मासिक धर्म स्वच्छता: सरकारी पहलों से किशोरियों को मिल रहा लाभ

मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए की गईं पहल — concept mind map

मासिक धर्म स्वच्छता: सरकारी पहलों से किशोरियों को मिल रहा लाभ

मासिक धर्म स्वच्छता चुनौतियाँ एवं समाधानमासिक धर्म स्वास्थ्य संबंधी समस्याएंRTI, अन्य स्वास्थ्य जटिलताएँसामाजिक वर्जनाएँ एवं मिथककिशोरियों तक पहुँच में बाधाराष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सहायतामासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS)कार्यान्वयन एवं निगरानीजागरूकता एवं उत्पाद उपलब्धतासैनिटरी उत्पादों की पहुँचस्वास्थ्य एवं गरिमा में सुधारलैंगिक समानता लक्ष्य
मासिक धर्म स्वच्छता चुनौतियाँ एवं समाधान

✎ मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत किशोरियों में मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जो जागरूकता, किफायती उत्पादों और सुरक्षित निपटान पर…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।  |  GS Paper II — शासन: सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके डिजाइन तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
  • Prelims: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS), किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, महिला स्वास्थ्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता
  • Essay: भारत में महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियां और उनका क्रियान्वयन

त्वरित पुनरावृत्ति: मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत किशोरियों में मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जो जागरूकता, किफायती उत्पादों और सुरक्षित निपटान पर केंद्रित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यसभा में मासिक धर्म संबंधी स्वास्थ्य और स्वच्छता (Menstrual Health and Hygiene – MHH) को बढ़ावा देने के लिए की गई विभिन्न पहलों की जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (PIP) के आधार पर मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए सहायता प्रदान की जाती है। यह जानकारी मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व तथा सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती है।

पृष्ठभूमि

  • मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (MHM) भारत में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती रही है, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में।
  • मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक वर्जनाएं और गलत धारणाएं अक्सर किशोरियों और महिलाओं के लिए सुरक्षित स्वच्छता प्रथाओं तक पहुंच में बाधा डालती हैं।
  • खराब मासिक धर्म स्वच्छता प्रथाएं प्रजनन पथ के संक्रमण (Reproductive Tract Infections – RTIs) और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
  • शिक्षा की कमी और सैनिटरी उत्पादों की अनुपलब्धता या उच्च लागत भी मासिक धर्म स्वच्छता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।
  • सरकार ने इन चुनौतियों का समाधान करने और महिलाओं तथा किशोरियों के स्वास्थ्य एवं गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम और नीतियां शुरू की हैं।
  • मासिक धर्म स्वच्छता एक बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय है, जिसके लिए विभिन्न हितधारक मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता होती है।

मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) क्या है?

  • मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई एक पहल है।
  • यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित होती है और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनके वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (PIP) के प्रस्तावों के आधार पर सहायता प्रदान करती है।
  • योजना का मुख्य उद्देश्य जागरूकता पैदा करना, गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
  • यह सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान विधियों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
  • इसके अतिरिक्त, सुरक्षित मासिक धर्म संबंधी प्रक्रियाओं पर परामर्श प्रदान करना भी इस योजना का एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • मंत्रालय स्वास्थ्य सुविधाओं, सामुदायिक मंचों, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और डिजिटल प्रसार तंत्र के माध्यम से सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों का संचालन करता है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत, एक सुदृढ़, बहुस्तरीय निगरानी प्रारूप के माध्यम से योजना के कार्यान्वयन की निगरानी की जाती है।
  • स्कूली छात्राओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा समन्वित कार्रवाई के माध्यम से लागू किया जाता है ताकि स्कूलों में सुरक्षित, प्रभावी और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता उपायों तक पहुंच को बढ़ावा दिया जा सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) के लिए विभिन्न हितधारक मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत सहायता राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (PIP) के प्रस्तावों के आधार पर मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता।
मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित। यह जागरूकता, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता, सुरक्षित निपटान और परामर्श पर केंद्रित है।
सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ स्वास्थ्य सुविधाओं, सामुदायिक मंचों, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और डिजिटल माध्यमों से निरंतर जागरूकता और संवेदीकरण कार्यक्रम।
सुदृढ़ निगरानी तंत्र NHM के तहत बहुस्तरीय निगरानी, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिषद (NPCC) की बैठकों और वार्षिक साझा समीक्षा मिशन (CRM) के माध्यम से प्रगति की समीक्षा शामिल है।
स्कूली छात्राओं के लिए नीति राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा समन्वित कार्रवाई के माध्यम से स्कूलों में सुरक्षित, प्रभावी और किफायती मासिक धर्म स्वच्छता उपायों तक पहुंच को बढ़ावा देना।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी सामाजिक वर्जनाओं और मिथकों को तोड़कर महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य और गरिमा को बढ़ावा देना।
  • मासिक धर्म के दौरान स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या को कम करके शिक्षा तक पहुंच और लैंगिक समानता में सुधार करना।
  • महिलाओं और लड़कियों के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार, जिससे संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम हो।

