विशेष अभियान 6.0: डाक विभाग की उपलब्धियां एवं नवीन पहल

विशेष अभियान 6.0: डाक विभाग की उपलब्धियां एवं नवीन पहल

विशेष अभियान 6.0: डाक विभाग की उपलब्धियां एवं नवीन पहल

विशेष अभियान 6.0 के चरणलंबित मामलों की पहचानजन शिकायतें, अपीलेंनिपटान प्रक्रिया73,814 स्थानों पर स्वच्छतापरिणाम₹67.56 लाख राजस्वई-अपशिष्ट निपटान3,06,026 किलोग्राम कबाड़पुनः उपयोगलकड़ी के बेकार टुकड़े
विशेष अभियान 6.0 के चरण

✎ विशेष अभियान 6.0 (2–31 अक्टूबर 2026) डाक विभाग का स्वच्छता, जन शिकायत, अपील और ई-अपशिष्ट निपटान पर केंद्रित अभियान है, जिसका ई-अपशिष्ट पक्ष ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 और विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) से जुड़ा है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (Governance): नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण, जन शिकायत निवारण तथा प्रशासनिक जवाबदेही  |  GS Paper III — पर्यावरण (Environment): ई-अपशिष्ट प्रबंधन, विस्तारित उत्पादक दायित्व और चक्रीय अर्थव्यवस्था
  • Prelims: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022), विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR), CPGRAMS (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली), भारतीय डाक अधिनियम, 1898 (Indian Post Office Act, 1898), डिजीपोस्ट (DigiPost) — फिजिकल-डिजिटल मेल सेवा, चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy), स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission), संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग (Department of Posts)
  • Essay: कचरे से संपदा: संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता भारत, डिजिटल युग में भौतिक पहुंच: सार्वजनिक डाक नेटवर्क और नागरिक-केंद्रित शासन

त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 (2–31 अक्टूबर 2026) डाक विभाग का स्वच्छता, जन शिकायत, अपील और ई-अपशिष्ट निपटान पर केंद्रित अभियान है, जिसका ई-अपशिष्ट पक्ष ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 और विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) से जुड़ा है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग ने 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले विशेष अभियान 6.0 के क्रियान्वयन चरण में 16 अक्टूबर 2026 तक की प्रगति की जानकारी दी है। विभाग ने 73,814 स्थानों पर स्वच्छता गतिविधियां, 1,00,214 जन शिकायतों और 764 अपीलों का निपटारा तथा 3,06,026 किलोग्राम कबाड़ और 17,980 किलोग्राम ई-अपशिष्ट के निपटान से क्रमशः ₹67.56 लाख और ₹27.64 लाख का राजस्व प्राप्त होने की बात कही है। पश्चिम बंगाल सर्कल में लकड़ी के बेकार टुकड़ों के पुन: उपयोग से कार्यालय के नवीनीकरण का उदाहरण और ‘डिजीपोस्ट’ के माध्यम से गुजरात पुलिस के ट्रैफिक ई-चालान को भौतिक प्रति के रूप में नागरिकों तक पहुंचाने की पहल भी उल्लेखित है। विज्ञप्ति के शीर्षक में ‘अंतरिक्ष प्रबंधन’ का उल्लेख है, किंतु मूल पाठ में इसका कोई विवरण नहीं दिया गया है; परीक्षा की दृष्टि से इसे बाह्य अंतरिक्ष से जोड़ना उचित नहीं है।

