भूटान में 108 स्तूपों का निर्माण: किरेन रिजिजू ने किया प्रतिनिधित्व, जानें महत्व

भूटान में 108 स्तूपों का निर्माण: किरेन रिजिजू ने किया प्रतिनिधित्व, जानें महत्व

भूटान में 108 स्तूपों का निर्माण: किरेन रिजिजू ने किया प्रतिनिधित्व, जानें महत्व

भारत-भूटान संबंधों में विकास1949 संधिप्रारंभिक समझौता2007 मैत्री संधिसंप्रभुता सम्मानगेलेफू परियोजनासांस्कृतिक कूटनीतिस्तूप निर्माणस्वयंसेवकों द्वाराउच्च स्तरीय बैठकद्विपक्षीय सहयोग
भारत-भूटान संबंधों में विकास

✎ भारत-भूटान संबंध सांस्कृतिक-आध्यात्मिक साझेदारी, जलविद्युत सहयोग और 2007 की मैत्री संधि पर आधारित हैं, और बौद्ध विरासत इस सॉफ्ट पावर का प्रमुख स्तंभ है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध, भारत-भूटान द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय संगठन)  |  GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति (बौद्ध धर्म के विभिन्न संप्रदाय, वज्रयान परंपरा, स्तूप वास्तुकला)  |  GS Paper II — शासन (अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित संवैधानिक और वैधानिक ढाँचा)
  • Prelims: स्तूप (Stupa) की संरचना और बौद्ध धर्म में उसका महत्व, वज्रयान बौद्ध धर्म (Vajrayana Buddhism) और उसका भौगोलिक प्रसार, भारत-भूटान मैत्री संधि, 2007 (India-Bhutan Treaty of Friendship, 2007), भूटान की संवैधानिक राजतंत्रीय व्यवस्था (Constitutional Monarchy), भूटान की मुद्रा ngultrum और भारतीय रुपये के साथ उसकी विनिमय व्यवस्था, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 और बौद्ध समुदाय को अल्पसंख्यक अधिसूचित किया जाना (1993), असम से लगी भारत-भूटान सीमा और सीमा-पार नदी प्रणालियाँ, बिम्सटेक (BIMSTEC) की सदस्यता में भूटान की भूमिका
  • Essay: सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति: आध्यात्मिक विरासत साझा संबंधों की नींव कैसे बनती है?, पड़ोस पहले नीति और सीमावर्ती क्षेत्रों का समावेशी विकास: भूटान के साथ सहयोग से सीख

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत-भूटान संबंध सांस्कृतिक-आध्यात्मिक साझेदारी, जलविद्युत सहयोग और 2007 की मैत्री संधि पर आधारित हैं, और बौद्ध विरासत इस सॉफ्ट पावर का प्रमुख स्तंभ है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने 01 नवंबर 2026 को भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (Gelephu Mindfulness City) में 108 स्तूपों की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा (Consecration) समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया। इस समारोह में भूटान के महामहिम राजा भी उपस्थित थे। यह परियोजना भूटान के राजा की परिकल्पना थी और इसे हज़ारों स्वयंसेवकों ने एक ही दिन में पूरा किया। श्री रिजिजू ने 31 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक भूटान यात्रा के दौरान भूटान के राजा और प्रधानमंत्री से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने विकास सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक संबंधों में द्विपक्षीय सहयोग की सकारात्मक दिशा की सराहना की। इस प्रकार यह घटना सांस्कृतिक कूटनीति और पड़ोसी देश के साथ विकास-केंद्रित साझेदारी, दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

