वित्तीय समावेशन: पीएमजेडीवाई से 58.63 करोड़ खाते, ₹3.08 लाख करोड़ जमा

वित्तीय समावेशन: पीएमजेडीवाई से 58.63 करोड़ खाते, ₹3.08 लाख करोड़ जमा — प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत खातों और जमा राशि में वृद्धि

वित्तीय समावेशन: पीएमजेडीवाई से 58.63 करोड़ खाते, ₹3.08 लाख करोड़ जमा

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना
  • Prelims: वित्तीय समावेशन, प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), अटल पेंशन योजना (APY), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY), स्टैंड-अप इंडिया योजना (SUPI), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), डिजिटल भुगतान, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ
  • Essay: वित्तीय समावेशन: समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तिकरण का आधार, भारत में आर्थिक असमानता को कम करने में सरकारी योजनाओं की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: वित्तीय समावेशन का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को सस्ती और सुलभ वित्तीय सेवाएँ प्रदान कर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है, जिसमें प्रधानमंत्री जन धन योजना एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार के वित्तीय समावेशन मिशन ने बैंकिंग, सामाजिक सुरक्षा और ऋण तक पहुँच के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत किया है। प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत 58.63 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जिनमें ₹3.08 लाख करोड़ से अधिक की जमा राशि दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), अटल पेंशन योजना (APY) और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जो समाज के हाशिए पर पड़े और वंचित वर्गों को वित्तीय सेवाओं तक पहुँच प्रदान करने में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) एक महत्वपूर्ण नीतिगत उद्देश्य रहा है, जिसका लक्ष्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर वंचितों और निम्न-आय वर्ग के लोगों को सस्ती और सुलभ वित्तीय सेवाएँ प्रदान करना है।
  • अगस्त 2014 में शुरू की गई प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने वित्तीय समावेशन के प्रयासों को एक नई दिशा दी, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक बैंकिंग सुविधा से वंचित परिवार को बैंकिंग सुविधाएँ प्रदान करना था।
  • वित्तीय समावेशन केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बचत, ऋण, बीमा, पेंशन और प्रेषण (Remittance) जैसी विभिन्न वित्तीय सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना भी शामिल है।
  • वित्तीय समावेशन गरीबी उन्मूलन, आर्थिक असमानता को कम करने और समावेशी विकास (Inclusive Growth) को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • सरकार ने विभिन्न योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन के दायरे को व्यापक बनाया है।
  • डिजिटल इंडिया पहल ने भी वित्तीय समावेशन को गति दी है, जिससे डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच आसान हुई है।

वित्तीय समावेशन क्या है?

  • वित्तीय समावेशन का अर्थ है समाज के सभी वर्गों, विशेषकर कमजोर और निम्न-आय वर्ग के लोगों को सस्ती, समय पर और पर्याप्त वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराना।
  • इन सेवाओं में बचत खाते, ऋण (Credit), बीमा (Insurance), पेंशन (Pension) और भुगतान सेवाएँ (Payment Services) शामिल हैं।
  • इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय प्रणाली से बाहर रहने वाले लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ना है।
  • यह आर्थिक सशक्तिकरण (Economic Empowerment) को बढ़ावा देता है और लोगों को अपनी बचत का प्रबंधन करने, निवेश करने और अप्रत्याशित वित्तीय झटकों से निपटने में मदद करता है।
  • भारत में, वित्तीय समावेशन को राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन (National Financial Inclusion Mission) के तहत प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है।
  • यह न केवल व्यक्तियों के लिए बल्कि देश की समग्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
व्यापक पहुंच समाज के सभी वर्गों, विशेषकर हाशिए पर रहने वाले और वंचित समुदायों तक बैंकिंग, क्रेडिट और बीमा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना।
प्रत्येक परिवार को बैंकिंग सुविधा बैंकिंग सुविधाओं से वंचित प्रत्येक परिवार को वैश्विक स्तर की बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना।
असुरक्षितों को सुरक्षा जीवन बीमा (पीएमजेजेबीवाई) और दुर्घटना बीमा (पीएमएसबीवाई) के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना।
वित्तपोषण से वंचितों को वित्तपोषित करना सूक्ष्म/लघु व्यवसाय इकाइयों और उद्यमियों को संपार्श्विक-मुक्त संस्थागत ऋण (पीएमएमवाई, एसयूपीआई) प्रदान कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
पेंशन सुविधा अटल पेंशन योजना (APY) के माध्यम से पात्र ग्राहकों को वृद्धावस्था में मासिक पेंशन सुनिश्चित करना।
महिला सशक्तिकरण जन-धन खातों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी और स्टैंड-अप इंडिया योजना में महिला उद्यमियों को प्राथमिकता।

