राजनाथ सिंह का बड़ा बयान: भारत किसी की ज़मीन कब्ज़ा नहीं करेगा, लेकिन सुरक्षा पर होगा कठोर

राजनाथ सिंह का बड़ा बयान: भारत किसी की ज़मीन कब्ज़ा नहीं करेगा, लेकिन सुरक्षा पर होगा कठोर

राजनाथ सिंह का बड़ा बयान: भारत किसी की ज़मीन कब्ज़ा नहीं करेगा, लेकिन सुरक्षा पर होगा कठोर

भारत रक्षा नीतिरणनीतिक स्वायत्ततासुरक्षा हेतुकब्जे से इनकारआत्मनिर्भरताघरेलू उत्पादनआयात में कमीरक्षा निर्यात2025-26 में38,424 करोड़ रुपयेआतंकवाद नीतिजीरो टॉलरेंसकड़ा रुखवैश्विक भूमिकाग्लोबल साउथवकालत
भारत रक्षा नीति

✎ भारत अपनी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता किए बिना वैश्विक शांति और समावेशी विकास का समर्थक है, जबकि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के माध्यम से एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध, शासन व्यवस्था  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था
  • Prelims: राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता, आतंकवाद, रक्षा निर्यात, आत्मनिर्भर भारत, ग्लोबल साउथ, वसुधैव कुटुंबकम, वैक्सीन मैत्री
  • Essay: भारत का वैश्विक उत्थान और उसकी चुनौतियाँ, राष्ट्रीय सुरक्षा: आंतरिक एवं बाह्य आयाम

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत अपनी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता किए बिना वैश्विक शांति और समावेशी विकास का समर्थक है, जबकि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के माध्यम से एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में एक रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांतों और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत शांति में विश्वास रखता है और किसी भी देश की भूमि पर कब्जा नहीं करना चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख और रक्षा निर्यात में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर भी प्रकाश डाला।

पृष्ठभूमि

  • भारत की विदेश नीति हमेशा से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और गुटनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर आधारित रही है।
  • हाल के वर्षों में, भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका का विस्तार करने पर जोर दिया है।
  • आतंकवाद भारत के लिए एक गंभीर और निरंतर चुनौती रहा है, जिसके कारण भारत ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है।
  • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) भारत सरकार की एक प्रमुख प्राथमिकता है, जिसका उद्देश्य रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
  • भारत ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के हितों का एक मुखर समर्थक रहा है और विभिन्न वैश्विक मंचों पर उनकी आवाज उठाता रहा है।
  • ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का सिद्धांत, जिसका अर्थ है ‘पूरी दुनिया एक परिवार है’, भारतीय सभ्यता का एक मूल विचार है और यह भारत की विदेश नीति को भी प्रभावित करता है।

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक भूमिका

  • रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का अर्थ है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र विदेश नीति और सुरक्षा निर्णय लेने में सक्षम है, बिना किसी बाहरी दबाव या गठबंधन के।
  • भारत शांति और स्थिरता का समर्थक है, लेकिन इसे कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए; भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे का दृढ़ता से जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले या उसका समर्थन करने वाले देशों के साथ भारत किसी भी संवाद से इनकार करता है, यह स्पष्ट करते हुए कि आतंकवाद किसी भी देश के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।
  • राष्ट्रीय एकता को राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अनिवार्य आधार माना जाता है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को धर्म, जाति या क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • भारत का उदय एक सभ्यतागत शक्ति के रूप में हो रहा है, जो टकराव के बजाय समावेशी विकास और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर आधारित है।
  • भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एक विश्वसनीय भागीदार और ‘विश्व बंधु’ के रूप में उभरा है, जैसा कि ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल और विकासशील देशों को सहायता प्रदान करने से स्पष्ट होता है।
  • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के माध्यम से भारत एक प्रमुख रक्षा आयातक से वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसका रक्षा निर्यात 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
शांति और रणनीतिक स्वायत्तता भारत किसी भी देश की भूमि पर कब्जा नहीं करना चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों के साथ संवाद की कोई गुंजाइश नहीं है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है।
राष्ट्रीय एकता का महत्व राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सशस्त्र बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है, जो राष्ट्रीय एकता पर आधारित है।
सभ्यतागत शक्ति के रूप में भारत भारत एक समावेशी विकास पर आधारित सभ्यतागत शक्ति के रूप में उभर रहा है, जो वैश्विक शांति और सहयोग को बढ़ावा देता है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत रक्षा आयातक से एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता बन रहा है, जिससे देश की सुरक्षा मजबूत हो रही है और निर्यात बढ़ रहा है।

महत्व

सामरिक महत्व

  • भारत की ‘पहले पड़ोस’ (Neighbourhood First) नीति और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के साथ सामंजस्य स्थापित करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
  • वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों के हितों की वकालत करने में।
  • रक्षा निर्यात में वृद्धि से भारत की भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होती है और यह एक महत्वपूर्ण रक्षा भागीदार के रूप में उभरता है।

आर्थिक महत्व

  • रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत अभियान) से घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
  • रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि (2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये) विदेशी मुद्रा अर्जित करने और अर्थव्यवस्था को गति देने में सहायक है।
  • तकनीकी नवाचार और अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में प्रगति होती है।

सामाजिक महत्व

  • राष्ट्रीय एकता पर जोर देने से आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है और सामाजिक सद्भाव बढ़ता है।
  • नागरिकों में राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है, जो देश की अखंडता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणाएं वैश्विक सहयोग और मानवीय सहायता को बढ़ावा देती हैं, जैसा कि ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल में देखा गया।

चुनौतियाँ

1. आतंकवाद का मुकाबला

  • पड़ोसी देशों द्वारा आतंकवाद को समर्थन देना भारत की सुरक्षा के लिए एक निरंतर चुनौती है।
  • आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण और उनकी गतिविधियों को रोकना एक जटिल कार्य है, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।

2. भू-राजनीतिक अस्थिरता

  • क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और सुरक्षा हितों को प्रभावित कर सकती हैं।
  • प्रमुख शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा और संघर्ष भारत के लिए संतुलन बनाने की चुनौती पेश करते हैं।

3. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

  • उच्च-स्तरीय रक्षा प्रौद्योगिकियों (जैसे पांचवीं और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान) के पूर्ण स्वदेशीकरण में अभी भी महत्वपूर्ण निवेश और समय की आवश्यकता है।
  • गुणवत्ता नियंत्रण, लागत-प्रभावशीलता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहना एक चुनौती है।

4. राष्ट्रीय एकता बनाए रखना

  • धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजनकारी प्रवृत्तियाँ राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।
  • आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सामाजिक सद्भाव और नागरिक भागीदारी आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सीमा पार आतंकवाद पड़ोसी देशों से मिलने वाला समर्थन भारत की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए खतरा।
रणनीतिक स्वायत्तता वैश्विक शक्तियों के दबाव और भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखना।
रक्षा विनिर्माण में उच्च प्रौद्योगिकी विमान और ड्रोन इंजन जैसी जटिल प्रौद्योगिकियों के पूर्ण स्वदेशीकरण में चुनौतियाँ।
राष्ट्रीय एकता पर दबाव विभिन्न पहचानों के आधार पर भेदभाव और विभाजनकारी प्रवृत्तियाँ।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला रक्षा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण घटकों और कच्चे माल पर निर्भरता।

आगे की राह

  • आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत और बहुआयामी रणनीति अपनाना, जिसमें कूटनीतिक दबाव, खुफिया जानकारी साझा करना और सुरक्षा सहयोग शामिल हो।
  • रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना, जिससे अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का स्वदेशी विकास हो सके।
  • राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाना और नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
  • वैश्विक मंचों पर ग्लोबल साउथ के हितों का प्रतिनिधित्व जारी रखना और विकासशील देशों के साथ साझेदारी मजबूत करना।
  • रक्षा निर्यात को और बढ़ाने के लिए गुणवत्ता, लागत-प्रतिस्पर्धा और समय पर आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित करना।
  • साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष सुरक्षा जैसे नए खतरों का सामना करने के लिए क्षमताओं का विकास करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारत की विदेश नीति · रणनीतिक स्वायत्तता · राष्ट्रीय सुरक्षा · आतंकवाद · आत्मनिर्भर भारत · रक्षा निर्यात · वसुधैव कुटुंबकम · ग्लोबल साउथ · शांति और स्थिरता · राष्ट्रीय एकता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 355’, ‘note’: ‘बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्यों की रक्षा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में रक्षा संबंधी विषय’}

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा  →  रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा की प्रतिबद्धता  →  रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर जोर  →  रक्षा निर्यात में वृद्धि  →  वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में उदय  →  वैश्विक स्थिरता और समावेशी विकास में योगदान

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के तहत 100 से अधिक देशों को कोविड-19 वैक्सीन की 30 करोड़ से अधिक खुराकें प्रदान की हैं।
2. भारत का रक्षा निर्यात 2013-14 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये हो गया है।
3. भारत ने 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल भारत की सॉफ्ट पावर और ग्लोबल साउथ के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कथन 2 सही है। रक्षा निर्यात में यह वृद्धि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। कथन 3 भी सही है। यह भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता और निर्यात लक्ष्यों की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

Q2. अभिकथन (A): भारत शांति में विश्वास रखता है और किसी भी देश की भूमि पर कब्जा नहीं करना चाहता है।
कारण (R): भारत एक सभ्यतागत शक्ति के रूप में समावेशी विकास और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर आधारित है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि भारत की विदेश नीति हमेशा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर केंद्रित रही है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि भारत की सभ्यतागत पहचान और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (दुनिया एक परिवार है) का सिद्धांत उसकी शांतिपूर्ण और समावेशी वैश्विक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि भारत का शांति में विश्वास उसके सभ्यतागत मूल्यों से उपजा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की विदेश नीति में ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में आतंकवाद के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत की विदेश नीति के मूल सिद्धांतों का संक्षिप्त उल्लेख, जिसमें शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और गुटनिरपेक्षता की विरासत शामिल है।
2. रणनीतिक स्वायत्तता का महत्व:
– परिभाषा: अपनी राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता, बाहरी दबावों से मुक्त।
– ऐतिहासिक संदर्भ: गुटनिरपेक्ष आंदोलन से वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था तक।
– समकालीन प्रासंगिकता: बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत के हितों की रक्षा (जैसे रूस-यूक्रेन संघर्ष पर रुख, विभिन्न देशों से रक्षा खरीद)।
– आर्थिक और तकनीकी आयाम: आत्मनिर्भरता और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तक पहुंच।
– उदाहरण: ‘वैक्सीन मैत्री’, ग्लोबल साउथ का नेतृत्व, विभिन्न वैश्विक मंचों पर स्वतंत्र स्थिति।
3. राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद पर दृष्टिकोण:
– आतंकवाद को ‘राज्य नीति के हथियार’ के रूप में अस्वीकृति।
– आतंकवाद के खिलाफ ‘सभी आवश्यक कदम’ उठाने का अधिकार।
– संवाद की कोई गुंजाइश नहीं: आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों के साथ बातचीत से इनकार।
– अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: आतंकवाद के वित्तपोषण और पनाहगाहों के खिलाफ वैश्विक प्रयासों का आह्वान।
– आंतरिक सुरक्षा आयाम: राष्ट्रीय एकता और नागरिक कर्तव्य पर जोर।
4. निष्कर्ष: भारत की विदेश नीति के समग्र लक्ष्य के रूप में वैश्विक स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देते हुए अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा करना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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