यूपीएससी/पीसीएस: बिहार के मिथिला मखाना का ऑस्ट्रेलिया निर्यात, किसानों को मिला 18% ज्यादा लाभ

एपीडा ने बिहार से ऑस्ट्रेलिया तक समुद्री मार्ग से जीआई-टैग वाले मिथिला मखाना के पहली बार निर्यात की सुविधा प्रदान की — concept mind map

यूपीएससी/पीसीएस: बिहार के मिथिला मखाना का ऑस्ट्रेलिया निर्यात, किसानों को मिला 18% ज्यादा लाभ

मिथिला मखाना निर्यात मार्गमिथिला मखानाGI-टैग उत्पाद18 मीट्रिक टनएपीडानिर्यात सुविधाभारती कार्यक्रमM/s एनआईएडी ग्रीननिर्यातकM/s जित्बन सप्लाईसमुद्री मार्गऑस्ट्रेलियालॉजिस्टिक्सकिसान18% अधिक आयग्रामीण अर्थव्यवस्था
मिथिला मखाना निर्यात मार्ग

✎ एपीडा द्वारा GI-टैग वाले मिथिला मखाना का ऑस्ट्रेलिया को पहला समुद्री निर्यात, कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो GI टैग और मूल्य श्रृंखला विकास के महत्व को रेखांकित…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (कृषि भूगोल)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (GI टैग)
  • Prelims: मिथिला मखाना, GI टैग, एपीडा, कृषि निर्यात, किसान आय, BIADA औद्योगिक क्षेत्र, HS कोड
  • Essay: भारत में कृषि निर्यात को बढ़ावा देने में GI टैग उत्पादों की भूमिका, किसानों की आय दोगुनी करने में मूल्य संवर्धन और वैश्विक बाजार पहुंच का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: एपीडा द्वारा GI-टैग वाले मिथिला मखाना का ऑस्ट्रेलिया को पहला समुद्री निर्यात, कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो GI टैग और मूल्य श्रृंखला विकास के महत्व को रेखांकित करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने बिहार के दरभंगा जिले से GI-टैग वाले मिथिला मखाना की पहली वाणिज्यिक समुद्री खेप को ऑस्ट्रेलिया के लिए निर्यात करने में सुविधा प्रदान की है। 18 मीट्रिक टन की इस खेप से किसानों को प्रचलित बाजार दरों से लगभग 18 प्रतिशत अधिक लाभ प्राप्त हुआ है, जो निर्यात-उन्मुख मूल्य श्रृंखलाओं के महत्व को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत के मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है, जो इसे राज्य का एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पाद बनाती है।
  • मिथिला मखाना को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त हुआ, जो इसकी विशिष्टता और गुणवत्ता को प्रमाणित करता है।
  • भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत एपीडा (APEDA) कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली शीर्ष संस्था है।
  • वित्त विधेयक, 2025 के तहत जुलाई 2025 से मखाना के लिए एक अलग हार्मोनाइज्ड सिस्टम (HS) कोड प्रभावी हुआ है, जिससे इसके व्यापार में सुगमता आएगी।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, भारत ने अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका सहित 20 से अधिक देशों को 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और मूल्यवर्धित मखाना उत्पादों का निर्यात किया है।
  • यह निर्यात M/s एनआईएडी ग्रीन द्वारा किया गया, जिसमें M/s जित्बन सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड ने लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान की, जो एपीडा के भारती (BHARTI) कार्यक्रम के तहत समर्थित एक स्टार्टअप है।

भौगोलिक संकेत (GI) टैग और एपीडा (APEDA)

