पीएम-स्वनिधि योजना: शहरी-बाहरी क्षेत्रों तक विस्तार एवं सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

पीएम-स्वनिधि योजना: शहरी-बाहरी क्षेत्रों तक विस्तार एवं सामाजिक-आर्थिक प्रभाव — पीएम-स्वनिधि योजना: मुख्य घटनाएँ और प्रभाव

पीएम-स्वनिधि योजना: शहरी-बाहरी क्षेत्रों तक विस्तार एवं सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
  • Prelims: पीएम-स्वनिधि योजना, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम, 2014, शहरी स्थानीय निकाय (ULB), डिजिटल भुगतान, यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड, सूक्ष्म-ऋण (Micro-credit)
  • Essay: भारत में अनौपचारिक क्षेत्र का महत्व और उसके सशक्तिकरण की आवश्यकता, समावेशी विकास: वित्तीय समावेशन और सामाजिक उत्थान में सरकारी योजनाओं की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम-स्वनिधि योजना शहरी और शहरी-बाहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को संपार्श्विक-मुक्त कार्यशील पूंजी ऋण, ब्याज सब्सिडी और डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन प्रदान करके वित्तीय समावेशन और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) ने हाल ही में पीएम-स्वनिधि योजना (PM-SVANidhi Scheme) के कार्यान्वयन की स्थिति और इसके प्रभावों पर विस्तृत जानकारी साझा की है। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB), हैदराबाद द्वारा किए गए अध्ययनों से पता चला है कि यह योजना रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए औपचारिक ऋण तक पहुँच बनाने, उनके व्यापार लाभ में वृद्धि करने और डिजिटल भुगतान अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के दायरे को शहरी इलाकों से आगे बढ़ाकर जनगणना वाले कस्बों और शहरी-बाहरी इलाकों तक विस्तारित किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक लाभार्थियों को लाभ मिल सके।

पृष्ठभूमि

  • कोविड-19 महामारी के कारण रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था, जिससे उन्हें पूंजी की कमी का सामना करना पड़ा।
  • भारत में रेहड़ी-पटरी विक्रेता अनौपचारिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और अक्सर औपचारिक ऋण स्रोतों से वंचित रहते हैं।
  • पारंपरिक रूप से, इन विक्रेताओं को साहूकारों से उच्च ब्याज दरों पर ऋण लेना पड़ता था, जिससे वे ऋण जाल में फंस जाते थे।
  • सरकार ने स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम, 2014 (Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014) के माध्यम से रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के अधिकारों और विनियमन के लिए एक ढाँचा प्रदान किया है।
  • वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देना और समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता रही है।
  • डिजिटल इंडिया पहल के तहत डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना भी एक प्रमुख उद्देश्य है, जिससे वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और दक्षता लाई जा सके।
  • इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) द्वारा 2023 और 2025 में किए गए अध्ययनों ने योजना के प्रभाव का आकलन किया, जिसमें 95 प्रतिशत लाभार्थियों के लिए यह उनका पहला बैंक ऋण पाया गया।

पीएम-स्वनिधि योजना क्या है?

  • पीएम-स्वनिधि (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि) योजना आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
  • इसका उद्देश्य शहरी और शहरी-बाहरी क्षेत्रों के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को अपना व्यवसाय फिर से शुरू करने के लिए संपार्श्विक-मुक्त कार्यशील पूंजी ऋण (collateral-free working capital loan) प्रदान करना है।
  • योजना के तहत, विक्रेता 10,000 रुपये का पहला ऋण ले सकते हैं, जिसके समय पर पुनर्भुगतान पर 20,000 रुपये और फिर 50,000 रुपये के अगले ऋण के लिए पात्र होते हैं।
  • समय पर या जल्दी पुनर्भुगतान करने पर 7 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सब्सिडी (interest subsidy) सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाती है।
  • डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए, डिजिटल भुगतान करने वाले विक्रेताओं को प्रति माह 100 रुपये तक का कैशबैक प्रोत्साहन (cashback incentive) प्रदान किया जाता है।
  • इस योजना का दायरा अब शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies – ULBs) की भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़कर जनगणना वाले कस्बों और आसपास के शहरी-बाहरी इलाकों तक बढ़ाया जा रहा है।
  • योजना के तहत सभी प्रकार के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को कवर किया जाता है, जिनमें मौसमी विक्रेता, घूम-घूमकर सामान बेचने वाले, महिला विक्रेता और पर्यटन पर निर्भर विक्रेता शामिल हैं।
  • हाल ही में, जिन लाभार्थियों ने ऋण की दूसरी किश्त चुका दी है, उनके लिए यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड (UPI-linked RuPay Credit Card) भी शुरू किया गया है, जिससे उन्हें औपचारिक क्रेडिट इतिहास बनाने में मदद मिल रही है।
  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और शहरी स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वे स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम, 2014 के तहत सर्वेक्षण कर विक्रेताओं की पहचान करें और उन्हें विक्रय प्रमाणपत्र (Certificate of Vending) जारी करें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
शहरी-बाहरी क्षेत्रों तक विस्तार योजना का दायरा शहरी स्थानीय निकायों की भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़कर जनगणना वाले कस्बों और शहरी-बाहरी इलाकों तक बढ़ाया गया, जिससे अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेता लाभान्वित हो सकें।
पहला औपचारिक ऋण अध्ययन के अनुसार, 95 प्रतिशत लाभार्थियों के लिए पीएम स्वनिधि ऋण उनका पहला बैंक ऋण था, जो औपचारिक ऋण व्यवस्था तक पहुंच बढ़ाने में सहायक है।
व्यापार लाभ में वृद्धि 2023 से 2025 के बीच पीएम स्वनिधि ऋण लेने वालों के औसत वार्षिक व्यापार लाभ में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
क्रेडिट इतिहास का निर्माण लगभग 30 प्रतिशत उधारकर्ताओं ने पीएम स्वनिधि ऋण के अतिरिक्त अन्य ऋण भी लिए, जो दर्शाता है कि यह योजना क्रेडिट इतिहास बनाने में मदद कर रही है।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के बीच डिजिटल भुगतान अपनाने में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है।
यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड दूसरी किश्त चुकाने वाले लाभार्थियों के लिए यह सुविधा शुरू की गई है, जिससे डिजिटल लेनदेन और औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच और सुगम हो।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को औपचारिक ऋण तक पहुंच प्रदान करके अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने में मदद करती है।
  • ऋण के माध्यम से व्यापार विस्तार और लाभ में वृद्धि से आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
  • डिजिटल भुगतान को अपनाने से वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) में वृद्धि होती है और नकदी-आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भरता कम होती है।

