विशेष अभियान-6: उर्वरक विभाग की प्रशासनिक सुधार में प्रगति

विशेष अभियान-6: उर्वरक विभाग की प्रशासनिक सुधार में प्रगति

विशेष अभियान-6: उर्वरक विभाग की प्रशासनिक सुधार में प्रगति

विशेष अभियान-6: उर्वरक विभाग की प्रशासनिक सुधार में प्रगति — विशेष अभियान-6: प्रमुख उपलब्धियाँ
आरेख: विशेष अभियान-6: प्रमुख उपलब्धियाँ

✎ विशेष अभियान प्रशासनिक सुधार और जन-शिकायत विभाग (DARPG) के दिशानिर्देशों पर आधारित एक समयबद्ध पहल है, जिसमें स्वच्छता, फाइल और अभिलेख प्रबंधन, स्क्रैप निपटान और जन-शिकायत निवारण को एक साथ लक्ष्य बनाया जाता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन व्यवस्था (प्रशासनिक सुधार, ई-गवर्नेंस, जन-शिकायत निवारण, लोक सेवा में जवाबदेही)  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं अपशिष्ट प्रबंधन (ई-कचरे और स्क्रैप का निपटान)
  • Prelims: विशेष अभियान (Special Campaign) श्रृंखला और DARPG की भूमिका, प्रशासनिक सुधार और जन-शिकायत विभाग (DARPG), सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993), सामान्य वित्तीय नियम (GFR), 2017 के अंतर्गत अनुपयोगी सामग्री का निपटान, ई-ऑफिस (e-Office) प्रणाली और ई-फाइल प्रबंधन, CPGRAMS: जन-शिकायत निवारण का केंद्रीकृत ऑनलाइन मंच, स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission), 2014, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (PMKSK) की संकल्पना और एकल-स्थान सेवा मॉडल
  • Essay: सुशासन की नींव के रूप में प्रशासनिक सुधार और कार्य-संस्कृति, स्वच्छता आदत से संस्कृति तक: सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान प्रशासनिक सुधार और जन-शिकायत विभाग (DARPG) के दिशानिर्देशों पर आधारित एक समयबद्ध पहल है, जिसमें स्वच्छता, फाइल और अभिलेख प्रबंधन, स्क्रैप निपटान और जन-शिकायत निवारण को एक साथ लक्ष्य बनाया जाता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

उर्वरक विभाग (Department of Fertilizers) और उसके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) ने 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक ‘विशेष अभियान-6’ सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह अभियान प्रशासनिक सुधार और जन-शिकायत विभाग (DARPG) के दिशानिर्देशों के अनुरूप था, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देना, लंबित कार्यों को घटाना और कार्यदक्षता बढ़ाना है। इस अवधि में 14,190 भौतिक फाइलों की समीक्षा, 7,257 ई-फाइलों की समीक्षा (जिनमें 6,783 बंद की गईं), 2,705 भौतिक फाइलों की विलोपन-प्रक्रिया, 3,184 आउटडोर स्वच्छता अभियान, लगभग 1,26,052 वर्ग फुट कार्यालय स्थान की मुक्ति और स्क्रैप निपटान से ₹87,54,854 का राजस्व प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। जन-शिकायतों और अपीलों के निपटान को भी अभियान में प्राथमिकता दी गई। इसलिए यह खबर प्रशासनिक सुधार के एक व्यावहारिक उदाहरण के रूप में महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में सरकारी कार्यालयों में अभिलेखों का अंबार, लंबित फाइलें और कार्यालय परिसरों का अव्यवस्थित उपयोग लंबे समय से प्रशासनिक दक्षता की चुनौती रहे हैं। इसी संदर्भ में समय-समय पर केंद्र सरकार ने समन्वित स्वच्छता और रिकॉर्ड-निपटान अभियान चलाए हैं।
  • स्वच्छ भारत मिशन (2014) ने स्वच्छता को जन-आंदोलन का रूप दिया। सरकारी कार्यालयों में इसी भावना को संस्थागत बनाने के लिए स्वच्छता को कार्य-संस्कृति से जोड़ने पर बल दिया गया।
  • DARPG प्रशासनिक सुधार, नागरिक-केंद्रित शासन और जन-शिकायत निवारण के लिए नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करता है। विशेष अभियानों के दिशानिर्देश इसी विभाग द्वारा जारी किए जाते हैं।
  • सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के अंतर्गत केंद्र सरकार के अभिलेखों के प्रबंधन, संरक्षण और विलोपन की व्यवस्था है। अभिलेखों के नियमित निपटान से कार्यालयों में स्थान और संसाधनों की बचत होती है।
  • भारत में उर्वरक क्षेत्र का प्रशासनिक ढाँचा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन है, जिसमें उर्वरक विभाग नीति-समन्वय करता है और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) तथा फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स travancore लिमिटेड (FACT) जैसे उपक्रम उत्पादन और वितरण से जुड़े हैं।
  • प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (PMKSK) किसानों को उर्वरक, बीज और अन्य कृषि-आदानों की एकल-स्थान सेवा देने की संकल्पना पर आधारित हैं। इन केंद्रों की स्वच्छता और व्यवस्था किसानों के साथ विभाग के संपर्क की गुणवत्ता से जुड़ी है।