  • भारत और भूटान के संबंध 1949 की संधि से शुरू होकर 2007 की भारत-भूटान मैत्री संधि के माध्यम से नए स्वरूप में आए, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के प्रति सम्मान की प्रतिबद्धता दोहराई।
  • भारत भूटान का प्रमुख विकास साझेदार है। जलविद्युत परियोजनाएँ (जैसे चुखा, कूरिछू, टाला और मंगदेछू) दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग का मुख्य आधार रही हैं, और भूटान की अधिकांश बिजली भारत को निर्यात होती है।
  • बौद्ध धर्म भारत और भूटान के बीच साझा सांस्कृतिक सूत्र है। भारत में बौद्ध समुदाय को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत 1993 में अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया, जिससे अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की भूमिका इस क्षेत्र में भी प्रासंगिक है।
  • भारत की पड़ोस पहले नीति (Neighbourhood First Policy) और अधिनियम पूर्व नीति (Act East Policy) के अंतर्गत भूटान को सामरिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष स्थान दिया गया है।
  • गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान का एक नियोजित विकास क्षेत्र है, जो भारत की असम सीमा के निकट स्थित है। इसलिए इसके विकास से सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रों पर आर्थिक प्रभाव की संभावना भी जुड़ी है।

स्तूप और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी क्या है?

  • स्तूप (Stupa) बौद्ध धर्म की एक प्रमुख स्थापत्य संरचना है, जो प्रायः बुद्ध के अवशेषों, प्रतीकों या पवित्र वस्तुओं से जुड़ी होती है। यह ध्यान, परिक्रमा और श्रद्धा का केंद्र होता है।
  • प्राण-प्रतिष्ठा (Consecration) वह धार्मिक अनुष्ठान है जिसके द्वारा किसी संरचना को पूजनीय और आध्यात्मिक रूप से सक्रिय माना जाता है।
  • वज्रयान (Vajrayana) महायान बौद्ध परंपरा की एक शाखा है, जिसका प्रसार भूटान, तिब्बत और हिमालयी क्षेत्र में विशेष रूप से हुआ है।
  • भूटान एक संवैधानिक राजतंत्र है, जहाँ राजा राष्ट्र का प्रमुख है और संसद द्विसदनीय है।
  • गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान के दक्षिणी भाग में स्थित एक नियोजित क्षेत्र है, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक केंद्र के साथ आर्थिक विकास को जोड़ना है।
  • इस परियोजना में 108 स्तूप आई (माउ) नदी के किनारे 11.7 किलोमीटर के क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक स्तूप की ऊँचाई 15 मीटर है और दो स्तूपों के बीच 108 मीटर की दूरी है।
  • भूटान की मुद्रा ngultrum है, जिसकी विनिमय दर भारतीय रुपये से जुड़ी है, जिससे भारत-भूटान आर्थिक संबंधों में स्थिरता आती है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
स्थान और आयोजन गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (Gelephu Mindfulness City), भूटान। यह असम की सीमा के निकट आई (माउ) नदी के किनारे स्थित है। 1 नवंबर 2026 को 108 स्तूपों की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह हुआ।
संरचना का स्वरूप 11.7 किलोमीटर के क्षेत्र में 108 स्तूप बनाए गए। प्रत्येक स्तूप 15 मीटर ऊँचा है और दो स्तूपों के बीच 108 मीटर की दूरी है। हज़ारों स्वयंसेवकों ने एक ही दिन में इन्हें खड़ा किया।
धार्मिक-सांस्कृतिक आधार स्तूप (Stupa) बौद्ध परंपरा के पवित्र स्मारक हैं। इस परियोजना का उद्देश्य स्थान को वज्रयान बौद्ध धर्म (Vajrayana Buddhism) के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना और भूटानी मूल्यों व संस्कृति को दर्शाना है।
परियोजना की उत्पत्ति भूटान के महामहिम राजा की परिकल्पना थी। उन्होंने ही इसके क्रियान्वयन का मार्गदर्शन किया। स्तूप संख्या 76 पर भूटान के राजा, भूटान के प्रधानमंत्री और भारत के केंद्रीय मंत्री ने प्रार्थना की।
भारत की भागीदारी केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया। स्तूप संख्या 76 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को समर्पित है, जिसके लिए भारत की ओर से आभार व्यक्त किया गया।
द्विपक्षीय पृष्ठभूमि 31 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 की भारतीय मंत्री की भूटान यात्रा में राजा और प्रधानमंत्री से भेंट हुई। व्यापार, ऊर्जा, निवेश, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक संबंधों पर सकारात्मक प्रगति की सराहना की गई।

