25 Sep बारबाडोस की पीएम मोटले ने संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक सुधारों का आह्वान किया
✎ वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में विश्वास बहाल करने के लिए 'ज्ञान को कार्य में बदलने' तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास
- Prelims: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly), छोटे द्वीपीय विकासशील राज्य (Small Island Developing States – SIDS), जलवायु वित्त (Climate Finance), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) का शासन, सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार
- Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की प्रासंगिकता, जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों पर इसका प्रभाव, नई प्रौद्योगिकियों का नैतिक शासन और समावेशी विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में विश्वास बहाल करने के लिए ‘ज्ञान को कार्य में बदलने’ तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया अमोर मॉटली ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) के वार्षिक उच्च-स्तरीय सत्र को संबोधित करते हुए वैश्विक नेताओं से ‘जो हम जानते हैं उसे कार्यरूप में बदलने’ का आग्रह किया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार, नई प्रौद्योगिकियों के समावेशी शासन और जलवायु वित्त की कमी जैसी प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डाला, और ‘जिम्मेदारी के संकट’ को इन विफलताओं का मूल कारण बताया।
पृष्ठभूमि
- संयुक्त राष्ट्र महासभा संयुक्त राष्ट्र (United Nations) का मुख्य विचार-विमर्श, नीति-निर्माण और प्रतिनिधि अंग है, जिसमें सभी 193 सदस्य राज्यों का समान प्रतिनिधित्व होता है।
- वैश्विक शासन में सुधार की मांग लंबे समय से उठ रही है, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में, जहां स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व की कमी पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना कर रहे छोटे द्वीपीय विकासशील राज्य (SIDS) जैसे बारबाडोस, जलवायु वित्त की उपलब्धता और ऋण स्थिरता के मुद्दों पर लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां स्वास्थ्य सेवा, आपदा भविष्यवाणी और शिक्षा में अपार संभावनाएं प्रदान करती हैं, लेकिन भेदभाव, निगरानी और गलत सूचना के प्रसार के जोखिम भी पैदा करती हैं, जिसके लिए वैश्विक शासन की आवश्यकता है।
- अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और बहुपक्षीय विकास बैंकों की संरचना पर भी सवाल उठाए गए हैं, विशेषकर विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पर्याप्त वित्त जुटाने की उनकी क्षमता के संबंध में।
- भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती असमानता के कारण अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद में विश्वास में गिरावट आई है, जिससे वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजना और भी कठिन हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की आवश्यकता
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है, जिस पर अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
- इसमें 15 सदस्य होते हैं: पांच स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) जिनके पास वीटो शक्ति होती है, और 10 गैर-स्थायी सदस्य जिन्हें महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
- बारबाडोस की प्रधानमंत्री ने तर्क दिया कि सुरक्षा परिषद बदलती दुनिया के साथ तालमेल बिठाने में विफल रही है, विशेषकर अफ्रीका के लिए स्थायी सीट की अनुपस्थिति और छोटे द्वीपीय विकासशील राज्यों के लिए सुनिश्चित प्रतिनिधित्व की कमी के कारण।
- वीटो शक्ति का उपयोग अक्सर सामूहिक अत्याचारों की स्थितियों में भी कार्रवाई को अवरुद्ध कर देता है, जैसा कि फ्रांस-मैक्सिकन पहल द्वारा प्रस्तावित वीटो के उपयोग को प्रतिबंधित करने के समर्थन से स्पष्ट होता है।
- सुधारों का उद्देश्य परिषद को अधिक प्रतिनिधि, कुशल और जवाबदेह बनाना है, ताकि यह समकालीन वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
- भारत सहित कई देश सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहे हैं, जो उनकी बढ़ती वैश्विक भूमिका और जिम्मेदारियों को दर्शाता है।
- सुधारों में स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना, वीटो शक्ति के उपयोग को संशोधित करना, और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व में सुधार करना शामिल हो सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बहुआयामी चुनौतियाँ | शांति, भोजन, जल, वित्त और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में वैश्विक बाधाएँ। |
| जिम्मेदारी का संकट | ज्ञान और क्षमता के बावजूद चुनौतियों का समाधान करने में विफलता। |
| अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अफ्रीका और छोटे द्वीपीय विकासशील राज्यों (SIDS) के लिए स्थायी प्रतिनिधित्व की आवश्यकता। |
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का शासन | AI के लाभों का उपयोग करते हुए भेदभाव और निगरानी जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए वैश्विक नियम। |
