21 Jul पीएलआई योजना: ऑटो एवं बैटरी सेक्टर में 44,326 करोड़ रुपये का निवेश, 67,820 नौकरियां
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, उन्नत ऑटोमोटिव उत्पाद (AAT), उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी, विनिर्माण क्षेत्र, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत
- Essay: भारत में विनिर्माण क्षेत्र का पुनरुत्थान: चुनौतियाँ और अवसर, भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में सरकारी नीतियों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: PLI-ऑटो और PLI-ACC योजनाएँ भारत में उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों और बैटरी भंडारण के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजित करने के लिए सरकार की प्रमुख पहलें हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारी उद्योग राज्य मंत्री ने हाल ही में लोकसभा में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स तथा उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि PLI-ऑटो योजना के तहत 31 मार्च, 2026 तक 44,326 करोड़ रुपये का संचयी निवेश और 67,820 रोजगार सृजित हुए हैं, जबकि PLI-ACC योजना के तहत 31 मई, 2026 तक 5,180 करोड़ रुपये का निवेश और 1,277 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की शुरुआत की है।
- PLI योजनाएँ ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहलों का एक महत्वपूर्ण घटक हैं, जिनका लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है।
- ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक है, जो GDP में महत्वपूर्ण योगदान देता है और बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करता है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते चलन के कारण उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण प्रौद्योगिकियों का विकास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
- इन योजनाओं का उद्देश्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाना, घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाना है।
- सरकार का लक्ष्य इन योजनाओं के माध्यम से उच्च मूल्य वर्धित विनिर्माण को प्रोत्साहित करना और निर्यात को बढ़ावा देना है।
ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और बैटरी स्टोरेज के लिए PLI योजनाएँ क्या हैं?
- PLI-ऑटो योजना: इसे 23 सितंबर, 2021 को उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं के उन्नयन हेतु 25,938 करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ मंजूरी दी गई थी।
- PLI-ऑटो का उद्देश्य: यह योजना भारत में उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देती है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन और हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन शामिल हैं।
- PLI-ऑटो के तहत प्रोत्साहन: यह योजना पात्र निर्माताओं को पांच साल की अवधि के लिए वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिससे निवेश आकर्षित हो और रोजगार सृजित हो।
- PLI-ACC योजना: मई 2021 में ‘उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम’ के तहत 50 गीगावाट क्षमता के लिए 18,100 करोड़ रुपये का परिव्यय स्वीकृत किया गया था।
- PLI-ACC का उद्देश्य: इसका लक्ष्य भारत में ACC बैटरी विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना को बढ़ावा देना है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण के लिए घरेलू बैटरी उत्पादन को बढ़ावा मिले।
- PLI-ACC के तहत प्रोत्साहन: यह योजना ACC बैटरी के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निर्माताओं को प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिससे बैटरी आयात पर निर्भरता कम हो।
- अखिल भारतीय योजनाएँ: दोनों योजनाएँ अखिल भारतीय प्रकृति की हैं, जिसका अर्थ है कि अनुमोदित आवेदक देश में कहीं भी विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने के लिए स्वतंत्र हैं।
- निवेश और रोजगार सृजन: इन योजनाओं से देश में महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित हुआ है और बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पीएलआई-ऑटो योजना | उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना और घरेलू तथा वैश्विक मांग को पूरा करना। |
| पीएलआई-ACC योजना | उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण के विनिर्माण को बढ़ावा देना, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण को समर्थन मिले। |
| बजट आवंटन | पीएलआई-ऑटो के लिए 25,938 करोड़ रुपये और पीएलआई-ACC के लिए 18,100 करोड़ रुपये का पर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन। |
| रोजगार सृजन | पीएलआई-ऑटो के तहत 67,820 और पीएलआई-ACC के तहत 1,277 प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन, आर्थिक विकास में योगदान। |
| अखिल भारतीय योजना | दोनों योजनाएँ अखिल भारतीय प्रकृति की हैं, जिससे आवेदक देश के किसी भी हिस्से में इकाइयाँ स्थापित कर सकते हैं, जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजनाएँ भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करती हैं, विशेषकर ऑटोमोबाइल और बैटरी भंडारण क्षेत्रों में।
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता कम होती है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
- निवेश और रोजगार सृजन से आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलती है, जिससे प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है।
रणनीतिक महत्व
- बैटरी भंडारण में आत्मनिर्भरता से भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) मजबूत होती है, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) लक्ष्यों को प्राप्त करने में।
- उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों का विनिर्माण भारत को भविष्य की गतिशीलता (Mobility) प्रौद्योगिकियों में अग्रणी बनाता है।
- यह योजनाएँ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Global Supply Chains) में भारत की स्थिति को मजबूत करती हैं।
सामाजिक महत्व
- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन से लोगों की आजीविका में सुधार होता है और गरीबी कम होती है।
- कौशल विकास (Skill Development) को बढ़ावा मिलता है क्योंकि इन उद्योगों को उच्च कुशल कार्यबल की आवश्यकता होती है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से वायु प्रदूषण कम होता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
पर्यावरणीय महत्व
- ACC बैटरी भंडारण को बढ़ावा देने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण को प्रोत्साहन देना भारत के जलवायु परिवर्तन (Climate Change) लक्ष्यों के अनुरूप है।
- स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास से एक हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) का निर्माण होता है।
चुनौतियाँ
1. प्रौद्योगिकी अधिग्रहण और नवाचार
- उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों और ACC बैटरी के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों का अधिग्रहण और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाना एक चुनौती है।
- घरेलू अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना ताकि विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम हो सके।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था
2. कौशल अंतर
- इन उच्च-तकनीकी उद्योगों के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कौशल विकास
3. बुनियादी ढाँचा और आपूर्ति श्रृंखला
- बैटरी विनिर्माण के लिए आवश्यक लिथियम, कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- विनिर्माण इकाइयों के लिए आवश्यक बिजली, सड़क और लॉजिस्टिक्स जैसे बुनियादी ढाँचे का विकास।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, अर्थव्यवस्था
4. वैश्विक प्रतिस्पर्धा
- अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थापित खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना और लागत-प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाना।
- व्यापार समझौतों और नीतियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना ताकि घरेलू उद्योगों को लाभ मिल सके।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, अर्थव्यवस्था
5. योजना का कार्यान्वयन और निगरानी
- योजना के तहत प्रोत्साहन राशि के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना।
- निवेश और रोजगार सृजन के लक्ष्यों की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक नीति
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पीएलआई-ACC प्रोत्साहन का दावा न होना | लाभार्थी कंपनियों द्वारा अभी तक कोई प्रोत्साहन राशि का दावा न किया जाना योजना के कार्यान्वयन में संभावित देरी या चुनौतियों का संकेत देता है। |
| उच्च प्रारंभिक निवेश | बैटरी विनिर्माण जैसी उच्च-तकनीकी परियोजनाओं में भारी प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता होती है, जो कंपनियों के लिए एक बाधा हो सकती है। |
| कच्चे माल की उपलब्धता | लिथियम, कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता, जो भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति संवेदनशील है। |
| तकनीकी प्रगति की गति | बैटरी प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ तालमेल बिठाना और अप्रचलन के जोखिम से बचना। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | बैटरी विनिर्माण और निपटान से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों का प्रबंधन, जैसे अपशिष्ट और प्रदूषण। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन (PLI) योजना
- ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए पीएलआई योजना (पीएलआई-ऑटो)
- उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम की उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना
आगे की राह
- पीएलआई-ACC योजना के तहत प्रोत्साहन राशि के दावों में देरी के कारणों की पहचान करना और उन्हें दूर करना।
- घरेलू अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन करना और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना।
- बैटरी विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं को विकसित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना।
- विनिर्माण इकाइयों के लिए विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचे और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का विकास सुनिश्चित करना।
- योजनाओं के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
- इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी भंडारण के लिए एक मजबूत घरेलू बाजार बनाने हेतु उपभोक्ता जागरूकता और प्रोत्साहन कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना · उन्नत ऑटोमोटिव उत्पाद (एएटी) · उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी · विनिर्माण क्षमता · आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · आर्थिक संवृद्धि · रोजगार सृजन · घरेलू विनिर्माण · इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी)
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा पीएलआई योजनाओं की घोषणा → निवेशकों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना → घरेलू विनिर्माण क्षमताओं का उन्नयन → रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि → आयात निर्भरता में कमी और आत्मनिर्भरता → निर्यात को बढ़ावा और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीएलआई-ऑटो योजना का उद्देश्य भारत में उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
2. उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम पीएलआई योजना के तहत आता है।
3. पीएलआई-ऑटो योजना के तहत लाभार्थी कंपनियों को प्रोत्साहन राशि का वितरण अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि पीएलआई-ऑटो योजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं का उन्नयन करना है। कथन 2 सही है क्योंकि उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम भी एक पीएलआई योजना है। कथन 3 गलत है क्योंकि पीएलआई-ऑटो योजना के तहत 2,386.36 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है, जबकि पीएलआई-एसीसी योजना के तहत अभी तक कोई प्रोत्साहन राशि का दावा नहीं किया गया है।
Q2. भारत में पीएलआई-ऑटो योजना के कार्यान्वयन के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा राज्य 31 मार्च, 2026 तक सबसे अधिक विनिर्माण इकाइयों का घर है?
- तमिलनाडु
- गुजरात
- महाराष्ट्र
- हरियाणा
उत्तर: महाराष्ट्र — दिए गए आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में 66 विनिर्माण इकाइयाँ हैं, जो 31 मार्च, 2026 तक पीएलआई-ऑटो योजना के तहत किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे अधिक हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने में उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और बैटरी भंडारण उद्योगों पर इसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में पीएलआई योजना के उद्देश्यों और भारत के विनिर्माण क्षेत्र पर इसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा करें। दूसरे भाग में, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और बैटरी भंडारण उद्योगों में पीएलआई-ऑटो और पीएलआई-एसीसी योजनाओं के तहत प्राप्त निवेश, रोजगार सृजन और प्रोत्साहन वितरण जैसे विशिष्ट आंकड़ों का उपयोग करते हुए इसके प्रभावों का विश्लेषण करें। चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का भी उल्लेख करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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