महत्व

आर्थिक सशक्तिकरण

  • वित्तीय समावेशन के माध्यम से व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को ऋण, बीमा और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच प्रदान करके उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) और स्टैंड-अप इंडिया योजना (SUPI) जैसे कार्यक्रमों ने आय-सृजन गतिविधियों को बढ़ावा दिया है, जिससे स्वरोजगार और उद्यमशीलता को प्रोत्साहन मिला है।

सामाजिक सुरक्षा

  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी योजनाएं कमजोर वर्गों को मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं।
  • अटल पेंशन योजना (APY) वृद्धावस्था में आय सुरक्षा सुनिश्चित करके सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करती है, जिससे गरीबी और असुरक्षा कम होती है।

समावेशी विकास

  • वित्तीय समावेशन समाज के हाशिए पर पड़े और वंचित वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में शामिल करता है, जिससे क्षेत्रीय असमानताएं कम होती हैं।
  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जन-धन खाते खोलने से इन क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ी है, जिससे संतुलित विकास को बढ़ावा मिला है।

सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

  • जन-धन खातों के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) संभव हुआ है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और लीकेज कम हुई है।
  • यह पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाता है, जिससे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचता है।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल साक्षरता का अभाव

  • कई लाभार्थियों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन के बारे में जानकारी का अभाव है।
  • यह वित्तीय सेवाओं का पूर्ण लाभ उठाने में बाधा उत्पन्न करता है और धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ाता है।

2. निष्क्रिय खातों की समस्या

  • बड़ी संख्या में जन-धन खाते खोले गए हैं, लेकिन कुछ खातों में लेनदेन बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता है, जिससे वे निष्क्रिय हो जाते हैं।
  • निष्क्रिय खातों से वित्तीय समावेशन का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता है।

3. आधारभूत संरचना की कमी

  • दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग आउटलेट, एटीएम और विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी अभी भी एक चुनौती है।
  • यह वित्तीय सेवाओं तक भौतिक पहुंच को सीमित करता है।

4. ऋण तक पहुंच में बाधाएं

  • सूक्ष्म ऋण योजनाओं के बावजूद, छोटे व्यवसायों और व्यक्तिगत उद्यमियों के लिए पर्याप्त और समय पर ऋण प्राप्त करना अभी भी एक चुनौती है।
  • संपार्श्विक-मुक्त ऋणों के बावजूद, बैंक अक्सर जोखिम के कारण छोटे ऋण देने में हिचकिचाते हैं।

5. जागरूकता और विश्वास की कमी

  • कई संभावित लाभार्थियों को अभी भी विभिन्न वित्तीय समावेशन योजनाओं के लाभों और प्रक्रियाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं है।
  • वित्तीय संस्थानों पर विश्वास की कमी भी कुछ समुदायों को इन सेवाओं को अपनाने से रोकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डिजिटल डिवाइड ग्रामीण-शहरी और लिंग-आधारित डिजिटल साक्षरता में अंतर वित्तीय सेवाओं के उपयोग को बाधित करता है।
ऋण वितरण में असमानता छोटे और सीमांत लाभार्थियों तक पर्याप्त ऋण की पहुंच सुनिश्चित करना अभी भी एक चुनौती है।
वित्तीय शिक्षा का अभाव बचत, निवेश और बीमा के महत्व के बारे में जागरूकता की कमी वित्तीय आदतों को प्रभावित करती है।
शिकायत निवारण तंत्र दूरस्थ क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं से संबंधित शिकायतों के प्रभावी और सुलभ निवारण तंत्र की आवश्यकता।
साइबर सुरक्षा जोखिम डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के साथ, उपयोगकर्ताओं को साइबर धोखाधड़ी और डेटा सुरक्षा के जोखिमों से बचाना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY)
  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)
  • अटल पेंशन योजना (APY)
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)
  • स्टैंड-अप इंडिया योजना (SUPI)

