13 Sep यूपीएससी तैयारी: गांधीनगर में होगा विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026, जानें थीम और महत्व
✎ वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 की भारत की मेजबानी चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा देने और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता | GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- Prelims: वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF), चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy), सतत उपभोग और उत्पादन (Sustainable Consumption and Production), 10-वर्षीय कार्यक्रम रूपरेखा (10YFP), संसाधन दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन
- Essay: सतत विकास के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था का महत्व, भारत का पर्यावरण नेतृत्व और वैश्विक सहयोग
त्वरित पुनरावृत्ति: वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 की भारत की मेजबानी चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा देने और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत 15 से 18 सितंबर, 2026 के दौरान गांधीनगर, गुजरात में ‘वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026’ की मेजबानी करेगा। यह दक्षिण एशिया में पहली बार आयोजित होने वाला ऐसा फोरम है, जिसका उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और वैश्विक स्तर पर चक्रीय समाधानों को प्रदर्शित करना है।
पृष्ठभूमि
- चक्रीय अर्थव्यवस्था एक आर्थिक मॉडल है जिसका उद्देश्य संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करना, अपशिष्ट को कम करना और उत्पादों के जीवन चक्र को बढ़ाना है। इसमें मौजूदा सामग्रियों और उत्पादों का दोबारा इस्तेमाल, मरम्मत और रीसाइकिल करना शामिल है।
- पारंपरिक ‘लेना-बनाना-निपटाना’ (take-make-dispose) रैखिक अर्थव्यवस्था मॉडल के विपरीत, चक्रीय अर्थव्यवस्था संसाधनों की कमी और पर्यावरणीय गिरावट जैसी चुनौतियों का समाधान प्रदान करती है।
- भारत सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को अपनाने और एक आधुनिक चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने पर जोर दे रही है।
- WCEF 2026 का आयोजन भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), फिनिश इनोवेशन फंड सिट्रा (Sitra), फिनलैंड सरकार, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), गुजरात सरकार और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
- इस फोरम में 65 से अधिक देशों के 2,000 से अधिक हितधारक भाग लेंगे, जिनमें व्यावसायिक नेता, उद्यमी, नीति निर्माता और शोधकर्ता शामिल होंगे।
- भारत ने हाल ही में सतत् उपभोग एवं उत्पादन प्रतिरूपों पर 10-वर्षीय कार्यक्रम रूपरेखा (10YFP) बोर्ड के सह-अध्यक्ष की भूमिका संभाली है, जो टिकाऊ उपभोग और उत्पादन को बढ़ावा देने में उसकी नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है।
चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) क्या है?
- चक्रीय अर्थव्यवस्था एक ऐसा आर्थिक मॉडल है जो संसाधनों के उपयोग को कम करने, अपशिष्ट को न्यूनतम करने और उत्पादों के मूल्य को यथासंभव लंबे समय तक बनाए रखने पर केंद्रित है।
- यह ‘लेना-बनाना-निपटाना’ के रैखिक मॉडल से अलग है, जहाँ संसाधनों को निकाला जाता है, उत्पादों में बदला जाता है और फिर उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था के मुख्य सिद्धांत हैं: अपशिष्ट और प्रदूषण को डिजाइन से ही बाहर करना, उत्पादों और सामग्रियों को उपयोग में रखना, और प्राकृतिक प्रणालियों का पुनर्जनन करना।
- इसमें उत्पादों की मरम्मत, पुन: उपयोग, नवीनीकरण और रीसाइक्लिंग जैसी रणनीतियाँ शामिल हैं ताकि सामग्रियों को अर्थव्यवस्था में वापस लाया जा सके।
- इसका उद्देश्य संसाधनों की दक्षता में सुधार करना, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और आर्थिक मूल्य सृजित करना है।
- यह जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और प्रदूषण जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था नवाचार, डिजिटलीकरण और नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देती है जो टिकाऊ उत्पादन और उपभोग पैटर्न का समर्थन करती हैं।