विशेष अभियान क्या है?

  • विशेष अभियान वह समयबद्ध प्रशासनिक पहल है जिसमें किसी निश्चित अवधि के भीतर कार्यालयों में स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन, लंबित मामलों के निपटान और स्क्रैप निपटान जैसे लक्ष्य एक साथ पूरे किए जाते हैं।
  • इन अभियानों के दिशानिर्देश प्रशासनिक सुधार और जन-शिकायत विभाग (DARPG) जारी करता है, और मंत्रालय/विभाग अपने-अपने कार्यालयों में उन्हें लागू करते हैं।
  • भौतिक फाइलों और ई-फाइलों की समीक्षा का उद्देश्य अप्रासंगिक और बंद हो चुकी फाइलों को छाँटकर कार्य-भार घटाना और निर्णय-प्रक्रिया को तेज करना है।
  • अभिलेखों का विलोपन सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 और सरकारी नियमों के अनुसार होना चाहिए, ताकि महत्वपूर्ण अभिलेख सुरक्षित रहें और केवल अनावश्यक सामग्री हटे।
  • कार्यालय में जमा अनुपयोगी सामग्री (स्क्रैप) का निपटान सामान्य वित्तीय नियम (GFR), 2017 के प्रावधानों के अंतर्गत नीलामी या निर्धारित प्रक्रिया से किया जाता है, जिससे सरकार को राजस्व भी मिलता है।
  • ई-फाइल प्रबंधन ई-ऑफिस जैसी डिजिटल प्रणाली पर आधारित है, जिससे फाइलों की ट्रैकिंग, समय-सीमा और निर्णय की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
  • जन-शिकायतों और अपीलों का निपटान CPGRAMS जैसे मंचों के आँकड़ों के आधार पर किया जाता है, ताकि नागरिक-शिकायतों पर जवाबदेही तय हो सके।
  • स्वच्छता अभियान और सोशल मीडिया आउटरीच का उद्देश्य कर्मचारियों और जनता में जागरूकता बढ़ाना तथा अच्छे कार्य-व्यवहार को प्रदर्शित करना है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
अभियान की अवधि और ढाँचा: 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चला विशेष अभियान-6, जो प्रशासनिक सुधार और जन-शिकायत विभाग (DARPG) के दिशानिर्देशों पर आधारित था। सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और कार्यदक्षता को एक निश्चित समयसीमा में संस्थागत रूप देने का यह एक मानक मॉडल है।
भौतिक फाइलों की समीक्षा: 14,190 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई। लंबित कार्यों को कम करने और पुराने दस्तावेज़ों की पहचान के लिए यह आधार-कार्य है।
ई-फाइल प्रबंधन: लक्ष्य 637 के मुकाबले 7,257 ई-फाइलों की समीक्षा हुई और 6,783 फाइलें बंद की गईं। ई-ऑफिस जैसे डिजिटल प्रशासन में पड़ी बंद न होने वाली फाइलों की सफाई से कार्य-प्रवाह की पारदर्शिता बढ़ती है।
रिकॉर्ड निपटान: निपटान हेतु पहचानी गई 5,516 फाइलों में से 2,705 भौतिक फाइलें हटाई गईं। सार्वजनिक अभिलेखों के वैधानिक निपटान की प्रक्रिया को व्यवहार में लाने का उदाहरण है।
स्क्रैप निपटान से ₹87,54,854 का राजस्व और लगभग 1,26,052 वर्ग फुट कार्यालय स्थान मुक्त हुआ। अनुपयोगी सामग्री के निपटान से सरकारी संपत्ति का मूल्य वसूला गया और कार्यालय परिसरों का बेहतर उपयोग संभव हुआ।
3,184 आउटडोर स्वच्छता अभियान और PMKSK पर स्वच्छता गतिविधियाँ, जिनमें Before-After तस्वीरों से परिणाम दिखाए गए। स्वच्छता को केवल आंतरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों से सीधे जुड़े केंद्रों की सेवा-गुणवत्ता से जोड़ा गया।
जन-शिकायतों और अपीलों का निपटान तथा 100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट। नागरिक-केंद्रित शासन और जन-जागरूकता, दोनों पहलुओं पर एक साथ काम हुआ।