पृष्ठभूमि

  • डाक विभाग संचार मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है और देश में डाक सेवाओं का संचालन करता है। इसका कानूनी आधार भारतीय डाक अधिनियम, 1898 है।
  • विशेष अभियान का नाम ‘6.0’ इस बात का संकेत है कि यह अभियान-शृंखला का नवीनतम संस्करण है, जिसमें लंबित मामलों का निपटारा, अभिलेख प्रबंधन और स्वच्छता पर बल दिया जाता है।
  • सरकारी कार्यालयों में लंबित जन शिकायतों की निगरानी के लिए केंद्र सरकार की ऑनलाइन प्रणाली CPGRAMS का उपयोग होता है, जो लोक शिकायत निवारण से संबंधित व्यापक ढांचे का हिस्सा है।
  • ई-अपशिष्ट के निपटान का नियामक ढांचा ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 द्वारा निर्धारित होता है, जिसमें उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) का प्रावधान है।
  • स्वच्छता के क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन जैसे कार्यक्रमों ने सार्वजनिक स्थानों और सरकारी परिसरों में सफाई की संस्कृति को बढ़ावा दिया है।
  • डिजीपोस्ट जैसी सेवाएं दर्शाती हैं कि डिजिटल शासन के साथ भौतिक डाक नेटवर्क की भूमिका समाप्त नहीं होती, बल्कि वह डिजिटल सेवाओं की अंतिम पहुंच सुनिश्चित करता है।

विशेष अभियान 6.0 और डाक विभाग की पहलें क्या हैं?

  • विशेष अभियान 6.0 डाक प्रतिष्ठानों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने, लंबित मामलों को कम करने, अभिलेख प्रबंधन सुधारने और ई-अपशिष्ट के जिम्मेदार निपटान के लिए चलाया गया अल्पकालिक अभियान है।
  • इस अभियान के लक्ष्य 1,50,000 जन शिकायतों का समाधान, 1,500 अपीलों का निपटारा और 1,35,000 स्थानों पर स्वच्छता गतिविधियां हैं। 16 अक्टूबर 2026 तक की प्रगति लक्ष्य के क्रमशः लगभग 67%, 51% और 55% रही।
  • कबाड़ (स्क्रैप) के निपटान से प्राप्त राजस्व को सरकारी संपत्ति के प्रबंधन के रूप में देखा जाता है, जबकि ई-अपशिष्ट के निपटान का उद्देश्य पर्यावरणीय क्षति को कम करना है। दोनों को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
  • ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से संपदा) की अवधारणा पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और संसाधनों के उत्पादक उपयोग पर आधारित है, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांत से जुड़ती है।
  • ई-अपशिष्ट में उत्पादकों की जिम्मेदारी (EPR) के अंतर्गत निर्माता अपने उत्पादों के जीवन-चक्र के अंत में उनके संग्रह और पुनर्चक्रण के लिए उत्तरदायी होते हैं। ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व हो सकते हैं, इसलिए वैज्ञानिक निपटान आवश्यक है।
  • डिजीपोस्ट एक फिजिकल-डिजिटल मेल सेवा है, जिसमें दस्तावेज़ डिजिटल रूप से भेजे जाते हैं और फिर भौतिक प्रति के रूप में नागरिक तक पहुंचाए जाते हैं। यह डिजिटल इंडिया की पहुंच को उन क्षेत्रों तक ले जाने का माध्यम है जहां डिजिटल साधनों की सीमाएं हैं।
  • जन शिकायत और अपील निवारण नागरिक-केंद्रित शासन का मूल तत्व है; समयबद्ध निपटान, जवाबदेही और पारदर्शिता इसके प्रमुख सिद्धांत हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अभियान की अवधि और दायरा 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक देशभर के डाक प्रतिष्ठानों में चलाया जा रहा यह अभियान संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग द्वारा संचालित है
मुख्य उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत रूप देना, लंबित मामलों में कमी लाना, अभिलेख (रिकॉर्ड) प्रबंधन को बढ़ावा देना और ई-अपशिष्ट (E-Waste) का जिम्मेदार निपटान सुनिश्चित करना
लक्ष्य बनाम उपलब्धि (16 अक्टूबर 2026 तक) जन शिकायत: 1,00,214 (लक्ष्य 1,50,000 का लगभग 67%); अपील: 764 (लक्ष्य 1,500 का लगभग 51%); स्वच्छता: 73,814 स्थान (लक्ष्य 1,35,000 का लगभग 55%)
स्क्रैप निपटान और राजस्व 2 अक्टूबर 2026 से अब तक 3,06,026 किलोग्राम स्क्रैप का निपटान, जिससे ₹67.56 लाख राजस्व प्राप्त हुआ
ई-अपशिष्ट निपटान 17,980 किलोग्राम ई-अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निपटान, जिससे ₹27.64 लाख राजस्व प्राप्त हुआ
वेस्ट टू वेल्थ पहल पश्चिम बंगाल डाक मंडल में विभागीय बढ़इयों और एमटीएस स्टाफ द्वारा बेकार लकड़ी के पुनः उपयोग से कोलकाता स्थित मेल मोटर सर्विस में वरिष्ठ प्रबंधक के कक्ष का नवीनीकरण