- यह ‘ग्लोबल साउथ’ सहित विभिन्न देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है ताकि वैश्विक स्तर पर चक्रीय समाधानों को अपनाया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मेजबानी | भारत (गांधीनगर, गुजरात) 15-18 सितंबर, 2026 तक वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 की मेजबानी करेगा। |
| थीम | ‘सर्कुलर इकोनॉमी: लोगों और समृद्धि के लिए बदलाव’ (Transition for People and Prosperity)। |
| भागीदारी | 65 से अधिक देशों के 2,000 से अधिक हितधारक (बिजनेस लीडर, उद्यमी, शोधकर्ता, नीति निर्माता आदि) भाग लेंगे। |
| प्रदर्शनी | 125 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शक सर्कुलर समाधान और निवेश के लिए तैयार नवाचारों का प्रदर्शन करेंगे। |
| सह-आयोजक | केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), फिनिश इनोवेशन फंड सिट्रा, फिनलैंड सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), गुजरात सरकार और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB)। |
| सत्र | AI, रोजगार, ऊर्जा उत्पादन, वित्त, शासन, टिकाऊ उत्पादों, औद्योगिक समाधान, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और युवा नेतृत्व जैसे विषयों पर 4 मुख्य सत्र और 16 समानांतर विषय-आधारित सत्र। |
महत्व
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के लिए
- यह फोरम सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) सिद्धांतों को बढ़ावा देगा, जिसमें मौजूदा सामग्रियों और उत्पादों का दोबारा इस्तेमाल, मरम्मत और रीसाइकिल करना शामिल है, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग होगा।
- यह अपशिष्ट उत्पादन को कम करने, प्रदूषण पर नियंत्रण पाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो भारत की जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
आर्थिक और रणनीतिक महत्व
- यह आयोजन भारत को वैश्विक मंच पर पर्यावरण नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करेगा, विशेषकर ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के साथ सहयोग को बढ़ावा देगा।
- सर्कुलर फाइनेंस (Circular Finance) और निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, जिससे नए व्यावसायिक मॉडल और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- यह नवाचार, डिजिटलीकरण और नई तकनीकों को बढ़ावा देगा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होगा।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नीति निर्माण
- यह विभिन्न देशों के बीच सर्कुलर इकोनॉमी प्रथाओं और नीतियों पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगा।
- भारत को टिकाऊ उपभोग और उत्पादन प्रतिरूपों पर 10-वर्षीय कार्यक्रम रूपरेखा (10YFP) बोर्ड के सह-अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन
- सर्कुलर इकोनॉमी सिद्धांतों को अपनाने के लिए उपभोक्ताओं, उद्योगों और नीति निर्माताओं के बीच व्यापक जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता है।
- पुनर्चक्रण, मरम्मत और पुन: उपयोग की आदतों को दैनिक जीवन में शामिल करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण; सामाजिक जागरूकता
2. बुनियादी ढाँचा और प्रौद्योगिकी
- सर्कुलर इकोनॉमी के लिए आवश्यक मजबूत रीसाइक्लिंग (Recycling) बुनियादी ढाँचे, अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों और उन्नत प्रौद्योगिकियों का विकास करना।
- विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक कचरा और प्लास्टिक कचरा जैसे जटिल अपशिष्ट धाराओं के प्रबंधन के लिए तकनीकी समाधानों की कमी।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा विकास; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
3. वित्तपोषण और निवेश
- सर्कुलर इकोनॉमी परियोजनाओं और स्टार्ट-अप्स के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और निवेश जुटाना।
- पारंपरिक रैखिक अर्थव्यवस्था (Linear Economy) से सर्कुलर मॉडल में संक्रमण के लिए प्रारंभिक पूंजीगत लागत अधिक हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास; निवेश मॉडल
4. नीति और नियामक ढाँचा
- सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए एक सुसंगत और व्यापक नीतिगत तथा नियामक ढाँचा विकसित करना।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना ताकि सर्कुलर इकोनॉमी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
यूपीएससी लिंक: शासन; पर्यावरण नीतियाँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अपशिष्ट प्रबंधन | बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण उत्पन्न होने वाले ठोस, तरल और ई-कचरे का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना। |
| संसाधन की कमी | प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से भविष्य में उनकी कमी और पर्यावरणीय असंतुलन का खतरा। |
| प्रदूषण | उत्पादन और उपभोग के रैखिक मॉडल से वायु, जल और मृदा प्रदूषण में वृद्धि। |
| तकनीकी अंतराल | सर्कुलर प्रक्रियाओं जैसे उन्नत रीसाइक्लिंग, सामग्री पुनर्प्राप्ति और उत्पाद डिजाइन के लिए आवश्यक विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकियों की कमी। |
| उपभोक्ता व्यवहार | एकल-उपयोग वाले उत्पादों और ‘उपयोग करो और फेंको’ की मानसिकता को बदलना एक बड़ी चुनौती है। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग | सीमा पार अपशिष्ट व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सर्कुलर प्रथाओं को एकीकृत करने में चुनौतियाँ। |
आगे की राह
- सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर और सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाकर जन-जागरूकता बढ़ाना।
- सर्कुलर इकोनॉमी से संबंधित अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करना।
- सर्कुलर इकोनॉमी परियोजनाओं के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन, सब्सिडी और आसान ऋण उपलब्ध कराना।
- अपशिष्ट प्रबंधन, रीसाइक्लिंग और सामग्री पुनर्प्राप्ति के लिए आधुनिक बुनियादी ढाँचे का विकास करना।
- उत्पाद डिजाइन में ‘सर्कुलरिटी’ को बढ़ावा देने के लिए ‘विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व’ (Extended Producer Responsibility – EPR) जैसे तंत्रों को मजबूत करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रौद्योगिकियों को अपनाया जा सके।
- स्टार्ट-अप्स और छोटे तथा मध्यम उद्यमों (SMEs) को सर्कुलर बिजनेस मॉडल अपनाने के लिए सहायता प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
चक्रीय अर्थव्यवस्था · संसाधन दक्षता · सतत विकास · अपशिष्ट प्रबंधन · पुनर्चक्रण · पुनः उपयोग · पर्यावरण संरक्षण · नीतिगत ढाँचा · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · नवाचार · हरित वित्त · सतत उपभोग और उत्पादन
अवधारणा प्रवाह
संसाधन निष्कर्षण और उत्पादन → उपभोग और ‘उपयोग करो और फेंको’ मॉडल → अपशिष्ट उत्पादन और प्रदूषण में वृद्धि → सर्कुलर इकोनॉमी की आवश्यकता → पुन: उपयोग, मरम्मत और रीसाइक्लिंग → संसाधन दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता → आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत दक्षिण एशिया में पहली बार इस फोरम की मेजबानी कर रहा है।
2. इसका आयोजन केवल भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
3. फोरम का मुख्य उद्देश्य सर्कुलर फाइनेंस को बढ़ावा देना और सर्कुलरिटी के लिए नवाचार को प्रोत्साहन देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि भारत दक्षिण एशिया में पहली बार WCEF की मेजबानी कर रहा है। कथन 2 गलत है क्योंकि इसका आयोजन भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), फिनिश इनोवेशन फंड सिट्रा, फिनलैंड सरकार, भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), गुजरात सरकार और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। कथन 3 सही है क्योंकि फोरम का उद्देश्य सर्कुलर फाइनेंस को बढ़ावा देना और सर्कुलरिटी के लिए नवाचार को प्रोत्साहन देना है।
Q2. चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के मुख्य सिद्धांतों में शामिल हैं:
1. उत्पादों और सामग्रियों का पुनः उपयोग और मरम्मत।
2. संसाधनों को अर्थव्यवस्था में मूल्यवान इनपुट के रूप में वापस लाना।
3. ‘लेना-बनाना-निपटाना’ (take-make-dispose) मॉडल को बढ़ावा देना।
4. अपशिष्ट उत्पादन को कम करना।
निम्नलिखित में से कौन से विकल्प सही हैं?