महत्व

प्रशासनिक दक्षता

  • लंबित फाइलों और ई-फाइलों की सफाई से निर्णय-प्रक्रिया की गति बढ़ती है और फाइलों के बोझ से होने वाली देरी घटती है।
  • भौतिक और डिजिटल, दोनों रिकॉर्डों की एक साथ समीक्षा से सूचना-प्रबंधन में एकरूपता आती है।
  • जन-शिकायतों और अपीलों के निपटान से प्रशासन की जवाबदेही का सीधा मापदंड तैयार होता है।

राजकोषीय और संसाधन प्रबंधन

  • अनुपयोगी स्क्रैप के निपटान से ₹87,54,854 का राजस्व प्राप्त हुआ, जो सार्वजनिक संपत्ति के उचित उपयोग का उदाहरण है।
  • मुक्त हुए लगभग 1,26,052 वर्ग फुट स्थान से नया निर्माण या किराया-व्यय घटाने जैसे विकल्प खुलते हैं, हालांकि इसका सटीक उपयोग रिपोर्ट में नहीं बताया गया है।

पर्यावरण और कार्यस्थल स्वास्थ्य

  • ई-कचरे और स्क्रैप का व्यवस्थित निपटान पर्यावरण-संरक्षण के नियमों के अनुपालन से जुड़ा है।
  • साफ-सुथरे कार्यालय परिसर कर्मचारियों के कार्य-वातावरण और सार्वजनिक छवि, दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका

  • उर्वरक विभाग के अधीन PSU, जैसे नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) और द फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स ट्रावनकोर लिमिटेड, नीति-निर्देश को अपने स्तर पर लागू करते हैं।
  • यह अभियान विभाग-मुख्यालय और PSU के बीच समन्वित क्रियान्वयन का उदाहरण है।

चुनौतियाँ

1. अभियान-आधारित बनाम सतत सुधार

  • विशेष अभियान एक निश्चित अवधि (अक्टूबर 2026) तक सीमित होता है, इसलिए प्रगति के टिके रहने पर प्रश्न उठता है।
  • अभियान बंद होने के बाद फाइलों का फिर से जमा होना पुरानी समस्या की पुनरावृत्ति का खतरा बढ़ाता है।

2. भौतिक और ई-रिकॉर्ड का समन्वय

  • भौतिक फाइलों की तुलना में ई-फाइलों का लक्ष्य-प्रदर्शन कहीं अधिक रहा, जो दोनों रिकॉर्ड-प्रणालियों के बीच असंतुलन दर्शाता है।
  • डिजिटलीकरण के बाद भी पुराने भौतिक अभिलेखों का बोझ बना रहता है।

3. अभिलेखों के निपटान में वैधानिक सावधानी

  • सार्वजनिक अभिलेखों को हटाते समय सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 की प्रक्रिया और अभिलेख-अनुसूचियों का पालन आवश्यक है।
  • अभिलेख हटाने में जल्दबाजी से सूचना का अधिकार और भविष्य के ऑडिट या न्यायिक आवश्यकताओं पर असर पड़ सकता है।