| जलवायु वित्त | जलवायु-संवेदनशील देशों के लिए आवश्यक $490 बिलियन वार्षिक वित्तपोषण की कमी। |
| असमानता और भू-राजनीतिक तनाव | बढ़ती असमानता को भू-राजनीतिक तनाव और घटते विश्वास का कारण बताया गया। |
महत्व
अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं शासन
- बारबाडोस की प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए ‘ज्ञान को कार्य में बदलने’ का आह्वान किया।
- अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि शक्ति और प्रतिनिधित्व के मुद्दों को संबोधित किया जा सके।
- AI के शासन के लिए वैश्विक नियमों की वकालत की गई, जिसमें सभी राज्यों को शामिल किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नई तकनीकें पुराने पदानुक्रमों को पुनर्जीवित न करें।
जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास
- जलवायु-संवेदनशील देशों के लिए जलवायु वित्त की भारी कमी को उजागर किया गया, जो 2030 तक $490 बिलियन वार्षिक की आवश्यकता के मुकाबले वर्तमान $90 बिलियन है।
- जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience), ऋण स्थिरता और वहनीय वित्त को अलग-अलग नहीं मानने पर जोर दिया गया, क्योंकि ये सभी सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सामाजिक न्याय एवं समानता
- बढ़ती असमानता को भू-राजनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय विश्वास में कमी का एक प्रमुख कारण बताया गया।
- तकनीकी प्रगति के बावजूद भेदभाव और निगरानी के जोखिमों के प्रति आगाह किया गया, जिससे यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि नई प्रौद्योगिकियाँ सभी को लाभ पहुँचाएँ।
चुनौतियाँ
1. बहुआयामी वैश्विक चुनौतियाँ
- शांति, भोजन, जल, वित्त, शिक्षा और अवसर जैसे क्षेत्रों में बढ़ती बाधाएँ।
- इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए पर्याप्त ज्ञान और क्षमता होने के बावजूद कार्रवाई करने में विफलता।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सामाजिक न्याय
2. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का बदलती दुनिया के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहना।
- अफ्रीका के लिए स्थायी सीट और छोटे द्वीपीय विकासशील राज्यों (SIDS) के लिए सुनिश्चित प्रतिनिधित्व की कमी।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, शासन
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का शासन
- AI में स्वास्थ्य सेवा, आपदा भविष्यवाणी और शिक्षा में सुधार की क्षमता है, लेकिन यह भेदभाव, निगरानी और गलत सूचना के प्रसार को भी बढ़ा सकता है।
- AI शासन को केवल निगमों या तकनीकी रूप से उन्नत देशों पर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि यह हर राज्य को प्रभावित करेगा।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शासन
4. जलवायु वित्त की कमी
- जलवायु-संवेदनशील देशों को 2030 तक लगभग $490 बिलियन वार्षिक की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल $90 बिलियन प्राप्त हो रहा है।
- जलवायु लचीलेपन, ऋण स्थिरता और वहनीय वित्त को अलग-अलग मुद्दों के रूप में मानने की प्रवृत्ति।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, अर्थव्यवस्था
5. बढ़ती असमानता
- बढ़ती असमानता को भू-राजनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय विश्वास में कमी का एक प्रमुख चालक बताया गया।
- यह सुनिश्चित करने में विफलता कि वैश्विक धन और नई प्रौद्योगिकियाँ सभी को लाभ पहुँचाएँ।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ज्ञान को कार्य में बदलने में विफलता | वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए पर्याप्त ज्ञान और क्षमता होने के बावजूद कार्रवाई की कमी। |
| अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का अप्रचलित होना | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में प्रतिनिधित्व की कमी और बदलती वैश्विक वास्तविकताओं के साथ तालमेल बिठाने में विफलता। |
| AI शासन में असमानता | AI के विकास और विनियमन को कुछ देशों या निगमों तक सीमित रखना, जिससे पुराने पदानुक्रमों का पुनरुत्पादन हो सकता है। |
| जलवायु वित्तपोषण का अंतर | जलवायु-संवेदनशील देशों के लिए आवश्यक $490 बिलियन वार्षिक वित्तपोषण के मुकाबले वर्तमान में केवल $90 बिलियन का प्रवाह। |
| बढ़ती वैश्विक असमानता | असमानता का भू-राजनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय विश्वास में कमी को बढ़ावा देना। |
आगे की राह
- ज्ञान और क्षमता को ठोस कार्रवाई में बदलना, विशेषकर वैश्विक चुनौतियों के समाधान में।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक सुधार करना, ताकि शक्ति और प्रतिनिधित्व के मुद्दों को संबोधित किया जा सके।
- अफ्रीका और छोटे द्वीपीय विकासशील राज्यों (SIDS) जैसे क्षेत्रों के लिए स्थायी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के शासन के लिए एक समावेशी वैश्विक ढाँचा विकसित करना, जिसमें सभी राज्यों की भागीदारी हो।
- जलवायु-संवेदनशील देशों के लिए जलवायु वित्तपोषण के अंतर को कम करने के लिए तत्काल उपाय करना।
- जलवायु लचीलेपन, ऋण स्थिरता और वहनीय वित्त को एक एकीकृत दृष्टिकोण के तहत संबोधित करना।
- वैश्विक असमानता को कम करने और यह सुनिश्चित करने के लिए नीतियाँ बनाना कि नई प्रौद्योगिकियाँ और वैश्विक धन सभी को लाभ पहुँचाएँ।