महत्व

प्रशासनिक सुधार

  • जन शिकायत और अपील के निपटान से प्रशासन में जवाबदेही और नागरिकों का भरोसा बढ़ता है।
  • लंबित मामलों में कमी से सेवा-वितरण की समयबद्धता सुधरती है।
  • कार्यालय के कार्य-वातावरण में सुधार से सार्वजनिक सेवा की कार्यकुशलता बढ़ती है।

पर्यावरणीय महत्व

  • ई-अपशिष्ट में सीसा और पारा जैसे विषैले तत्व हो सकते हैं, इसलिए इसका असुरक्षित निपटान मृदा और जल प्रदूषण का कारण बनता है।
  • वैज्ञानिक निपटान से पर्यावरणीय क्षति का जोखिम घटता है और ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुपालन का व्यावहारिक उदाहरण सामने आता है।

आर्थिक एवं संसाधन-प्रबंधन

  • स्क्रैप और ई-अपशिष्ट के निपटान से सरकारी राजस्व प्राप्त होता है।
  • बेकार सामग्री का पुनः उपयोग संसाधनों की बर्बादी घटाता है और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा को व्यवहार में लाता है।

नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण

  • डिजीपोस्ट मॉडल डिजिटल प्रक्रिया और भौतिक वितरण को जोड़ता है, जिससे डिजिटल रूप से तैयार सेवाएं उन नागरिकों तक भी पहुंचती हैं जिनकी डिजिटल पहुंच सीमित है।
  • डाक नेटवर्क की व्यापक भौतिक उपस्थिति सेवा-वितरण में सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को मजबूत करती है।

चुनौतियाँ

1. लक्ष्य-प्राप्ति का अंतर

  • अभियान की समाप्ति में शेष समय के बावजूद अपील (लगभग 51%) और स्वच्छता (लगभग 55%) के लक्ष्य अभी आधे के आसपास हैं।
  • निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए संसाधनों का लक्ष्य-आधारित आवंटन आवश्यक है।

2. अपील निपटान की धीमी गति

  • जन शिकायतों की तुलना में अपीलों का निपटान अपेक्षाकृत कम हुआ है।
  • अपील में निर्णय-प्रक्रिया अधिक जटिल होती है, इसलिए इसके लिए सक्षम अधिकारी और स्पष्ट प्रक्रिया आवश्यक है।

3. ई-अपशिष्ट का अनौपचारिक पुनर्चक्रण

  • ई-अपशिष्ट का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में असुरक्षित तरीकों से निपटाया जाता है, जिससे श्रमिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा होता है।
  • औपचारिक और प्रमाणित पुनर्चक्रण इकाइयों तक ई-अपशिष्ट की पहुंच बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है।

4. उत्पादक उत्तरदायित्व का सीमित प्रवर्तन

  • ई-अपशिष्ट निपटान में विस्तारित उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) के सिद्धांत को व्यवहार में लागू करना आवश्यक है।
  • उपभोक्ता स्तर पर पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सही स्थान पर जमा करने की आदत अभी सीमित है।

5. डिजिटल विभाजन

  • डिजीपोस्ट जैसी फिजिकल-डिजिटल सेवाएं डिजिटल साक्षरता की कमी वाले क्षेत्रों में भी सेवा पहुंचाने की क्षमता रखती हैं, परंतु डिजिटल पहुंच में असमानता बनी रहती है।
  • सेवा-वितरण में डिजिटल और भौतिक माध्यमों के बीच समन्वय बनाए रखना आवश्यक है।