4. ई-कचरे और स्क्रैप का पर्यावरणीय निपटान

  • ई-कचरे के निपटान के लिए ई-वेस्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत अधिकृत संग्राहकों या पुनर्चक्रणकर्ताओं को सौंपना अनिवार्य है।
  • स्क्रैप से राजस्व तो मिलता है, परंतु निपटान की पूरी श्रृंखला पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

5. उपलब्धि-मापन की सीमाएँ

  • 3,184 स्वच्छता अभियान और 100 से अधिक पोस्ट जैसे आँकड़े गतिविधि-आधारित (output) हैं, परिणाम-आधारित (outcome) नहीं।
  • कार्यालय स्थान का वास्तविक उपयोग और कार्य-दक्षता में सुधार का स्वतंत्र मूल्यांकन अभी सामने नहीं आया है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
अभियान की निरंतरता अवधि समाप्त होने के बाद स्वच्छता और फाइल-प्रबंधन की आदतें बनी रहेंगी या नहीं, यह अनिश्चित है।
भौतिक-डिजिटल असंतुलन ई-फाइलों का निपटान तेज़ी से हुआ, जबकि भौतिक फाइलों की समीक्षा में अधिक समय लगा।
अभिलेख निपटान की वैधता सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 और अभिलेख-अनुसूचियों के अनुपालन के बिना निपटान से रिकॉर्ड-हानि का जोखिम है।
ई-कचरा और स्क्रैप का पर्यावरणीय प्रभाव अनधिकृत निपटान से प्रदूषण और स्वास्थ्य-जोखिम बढ़ सकते हैं।
परिणाम का स्वतंत्र मूल्यांकन गतिविधि-संख्या के आधार पर सफलता का आकलन दक्षता में वास्तविक सुधार को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
जन-शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निपटान ‘सभी शिकायतों का निपटान’ का दावा तभी सार्थक है जब नागरिक संतुष्ट हों और पुनः शिकायत न करें।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (Pradhan Mantri Kisan Samriddhi Kendra – PMKSK)

आगे की राह

  • विशेष अभियानों के परिणामों को नियमित मासिक समीक्षा में शामिल किया जाए, ताकि स्वच्छता और फाइल-प्रबंधन एक स्थायी प्रशासनिक आदत बने।
  • भौतिक फाइलों के लिए स्पष्ट डिजिटलीकरण-लक्ष्य तय किए जाएँ और ई-ऑफिस में पुरानी फाइलों के स्थानांतरण की समयबद्ध योजना बनाई जाए।
  • अभिलेख निपटान से पहले अभिलेख-अनुसूचियों और सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
  • ई-कचरे और स्क्रैप के निपटान के लिए केवल अधिकृत संग्राहकों और पुनर्चक्रणकर्ताओं के माध्यम से लेन-देन हो, और इसका रिकॉर्ड रखा जाए।
  • स्क्रैप से प्राप्त राजस्व और मुक्त हुए कार्यालय स्थान के उपयोग की सार्वजनिक जानकारी दी जाए।
  • जन-शिकायतों के निपटान में CPGRAMS जैसे मंचों पर नागरिक-संतुष्टि के आँकड़े भी प्रकाशित किए जाएँ।
  • स्वच्छता अभियानों के परिणाम को Before-After के दृश्य-प्रमाण के साथ-साथ स्वतंत्र निरीक्षण से भी जाँचा जाए।
  • सभी PSU में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अपनाई जाए, ताकि प्रदर्शन की तुलना और सुधार संभव हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विशेष अभियान-6 (Special Campaign 6) · प्रशासनिक सुधार और जन-शिकायत विभाग (DARPG) · ई-फाइल प्रबंधन · रिकॉर्ड निपटान और लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) · सामान्य वित्तीय नियम, 2017 (GFR 2017) · जन-शिकायत निवारण (CPGRAMS) · नागरिक-केंद्रित प्रशासन (Citizen-Centric Administration) · वेबर का नौकरशाही सिद्धांत (Weber’s Bureaucracy) · लक्ष्य-आधारित शासन और मापन की सीमाएँ · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) · स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) · सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005)

अवधारणा प्रवाह

DARPG के दिशानिर्देश जारी होते हैं, जिनमें स्वच्छता, लंबित कार्य-निपटान और कार्यदक्षता को लक्ष्य बनाया गया है।  →  उर्वरक विभाग 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष अभियान-6 लागू करता है और अधीन PSU उसे क्रियान्वित करते हैं।  →  भौतिक और ई-फाइलों की समीक्षा तथा अनुपयोगी रिकॉर्ड व स्क्रैप का निपटान होता है।  →  स्क्रैप निपटान से राजस्व प्राप्त होता है और कार्यालय परिसरों में लगभग 1,26,052 वर्ग फुट स्थान मुक्त होता है।  →  स्वच्छता अभियान, PMKSK जैसे किसान-सेवा केंद्रों की सफाई और जन-शिकायतों के निपटान से सेवा-गुणवत्ता में सुधार होता है।  →  परिणाम सोशल मीडिया और PIB के माध्यम से सार्वजनिक किए जाते हैं, जिससे जवाबदेही और जागरूकता बढ़ती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रशासनिक सुधार और जन-शिकायत विभाग (DARPG) कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
2. CPGRAMS एक वेब-आधारित प्रणाली है, जिसके माध्यम से नागरिक जन-शिकायत दर्ज कर सकते हैं और उसकी प्रगति की निगरानी कर सकते हैं।
3. लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 केवल राज्य सरकारों के अभिलेखों पर लागू होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: DARPG कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अधीन है। कथन 2 सही है: CPGRAMS शिकायत दर्ज करने और निगरानी की केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रणाली है। कथन 3 गलत है: लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के अभिलेखों पर लागू होता है, राज्यों पर नहीं।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): सूचना का अधिकार भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार के रूप में शब्दशः सूचीबद्ध नहीं है।
कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 19(1)(क) में वाक्-स्वातंत्र्य के अंतर्गत सूचना के अधिकार को निहित माना है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है
  4. (A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — सूचना का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(क) से निकला हुआ अधिकार माना गया है। राज नारायण बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1975) जैसे निर्णयों में न्यायालय ने इसे मान्यता दी। अतः (A) सत्य है और (R) उसकी संवैधानिक व्याख्या करता है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
सूची I (अधिनियम/नियम)
1. लोक अभिलेख अधिनियम, 1993
2. सामान्य वित्तीय नियम, 2017 (GFR 2017)
3. संविधान का अनुच्छेद 77
4. उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985

सूची II (विषय-क्षेत्र)
a. भारत सरकार के कार्यों के संचालन के लिए नियम बनाना
b. अनुपयोगी सामग्री (unserviceable stores) के निपटान सहित सरकारी वित्तीय प्रक्रियाएँ
c. सरकारी अभिलेखों का संरक्षण और विनिष्टीकरण
d. उर्वरकों की गुणवत्ता, मूल्य और वितरण का नियंत्रण

सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-b, 2-a, 3-c, 4-d
  2. 1-a, 2-c, 3-b, 4-d
  3. 1-c, 2-b, 3-a, 4-d
  4. 1-d, 2-a, 3-b, 4-c

उत्तर: 1-c, 2-b, 3-a, 4-d — लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (1-c) अभिलेखों के संरक्षण और विनिष्टीकरण से जुड़ा है। GFR 2017 (2-b) में अनुपयोगी सामग्री के निपटान सहित वित्तीय प्रक्रियाएँ हैं। अनुच्छेद 77 (3-a) भारत सरकार के कार्य-संचालन हेतु नियम बनाने की शक्ति देता है। उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 (4-d) आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत उर्वरकों की गुणवत्ता, मूल्य और वितरण नियंत्रित करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, फाइलों की समीक्षा और लंबित मामलों के निपटान जैसे समयबद्ध अभियानों (campaign mode) को प्रशासनिक दक्षता का प्रभावी उपाय माना जाता है। इन अभियानों की उपलब्धियों और सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि यदि ऐसे अभियानों के समाप्त होने के बाद फाइल-प्रबंधन और जन-शिकायत निवारण की नियमित व्यवस्था स्थापित न हो, तो लोक प्रशासन की विश्वसनीयता पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर की रूपरेखा (Model-answer skeleton):

