘स्वच्छता ही सेवा’ की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण:
– सकारात्मक प्रभाव: जनभागीदारी को बढ़ावा देना, व्यवहारिक परिवर्तन लाना, जागरूकता बढ़ाना, सरकारी प्रयासों को पूरक बनाना।
– चुनौतियाँ/सीमाएँ: निरंतरता का अभाव, केवल अभियान तक सीमित रहना, दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन में कठिनाई, संसाधनों की कमी।
3. सामुदायिक भागीदारी का महत्व:
– स्वामित्व की भावना: स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी से परियोजनाओं में स्वामित्व की भावना आती है।
– सतत समाधान: स्थानीय समस्याओं के लिए स्थानीय समाधान, जो अधिक टिकाऊ होते हैं।
– व्यवहारिक परिवर्तन: व्यक्तिगत और सामूहिक व्यवहार में बदलाव लाने में सहायक।
– संसाधनों का कुशल उपयोग: श्रम और संसाधनों का बेहतर उपयोग।
– सामाजिक दबाव: सकारात्मक सामाजिक दबाव के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देना।
4. निष्कर्ष: स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकारी प्रयासों और सामुदायिक भागीदारी के बीच तालमेल की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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