महत्व

सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व

  • भारत और भूटान के बीच साझा बौद्ध विरासत की जीवंत अभिव्यक्ति है, जो दोनों देशों के जन-स्तर के संबंधों को सुदृढ़ करती है।
  • हिमालयी क्षेत्र में वज्रयान परंपरा के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती है।
  • भूटानी मूल्यों और संस्कृति का सार्वजनिक प्रदर्शन इस परियोजना का घोषित उद्देश्य है।

कूटनीतिक और रणनीतिक महत्व

  • उच्चस्तरीय भागीदारी से भारत-भूटान के विशेष संबंधों की निरंतरता का संकेत मिलता है।
  • वर्ष 2007 की भारत-भूटान मैत्री संधि (India-Bhutan Friendship Treaty) के बाद के सहयोग-ढाँचे की भावना इस आयोजन में दिखती है।
  • भारत की पड़ोसी-प्रथम नीति के संदर्भ में ऐसी साझेदारियाँ विश्वास और सद्भावना को बढ़ाती हैं।

आर्थिक और कनेक्टिविटी संबंधी महत्व

  • यात्रा के दौरान व्यापार, ऊर्जा और निवेश पर सहयोग की समीक्षा हुई, जो द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों का आधार है।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का विस्तार आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकता है।

क्षेत्रीय विकास से जुड़ा पहलू

  • मंत्री के अनुसार यह परियोजना भूटान के साथ-साथ भारत के पड़ोसी क्षेत्रों के विकास में भूमिका निभाएगी।
  • धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन की संभावना सीमावर्ती अर्थव्यवस्था के लिए अवसर बन सकती है, हालाँकि इसका प्रभाव नीति-क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

चुनौतियाँ

1. पर्यावरणीय और भू-उपयोग संबंधी विचार

  • 11.7 किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र में नदी तट पर बड़े पैमाने पर संरचनाएँ खड़ी करने का स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव आकलन का विषय है।
  • हिमालयी पारिस्थितिकी संवेदनशील मानी जाती है, इसलिए भूमि-उपयोग और जल-संसाधनों के संरक्षण की व्यवस्था आवश्यक है।

2. सांस्कृतिक प्रामाणिकता और संरक्षण

  • बड़े पैमाने पर निर्मित धार्मिक संरचनाओं के आध्यात्मिक अर्थ और प्रामाणिकता को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
  • पर्यटन-दबाव बढ़ने पर स्थल की धार्मिक गरिमा और स्थानीय समुदाय के हित में संतुलन आवश्यक होगा।

3. सीमावर्ती प्रबंधन और सुरक्षा समन्वय

  • असम की सीमा के निकट होने से सीमा-पार आवाजाही और भीड़-प्रबंधन पर समन्वय की आवश्यकता होगी।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास-परियोजनाओं के साथ सुरक्षा-व्यवस्था का संतुलन बनाना होगा।

4. दीर्घकालिक निरंतरता और शासन

  • परियोजना का मार्गदर्शन एक शीर्ष नेतृत्व की परिकल्पना पर आधारित है, इसलिए नीति-निरंतरता और संस्थागत ढाँचे का महत्व बढ़ जाता है।
  • दीर्घकालिक विकास के लिए स्पष्ट शासन-संरचना और वित्तीय योजना आवश्यक है।

