वित्त मंत्रालय का विशेष अभियान 6.0: स्वच्छता अभियान के लिए तैयारियाँ पूर्ण

व्यय विभाग स्वच्छता अभियान के लिए पूरी तरह से तैयार — labelled illustration

वित्त मंत्रालय का विशेष अभियान 6.0: स्वच्छता अभियान के लिए तैयारियाँ पूर्ण

✎ विशेष अभियान 6.0 प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, लंबित मामलों का निपटान करने और सरकारी विभागों में स्वच्छता को संस्थागत बनाने के लिए एक संरचित पहल है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं  |  GS Paper IV — लोक प्रशासन में नैतिकता
  • Prelims: व्यय विभाग, वित्त मंत्रालय, विशेष अभियान 6.0, प्रशासनिक दक्षता, सुशासन, लंबित मामलों का निपटान, केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय, महालेखा नियंत्रक
  • Essay: प्रशासनिक सुधार और सुशासन: चुनौतियाँ और समाधान, स्वच्छता और दक्षता: सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार के आधार

त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, लंबित मामलों का निपटान करने और सरकारी विभागों में स्वच्छता को संस्थागत बनाने के लिए एक संरचित पहल है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

व्यय विभाग (Department of Expenditure) विशेष अभियान 6.0 को लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जिसका उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत बनाना और लंबित मामलों का निपटान करना है। यह अभियान दो चरणों में चलाया जाएगा: तैयारी चरण (15 से 30 सितंबर, 2026) और कार्यान्वयन चरण (2 से 31 अक्टूबर, 2026)। इस पहल का लक्ष्य सभी स्तरों पर प्रशासनिक दक्षता और स्वच्छता को बढ़ाना है, जैसा कि पिछले अभियानों की सफलता से प्रेरित है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने तथा स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से विशेष अभियान चलाती है।
  • ये अभियान विशेष रूप से लंबित मामलों, जैसे संसदीय संदर्भ, अंतर-मंत्रालयी टिप्पणियाँ, राज्य सरकार के संदर्भ, जन शिकायतें और जन शिकायत अपीलें, के त्वरित निपटान पर केंद्रित होते हैं।
  • व्यय विभाग वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अंतर्गत आता है और यह सरकार के व्यय प्रबंधन, वित्तीय नियमों तथा नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • पिछले विशेष अभियान 5.0 (2 से 31 अक्टूबर, 2025) में व्यय विभाग और उसके संबद्ध संगठनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया था, जिससे लंबित मामलों में कमी आई और स्वच्छता की संस्कृति को बढ़ावा मिला।
  • इन अभियानों का उद्देश्य केवल भौतिक स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रिकॉर्ड प्रबंधन, कार्यस्थल के प्रबंधन और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में दक्षता लाना भी शामिल है।
  • यह पहल सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों के अनुरूप है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता शामिल है।

विशेष अभियान 6.0 क्या है?

  • विशेष अभियान 6.0 एक सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य मंत्रालयों और विभागों में प्रशासनिक दक्षता, स्वच्छता तथा लंबित मामलों के त्वरित निपटान को बढ़ावा देना है।
  • यह अभियान दो संरचित चरणों में चलाया जाएगा: तैयारी चरण (15 से 30 सितंबर, 2026) और कार्यान्वयन चरण (2 से 31 अक्टूबर, 2026)।
  • तैयारी चरण में, संबंधित विभागों और उनके प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत आने वाले संगठनों को स्वच्छता, जगह के प्रबंधन, कचरे के निपटान, रिकॉर्ड प्रबंधन और लंबित मामलों से जुड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए जागरूक किया जाता है।
  • कार्यान्वयन चरण में, निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर व्यवस्थित और परिणाम-उन्मुख कार्रवाई की जाती है।
  • व्यय विभाग के संदर्भ में, इसमें महालेखा नियंत्रक (Controller General of Accounts), मुख्य सलाहकार लागत (Chief Adviser Cost), केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय (Central Pension Accounting Office) और अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (Arun Jaitley National Institute of Financial Management) जैसे संगठन शामिल हैं।
  • इस अभियान का मुख्य लक्ष्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, अनावश्यक फाइलों और कागजात को हटाना तथा कार्यस्थल को अधिक स्वच्छ और कुशल बनाना है।
  • यह अभियान जन शिकायतों और अन्य महत्वपूर्ण संदर्भों के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है, जिससे सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार होता है।
  • इसका उद्देश्य केवल अभियान की अवधि के दौरान ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी प्रशासनिक दक्षता और स्वच्छता की संस्कृति को बनाए रखना और संस्थागत बनाना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विशेष अभियान 6.0 यह अभियान व्यय विभाग द्वारा प्रशासनिक दक्षता और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए चलाया जा रहा है।
दो-चरणीय संरचना अभियान को तैयारी चरण (15-30 सितंबर, 2026) और कार्यान्वयन चरण (2-31 अक्टूबर, 2026) में विभाजित किया गया है, जो व्यवस्थित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है।
लंबित मामलों का निपटान इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न प्रकार के लंबित मामलों, जैसे सांसद संदर्भ, अंतर-मंत्रालयी संदर्भ, राज्य सरकार संदर्भ और जन शिकायतें, का प्रभावी ढंग से निपटान करना है।
संस्थागत स्वच्छता यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि स्वच्छता को विभागों की कार्यप्रणाली का स्थायी हिस्सा बनाने पर केंद्रित है।
विस्तृत कवरेज व्यय विभाग के सभी खंडों और इसके प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत आने वाले संगठनों (जैसे महालेखा नियंत्रक, केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय) को इसमें शामिल किया गया है।
पिछली सफलता का आधार विशेष अभियान 5.0 की सफलता और उसके बाद भी जारी रही प्रगति इस अभियान के लिए प्रेरणा और आधार प्रदान करती है।

