11 Aug मासिक धर्म स्वच्छता: सरकार की प्रमुख योजनाओं और पहलों पर नवीनतम अपडेट 2026
✎ मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है, जो किशोरियों में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता, किफायती उत्पादों की उपलब्धता और सुरक्षित निपटान पर…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय। | GS Paper II — शासन: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
- Prelims: मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), किशोर स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता
- Essay: भारत में महिला स्वास्थ्य और सशक्तिकरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियां और उनका कार्यान्वयन
त्वरित पुनरावृत्ति: मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है, जो किशोरियों में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता, किफायती उत्पादों की उपलब्धता और सुरक्षित निपटान पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में राज्यसभा में मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य और स्वच्छता (MHM) को बढ़ावा देने के लिए की गई विभिन्न पहलों की जानकारी दी है। मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (PIP) के आधार पर मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें किशोरियों में जागरूकता, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता और सुरक्षित निपटान पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
पृष्ठभूमि
- मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता (MHM) एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा है, जो महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र कल्याण को प्रभावित करता है।
- भारत में, मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक वर्जनाएं और गलत धारणाएं अक्सर लड़कियों को स्कूल छोड़ने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करने के लिए मजबूर करती हैं।
- सुरक्षित और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों तक पहुंच की कमी, विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में, एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- असुरक्षित मासिक धर्म स्वच्छता पद्धतियों से संक्रमण, प्रजनन पथ के संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
- मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन एक बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय है, जिसके लिए विभिन्न हितधारक मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता होती है।
- सरकार ने इस मुद्दे के समाधान के लिए विभिन्न कार्यक्रम और नीतियां तैयार की हैं, जिनमें जागरूकता बढ़ाना, उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और सुरक्षित निपटान को बढ़ावा देना शामिल है।
मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) और संबंधित पहलें क्या हैं?
- मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए कार्यान्वित की जाती है।
- यह योजना जागरूकता पैदा करने, गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान और सुरक्षित मासिक धर्म संबंधी प्रक्रियाओं पर परामर्श प्रदान करने पर केंद्रित है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनके वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (PIP) में दिए गए प्रस्तावों के आधार पर मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
- मंत्रालय स्वास्थ्य सुविधाओं, सामुदायिक मंचों, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, डिजिटल प्रसार तंत्र और किशोर-केंद्रित कार्यक्रम प्लेटफार्मों के माध्यम से सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों का संचालन करता है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत निगरानी एक सुदृढ़, बहुस्तरीय प्रारूप के माध्यम से की जाती है, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिषद (NPCC) की बैठकों के दौरान अनुमोदित लक्ष्यों के विरुद्ध राज्यवार प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा शामिल है।
- वार्षिक साझा समीक्षा मिशन (CRM) कार्यक्रम कार्यान्वयन, स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढीकरण और प्रमुख संकेतकों पर प्रगति का स्वतंत्र, जमीनी आकलन प्रदान करते हैं।
- संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने विभागों के माध्यम से स्कूलों में सुरक्षित, प्रभावी और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता उपायों तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए स्कूली छात्राओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति को लागू करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय | मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) के लिए विभिन्न मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वित कार्रवाई आवश्यक है। |
| राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत सहायता | राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (PIP) के आधार पर मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता मिलती है। |
| मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) | किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित। यह जागरूकता, गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता, सुरक्षित निपटान और परामर्श पर केंद्रित है। |
| सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ | मंत्रालय स्वास्थ्य सुविधाओं, सामुदायिक मंचों, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और डिजिटल माध्यमों से निरंतर जागरूकता और संवेदीकरण कार्यक्रम चलाता है। |
| सुदृढ़ निगरानी तंत्र | NHM के अंतर्गत बहुस्तरीय निगरानी, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिषद (NPCC) की बैठकों और वार्षिक साझा समीक्षा मिशन (CRM) के माध्यम से प्रगति का आकलन शामिल है। |
| स्कूली छात्राओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति | राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से कार्यान्वित, स्कूलों में सुरक्षित, प्रभावी और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता उपायों तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी सामाजिक वर्जनाओं और मिथकों को तोड़कर महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और गरिमा को सुनिश्चित करना।
- लड़कियों की शिक्षा में निरंतरता सुनिश्चित करना, क्योंकि खराब मासिक धर्म स्वच्छता के कारण अक्सर लड़कियाँ स्कूल छोड़ देती हैं।
- लैंगिक समानता (Gender Equality) और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, जिससे महिलाएं और लड़कियाँ समाज में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
स्वास्थ्य महत्व
- खराब मासिक धर्म स्वच्छता से होने वाले संक्रमणों और बीमारियों (जैसे मूत्र पथ के संक्रमण) को रोकना।
- किशोरियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, जिससे उन्हें मासिक धर्म के दौरान आत्मविश्वास और आराम महसूस हो।
शासन और नीतिगत महत्व
- मासिक धर्म स्वच्छता को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में स्थापित करना और इसके लिए एक समन्वित, बहु-मंत्रालयी दृष्टिकोण अपनाना।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) जैसे बड़े कार्यक्रमों के माध्यम से जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाना।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और शिक्षा का अभाव
- मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक कलंक और मिथकों के कारण लड़कियों और महिलाओं में सही जानकारी का अभाव।
- पुरुषों और लड़कों में मासिक धर्म के बारे में संवेदनशीलता और समझ की कमी, जिससे सहयोग का अभाव होता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य और शिक्षा
2. स्वच्छता उत्पादों तक पहुंच और सामर्थ्य
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की सीमित उपलब्धता।
- गरीब परिवारों के लिए सैनिटरी उत्पादों की लागत एक बाधा बनी हुई है, जिससे वे पारंपरिक और अस्वच्छ तरीकों का उपयोग करने को मजबूर होते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य और गरीबी
3. बुनियादी ढाँचा और निपटान
- स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त और स्वच्छ शौचालयों तथा मासिक धर्म स्वच्छता सुविधाओं की कमी।
- उपयोग किए गए सैनिटरी उत्पादों के सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान के लिए उचित प्रणालियों का अभाव, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण होता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सार्वजनिक सेवाएं; पर्यावरण: प्रदूषण
4. समन्वय और कार्यान्वयन
- मासिक धर्म स्वच्छता एक अंतर-मंत्रालयी विषय होने के बावजूद, विभिन्न विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी।
- योजनाओं के कार्यान्वयन में क्षेत्रीय असमानताएं और जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र की कमजोरियाँ।
यूपीएससी लिंक: शासन: नीतियों का कार्यान्वयन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सामाजिक वर्जनाएँ और मिथक | मासिक धर्म को अपवित्र मानने की धारणाएँ, जिससे लड़कियों और महिलाओं को अलगाव और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। |
| स्वच्छता उत्पादों की लागत | गरीब परिवारों के लिए सैनिटरी नैपकिन खरीदना मुश्किल, जिससे वे अस्वच्छ विकल्पों का उपयोग करते हैं। |
| शौचालय और निपटान सुविधाओं की कमी | स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित और निजी मासिक धर्म स्वच्छता सुविधाओं का अभाव। |
| जागरूकता कार्यक्रमों की पहुंच | दूरदराज के क्षेत्रों और हाशिए पर पड़े समुदायों तक प्रभावी जागरूकता संदेशों का न पहुंच पाना। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | अनुचित निपटान विधियों के कारण सैनिटरी कचरे से होने वाला प्रदूषण। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)
- मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS)
आगे की राह
- मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने के लिए व्यापक और निरंतर सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियान चलाए जाएँ, जिसमें पुरुषों और लड़कों को भी शामिल किया जाए।
- गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए।
- स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर मासिक धर्म के अनुकूल शौचालय और सुरक्षित निपटान सुविधाओं का निर्माण और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
- मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (MHM) को स्कूली पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग बनाया जाए ताकि कम उम्र से ही सही जानकारी प्रदान की जा सके।
- विभिन्न मंत्रालयों (स्वास्थ्य, शिक्षा, जल शक्ति, पंचायती राज) और गैर-सरकारी संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय और अभिसरण को बढ़ावा दिया जाए।
- पुन: प्रयोज्य (reusable) और पर्यावरण-अनुकूल मासिक धर्म उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए और उनके सुरक्षित निपटान के लिए दिशानिर्देश विकसित किए जाएँ।
- जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (जैसे आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) को मासिक धर्म स्वच्छता पर परामर्श और शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित और सशक्त किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मासिक धर्म स्वच्छता · राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन · किशोर स्वास्थ्य · सार्वजनिक स्वास्थ्य · अंतर-मंत्रालयी समन्वय · जागरूकता अभियान · स्वच्छता प्रबंधन · महिला स्वास्थ्य · सतत विकास लक्ष्य · स्वास्थ्य शिक्षा
अवधारणा प्रवाह
खराब मासिक धर्म स्वच्छता → संक्रमण और बीमारियाँ / स्कूल छोड़ना → स्वास्थ्य और शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव → सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा → राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत पहलें → जागरूकता और सुविधाएँ प्रदान करना → बेहतर मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) का कार्यान्वयन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
2. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान की जाती है।
3. मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) एक बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है क्योंकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) लागू करता है। कथन 2 सही है क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनके वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (PIP) के प्रस्तावों के आधार पर मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए सहायता प्रदान की जाती है। कथन 3 सही है क्योंकि मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) को एक बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय के रूप में वर्णित किया गया है, जिसके लिए विभिन्न हितधारक मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा समन्वित कार्यवाही की आवश्यकता होती है।
Q2. मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) के मुख्य उद्देश्यों में शामिल हैं:
1. जागरूकता पैदा करना।
2. गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
3. सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान।
4. सुरक्षित मासिक धर्म संबंधी प्रक्रियाओं पर परामर्श प्रदान करना।
उपरोक्त में से कौन से उद्देश्य सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) जागरूकता पैदा करने, गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान और सुरक्षित मासिक धर्म संबंधी प्रक्रियाओं पर परामर्श प्रदान करने पर केंद्रित है। अतः, सभी चारों उद्देश्य सही हैं।
Q3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत निगरानी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: NHM के अंतर्गत निगरानी एक सुदृढ़, बहुस्तरीय प्रारूप के माध्यम से की जाती है।
कथन II: इसमें सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिषद (NPCC) की बैठकों के दौरान अनुमोदित लक्ष्यों के विरुद्ध राज्यवार प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा शामिल है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं, लेकिन कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है।
- कथन I सही है, लेकिन कथन II गलत है।
- कथन I गलत है, लेकिन कथन II सही है।
उत्तर: कथन I और कथन II दोनों सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है। — राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत निगरानी एक सुदृढ़, बहुस्तरीय प्रारूप के माध्यम से की जाती है, जिसमें सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिषद (NPCC) की बैठकों के दौरान अनुमोदित लक्ष्यों के विरुद्ध राज्यवार प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा शामिल है। इसलिए, दोनों कथन सही हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन (MHM) एक बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय है। इस कथन के आलोक में, भारत में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन (MHM) की बहुआयामी प्रकृति को समझाकर करें। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) के उद्देश्यों और कार्यान्वयन तंत्र पर प्रकाश डालें। इसमें जागरूकता सृजन, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता, सुरक्षित निपटान और परामर्श सेवाओं जैसे पहलुओं को शामिल करें। विभिन्न मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दें। NHM के तहत निगरानी तंत्र (जैसे NPCC बैठकें और साझा समीक्षा मिशन) का उल्लेख करें। अंत में, चुनौतियों और आगे की राह पर संक्षिप्त चर्चा करते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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