सामाजिक महत्व

  • क्रेडिट की दिक्कतों को कम करके और परिवारों की आय को स्थिर करके, यह योजना विक्रेताओं के जीवन-स्तर में सुधार करती है।
  • बेहतर खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा तक आसान पहुंच और बच्चों की शिक्षा में मदद करके सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देती है।
  • महिला विक्रेताओं और अन्य वंचित समूहों को सशक्त बनाती है, जिससे सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलता है।

शासनिक महत्व

  • यह योजना स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम, 2014 (Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014) के प्रावधानों के तहत रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की पहचान और उनके विनियमन में सहायता करती है।
  • शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies – ULBs) और राज्य सरकारों की भूमिका को मजबूत करती है, जिससे स्थानीय शासन में सुधार होता है।
  • योजना के प्रभाव का आकलन करने के लिए किए गए अध्ययन नीति निर्माण और कार्यान्वयन में साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

चुनौतियाँ

1. पात्रता और पहचान

  • सभी पात्र रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की पहचान करना और उन्हें योजना के दायरे में लाना एक चुनौती है, विशेषकर शहरी-बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • विक्रय प्रमाणपत्र (Certificate of Vending) जारी करने की प्रक्रिया में देरी या जटिलताएँ लाभार्थियों तक पहुँच को बाधित कर सकती हैं।

2. जागरूकता और पहुंच

  • योजना के लाभों और आवेदन प्रक्रिया के बारे में सभी संभावित लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से जानकारी पहुंचाना, विशेषकर उन लोगों तक जिनकी डिजिटल साक्षरता कम है।
  • स्थानीय भाषाओं में सूचना, शिक्षा और संचार (Information, Education and Communication – IEC) सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

3. क्रेडिट इतिहास का अभाव

  • कई रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के पास औपचारिक क्रेडिट इतिहास नहीं होता, जिससे उन्हें ऋण प्राप्त करने में प्रारंभिक कठिनाई हो सकती है, हालांकि योजना इसे बनाने में मदद कर रही है।

4. डिजिटल साक्षरता और अपनाना

  • डिजिटल भुगतान और यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड के उपयोग के लिए रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना आवश्यक है।
  • तकनीकी बाधाओं और डिजिटल डिवाइड को कम करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
व्यापक कवरेज योजना का दायरा बढ़ने के बावजूद, अभी भी बड़ी संख्या में रेहड़ी-पटरी विक्रेता औपचारिक ऋण और अन्य लाभों से वंचित हो सकते हैं।
प्रशासनिक दक्षता लोन मंजूरी में लगने वाला औसत समय (23 दिन) कुछ विक्रेताओं के लिए लंबा हो सकता है, जिन्हें तत्काल पूंजी की आवश्यकता होती है।
स्थानीय निकायों की क्षमता राज्यों/शहरी स्थानीय निकायों पर सर्वेक्षण करने, प्रमाणपत्र जारी करने और नए आवेदन जुटाने का अतिरिक्त बोझ, उनकी क्षमता पर निर्भर करता है।
ऋण चुकाने की दर योजना की दीर्घकालिक सफलता के लिए ऋण चुकाने की उच्च दर बनाए रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब ऋण की मात्रा बढ़ती है।
डेटा गोपनीयता और सुरक्षा डिजिटल लेनदेन और क्रेडिट कार्ड के उपयोग में वृद्धि के साथ, लाभार्थियों के डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • पीएम-स्वनिधि योजना (PM-SVANidhi Scheme)