  • भौगोलिक संकेत (GI) टैग उन उत्पादों पर उपयोग किया जाने वाला एक संकेत है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और उनमें उस मूल के कारण गुण या प्रतिष्ठा होती है।
  • यह बौद्धिक संपदा अधिकारों का एक रूप है जो उत्पाद की विशिष्टता और गुणवत्ता को सुनिश्चित करता है, जिससे नकली उत्पादों से बचाव होता है।
  • भारत में GI टैग ‘वस्तुओं का भौगोलिक सूचक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ द्वारा प्रशासित होते हैं।
  • कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संगठन है, जिसकी स्थापना दिसंबर 1985 में हुई थी।
  • एपीडा का मुख्य कार्य अनुसूचित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और उनका विकास करना है, जिसमें फल, सब्जियां, मांस उत्पाद, डेयरी उत्पाद, अनाज, शहद, गुड़, चीनी उत्पाद, मादक और गैर-मादक पेय पदार्थ शामिल हैं।
  • यह निर्यातकों को क्षमता निर्माण, बाजार विकास पहलों, निर्यात सुविधा और हितधारक सहभागिता के माध्यम से सहायता प्रदान करता है।
  • एपीडा राज्य सरकारों, निर्यातकों, स्टार्टअप्स, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और किसान उत्पादक कंपनियों (FPOCs) के साथ मिलकर काम करता है ताकि भारत के कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके।
  • मिथिला मखाना के मामले में, GI टैग ने इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और निर्यात क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पहली समुद्री खेप मिथिला मखाना के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पहुंच का विस्तार और निर्यात क्षमता का प्रदर्शन।
GI-टैग (भौगोलिक संकेतक) उत्पाद मिथिला मखाना की विशिष्ट पहचान, गुणवत्ता और मूल स्थान को प्रमाणित करता है, जिससे वैश्विक बाजार में इसकी मांग बढ़ती है।
किसानों की आय में वृद्धि निर्यात-आधारित बाजार पहुंच से किसानों को प्रचलित दरों से लगभग 18 प्रतिशत अधिक लाभ मिला।
एपीडा की भूमिका कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने निर्यात प्रक्रिया को सुगम बनाया, क्षमता निर्माण और बाजार विकास में सहायता की।
बिहार का योगदान भारत के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है, जो इस क्षेत्र के कृषि निर्यात में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • मिथिला मखाना के निर्यात से किसानों की आय में वृद्धि हुई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिला है।
  • यह पहल बिहार के कृषि उत्पादों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खोलती है, जिससे निर्यात-आधारित विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • GI-टैग उत्पादों के निर्यात से भारत की विशिष्ट कृषि विरासत को वैश्विक पहचान मिलती है और मूल्यवर्धन होता है।

सामाजिक महत्व

  • मखाना प्रसंस्करण से जुड़े फोरी समुदाय जैसे पारंपरिक कौशल वाले समुदायों को निरंतर समर्थन मिलने से उनकी आजीविका सुरक्षित होती है।
  • निर्यात के अवसर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा देते हैं, जिससे पलायन कम हो सकता है।

रणनीतिक महत्व

  • यह भारत की कृषि निर्यात नीति को मजबूत करता है, जो ‘फार्म टू फोर्क’ (खेत से थाली तक) अवधारणा के तहत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारतीय उत्पादों की उपस्थिति बढ़ाता है।
  • एपीडा जैसी संस्थाओं के माध्यम से सरकार का समर्थन कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण

  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों की सख्त गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा करना एक चुनौती है।
  • उत्पाद की एकरूपता और मानकीकरण सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि निर्यात निरंतर बना रहे।

2. लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा

  • बिहार जैसे अंतर्देशीय राज्य से समुद्री मार्ग से निर्यात के लिए कुशल और लागत प्रभावी लॉजिस्टिक्स की आवश्यकता होती है।
  • भंडारण, प्रसंस्करण और परिवहन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी निर्यात को बाधित कर सकती है।

3. बाजार पहुंच और प्रतिस्पर्धा

  • नए बाजारों में प्रवेश करना और स्थापित प्रतिस्पर्धियों के बीच अपनी जगह बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और शुल्कों की जानकारी रखना तथा उनका पालन करना आवश्यक है।

4. जलवायु परिवर्तन और उत्पादन

  • जलवायु परिवर्तन के कारण मखाना उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आपूर्ति में अनिश्चितता आ सकती है।
  • किसानों को जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक निर्यात बाजारों की सख्त गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करना।
परिवहन लागत और समय बिहार से बंदरगाहों तक और फिर ऑस्ट्रेलिया तक समुद्री मार्ग से परिवहन की लागत और लगने वाला समय।
बाजार की मांग में उतार-चढ़ाव अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में मखाना की मांग में संभावित बदलाव और उसका उत्पादन पर प्रभाव।
प्रसंस्करण और पैकेजिंग अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कुशल प्रसंस्करण और आकर्षक, टिकाऊ पैकेजिंग सुनिश्चित करना।
वित्तीय सहायता और बीमा छोटे किसानों और निर्यातकों के लिए वित्तीय सहायता और निर्यात जोखिम बीमा की उपलब्धता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • भारती (BHARTI – Bharat’s Agritech, Resilience, Advancement and Incubation Hub for Export Innovation)