महत्व

प्रशासनिक दक्षता

  • लंबित मामलों के त्वरित निपटान से सरकारी कामकाज में तेजी आती है और निर्णय लेने की प्रक्रिया सुगम होती है।
  • स्वच्छता और बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन से कार्यस्थल का माहौल सुधरता है तथा कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ती है।
  • यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और अनावश्यक देरी को कम करने में सहायक है।

सुशासन

  • जन शिकायतों और अपीलों का समय पर समाधान नागरिकों के प्रति सरकार की जवाबदेही को दर्शाता है।
  • पारदर्शिता और बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन से भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है और शासन में विश्वास बढ़ता है।
  • यह पहल ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के सिद्धांत के अनुरूप है, जहाँ प्रक्रियाओं को सरल और प्रभावी बनाया जाता है।

संसाधन प्रबंधन

  • कचरे के निपटान और जगह के प्रबंधन से सरकारी कार्यालयों में संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है।
  • डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और भौतिक फाइलों के उचित रखरखाव से सूचना तक पहुंच आसान होती है और कागजी कार्रवाई कम होती है।
  • यह अभियान सरकारी कार्यालयों में एक स्थायी और कुशल कार्य संस्कृति को बढ़ावा देता है।

चुनौतियाँ

1. अभियान की निरंतरता

  • अभियान की समाप्ति के बाद भी स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटान की गति को बनाए रखना एक चुनौती है।
  • कर्मचारियों में स्थायी रूप से व्यवहार परिवर्तन लाना और उन्हें इन प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है।

2. तकनीकी एकीकरण

  • लंबित मामलों के प्रभावी प्रबंधन और रिकॉर्ड डिजिटलीकरण के लिए आधुनिक तकनीकों का पूर्ण एकीकरण सुनिश्चित करना।
  • कर्मचारियों को नई प्रणालियों और तकनीकों के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना।

3. संसाधन आवंटन

  • स्वच्छता और रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए आवश्यक मानव और वित्तीय संसाधनों का पर्याप्त आवंटन सुनिश्चित करना।
  • विशेष अभियान के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता को पूरा करना।

4. अंतर-विभागीय समन्वय

  • विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच लंबित मामलों के निपटान के लिए प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
  • जानकारी साझा करने और संयुक्त कार्रवाई के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्थायी व्यवहार परिवर्तन अभियान के बाद स्वच्छता और दक्षता के मानकों को बनाए रखना।
तकनीकी उन्नयन लंबित मामलों के प्रबंधन और रिकॉर्ड डिजिटलीकरण के लिए पर्याप्त तकनीकी बुनियादी ढाँचा और प्रशिक्षण।
कर्मचारी प्रेरणा सभी स्तरों पर कर्मचारियों को अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और स्थायी प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करना।
निगरानी और मूल्यांकन अभियान की प्रगति और परिणामों की प्रभावी निगरानी तथा मूल्यांकन के लिए मजबूत तंत्र का अभाव।
लंबित मामलों की जटिलता कुछ लंबित मामले अत्यधिक जटिल और बहु-विभागीय प्रकृति के हो सकते हैं, जिनके निपटान में अधिक समय और समन्वय की आवश्यकता होती है।

आगे की राह

  • अभियान के बाद भी स्वच्छता और दक्षता के मानकों को बनाए रखने के लिए एक स्थायी निगरानी तंत्र स्थापित करना।
  • कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना ताकि वे आधुनिक रिकॉर्ड प्रबंधन और स्वच्छता प्रथाओं को अपना सकें।
  • डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना और सभी सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली को पूरी तरह से लागू करना।
  • जन शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करना।
  • विभिन्न विभागों और मंत्रालयों के बीच लंबित मामलों के निपटान के लिए बेहतर समन्वय और सूचना साझाकरण तंत्र विकसित करना।
  • उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभागों और कर्मचारियों को मान्यता और प्रोत्साहन प्रदान करना ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हों।
  • नियमित अंतराल पर आंतरिक ऑडिट और मूल्यांकन करना ताकि अभियान की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके और सुधार के क्षेत्रों की पहचान की जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विशेष अभियान 6.0 · स्वच्छता अभियान · प्रशासनिक दक्षता · लंबित मामलों का निपटान · रिकॉर्ड प्रबंधन · ई-ऑफिस प्रणाली · सार्वजनिक शिकायतें · सुशासन · व्यय विभाग · वित्त मंत्रालय

अवधारणा प्रवाह

व्यय विभाग द्वारा विशेष अभियान 6.0 की घोषणा  →  दो-चरणीय संरचना: तैयारी और कार्यान्वयन चरण  →  स्वच्छता, जगह प्रबंधन, रिकॉर्ड प्रबंधन और लंबित मामलों के लक्ष्य निर्धारण  →  लंबित मामलों (सांसद संदर्भ, जन शिकायतें) का निपटान  →  प्रशासनिक दक्षता और सुशासन में वृद्धि  →  सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का संवर्धन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. विशेष अभियान 6.0 का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटान को बढ़ावा देना है।
2. यह अभियान केवल वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा ही कार्यान्वित किया जा रहा है।
3. अभियान में तैयारी चरण और कार्यान्वयन चरण दोनों शामिल हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता और लंबित मामलों का निपटान है। कथन 2 गलत है क्योंकि अभियान के निर्देश सभी विभागों और प्रशासनिक नियंत्रण संगठनों को जारी किए गए हैं, न कि केवल व्यय विभाग को। कथन 3 सही है क्योंकि अभियान को दो चरणों, तैयारी और कार्यान्वयन में संरचित किया गया है।

Q2. विशेष अभियान 6.0 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से संगठन व्यय विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत आते हैं और अभियान में शामिल हैं?
1. महालेखा नियंत्रक
2. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
3. केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय
4. अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 3
  2. केवल 1, 3 और 4
  3. केवल 2 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: केवल 1, 3 और 4 — महालेखा नियंत्रक, केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय और अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान व्यय विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत आते हैं और अभियान में शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वित्त मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन सीधे व्यय विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं आता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सरकारी विभागों में विशेष अभियानों, जैसे कि ‘विशेष अभियान 6.0’, का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता और सुशासन को बढ़ावा देना है। इस कथन के आलोक में, भारत में सार्वजनिक सेवाओं के वितरण और जवाबदेही में सुधार के लिए ऐसे अभियानों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘विशेष अभियान 6.0’ जैसे अभियानों का संक्षिप्त परिचय और उनका उद्देश्य (स्वच्छता, लंबित मामलों का निपटान, प्रशासनिक दक्षता)।
2. अभियानों की भूमिका और महत्व: प्रशासनिक दक्षता में सुधार (ई-ऑफिस, रिकॉर्ड प्रबंधन), लंबित मामलों का निपटान (जन शिकायतें, अंतर-मंत्रालयी संदर्भ), कार्यस्थल की स्वच्छता, कर्मचारी मनोबल पर सकारात्मक प्रभाव, सुशासन के सिद्धांतों को बढ़ावा देना।
3. समालोचनात्मक परीक्षण/चुनौतियाँ: ऐसे अभियानों की अल्पकालिक प्रकृति, दीर्घकालिक संस्थागत परिवर्तनों की आवश्यकता, केवल अभियान अवधि तक सीमित प्रभाव, संसाधनों का कुशल उपयोग, राजनीतिक इच्छाशक्ति और निरंतरता का अभाव, निचले स्तर पर कार्यान्वयन की चुनौतियाँ।
4. सार्वजनिक सेवाओं के वितरण और जवाबदेही में सुधार: पारदर्शिता, नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण, डिजिटल पहल (जैसे जन शिकायत पोर्टल), प्रदर्शन मूल्यांकन, शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना।
5. निष्कर्ष: अभियानों के महत्व को स्वीकार करते हुए, उन्हें स्थायी संस्थागत सुधारों और नीतिगत परिवर्तनों के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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