- संघर्षों को रोकने और मध्यस्थता के लिए संयुक्त राष्ट्र को पर्याप्त संसाधन और संकल्प प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संयुक्त राष्ट्र सुधार · अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का लोकतंत्रीकरण · जलवायु वित्तपोषण · छोटे द्वीप विकासशील राज्य (SIDS) · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन · वीटो शक्ति का दुरुपयोग · संघर्ष निवारण · असमानता और भू-राजनीति · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · वैश्विक उत्तरदायित्व
अवधारणा प्रवाह
ज्ञान और क्षमता की उपलब्धता → वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में विफलता → जिम्मेदारी का संकट → अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता → ज्ञान को कार्य में बदलने का आह्वान → वैश्विक सहयोग और समावेशी शासन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार का आह्वान किया।
2. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफ्रीका के लिए स्थायी सीट और छोटे द्वीप विकासशील राज्यों (SIDS) के लिए प्रतिनिधित्व की कमी पर प्रकाश डाला।
3. बारबाडोस ने सामूहिक अत्याचारों से जुड़ी स्थितियों में वीटो के उपयोग को प्रतिबंधित करने वाली फ्रांसीसी-मैक्सिकन पहल का समर्थन किया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि बारबाडोस की प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार का आह्वान किया। कथन 2 भी सही है क्योंकि उन्होंने सुरक्षा परिषद में अफ्रीका और SIDS के प्रतिनिधित्व की कमी को उजागर किया। कथन 3 भी सही है क्योंकि बारबाडोस ने सामूहिक अत्याचारों में वीटो के उपयोग को प्रतिबंधित करने वाली पहल का समर्थन किया है।
Q2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के शासन के संबंध में, बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली ने किस दृष्टिकोण की वकालत की है?
- AI शासन को मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी-विकसित देशों द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए।
- निगमों को AI के विकास और शासन में पूर्ण स्वायत्तता दी जानी चाहिए।
- एक ऐसी तकनीक जो हर राज्य को प्रभावित करेगी, उसे ऐसे नियमों द्वारा शासित किया जाना चाहिए जिन्हें हर राज्य को आकार देने का अवसर मिला हो।
- AI शासन को पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दायरे में आना चाहिए।
उत्तर: एक ऐसी तकनीक जो हर राज्य को प्रभावित करेगी, उसे ऐसे नियमों द्वारा शासित किया जाना चाहिए जिन्हें हर राज्य को आकार देने का अवसर मिला हो। — बारबाडोस की प्रधानमंत्री ने तर्क दिया कि AI शासन को केवल निगमों या तकनीकी रूप से उन्नत देशों पर नहीं छोड़ा जा सकता है, बल्कि इसे ऐसे नियमों द्वारा शासित किया जाना चाहिए जिन्हें हर राज्य को आकार देने का अवसर मिला हो।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सुधार की आवश्यकता पर बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली के आह्वान की आलोचनात्मक जाँच कीजिए। साथ ही, वैश्विक शासन में छोटे द्वीप विकासशील राज्यों (SIDS) के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली के संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार के आह्वान का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **सुधार की आवश्यकता:**
* **संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का लोकतंत्रीकरण:** अफ्रीका के लिए स्थायी सीट और SIDS के लिए प्रतिनिधित्व की कमी।
* **वीटो शक्ति का दुरुपयोग:** सामूहिक अत्याचारों के मामलों में वीटो के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की पहल का समर्थन।
* **संघर्ष निवारण और शांति स्थापना:** संघर्षों को रोकने के लिए पर्याप्त संसाधनों और संकल्प की आवश्यकता।
* **वैश्विक असमानता और वित्तपोषण:** जलवायु वित्तपोषण में कमी (490 बिलियन डॉलर की आवश्यकता बनाम 90 बिलियन डॉलर का वर्तमान प्रवाह)।
* **कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का शासन:** AI के नैतिक और समावेशी शासन की आवश्यकता, जिसमें सभी राज्यों की भागीदारी हो।
* **उत्तरदायित्व का संकट:** अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझा उत्तरदायित्व की कमी।
3. **छोटे द्वीप विकासशील राज्यों (SIDS) के सामने चुनौतियाँ:**
* **जलवायु परिवर्तन का प्रभाव:** समुद्र के स्तर में वृद्धि, चरम मौसमी घटनाएँ, तटीय क्षरण।
* **सीमित संसाधन और अर्थव्यवस्थाएँ:** पर्यटन और कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, जिससे बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है।
* **ऋण संधारणीयता:** जलवायु अनुकूलन और विकास के लिए भारी ऋण।
* **अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व की कमी:** वैश्विक मंचों पर उनकी आवाज़ का कमज़ोर होना, विशेषकर UNSC जैसे निकायों में।
* **सुरक्षा संबंधी खतरे:** जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न सुरक्षा खतरे और भू-राजनीतिक तनावों का प्रभाव।
4. **निष्कर्ष:** समावेशी, न्यायसंगत और प्रभावी वैश्विक शासन के लिए इन चुनौतियों का समाधान करने और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: news.un.org
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