मुंबई में बीओसीडब्ल्यू सम्मेलन 2026: मनसुख मांडविया करेंगे अध्यक्षता, जाने मुख्य विषय

डॉ. मनसुख मांडविया 11-12 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) — diagram

मुंबई में बीओसीडब्ल्यू सम्मेलन 2026: मनसुख मांडविया करेंगे अध्यक्षता, जाने मुख्य विषय

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BOCW कल्याण ढांचा

✎ राष्ट्रीय भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (BOCW) सम्मेलन का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना, प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा करना और केंद्र-राज्य समन्वय को…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
  • Prelims: भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार का विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996, BOCW कल्याण बोर्ड, श्रम संहिता, डिजिटल लेबर चौक, सामाजिक सुरक्षा, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक
  • Essay: भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का कल्याण और सामाजिक सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, प्रौद्योगिकी का उपयोग कर श्रमिक कल्याण में सुधार: एक आवश्यकता

त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (BOCW) सम्मेलन का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना, प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा करना और केंद्र-राज्य समन्वय को बढ़ाना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से 11-12 सितंबर 2026 को मुंबई में राष्ट्रीय भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (BOCW) सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इस सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सर्वोत्तम प्रथाओं और सफल उपायों को साझा करना, निर्माण श्रमिकों के हित में प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा करना और कल्याण बोर्डों के कामकाज को मजबूत करना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में निर्माण क्षेत्र कृषि के बाद रोजगार के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है, जो लाखों श्रमिकों की आजीविका का आधार है।
  • भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार का विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 (Building and Other Construction Workers (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1996) का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के रोजगार को विनियमित करना और उनकी सेवा शर्तों को निर्धारित करना है।
  • इस अधिनियम के तहत, राज्य स्तर पर BOCW कल्याण बोर्डों (BOCW Welfare Boards) का गठन किया गया है, जो निर्माण श्रमिकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित करते हैं।
  • इन कल्याण बोर्डों को निर्माण परियोजनाओं पर लगाए गए उपकर (Cess) के माध्यम से वित्त पोषित किया जाता है।
  • हाल ही में लागू किए गए नए श्रम संहिता (New Labour Codes) के साथ, निर्माण श्रमिकों के कल्याण ढांचे के विकास और कल्याण बोर्डों के कामकाज को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
  • नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में तीन प्रमुख पहलें शुरू की गई थीं: राज्य श्रम निगम कार्यालय (BOCW) डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र और ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल।
  • इन पहलों का उद्देश्य रोजगार सुविधा को सुदृढ़ करना, श्रमिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करना और उपकर संग्रह एवं निगरानी में पारदर्शिता और दक्षता में सुधार करना है।

राष्ट्रीय भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (BOCW) सम्मेलन क्या है?

  • यह सम्मेलन केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है।
  • सम्मेलन में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, BOCW कल्याण बोर्डों के अध्यक्ष और सचिव तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
  • विचार-विमर्श में वैधानिक जिम्मेदारियों, श्रमिक पंजीकरण, कल्याणकारी सेवाओं की उपलब्धता, कल्याण निधि की निगरानी और उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
  • इसका एक महत्वपूर्ण घटक राज्य BOCW कल्याण बोर्डों द्वारा अपनाई गई नवोन्मेषी पद्धतियों और सफल कार्यक्रमों को साझा करना होगा, ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जा सके।
  • सम्मेलन में नवंबर 2025 में शुरू की गई तीन प्रमुख पहलों – डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र और ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल – पर हुई प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता मार्गों, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों, श्रम सांख्यिकी और श्रम प्रणाली पर भी गहन विचार-विमर्श करेगा।
  • सम्मेलन का उद्देश्य केंद्र, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्डों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करना और कार्यान्वयन में कमियों की पहचान करना है।
  • इसका अंतिम लक्ष्य निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, कल्याण और रोजगार के अवसर अधिक प्रभावी और सुलभ तरीके से प्रदान करने के लिए प्राथमिकता वाले कार्यों को निर्धारित करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सर्वोत्तम प्रथाओं का साझाकरण राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सफल उपायों और नवाचारों को साझा करने से निर्माण श्रमिकों के कल्याण में सुधार होगा।
प्रमुख पहलों की समीक्षा डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र और ऑनलाइन बीओसीडब्ल्यू उपकर संग्रह पोर्टल जैसी पहलों की प्रगति का आकलन किया जाएगा।
कल्याण बोर्डों का सुदृढ़ीकरण बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों के कामकाज को मजबूत करने और उनकी दक्षता बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
प्रौद्योगिकी-आधारित सेवा वितरण श्रमिकों तक कल्याणकारी सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दिया जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता मार्गों, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
केंद्र-राज्य समन्वय केंद्र, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और कल्याण बोर्डों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करने का लक्ष्य है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • निर्माण क्षेत्र भारत में रोजगार के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है, जो लाखों श्रमिकों की आजीविका का आधार है।
  • श्रमिक कल्याण उपायों में सुधार से कार्यबल की उत्पादकता और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।