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 1, 2 और 4
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 2 और 4 — चक्रीय अर्थव्यवस्था का उद्देश्य मौजूदा सामग्रियों और उत्पादों का दोबारा इस्तेमाल, उन्हें ठीक करके फिर से काम के लायक बनाना और रीसाइकिल करना है, ताकि उन्हें कीमती संसाधनों के तौर पर अर्थव्यवस्था में वापस लाया जा सके। यह ‘लेना-बनाना-निपटाना’ (take-make-dispose) मॉडल के विपरीत है। इसलिए, कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 गलत है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) क्या है और यह सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक हो सकती है? भारत में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: चक्रीय अर्थव्यवस्था की परिभाषा और उसके मुख्य सिद्धांतों (पुनः उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण) को स्पष्ट करें।
मुख्य भाग 1: चक्रीय अर्थव्यवस्था का सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से संबंध स्थापित करें। उदाहरण के लिए, SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन), SDG 8 (अच्छा काम और आर्थिक विकास), SDG 9 (उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढाँचा), SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) आदि से इसका जुड़ाव समझाएँ।
मुख्य भाग 2: भारत द्वारा चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करें। इसमें राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission), अपशिष्ट प्रबंधन नियम, ई-कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, विभिन्न मंत्रालयों की नीतियाँ और वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 की मेजबानी जैसे पहल शामिल हो सकते हैं।
मुख्य भाग 3: भारत में चक्रीय अर्थव्यवस्था के समक्ष आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण करें। इसमें जागरूकता की कमी, तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ, अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका, नियामक ढाँचे का क्रियान्वयन, उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव की आवश्यकता और बुनियादी ढाँचे की कमी जैसे बिंदु शामिल हो सकते हैं।
निष्कर्ष: चक्रीय अर्थव्यवस्था के महत्व को दोहराते हुए, भारत के लिए इसके संभावित लाभों और आगे की राह पर संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: गुजरात राज्य द्वारा ‘वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026’ की मेजबानी के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. यह फोरम गुजरात सरकार द्वारा आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्य के सभी जिले शामिल होंगे।
- B. फोरम का आयोजन गांधीनगर में किया जाएगा, जिसका विषय ‘सर्कुलर इकोनॉमी: लोगों और समृद्धि के लिए बदलाव’ होगा।
- C. इस फोरम का मुख्य उद्देश्य गुजरात में कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है।
- D. फोरम का आयोजन 2025 में किया जाएगा, जिसमें वैश्विक पर्यावरण संगठनों की भागीदारी होगी।
उत्तर: B. फोरम का आयोजन गांधीनगर में किया जाएगा, जिसका विषय ‘सर्कुलर इकोनॉमी: लोगों और समृद्धि के लिए बदलाव’ होगा। — गुजरात के गांधीनगर में 15 से 18 सितंबर, 2026 तक ‘वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026’ का आयोजन किया जाएगा, जिसका विषय ‘सर्कुलर इकोनॉमी: लोगों और समृद्धि के लिए बदलाव’ होगा।
Mains: गुजरात सरकार द्वारा ‘वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026’ की मेजबानी के संदर्भ में, राज्य में ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने के लिए अपनाए जाने वाले प्रमुख रणनीतिक उपायों की चर्चा कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- यूपीएससी तैयारी: गांधीनगर में होगा विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026, जानें थीम और महत्व - September 13, 2026
- UPSC Alert: India to Host Global Circular Economy Forum 2026 in Gujarat - September 13, 2026
- अमित शाह मुंबई में हिंदी दिवस 2026 एवं राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे - September 13, 2026

No Comments