आगे की राह

  • शहरी स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों की क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाए ताकि सर्वेक्षण और विक्रय प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाया जा सके।
  • डिजिटल साक्षरता और वित्तीय शिक्षा कार्यक्रमों को और मजबूत किया जाए, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां डिजिटल अपनाने की दर कम है।
  • योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्थानीय भाषाओं में व्यापक और लक्षित अभियान चलाए जाएं, जिसमें सामुदायिक रेडियो और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों का उपयोग किया जाए।
  • ऋण मंजूरी प्रक्रिया को और अधिक कुशल और समयबद्ध बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाए, जिससे औसत मंजूरी समय को कम किया जा सके।
  • यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड के लाभों और उपयोगिता के बारे में विक्रेताओं को शिक्षित किया जाए और इसके अपनाने को प्रोत्साहित किया जाए।
  • योजना के प्रभाव का नियमित और व्यापक मूल्यांकन किया जाए, जिसमें सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के साथ-साथ क्रेडिट इतिहास निर्माण और डिजिटल समावेशन पर भी ध्यान दिया जाए।
  • मौसमी विक्रेताओं और पर्यटन पर निर्भर विक्रेताओं जैसे विशिष्ट समूहों की जरूरतों को पूरा करने के लिए योजना में लचीलेपन पर विचार किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पीएम-स्वनिधि योजना · शहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेता · सूक्ष्म-ऋण सुविधा · डिजिटल भुगतान · वित्तीय समावेशन · क्रेडिट इतिहास · आजीविका संवर्धन · सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण · शहरी स्थानीय निकाय · स्ट्रीट वेंडर्स अधिनियम, 2014

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(क)’, ‘note’: ‘राज्य द्वारा आजीविका के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘बेरोजगारी, बुढ़ापे आदि में सार्वजनिक सहायता’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}

अवधारणा प्रवाह

औपचारिक ऋण तक पहुंच का अभाव  →  पीएम-स्वनिधि योजना के तहत सूक्ष्म-ऋण  →  व्यापार में वृद्धि और डिजिटल भुगतान  →  क्रेडिट इतिहास का निर्माण और वित्तीय समावेशन  →  जीवन-स्तर और सामाजिक कल्याण में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. पीएम-स्वनिधि योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की भौगोलिक सीमाओं के भीतर काम करने वाले रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए है।
2. इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB), हैदराबाद द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, अधिकांश पीएम-स्वनिधि लाभार्थी पहली बार बैंक से ऋण लेने वाले थे।
3. इस योजना के तहत डिजिटल भुगतान को अपनाने में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि योजना का दायरा शहरी स्थानीय निकायों की भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़कर शहरी-बाहरी इलाकों और जनगणना वाले कस्बों तक बढ़ाया गया है। कथन 2 सही है क्योंकि अध्ययन में पाया गया कि 95 प्रतिशत लाभार्थियों के लिए पीएम-स्वनिधि बैंक से लिया गया ऋण उनका पहला ऋण था। कथन 3 सही है क्योंकि अध्ययन में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में उल्लेखनीय वृद्धि पाई गई।

Q2. पीएम-स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की पहचान और उन्हें प्रमाण पत्र जारी करने की जिम्मेदारी किसकी है?

  1. आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
  2. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
  3. संबंधित शहरी स्थानीय निकाय और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारें
  4. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय

उत्तर: संबंधित शहरी स्थानीय निकाय और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारें — स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम, 2014 के प्रावधानों के तहत रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की पहचान करने, सर्वेक्षण करने और विक्रय प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी संबंधित शहरी स्थानीय निकायों और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों की होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पीएम-स्वनिधि योजना ने शहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के वित्तीय समावेशन और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में किस प्रकार योगदान दिया है? योजना के विस्तार और प्रभाव का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत पीएम-स्वनिधि योजना के उद्देश्यों और लक्षित समूह का संक्षिप्त परिचय देकर करें। फिर, वित्तीय समावेशन में इसके योगदान पर प्रकाश डालें, जैसे कि पहली बार ऋण तक पहुंच, क्रेडिट इतिहास का निर्माण और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा। इसके बाद, योजना के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करें, जिसमें व्यापार लाभ में वृद्धि, बेहतर जीवन-स्तर, खाद्य सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा में सहायता शामिल है। योजना के विस्तार (शहरी-बाहरी इलाकों और जनगणना वाले कस्बों तक) और जागरूकता अभियानों का उल्लेख करें। अंत में, योजना के समग्र प्रभाव का आलोचनात्मक मूल्यांकन करते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment