03 Nov पुणे मेट्रो का विस्तार: शहरी विकास और ईज ऑफ लिविंग में मील का पत्थर
✎ शहरी जीवन सुगमता और उत्पादकता के लिए मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन परियोजनाएँ राज्य सूची और संघ सूची के समन्वय से, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण के माध्यम से आगे बढ़ती हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आर्थिक विकास और अवसंरचना (परिवहन अवसंरचना, शहरी परिवहन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी) | GS Paper II — शासन और नीति-निर्माण (शहरी शासन, केंद्र-राज्य समन्वय, नीति कार्यान्वयन) | GS Paper I — भारत में शहरीकरण की समस्याएँ और उनका समाधान
- Prelims: मेट्रो रेल (Metro Rail) और भारत में पहली मेट्रो (कोलकाता, 1984), मेट्रो रेल अधिनियम, 2002 (Metro Railways (Operation and Maintenance) Act, 2002), राष्ट्रीय मेट्रो रेल नीति, 2017 (National Metro Rail Policy, 2017), व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण (Viability Gap Funding — VGF), स्मार्ट सिटीज़ मिशन (Smart Cities Mission) और अमृत (AMRUT), जीवन सुगमता सूचकांक (Ease of Living Index) और उसके आयाम, संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में रेलवे व स्थानीय शासन की स्थिति
- Essay: शहरीकरण का भविष्य: उत्पादकता, जीवन सुगमता और सार्वजनिक परिवहन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी से अवसंरचना वित्त पोषण: अवसर और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: शहरी जीवन सुगमता और उत्पादकता के लिए मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन परियोजनाएँ राज्य सूची और संघ सूची के समन्वय से, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण के माध्यम से आगे बढ़ती हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पुणे मेट्रो की एक नई लाइन के लोकार्पण और दूसरी लाइन के शिलान्यास के अवसर पर प्रधानमंत्री का संबोधन जारी हुआ। संबोधन में हिंजवडी से शिवाजीनगर के बीच मेट्रो सेवा को पुणे के आईटी केंद्र के लिए बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ा गया। प्रधानमंत्री ने शहरों की पहचान में प्रतिस्पर्धात्मकता और जीवन सुगमता को नई कसौटी बताया और कहा कि परिवहन सुधार से समय की बचत, उत्पादकता में वृद्धि और आर्थिक गतिविधि को गति मिलती है। इन दावों में देश भर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और दैनिक यात्रियों की संख्या से जुड़े आँकड़े भी शामिल थे, जिन्हें संबंधित मंत्रालय के आधिकारिक आँकड़ों से मिलाकर पढ़ना उचित होगा।
पृष्ठभूमि
- भारत में पहली मेट्रो 1984 में कोलकाता में चली थी। इसके बाद लंबे समय तक मेट्रो परियोजनाएँ सीमित शहरों तक ही रहीं।
- मेट्रो रेल नियामक ढाँचे के लिए मेट्रो रेल (निर्माण कार्य) अधिनियम, 1978 और मेट्रो रेल (संचालन एवं अनुरक्षण) अधिनियम, 2002 लागू हुए। इनसे परिचालन और सुरक्षा का कानूनी आधार तय हुआ।
- राष्ट्रीय मेट्रो रेल नीति, 2017 ने मेट्रो परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया और राज्यों को मेट्रो के लिए व्यवहार्यता के आधार पर परियोजनाएँ तैयार करने का मार्गदर्शन दिया।
- स्मार्ट सिटीज़ मिशन और अमृत जैसी योजनाओं ने शहरी अवसंरचना, सार्वजनिक परिवहन और सेवा-वितरण पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे शहरी शासन में नीतिगत निरंतरता बनी।
- शहरी जीवन-स्तर मापने के लिए आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने जीवन सुगमता सूचकांक जैसे साधन विकसित किए, जिनसे परिवहन, आवास और सेवाओं की गुणवत्ता की तुलना संभव हुई।
मेट्रो रेल और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) क्या है?
- मेट्रो रेल एक तीव्र, विद्युत-चालित, उच्च क्षमता वाली शहरी द्रुत परिवहन प्रणाली है, जो मुख्यतः सड़कों के भीड़भाड़ वाले गलियारों में यात्रियों को जल्दी और नियमित रूप से पहुँचाती है।
- रेलवे संघ सूची का विषय है, जबकि शहरी नियोजन और स्थानीय शासन राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं। इसलिए मेट्रो परियोजनाओं में केंद्र, राज्य और शहरी निकायों का समन्वय आवश्यक होता है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी में सरकार और निजी क्षेत्र एक अनुबंध के अंतर्गत संसाधन, जोखिम और प्रबंधन साझा करते हैं। इसका उद्देश्य सरकारी वित्तीय भार घटाना और परियोजना की दक्षता बढ़ाना होता है।
- व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण (VGF) के अंतर्गत सरकार ऐसी परियोजनाओं को पूंजीगत सहायता देती है जिनकी वित्तीय व्यवहार्यता अकेले निजी निवेश से पूरी नहीं होती। इससे सामाजिक रूप से आवश्यक किंतु कम लाभ वाली परियोजनाएँ भी आगे बढ़ती हैं।
- मेट्रो परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, किराया-निर्धारण, राजस्व जोखिम और कार्यान्वयन विलंब जैसी चुनौतियाँ सामने आती हैं, जिनके लिए अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान आवश्यक होते हैं।
- परिवहन सुधार से यात्रा समय में कमी, वाहन प्रदूषण में गिरावट और उत्पादकता में वृद्धि जैसे लाभ मिलते हैं, जो शहरी जीवन सुगमता के मूल तत्व हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता (Feature) | महत्व (Significance) |
|---|---|
| हिंजवडी–शिवाजीनगर मेट्रो लाइन | पुणे के आईटी केंद्र (IT Hub) को शहर के पुराने और नए इलाकों से सीधी जोड़ने वाली कनेक्टिविटी मिलती है, जिससे कार्यस्थल तक यात्रा का समय घटता है। |
| पीपीपी मॉडल (Public-Private Partnership: PPP) | सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी से परियोजना बनी है। इससे सार्वजनिक वित्त पर दबाव कम करने और निर्माण व संचालन की दक्षता बढ़ाने का तर्क दिया जाता है। |
| मेट्रो नेटवर्क का विस्तार | वक्तव्य के अनुसार देश में मेट्रो मार्ग लगभग 248 किलोमीटर (2014) से बढ़कर लगभग 1200 किलोमीटर और मेट्रो वाले शहर 5 से 26 हो गए हैं। ये आंकड़े सरकारी दावे हैं और इन्हें मूल स्रोत से सत्यापित करना चाहिए। |
| दैनिक यात्री संख्या | वक्तव्य के अनुसार मेट्रो में प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक यात्री सफर करते हैं। इससे शहरी परिवहन में सार्वजनिक यातायात की भूमिका का अंदाजा मिलता है। |
| महाराष्ट्र में मेट्रो अवसंरचना | वक्तव्य के अनुसार राज्य में लगभग 175 किलोमीटर मेट्रो सेवा में है और 680 किलोमीटर से अधिक पर कार्य जारी है। इससे शहरी अवसंरचना में राज्य-स्तरीय निवेश की दिशा स्पष्ट होती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- मेट्रो से यात्रा समय घटने पर नगर की उत्पादकता (Productivity) बढ़ती है, जो आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में योगदान देती है।
- निर्माण, इंजीनियरिंग और संचालन में रोजगार सृजित होता है, और इसका प्रभाव स्थानीय दुकानों व उद्योगों तक पहुंचता है।
- वक्तव्य में बताया गया लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये का निवेश पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के रूप में अवसंरचना क्षेत्र को गति देता है।
शहरी शासन और नीति महत्व
- मेट्रो को शहर की प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) और जीवन सुगमता (Ease of Living) से जोड़ा गया है, जो शहरी नीति के मूल्यांकन के दो प्रमुख मानक हैं।
- पीपीपी मॉडल सार्वजनिक सेवाओं में निजी पूंजी और प्रबंधकीय क्षमता के उपयोग का एक उदाहरण है।
पर्यावरण और सामाजिक पहलू
- सार्वजनिक परिवहन पर निर्भरता बढ़ने से निजी वाहनों की संख्या और सड़क भीड़ में कमी की संभावना बनती है, जिससे वायु प्रदूषण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- सस्ती और तेज़ यात्रा से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग को रोजगार और शिक्षा के अवसर तक बेहतर पहुंच मिलती है।
चुनौतियाँ
1. शहरी वित्तीय स्थिरता
- मेट्रो परियोजनाओं की पूंजी लागत बहुत अधिक होती है और किराये से प्राप्त राजस्व अक्सर परिचालन व्यय को पूरा नहीं कर पाता।
- शहरी स्थानीय निकायों की अपनी कर-आय सीमित होने से दीर्घकालिक वित्तपोषण के लिए राज्य और केंद्र पर निर्भरता रहती है।
यूपीएससी लिंक: शहरी शासन, वित्तीय संघवाद और सार्वजनिक वित्त (GS-II और GS-III)
2. पीपीपी मॉडल में जोखिम का बंटवारा
- निजी भागीदार की लाभ-अपेक्षा और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाना कठिन होता है।
- अनुबंध में जोखिम का गलत बंटवारा होने पर परियोजना में विलंब या पुनर्वार्ता (Renegotiation) की स्थिति आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक-निजी भागीदारी और शासन सुधार (GS-II और GS-III)
3. शहरी नियोजन और एकीकरण
- मेट्रो के साथ बस सेवा, पैदल पथ और साइकिल सुविधा का समन्वय न होने पर अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (Last-mile Connectivity) कमजोर रहती है।
- भूमि उपयोग और आवास नीति के साथ परिवहन योजना का समन्वय न होने पर भीड़भाड़ और अनियोजित विकास बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: शहरी नियोजन, नगर-विकास और अवसंरचना (GS-I और GS-III)
4. संस्थागत समन्वय
- मेट्रो परियोजनाओं में केंद्र, राज्य और नगर निकाय की भूमिकाएं एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं, जिससे निर्णय-प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
- परियोजनाओं के बीच प्राथमिकता और संसाधन-आवंटन पर समन्वय की आवश्यकता बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य संबंध और सहकारी संघवाद (GS-II)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा (Issue) | चिंता (Concern) |
|---|---|
| राजस्व बनाम परिचालन लागत | यात्री किराया और विज्ञापन आय से परिचालन व्यय पूरा न होने पर घाटे का बोझ सरकारी बजट पर पड़ता है। |
| जोखिम और अनुबंध प्रबंधन | पीपीपी अनुबंधों में जोखिम का असमान बंटवारा भविष्य के विवाद और देरी का कारण बन सकता है। |
| समेकित परिवहन | मेट्रो, बस और निजी वाहनों के बीच समन्वय न होने पर यात्रा की निरंतरता टूटती है। |
| भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास | स्टेशन और डिपो के लिए भूमि की उपलब्धता और प्रभावित परिवारों का पुनर्वास चुनौती बने रहते हैं। |
| सुलभता और समावेशन | दिव्यांगजन, वृद्ध और कम आय वर्ग के लिए स्टेशनों की सुलभता और किराया-संरचना पर ध्यान आवश्यक है। |
आगे की राह
- मेट्रो परियोजनाओं के साथ बस, पैदल पथ और साइकिल अवसंरचना का एकीकृत परिवहन योजना (Integrated Transport Plan) तैयार किया जाए।
- पीपीपी अनुबंधों में जोखिम के बंटवारे, टैरिफ निर्धारण और विवाद-समाधान की स्पष्ट व्यवस्था हो।
- परियोजना-वित्त के लिए राजस्व के स्थिर स्रोत, जैसे संपत्ति-आधारित वित्तपोषण (Value Capture Financing), का मूल्यांकन किया जाए।
- शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता बढ़ाई जाए, ताकि वे परिवहन सेवाओं की योजना और संचालन में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
- मेट्रो स्टेशनों पर दिव्यांगजन-मैत्री सुविधाएं और समावेशी किराया-संरचना सुनिश्चित की जाए।
- परियोजनाओं का स्वतंत्र प्रभाव-मूल्यांकन हो, जिसमें यात्रा समय, प्रदूषण और रोजगार के प्रभाव को मापा जाए।
- भूमि-उपयोग नीति को परिवहन योजना से जोड़कर स्टेशन-क्षेत्र में मिश्रित और सघन विकास (Transit-Oriented Development) को प्रोत्साहित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
शहरी विकास · मेट्रो कनेक्टिविटी · ईज़ ऑफ लिविंग · ईज़ ऑफ ट्रांसपोर्टेशन · सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल · आधारभूत संरचना विकास · आर्थिक संवृद्धि · रोजगार सृजन · उत्पादकता · विकसित भारत
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं को शक्ति और दायित्व
- बारहवीं अनुसूची: नगरपालिकाओं के कार्यों की सूची
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 22: रेलवे, मेट्रो रेल का विधायी आधार
अवधारणा प्रवाह
शहरी जनसंख्या और यातायात की मांग बढ़ती है। → मेट्रो लाइन के विस्तार से कनेक्टिविटी और यात्रा समय में सुधार होता है। → यात्रा समय घटने से कार्य-कुशलता और शहरी उत्पादकता (Productivity) बढ़ती है। → निर्माण और संचालन में निवेश से रोजगार सृजित होता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। → पीपीपी मॉडल से निजी पूंजी जुटती है, लेकिन जोखिम-प्रबंधन और राजस्व-स्थिरता की चुनौतियां बनी रहती हैं। → इन चुनौतियों के समाधान से शहरी जीवन सुगमता (Ease of Living) का दीर्घकालिक लक्ष्य प्राप्त होता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पहली मेट्रो रेल सेवा 1984 में कोलकाता में शुरू हुई थी।
2. 2014 तक, भारत के 5 शहरों में मेट्रो रेल सेवा उपलब्ध थी।
3. वर्तमान में, भारत का मेट्रो नेटवर्क दुनिया के शीर्ष तीन मेट्रो नेटवर्कों में से एक है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। भारत में पहली मेट्रो रेल सेवा 1984 में कोलकाता में शुरू हुई थी। कथन 2 सही है। 2014 तक, भारत के केवल 5 शहरों में मेट्रो रेल सेवा उपलब्ध थी। कथन 3 सही है। वर्तमान में, भारतीय मेट्रो नेटवर्क दुनिया के शीर्ष तीन मेट्रो नेटवर्कों में गिना जाता है।
Q2. अभिकथन (A): मेट्रो परियोजनाएं शहरी क्षेत्रों में ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ और ‘ईज़ ऑफ ट्रांसपोर्टेशन’ को बेहतर बनाती हैं।
कारण (R): मेट्रो कनेक्टिविटी से यात्रा का समय बचता है और शहर की उत्पादकता बढ़ती है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि मेट्रो परियोजनाएं शहरी जीवन को सुगम बनाती हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि समय की बचत और उत्पादकता में वृद्धि सीधे तौर पर ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ और ‘ईज़ ऑफ ट्रांसपोर्टेशन’ में सुधार करती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है। इसलिए, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ शहरी आधारभूत संरचना के विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की भूमिका का परीक्षण कीजिए। क्या यह मॉडल ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में PPP मॉडल की परिभाषा, इसके लाभ (जैसे पूंजी, विशेषज्ञता, दक्षता), शहरी आधारभूत संरचना (विशेषकर मेट्रो परियोजनाओं) में इसके अनुप्रयोग के उदाहरण और इसकी चुनौतियों (जैसे जोखिम आवंटन, पारदर्शिता, नियामक ढांचा) को शामिल करना चाहिए। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ इसके संबंध को आर्थिक संवृद्धि, रोजगार सृजन, ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ और ‘ईज़ ऑफ ट्रांसपोर्टेशन’ में सुधार के संदर्भ में विश्लेषित करें। नीति आयोग की रिपोर्टों और संबंधित सरकारी योजनाओं का उल्लेख करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: पुणे मेट्रो परियोजनाओं के संदर्भ में, प्रधान मंत्री के संबोधन के अनुसार निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. पुणे मेट्रो परियोजना का उद्घाटन 2016 में किया गया था।
2. यह परियोजना पुणे के शहरी गतिशीलता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
3. पुणे में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार शहर के आर्थिक विकास को गति देगा।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — प्रधानमंत्री के संबोधन में पुणे मेट्रो परियोजना के उद्घाटन का उल्लेख 2016 में आधारशिला रखने के रूप में किया गया था, न कि उद्घाटन के रूप में। शेष कथन संबोधन के मूल पाठ के अनुरूप हैं।
Mains: पुणे मेट्रो परियोजनाओं के माध्यम से शहरी गतिशीलता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार के सहयोगात्मक प्रयासों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। (लगभग 150 शब्द)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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