सामाजिक महत्व

  • निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा (Social Security) और कल्याणकारी सेवाएं प्रदान करना उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • डिजिटल पहलों से श्रमिकों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी, जिससे सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को बढ़ावा मिलेगा।

शासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय से नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा।
  • कल्याण निधि के उपयोग की निगरानी और पारदर्शिता से भ्रष्टाचार कम होगा और जवाबदेही बढ़ेगी।

नीतिगत महत्व

  • नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) के लागू होने के संदर्भ में बीओसीडब्ल्यू ढांचे के विकास का जायजा लेना महत्वपूर्ण है।
  • सम्मेलन नीति निर्माण और कार्यान्वयन में कमियों की पहचान करने तथा प्राथमिकता वाले कार्यों को निर्धारित करने में मदद करेगा।

चुनौतियाँ

1. पंजीकरण और पहचान

  • असंगठित क्षेत्र के निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण एक बड़ी चुनौती है, जिससे वे कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।
  • अस्थायी और प्रवासी प्रकृति के कारण श्रमिकों की पहचान और ट्रैकिंग मुश्किल होती है।

2. कल्याण निधि का उपयोग

  • बीओसीडब्ल्यू उपकर (Cess) संग्रह के बावजूद, कई राज्यों में कल्याण निधि का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं हो पाता है।
  • निधि के दुरुपयोग या अक्षम प्रबंधन की शिकायतें सामने आती हैं, जिससे श्रमिकों को लाभ नहीं मिल पाता।

3. सेवाओं तक पहुंच

  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिकों के लिए कल्याणकारी सेवाओं और सूचना तक पहुंच एक चुनौती है।
  • डिजिटल साक्षरता की कमी भी ऑनलाइन सेवाओं के उपयोग में बाधा डालती है।

4. अंतर-राज्यीय समन्वय

  • प्रवासी श्रमिकों के लिए विभिन्न राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाना मुश्किल होता है, क्योंकि अंतर-राज्यीय समन्वय की कमी होती है।
  • विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियम और प्रक्रियाएं जटिलता बढ़ाती हैं।

5. कौशल विकास और रोजगार

  • निर्माण श्रमिकों के लिए कौशल विकास और पुनः कौशल (Reskilling) के अवसरों की कमी है, जिससे उनकी आय क्षमता सीमित होती है।
  • रोजगार सुविधा को सुदृढ़ करने के लिए प्रभावी तंत्र का अभाव है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
असंगठित क्षेत्र के श्रमिक पंजीकरण की कमी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रहना।
कल्याण निधि का कुप्रबंधन उपकर संग्रह के बावजूद निधि का अप्रभावी उपयोग और दुरुपयोग।
सेवाओं की अपर्याप्त पहुंच ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में श्रमिकों तक कल्याणकारी सेवाओं की सीमित पहुंच।
अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिक विभिन्न राज्यों में कल्याणकारी लाभों तक पहुंचने में कठिनाई और समन्वय की कमी।
कौशल विकास की कमी श्रमिकों के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसरों का अभाव।

आगे की राह

  • निर्माण श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना, जिसमें आधार (Aadhaar) और अन्य पहचान पत्रों को एकीकृत किया जाए ताकि पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके।
  • कल्याण निधि के संग्रह और उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करना, जिसमें डिजिटल ऑडिटिंग और सार्वजनिक प्रकटीकरण शामिल हो।
  • डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और बहुभाषी हेल्पलाइन स्थापित करना ताकि श्रमिकों को ऑनलाइन सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से मिल सके।
  • अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के लिए एक पोर्टेबल कल्याणकारी ढांचा विकसित करना, जिससे वे किसी भी राज्य में अपने लाभों का उपयोग कर सकें।
  • निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करना, जिससे श्रमिकों की रोजगार क्षमता बढ़े।
  • बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों को मजबूत करना और उनके कामकाज में सुधार करना, जिसमें प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में श्रमिकों के प्रतिनिधियों को शामिल करना शामिल है।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नियमित संवाद और समन्वय के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित करना, ताकि नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक अधिनियम · असंगठित क्षेत्र के श्रमिक · सामाजिक सुरक्षा · कल्याण बोर्ड · श्रम संहिता · डिजिटल लेबर चौक · उपकर संग्रह · कौशल विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि करेगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘नीति के कुछ सिद्धांत’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम पाने का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 42’, ‘note’: ‘काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाएँ’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी’}