5. छोटे पड़ोसी के साथ साझेदारी का संतुलन

  • भूटान की संप्रभुता और आत्मनिर्भर विकास-दृष्टि का सम्मान भारतीय सहयोग की मूल शर्त है।
  • सहयोग ऐसा हो कि वह भूटान की प्राथमिकताओं के अनुरूप रहे और उस पर अनावश्यक निर्भरता न बने।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
पारिस्थितिकी नदी-तट और हिमालयी क्षेत्र में बड़े निर्माण का दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभाव
सांस्कृतिक गरिमा पर्यटन-दबाव से धार्मिक स्थल की पवित्रता और प्रामाणिकता पर असर
सीमा प्रबंधन असम सीमा के निकट आवाजाही और सुरक्षा-समन्वय की जटिलता
नीति-निरंतरता परियोजना का मार्गदर्शन उच्च स्तर पर केंद्रित होने से दीर्घकालिक शासन-ढाँचे की आवश्यकता
संप्रभुता और संतुलन सहयोग भूटान की प्राथमिकताओं और आत्मनिर्भरता के अनुरूप रहना चाहिए

आगे की राह

  • पर्यावरण प्रभाव आकलन के माध्यम से नदी-तट और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण के उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
  • पर्यटन के लिए धारण-क्षमता (carrying capacity) का निर्धारण कर भीड़ और अपशिष्ट-प्रबंधन की व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
  • स्थानीय भूटानी समुदाय की भागीदारी से सांस्कृतिक प्रामाणिकता और आजीविका दोनों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा-प्रबंधन और आवाजाही-नियमन के लिए दोनों देशों के बीच नियमित समन्वय तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
  • व्यापार, ऊर्जा, निवेश और कनेक्टिविटी की परियोजनाओं को गेलेफू क्षेत्र के विकास-ढाँचे से जोड़कर एकीकृत योजना बनाई जानी चाहिए।
  • भारत-भूटान द्विपक्षीय संवाद में सांस्कृतिक कूटनीति को आर्थिक सहयोग के समानांतर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
  • परियोजना की प्रगति का समय-समय पर मूल्यांकन कर पारदर्शी और जवाबदेह शासन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बौद्ध कूटनीति (Buddhist Diplomacy) · सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) · पड़ोसी प्रथम नीति (Neighbourhood First Policy) · भारत-भूटान मैत्री संधि (India-Bhutan Friendship Treaty), 2007 · वज्रयान बौद्ध धर्म (Vajrayana Buddhism) · स्तूप वास्तुकला (Stupa Architecture) · गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (Gelephu Mindfulness City) · सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (Gross National Happiness) · जलविद्युत सहयोग (Hydropower Cooperation) · सॉफ्ट पावर (Soft Power) · अशोक का धम्म (Ashokan Dhamma) · सांस्कृतिक विरासत संरक्षण (Cultural Heritage Conservation)

अवधारणा प्रवाह

भूटान के महामहिम राजा की परिकल्पना और उसके मार्गदर्शन में परियोजना की शुरुआत  →  गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को वज्रयान बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय  →  स्वयंसेवकों द्वारा एक ही दिन में 108 स्तूपों का निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा  →  भारत सरकार के प्रतिनिधि की उपस्थिति और स्तूप संख्या 76 पर संयुक्त प्रार्थना  →  साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों की पुष्टि और द्विपक्षीय मित्रता की अभिव्यक्ति  →  व्यापार, ऊर्जा, निवेश और कनेक्टिविटी पर द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा और विस्तार  →  सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, पर्यटन और आर्थिक अवसरों की संभावना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूटान में संवैधानिक राजतंत्र की व्यवस्था है।
2. वज्रयान बौद्ध धर्म को प्रायः महायान की एक शाखा के रूप में समझा जाता है।
3. भारत की सीमा भूटान से केवल असम राज्य के साथ लगती है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि भूटान में 2008 के संविधान के अंतर्गत संवैधानिक राजतंत्र है। कथन 2 सही है, क्योंकि वज्रयान को प्रायः महायान से जुड़ी तांत्रिक (मंत्रयान) परंपरा माना जाता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि भूटान की सीमा असम के अलावा पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से भी लगती है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): स्तूप बौद्ध स्थापत्य की ऐसी गुंबदाकार संरचनाएँ हैं जिनमें बुद्ध या संतों के अवशेष सुरक्षित रखे जाते हैं।
कारण (R): सांची का महास्तूप यूनेस्को (UNESCO) के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है।

सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है। — (A) सही है: स्तूप में धातुगर्भ या अवशेषों को रखने की परंपरा रही है। (R) भी सही है, सांची का महास्तूप 1989 में विश्व धरोहर स्थल घोषित हुआ। परंतु (R) इस तथ्य की व्याख्या नहीं करता कि स्तूप अवशेषों को क्यों रखते हैं, इसलिए यह (A) का कारण नहीं है।

Q3. निम्नलिखित स्थलों को उनके राज्यों से सुमेलित कीजिए:
सूची I (बौद्ध स्थल): A. सांची, B. बोधगया, C. सारनाथ, D. अजंता
सूची II (राज्य): 1. बिहार, 2. उत्तर प्रदेश, 3. मध्य प्रदेश, 4. महाराष्ट्र

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-3, B-1, C-2, D-4
  2. A-2, B-1, C-3, D-4
  3. A-3, B-4, C-2, D-1
  4. A-1, B-3, C-4, D-2

उत्तर: A-3, B-1, C-2, D-4 — सांची मध्य प्रदेश (रायसेन जिला) में है, बोधगया बिहार में है, सारनाथ उत्तर प्रदेश (वाराणसी) में है और अजंता की गुफाएँ महाराष्ट्र (औरंगाबाद जिला) में हैं। अतः A-3, B-1, C-2, D-4 सही सुमेलन है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की पड़ोसी-केंद्रित विदेश नीति में बौद्ध धर्म और साझा सांस्कृतिक विरासत प्रभावी साधन के रूप में उभरे हैं। भारत-भूटान संबंधों के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि सांस्कृतिक कूटनीति आर्थिक एवं सुरक्षा हितों के साथ किस सीमा तक संतुलित हो सकती है। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु: (1) भूमिका: नवंबर 2026 में भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 108 स्तूपों की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भारत सरकार के प्रतिनिधि की उपस्थिति, जो साझा बौद्ध विरासत की ओर संकेत करती है। (2) सांस्कृतिक कूटनीति का आधार: अशोक का धम्म और शिलालेख संख्या 13 में धम्म-विजय की अवधारणा; सांची, बोधगया, सारनाथ जैसे स्थलों का बौद्ध परिपथ; वज्रयान की भूटान में प्रमुख भूमिका; जोसेफ नाई (Joseph Nye) की सॉफ्ट पावर की अवधारणा। (3) द्विपक्षीय ढांचा: भारत-भूटान मैत्री संधि, 2007, जो 1949 की संधि का स्थान लेती है; जलविद्युत परियोजनाएँ जैसे चुखा, कुरिछू, ताला और मंगदेछू; व्यापार, कनेक्टिविटी और विकास सहयोग। (4) भूटान की सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH) की अवधारणा और उसके सांस्कृतिक मूल्य भारत की नीति-संवाद में कैसे स्थान पाते हैं। (5) समालोचनात्मक पक्ष: सांस्कृतिक प्रभाव की सीमाएँ, चीन के साथ भूटान की सीमा-वार्ता और 2017 के डोकलाम प्रकरण से उपजे सुरक्षा प्रश्न, तथा यह तर्क कि सांस्कृतिक संबंध तभी टिकाऊ हैं जब आर्थिक सहयोग और सीमा-सुरक्षा संतुलित हों। (6) दूसरा भाग का निष्कर्ष: सांस्कृतिक कूटनीति विश्वास-निर्माण का साधन है, पर वह स्वतंत्र नीति-विकल्प नहीं; संतुलन के लिए संस्थागत संवाद, विकास साझेदारी और सीमा-प्रबंधन का समन्वय आवश्यक है। संतुलित निष्कर्ष के साथ दोनों पक्षों के मत प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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