स्वास्थ्य महत्व

  • जननांग पथ के संक्रमण (RTI) और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं को रोकने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म प्रथाओं को बढ़ावा देना।
  • गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करके स्वास्थ्य असमानताओं को कम करना।
  • किशोरियों को मासिक धर्म से संबंधित सही जानकारी और परामर्श प्रदान करके उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाना।

आर्थिक महत्व

  • स्वच्छता उत्पादों तक पहुंच और शिक्षा के माध्यम से महिलाओं की कार्यबल भागीदारी और आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि।
  • स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर होने वाले खर्च में कमी, जिससे व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ कम होता है।
  • स्वच्छता उत्पादों के स्थानीय उत्पादन और वितरण को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता और शिक्षा का अभाव

  • मासिक धर्म से जुड़ी गलत धारणाएँ, मिथक और वर्जनाएँ अभी भी समाज में व्यापक हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • कई लड़कियों और महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के सही तरीकों और उत्पादों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।

2. स्वच्छता उत्पादों तक पहुंच और सामर्थ्य

  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।
  • गरीब परिवारों के लिए सैनिटरी उत्पादों की लागत एक बाधा बनी हुई है, जिससे वे अस्वच्छ विकल्पों का उपयोग करने को मजबूर होते हैं।

3. अपशिष्ट निपटान की समस्या

  • उपयोग किए गए सैनिटरी उत्पादों के सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान के लिए उचित बुनियादी ढांचे का अभाव।
  • अनुचित निपटान से पर्यावरणीय प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।

4. बुनियादी ढांचे की कमी

  • स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर लड़कियों के लिए अलग और स्वच्छ शौचालयों और पानी की सुविधाओं का अभाव।
  • मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के लिए आवश्यक सुविधाओं की कमी से लड़कियों की स्कूल उपस्थिति प्रभावित होती है।

5. अंतर-मंत्रालयी समन्वय

  • मासिक धर्म स्वास्थ्य एक बहुआयामी विषय है, जिसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता होती है।
  • योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत साझेदारी महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जागरूकता की कमी मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाएँ और गलत जानकारी।
उत्पादों की अनुपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में सैनिटरी नैपकिन की सीमित पहुंच।
उच्च लागत गरीब परिवारों के लिए सैनिटरी उत्पादों का महंगा होना।
अपशिष्ट निपटान पर्यावरण के अनुकूल निपटान सुविधाओं का अभाव।
बुनियादी ढांचे की कमी स्कूलों में स्वच्छ शौचालयों और पानी की अनुपलब्धता।
समन्वय का अभाव विभिन्न हितधारकों के बीच प्रभावी तालमेल की आवश्यकता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)
  • मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS)

आगे की राह

  • मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियानों को मजबूत करना, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाए।
  • गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणालियों और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर मासिक धर्म के अनुकूल बुनियादी ढांचे (स्वच्छ शौचालय, पानी और निपटान सुविधाएँ) का निर्माण और रखरखाव सुनिश्चित करना।
  • मासिक धर्म अपशिष्ट के सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान के लिए प्रभावी प्रणालियों को विकसित करना और लागू करना।
  • विभिन्न मंत्रालयों (स्वास्थ्य, शिक्षा, जल शक्ति, महिला एवं बाल विकास) और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और अभिसरण को बढ़ावा देना।
  • किशोरियों और महिलाओं को मासिक धर्म स्वास्थ्य पर सही जानकारी और परामर्श प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को प्रशिक्षित करना।
  • मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं को तोड़ने और एक सहायक सामाजिक वातावरण बनाने के लिए सामुदायिक भागीदारी और पुरुषों की सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मासिक धर्म स्वच्छता · राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन · किशोरियों का स्वास्थ्य · सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल · अंतर-मंत्रालयी समन्वय · जागरूकता कार्यक्रम · स्वच्छता प्रबंधन · स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय · सतत विकास लक्ष्य · महिला सशक्तिकरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 21’: ‘स्वास्थ्य के अधिकार का एक अभिन्न अंग।’}
  • {‘अनुच्छेद 39(e)’: ‘नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना।’}
  • {‘अनुच्छेद 47’: ‘पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य।’}

अवधारणा प्रवाह

मासिक धर्म स्वच्छता का अभाव  →  स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और सामाजिक वर्जनाएँ  →  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत पहल  →  मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) का कार्यान्वयन  →  जागरूकता, उत्पादों की उपलब्धता और सुरक्षित निपटान  →  महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य और गरिमा में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) का उद्देश्य केवल सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
2. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मासिक धर्म स्वच्छता योजनाओं के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान की जाती है।
3. मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन (MHM) एक बहुआयामी और अंतर-मंत्रालयी विषय है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि मासिक धर्म स्वच्छता योजना जागरूकता पैदा करने, गुणवत्तापूर्ण और किफायती सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निपटान तथा सुरक्षित मासिक धर्म संबंधी प्रक्रियाओं पर परामर्श प्रदान करने पर केंद्रित है। कथन 2 सही है। कथन 3 सही है।

Q2. मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) किस केंद्रीय मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है?

  1. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
  2. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
  3. जल शक्ति मंत्रालय
  4. शिक्षा मंत्रालय

उत्तर: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय — मासिक धर्म स्वच्छता योजना केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किशोरियों में मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लागू की जाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन (MHM) को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में अंतर-मंत्रालयी समन्वय के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रबंधन (MHM) के महत्व और भारत में इसकी वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त परिचय।
2. **राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की भूमिका:**
* राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता।
* मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) का कार्यान्वयन: जागरूकता, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता, सुरक्षित निपटान, परामर्श।
* सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों का संचालन।
* निगरानी और मूल्यांकन तंत्र (NPCC बैठकें, CRM)।
* किशोर-केंद्रित कार्यक्रम प्लेटफॉर्म।
3. **आलोचनात्मक परीक्षण (चुनौतियाँ और सीमाएँ):**
* पहुंच और सामर्थ्य में असमानताएँ (ग्रामीण-शहरी, सामाजिक-आर्थिक)।
* सामाजिक कलंक और वर्जनाएँ।
* पर्याप्त निपटान सुविधाओं का अभाव।
* जागरूकता कार्यक्रमों की प्रभावशीलता।
* योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की क्षमताएँ।
4. **अंतर-मंत्रालयी समन्वय का महत्व:**
* स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (जागरूकता, नैपकिन)।
* शिक्षा मंत्रालय (स्कूली छात्राओं के लिए नीति, स्कूलों में सुविधाओं का प्रावधान)।
* जल शक्ति मंत्रालय (स्वच्छता, पानी की उपलब्धता)।
* महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (पोषण, समग्र महिला सशक्तिकरण)।
* पंचायती राज मंत्रालय/शहरी विकास मंत्रालय (स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढाँचा और निपटान)।
* समग्र दृष्टिकोण के लाभ: संसाधनों का इष्टतम उपयोग, व्यापक कवरेज, स्थायी समाधान।
5. **निष्कर्ष:** MHM को बढ़ावा देने में NHM की भूमिका का सारांश और भविष्य की राह, जिसमें सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए अंतर-मंत्रालयी समन्वय की निरंतर आवश्यकता पर बल दिया जाए।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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