आगे की राह

  • गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और निर्यातकों को प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • निर्यात के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं सहित बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।
  • नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहचान करना और उनमें प्रवेश के लिए बाजार विकास पहलों को बढ़ावा देना।
  • GI-टैग वाले उत्पादों के लिए ब्रांडिंग और मार्केटिंग रणनीतियों को विकसित करना ताकि उनकी वैश्विक पहचान बढ़ाई जा सके।
  • मखाना मूल्य श्रृंखला में शामिल सभी हितधारकों, विशेषकर फोरी समुदाय को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मिथिला मखाना · भौगोलिक संकेत (GI) टैग · कृषि निर्यात · एपीडा (APEDA) · किसान आय दोगुनी करना · मूल्य संवर्धन · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार · लॉजिस्टिक्स · निर्यात संवर्धन · कृषि उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 301’: ‘व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता’}
  • {‘अनुच्छेद 302’: ‘संसद द्वारा व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

GI-टैग मिथिला मखाना को विशिष्ट पहचान मिली।  →  एपीडा ने बिहार से ऑस्ट्रेलिया तक समुद्री निर्यात सुगम बनाया।  →  किसानों को प्रचलित दरों से 18% अधिक आय प्राप्त हुई।  →  मिथिला मखाना की अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपस्थिति मजबूत हुई।  →  बिहार के कृषि निर्यात को बढ़ावा मिला और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।  →  अन्य GI-टैग उत्पादों के निर्यात के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भौगोलिक संकेत (GI) टैग किसी उत्पाद को दिया जाता है जो एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न होता है और उसमें उस क्षेत्र की विशिष्ट गुणवत्ता या प्रतिष्ठा होती है।
2. मिथिला मखाना को भारत में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा GI टैग प्रदान किया गया है।
3. भारत के मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। GI टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी उत्पत्ति एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में होती है और उनमें उस क्षेत्र की विशेष गुणवत्ता या प्रतिष्ठा होती है। कथन 2 गलत है। GI टैग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री (Geographical Indications Registry) द्वारा प्रदान किया जाता है, न कि APEDA द्वारा। APEDA कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देता है। कथन 3 सही है। बिहार भारत के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत योगदान देता है।

Q2. अभिकथन (A): कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) भारत से कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कारण (R): APEDA निर्यातकों को क्षमता निर्माण, बाजार विकास और लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान करता है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि APEDA भारत से कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार शीर्ष निकाय है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि APEDA वास्तव में क्षमता निर्माण, बाजार विकास पहल और निर्यात सुविधा जैसी विभिन्न सेवाएं प्रदान करके निर्यातकों का समर्थन करता है, जिससे कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में भौगोलिक संकेत (GI) टैग की भूमिका का परीक्षण कीजिए। मिथिला मखाना के हालिया निर्यात के संदर्भ में, किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में ऐसी पहलों के महत्व पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** भौगोलिक संकेत (GI) टैग और कृषि निर्यात के बीच संबंध का संक्षिप्त परिचय। मिथिला मखाना के हालिया निर्यात का उल्लेख।
2. **GI टैग की भूमिका:**
* उत्पाद की विशिष्टता और गुणवत्ता का प्रमाणीकरण।
* अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ब्रांड पहचान और प्रीमियम मूल्य निर्धारण।
* नकली उत्पादों से सुरक्षा।
* निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच को आसान बनाना।
* स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण।
3. **मिथिला मखाना निर्यात का संदर्भ:**
* APEDA की भूमिका और सुविधा।
* किसानों को 18% अधिक लाभ।
* अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति और सतत निर्यात अवसरों का सृजन।
* लॉजिस्टिक्स और मूल्य श्रृंखला में सुधार।
4. **किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्व:**
* प्रत्यक्ष बाजार पहुंच से बिचौलियों की भूमिका में कमी।
* निर्यात-उन्मुख मूल्य श्रृंखलाओं का विकास।
* स्थानीय रोजगार सृजन (प्रसंस्करण, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स)।
* कृषि विविधीकरण और फसल पैटर्न में बदलाव को प्रोत्साहन।
* ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और निवेश को आकर्षित करना।
* ‘फोड़ी समुदाय’ जैसे पारंपरिक कौशल वाले समुदायों को सहायता।
* सरकार की ‘किसान आय दोगुनी करने’ के लक्ष्य में योगदान।
5. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** गुणवत्ता मानकों का रखरखाव, लॉजिस्टिक्स में सुधार, क्षमता निर्माण, बाजार अनुसंधान और विविधीकरण।
6. **निष्कर्ष:** GI टैग और निर्यात संवर्धन पहलों के माध्यम से कृषि क्षेत्र के समग्र विकास और ग्रामीण समृद्धि की संभावनाओं पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment