29 Jul राज्यसभा ने पारित किया वंदे मातरम अपमान को अपराध बनाने वाला विधेयक
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: महत्त्वपूर्ण प्रावधान, संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय। | GS Paper IV — लोक प्रशासन में नैतिकता: शासन व्यवस्था में ईमानदारी, लोक सेवा की अवधारणा, शासन व्यवस्था और ईमानदारी का दार्शनिक आधार।
- Prelims: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971, वंदे मातरम, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय ध्वज, संविधान, आपराधिक अपराध, संसद, राज्यसभा
- Essay: राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन, कानून का शासन और नागरिक के कर्तव्य
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 का विस्तार करता है, जिसमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान भी एक आपराधिक अपराध बन जाएगा, जिसके लिए तीन साल तक के कारावास का प्रावधान है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राज्यसभा ने हाल ही में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान को एक आपराधिक अपराध बनाना है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) के दायरे का विस्तार करता है, जिसमें राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के प्रति अनादर या अपमान को भी आपराधिक अपराध बनाया गया है।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971, भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान को रोकने के लिए बनाया गया था।
- यह अधिनियम राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान को दंडनीय अपराध बनाता है।
- प्रस्तावित संशोधन विधेयक, 2026, इस अधिनियम के दायरे में ‘वंदे मातरम’ को भी शामिल करता है।
- विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या उसके दौरान अशांति पैदा करना भी आपराधिक बनाना है।
- इस विधेयक में राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर या अपमान के लिए तीन साल तक के कारावास का प्रावधान है।
- विपक्ष ने विधेयक पर चर्चा के दौरान विरोध प्रदर्शन किया और सदन से बहिर्गमन किया, जिसमें NEET पेपर लीक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस बल प्रयोग पर गृह मंत्री से जवाब की मांग की गई थी।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 क्या है?
- राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971, भारत की संसद द्वारा अधिनियमित एक कानून है।
- इसका मुख्य उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान को रोकना और उन्हें सम्मान प्रदान करना है।
- यह अधिनियम राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान को दंडनीय अपराध घोषित करता है।
- अधिनियम के तहत, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज को जलाता है, विकृत करता है, विरूपित करता है या किसी भी तरह से उसका अनादर करता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है।
- इसी प्रकार, राष्ट्रगान के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या उसके प्रति अनादर प्रदर्शित करना भी इस अधिनियम के तहत अपराध है।
- प्रस्तावित संशोधन विधेयक, 2026, इस अधिनियम में ‘वंदे मातरम’ को भी शामिल कर इसके दायरे का विस्तार करता है।
- इस अधिनियम का उल्लंघन करने पर कारावास और/या जुर्माने का प्रावधान है।
- यह अधिनियम राष्ट्रीय पहचान और एकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान आपराधिक कृत्य | राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना और राष्ट्रवाद की भावना को सुदृढ़ करना। |
| राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 | राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के दायरे का विस्तार, जिसमें राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालना या अशांति पैदा करना शामिल है। |
| तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान | राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर या अपमान के लिए कठोर दंड का प्रावधान, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान शामिल हैं। |
| राज्यसभा द्वारा पारित | कानून बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम, जो राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान को वैधानिक रूप से अनिवार्य करेगा। |
महत्व
राष्ट्रीय एकता और अखंडता
- यह विधेयक राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान को बढ़ावा देकर देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने का प्रयास करता है।
- राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक रहा है और इसका सम्मान राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा है।
कानूनी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण
- यह राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 को अद्यतन करता है, जिसमें राष्ट्रीय गीत को भी शामिल किया गया है, जिससे राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा का कानूनी ढाँचा मजबूत होता है।
- अपमान या अनादर के कृत्यों के लिए स्पष्ट दंड का प्रावधान ऐसे कृत्यों को रोकने में मदद करेगा।
नागरिक कर्तव्य और राष्ट्रवाद
- यह नागरिकों को राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपने कर्तव्यों और सम्मान की भावना को याद दिलाता है।
- यह राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देता है और उन कृत्यों को हतोत्साहित करता है जो राष्ट्रीय पहचान को कमजोर कर सकते हैं।
चुनौतियाँ
1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव
- कुछ आलोचकों का तर्क है कि यह विधेयक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of speech) पर अंकुश लगा सकता है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत एक मौलिक अधिकार है।
- यह निर्धारित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि ‘अपमान’ या ‘अनादर’ की परिभाषा कहाँ समाप्त होती है और वैध असहमति या आलोचना कहाँ से शुरू होती है।
यूपीएससी लिंक: संविधान – मौलिक अधिकार
2. कानून का दुरुपयोग
- इस बात की चिंता है कि इस कानून का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों या असंतोष की आवाज़ों को दबाने के लिए किया जा सकता है।
- ‘अशांति पैदा करने’ या ‘बाधा डालने’ जैसे शब्दों की अस्पष्टता व्याख्यात्मक चुनौतियाँ पैदा कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन – पारदर्शिता और जवाबदेही
3. कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- यह सुनिश्चित करना कि कानून का कार्यान्वयन निष्पक्ष और न्यायसंगत हो, एक चुनौती हो सकती है, विशेष रूप से विभिन्न संदर्भों में ‘अपमान’ की व्यक्तिपरक प्रकृति को देखते हुए।
- पुलिस और न्यायिक प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: न्यायपालिका – न्यायिक प्रक्रिया
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता | यह विधेयक मौलिक अधिकार अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित कर सकता है। |
| कानून का दुरुपयोग | अस्पष्ट परिभाषाओं के कारण राजनीतिक असंतोष को दबाने के लिए कानून का दुरुपयोग होने की संभावना। |
| ‘अपमान’ की परिभाषा | यह निर्धारित करना कठिन है कि ‘अपमान’ कहाँ शुरू होता है और वैध आलोचना कहाँ समाप्त होती है। |
| असंतोष का दमन | यह विधेयक असहमति की आवाज़ों को आपराधिक बनाने का एक उपकरण बन सकता है। |
आगे की राह
- कानून में ‘अपमान’ और ‘अनादर’ की स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ परिभाषाएँ शामिल की जानी चाहिए ताकि अस्पष्टता को कम किया जा सके।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के बीच संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए।
- कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश और जाँच-पड़ताल तंत्र स्थापित किए जाने चाहिए।
- नागरिकों को राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व और उनके सम्मान के बारे में शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
- न्यायिक समीक्षा (judicial review) के माध्यम से कानून की संवैधानिकता और उसके कार्यान्वयन की निगरानी की जानी चाहिए।
- यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देना हो, न कि असंतोष को दबाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 · वंदे मातरम · राष्ट्रीय प्रतीक · मौलिक कर्तव्य · संवैधानिक नैतिकता · अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता · संसद की विधायी शक्ति · न्यायिक समीक्षा · संघवाद · राष्ट्रीय एकता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(ए)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51ए(ए)’, ‘note’: ‘संविधान का पालन और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान’}
अवधारणा प्रवाह
राज्यसभा में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित। → विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान को आपराधिक कृत्य बनाता है। → राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 का दायरा विस्तृत होता है। → राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर पर तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान। → राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देने का लक्ष्य। → अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के दुरुपयोग पर बहस।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अधिनियम राष्ट्रीय ध्वज और भारत के संविधान के अपमान को दंडनीय अपराध बनाता है।
2. हाल ही में पारित विधेयक इस अधिनियम के दायरे में ‘वंदे मातरम’ के अपमान को भी शामिल करता है।
3. इस अधिनियम के तहत अपराध के लिए अधिकतम तीन वर्ष के कारावास का प्रावधान है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान को दंडनीय बनाता है। कथन 2 सही है। हाल ही में पारित विधेयक ‘वंदे मातरम’ के अपमान को भी इसके दायरे में लाता है। कथन 3 सही है। विधेयक में राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर के लिए अधिकतम तीन वर्ष के कारावास का प्रावधान है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- राष्ट्रीय गान: जन गण मन
- राष्ट्रीय गीत: वंदे मातरम
- राष्ट्रीय प्रतीक: अशोक चक्र
- राष्ट्रीय पशु: बाघ
उत्तर: राष्ट्रीय प्रतीक: अशोक चक्र — राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चक्र नहीं, बल्कि अशोक की लाट से लिया गया सारनाथ का सिंह स्तंभ है। अशोक चक्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के केंद्र में स्थित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रावधानों की आलोचनात्मक जाँच कीजिए, विशेष रूप से ‘वंदे मातरम’ के अपमान को आपराधिक कृत्य बनाने के संदर्भ में। क्या यह विधेयक संवैधानिक नैतिकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के अनुरूप है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 और इसके मुख्य प्रावधानों का संक्षिप्त परिचय, जिसमें ‘वंदे मातरम’ को शामिल करना शामिल है।
2. विधेयक के पक्ष में तर्क: राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का महत्व, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना, देशद्रोह और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता।
3. विधेयक के विपक्ष में तर्क/आलोचना: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(ए)) पर संभावित प्रभाव, ‘अपमान’ की अस्पष्ट परिभाषा, असहमति को दबाने की संभावना, संवैधानिक नैतिकता के सिद्धांतों से टकराव।
4. संवैधानिक नैतिकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव: सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों (जैसे बीजो इमैनुअल बनाम केरल राज्य, 1986) का उल्लेख करते हुए विश्लेषण कि क्या यह विधेयक इन सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
5. निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करना, जिसमें राष्ट्रीय सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया जाए।
स्रोत: Hindustan Times
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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