अवधारणा प्रवाह

निर्माण क्षेत्र में लाखों श्रमिक कार्यरत हैं।  →  इन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी सेवाओं की आवश्यकता है।  →  बीओसीडब्ल्यू अधिनियम और कल्याण बोर्ड इस उद्देश्य के लिए स्थापित किए गए हैं।  →  राष्ट्रीय सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और पहलों की समीक्षा करने का मंच प्रदान करता है।  →  इसका उद्देश्य केंद्र-राज्य समन्वय बढ़ाना और श्रमिकों के कल्याण में सुधार करना है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) सम्मेलन, 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह सम्मेलन केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याणकारी उपायों की पहुंच और प्रभावशीलता में सुधार हेतु सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना है।
3. सम्मेलन में नवंबर 2025 में शुरू की गई ‘डिजिटल लेबर चौक’ पहल की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। सम्मेलन केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। कथन 2 सही है। सम्मेलन का उद्देश्य राज्य बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों द्वारा अपनाई गई नवोन्मेषी पद्धतियों और सफल कार्यक्रमों को साझा करना है, ताकि कल्याणकारी उपायों की पहुंच और प्रभावशीलता को बेहतर बनाया जा सके। कथन 3 सही है। सम्मेलन में नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में शुरू की गई तीन प्रमुख पहलों, जिनमें ‘डिजिटल लेबर चौक’ भी शामिल है, पर हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार का विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996’ का/के मुख्य उद्देश्य है/हैं?
1. निर्माण श्रमिकों के रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन करना।
2. निर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी उपाय प्रदान करना।
3. निर्माण श्रमिकों के लिए एक कल्याण निधि का गठन करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार का विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के रोजगार और सेवा शर्तों को विनियमित करना, उनके लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी उपाय प्रदान करना तथा एक कल्याण निधि का गठन करना है। ये सभी कथन अधिनियम के मुख्य उद्देश्यों को दर्शाते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, विशेषकर निर्माण श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने में ‘भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) अधिनियम, 1996’ की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, हाल के श्रम संहिताओं और तकनीकी पहलों ने इस क्षेत्र में श्रमिकों के कल्याण को कैसे प्रभावित किया है? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत बीओसीडब्ल्यू अधिनियम, 1996 के उद्देश्यों और प्रावधानों से करें। इसकी सफलताओं और सीमाओं का विश्लेषण करें, जैसे कि पंजीकरण में चुनौतियाँ, कल्याण निधि का उपयोग और कार्यान्वयन में राज्यों के बीच असमानता। फिर, नए श्रम संहिताओं (जैसे सामाजिक सुरक्षा संहिता) के तहत किए गए परिवर्तनों और उनके संभावित प्रभावों पर चर्चा करें। ‘डिजिटल लेबर चौक’, ‘लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र’ और ‘ऑनलाइन बीओसीडब्ल्यू उपकर संग्रह पोर्टल’ जैसी तकनीकी पहलों की भूमिका और उनके माध्यम से पारदर्शिता, दक्षता और सेवा वितरण में सुधार पर प्रकाश डालें। अंत में, केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: महाराष्ट्र राज्यातील राष्ट्रीय भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) कल्याणकारी योजना अंतर्गत खालीलपैकी कोणती योजना राज्यात राबविण्यात येत नाही?

  1. अटल बीमित व्यक्ती कल्याण योजना
  2. निर्माण कामगार आवास योजना
  3. निर्माण कामगार शिक्षण योजना
  4. निर्माण कामगार जीवन सुरक्षा योजना

उत्तर: निर्माण कामगार जीवन सुरक्षा योजना — निर्माण कामगार जीवन सुरक्षा योजना ही महाराष्ट्र राज्यातील बीओसीडब्ल्यू कल्याणकारी योजनांमध्ये समाविष्ट नाही.

Mains: राष्ट्रीय भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) अधिनियम, 1996 अंतर्गत महाराष्ट्र राज्याने राबविलेल्या विविध कल्याणकारी योजनांचे मूल्यांकन करा. राज्यातील बीओसीडब्ल्यू कल्याणकारी योजनांच्या प्रभावी अंमलबजावणीसाठी आवश्यक उपाययोजना सुचवा.


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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