आगे की राह

  • डिजिटल और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों को ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक विस्तारित करना, विशेषकर महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए।
  • निष्क्रिय जन-धन खातों को सक्रिय करने और उनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लक्षित अभियान चलाना।
  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग आउटलेट, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट और डिजिटल भुगतान अवसंरचना को मजबूत करना।
  • सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण वितरण प्रक्रियाओं को सरल बनाना और संपार्श्विक-मुक्त ऋणों की उपलब्धता बढ़ाना।
  • वित्तीय समावेशन योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए बहुभाषी और स्थानीयकृत संचार रणनीतियों का उपयोग करना।
  • वित्तीय सेवाओं से संबंधित शिकायतों के लिए एक मजबूत, सुलभ और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना।
  • साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत करना और डिजिटल लेनदेन करने वाले उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने के लिए शिक्षित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वित्तीय समावेशन · प्रधानमंत्री जन धन योजना · सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ · सूक्ष्म वित्त · आर्थिक सशक्तिकरण · समावेशी विकास · प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण · डिजिटल भुगतान

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा।’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘समान कार्य के लिए समान वेतन, आजीविका के साधन।’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार।’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि।’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा वित्तीय समावेशन मिशन की शुरुआत (PMJDY)  →  जन-धन खाते खोलना और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना  →  सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (PMJJBY, PMSBY, APY) का विस्तार  →  सूक्ष्म ऋण और उद्यमशीलता सहायता (PMMY, SUPI) प्रदान करना  →  आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास को बढ़ावा देना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना अगस्त 2014 में ‘राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन’ के रूप में शुरू की गई थी।
2. इसका उद्देश्य केवल शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं से वंचित परिवारों को बैंकिंग सुविधाएँ प्रदान करना है।
3. इस योजना के तहत खोले गए खातों में महिलाओं के खातों का प्रतिशत पुरुषों के खातों से अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। प्रधानमंत्री जन धन योजना अगस्त 2014 में राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन के रूप में शुरू की गई थी। कथन 2 गलत है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों सहित सभी बैंकिंग सुविधाओं से वंचित परिवारों को बैंकिंग सुविधाएँ प्रदान करना है। कथन 3 गलत है। हालाँकि महिलाओं के खाते बड़ी संख्या में हैं (55.74%), यह पुरुषों के खातों से अधिक नहीं है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी योजनाएँ भारत सरकार के वित्तीय समावेशन मिशन का हिस्सा हैं?
1. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)
2. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)
3. अटल पेंशन योजना (APY)
4. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी चार योजनाएँ – प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना – भारत सरकार के व्यापक वित्तीय समावेशन मिशन का अभिन्न अंग हैं। ये योजनाएँ बीमा, पेंशन और ऋण तक पहुँच प्रदान करके विभिन्न वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वित्तीय समावेशन आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक न्याय का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) और संबंधित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत वित्तीय समावेशन की परिभाषा और उसके महत्व से करें। फिर प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के उद्देश्यों और प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालें। इसके बाद, PMJJBY, PMSBY, APY और PMMY जैसी संबंधित योजनाओं के माध्यम से वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में PMJDY की भूमिका का विश्लेषण करें। इन योजनाओं के तहत प्राप्त उपलब्धियों और आंकड़ों का उल्लेख करें। अंत में, इन पहलों के सकारात्मक प्रभावों (जैसे आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और ऋण तक पहुँच) के साथ-साथ संभावित चुनौतियों या सुधार के क्षेत्रों का भी आलोचनात्मक मूल्यांकन करते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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