1. भूमिका: विशेष अभियान-6 (2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026) का तथ्यात्मक परिचय। यह अभियान प्रशासनिक सुधार और जन-शिकायत विभाग (DARPG) के दिशानिर्देशों के अनुसार चलाया गया, जिसका उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत रूप देना, लंबित कार्य घटाना और कार्यदक्षता बढ़ाना था।

2. अभियान की उपलब्धियों के आँकड़े: 1,26,052 वर्ग फुट कार्यालय स्थान मुक्त; 3,184 आउटडोर स्वच्छता अभियान; 14,190 भौतिक फाइलों की समीक्षा; ई-फाइलों में लक्ष्य 637 के मुकाबले 7,257 की समीक्षा और 6,783 फाइलें बंद; 2,705 भौतिक फाइलों का विनिष्टीकरण; स्क्रैप निपटान से ₹87,54,854 का राजस्व। इन आँकड़ों से परिमाणात्मक प्रगति स्पष्ट होती है।

3. समर्थन में तर्क: (क) वेबर के नौकरशाही सिद्धांत में नियम-आधारित, लिखित और अभिलेख-आधारित प्रशासन पर बल है, और फाइल-समीक्षा उसी का व्यावहारिक रूप है। (ख) दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग (2008, अध्यक्ष: वीरप्पा मोइली) की ‘नागरिक-केंद्रित प्रशासन’ की अनुशंसा के अनुरूप जन-शिकायतों का निपटान। (ग) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4 के तहत सार्वजनिक अभिलेखों की व्यवस्थित उपलब्धता और अनुच्छेद 19(1)(क) से जुड़ी पारदर्शिता। (घ) स्वच्छ भारत मिशन के व्यवहार-परिवर्तन दृष्टिकोण का कार्यालय-स्तर पर विस्तार।

4. आलोचनात्मक पक्ष: (क) अभियान-मोड की सीमा: एक निश्चित अवधि में बढ़ा हुआ कार्य स्थायी संस्थागत क्षमता नहीं बनाता; अक्टूबर के बाद स्थिति पुनः पुरानी हो सकती है। (ख) लक्ष्य-निर्धारण की गुणवत्ता: ई-फाइल समीक्षा में लक्ष्य 637 और उपलब्धि 7,257 का अंतर बताता है कि लक्ष्य वास्तविक क्षमता के अनुरूप नहीं थे; मात्रात्मक मापन गुणात्मक सुधार का प्रमाण नहीं है (Goodhart’s Law का व्यावहारिक पक्ष)। (ग) शिकायत-निपटान की गुणवत्ता बनाम संख्या: ‘सभी शिकायतों का निपटान’ से यह स्पष्ट नहीं होता कि समाधान नागरिक को संतोषजनक लगा या नहीं। (घ) अभिलेख-विनिष्टीकरण में सावधानी: लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 और अभिलेखागार की प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है, ताकि ऐतिहासिक या कानूनी महत्व के रिकॉर्ड नष्ट न हों। (ङ) सोशल मीडिया प्रचार (100 से अधिक पोस्ट) को उपलब्धि का विकल्प मानने का जोखिम।

5. संतुलित दृष्टिकोण: अभियान ‘प्रारंभिक झटका’ (shock therapy) के रूप में उपयोगी हैं, पर स्थायी सुधार के लिए नियमित व्यवस्था चाहिए, जैसे नियमित फाइल-आडिट, ई-ऑफिस (e-Office) का सतत उपयोग, CPGRAMS में समयबद्ध निपटान, और कर्मचारियों का प्रशिक्षण। द्वितीय ARC की सिफारिशों और ‘कर्मयोगी’ जैसे क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों से संस्थागत ढाँचा मज़बूत होता है।

6. दूसरा प्रश्न-भाग (परिणाम): अभियान-पश्चात निरंतरता के अभाव में फाइलें पुनः जमा होंगी, शिकायतों का निपटान सांख्यिकीय रह जाएगा, और जनता का प्रशासन पर विश्वास घटेगा; दीर्घकाल में ‘दिखावटी सुधार’ की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

7. निष्कर्ष: अभियान सुधार का आरंभ हैं, साध्य नहीं; निरंतर निगरानी, गुणात्मक मूल्यांकन और नियमित प्रक्रियाओं के मेल से ही प्रशासनिक दक्षता टिकाऊ बनती है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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