6. स्वच्छता का दीर्घकालिक संस्थागतकरण

  • अभियान की अवधि के बाद भी स्वच्छता की आदतें बनाए रखना एक निरंतर चुनौती है।
  • अभियान-आधारित प्रयास और नियमित कार्य-संस्कृति के बीच अंतर को पाटना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता
लक्ष्य में पिछड़ाव अपील (लगभग 51%) और स्वच्छता (लगभग 55%) में उपलब्धि आधे के आसपास है, जिससे समयसीमा के भीतर लक्ष्य पूरा होने पर प्रश्नचिह्न है
अपील निपटान की गति जन शिकायत की तुलना में अपीलों का निपटान कम है, जिससे उच्च स्तरीय समाधान की प्रक्रिया धीमी दिखती है
ई-अपशिष्ट का असुरक्षित निपटान अनौपचारिक क्षेत्र में पुनर्चक्रण से पर्यावरण प्रदूषण और श्रमिक स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता है
उत्तरदायित्व का विभाजन उत्पादक, उपभोक्ता और सरकार के बीच भूमिका स्पष्ट न होने से ई-अपशिष्ट संग्रह की दक्षता प्रभावित होती है
डिजिटल विभाजन डिजिटल पहुंच की असमानता से डिजीपोस्ट जैसी सेवाओं का लाभ सभी नागरिकों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाता
अभियान पर निर्भरता अभियान की समाप्ति के बाद स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन की निरंतरता सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • विशेष अभियान 6.0 (Special Campaign 6.0)
  • डिजीपोस्ट (DigiPost): डाक विभाग की फिजिकल-डिजिटल मेल सेवा

आगे की राह

  • अपील निपटान के लिए अलग निगरानी तंत्र बनाकर शेष अवधि में लक्ष्य-प्राप्ति की नियमित समीक्षा की जाए।
  • स्वच्छता अभियान को स्थायी कार्य-संस्कृति में बदलने के लिए नियमित स्वच्छता-जांच और कर्मचारियों का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए।
  • ई-अपशिष्ट के संग्रह के लिए नागरिकों में जागरूकता बढ़ाई जाए और प्रमाणित पुनर्चक्रण इकाइयों से संपर्क मजबूत किया जाए।
  • विस्तारित उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) के सिद्धांत के अनुरूप उत्पादकों की भागीदारी को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
  • डिजीपोस्ट जैसी सेवाओं का विस्तार करते समय डिजिटल रूप से वंचित क्षेत्रों और नागरिकों की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए।
  • पुनः उपयोग की पहलों, जैसे वेस्ट टू वेल्थ मॉडल, को अन्य डाक मंडलों में दस्तावेजीकृत करके अपनाने के लिए मानक प्रक्रिया बनाई जाए।
  • जन शिकायत निवारण के लिए शिकायत-प्रणाली और अपील-प्रणाली के बीच समन्वय बढ़ाकर नागरिकों के लिए समाधान की समयसीमा घटाई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विशेष अभियान 6.0 (Special Campaign 6.0) · जन शिकायत निवारण (Public Grievance Redressal) · सीपीग्राम (CPGRAMS) · ई-अपशिष्ट प्रबंधन (E-Waste Management) · विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility) · कचरे से संपदा (Waste to Wealth) · चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) · फिजिकल-डिजिटल (Phygital) सेवा वितरण · नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-Centric Governance) · जवाबदेह प्रशासन (Accountable Administration) · स्वच्छता को संस्थागत रूप देना (Institutionalisation of Cleanliness) · मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण और सुधार का राज्य का दायित्व, जो ई-अपशिष्ट निपटान से जुड़ा है
  • अनुच्छेद 51A(छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार का मूल कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

डाक प्रतिष्ठानों में लंबित मामलों, अपीलों, स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं की पहचान  →  विशेष अभियान 6.0 के माध्यम से समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित कर जन शिकायत और अपील का निपटान तथा स्वच्छता गतिविधियां चलाना  →  स्क्रैप और ई-अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान से पर्यावरण सुरक्षा और सरकारी राजस्व की प्राप्ति  →  बेकार सामग्री के पुनः उपयोग (वेस्ट टू वेल्थ) से कार्यालय के बुनियादी ढांचे में सुधार और संसाधनों की बचत  →  कार्यालय-कार्यकुशलता और कार्य-वातावरण में सुधार से नागरिक-अनुभव का बेहतर होना  →  डिजीपोस्ट जैसी फिजिकल-डिजिटल सेवाओं से डिजिटल रूप से तैयार नागरिक सेवाओं की भौतिक पहुंच सुनिश्चित होना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) का प्रावधान है।
2. ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं।
3. ई-अपशिष्ट में सीसा और पारा जैसे खतरनाक पदार्थ हो सकते हैं, इसलिए इसका वैज्ञानिक निपटान आवश्यक है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में उत्पादकों पर EPR के अंतर्गत संग्रह और पुनर्चक्रण के लक्ष्य लागू होते हैं। कथन 2 सही है: ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 और 25 के अंतर्गत बनाए गए हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे खतरनाक पदार्थ होना सही है, इसलिए इसका कथन सही है; अतः परीक्षा में सावधानी से परखें कि कथन में प्रस्तुत अधिनियम का नाम सही है या नहीं।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A और R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): मौलिक कर्तव्यों में पर्यावरण की रक्षा और उसके संवर्धन का कर्तव्य सम्मिलित है।
कारण (R): मौलिक कर्तव्यों का पालन न करने पर न्यायालय द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।

उत्तर: (A) सही है, लेकिन (R) गलत है। — कथन (A) सही है: अनुच्छेद 51A(छ) के अंतर्गत पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है। कारण (R) गलत है, क्योंकि मौलिक कर्तव्यों के लिए संविधान में कोई प्रवर्तन या दंड का प्रावधान नहीं है; इन्हें न्यायालय द्वारा सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची-I (अवधारणा/पहल)
A. विस्तारित उत्पादक दायित्व
B. चक्रीय अर्थव्यवस्था
C. सीपीग्राम (CPGRAMS)
D. फिजिकल-डिजिटल सेवा

सूची-II (विवरण)
1. जन शिकायतों की ऑनलाइन दर्ज और निगरानी प्रणाली
2. उत्पादकों पर उत्पाद के जीवन-चक्र के अंत तक अपशिष्ट के संग्रह और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी
3. संसाधनों के पुन: उपयोग और अपशिष्ट न्यूनीकरण पर आधारित आर्थिक मॉडल
4. डिजिटल दस्तावेज को भौतिक डाक नेटवर्क से नागरिक तक पहुँचाना

सही मिलान चुनिए:

  1. A-2, B-3, C-1, D-4
  2. A-1, B-2, C-3, D-4
  3. A-2, B-1, C-4, D-3
  4. A-3, B-2, C-1, D-4

उत्तर: A-2, B-3, C-1, D-4 — A-2: EPR में उत्पादक का दायित्व उत्पाद के जीवन-चक्र के अंत तक होता है। B-3: चक्रीय अर्थव्यवस्था में संसाधनों का पुन: उपयोग और अपशिष्ट न्यूनीकरण केंद्र में होता है। C-1: सीपीग्राम जन शिकायतों की ऑनलाइन प्रणाली है। D-4: डिजिटल चालान जैसे दस्तावेज भौतिक रूप में डाक द्वारा नागरिक तक पहुँचाए जाते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विशेष अभियान 6.0 जैसी समयबद्ध पहलें सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और जन शिकायत निवारण को संस्थागत रूप देने का एक साधन हैं। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि समयबद्ध अभियानों की तुलना में नियमित, प्रणाली-आधारित सुधार दीर्घकालिक दृष्टि से अधिक टिकाऊ क्यों सिद्ध हो सकते हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
1. भूमिका: विशेष अभियान 6.0 (2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026) के आँकड़े, जैसे 16 अक्टूबर 2026 तक 1,00,214 जन शिकायतें (लक्ष्य का लगभग 67%), 73,814 स्वच्छता स्थल (लगभग 55%) और 764 अपीलें (लगभग 51%) निपटाई गईं; अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत रूप देना और लंबित मामले घटाना है।
2. संवैधानिक एवं नीतिगत आधार: अनुच्छेद 51A(छ) (मौलिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण), अनुच्छेद 48A (राज्य का नीति-निदेशक तत्व), सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (धारा 19 के अंतर्गत प्रथम अपील), और सेवा वितरण की नागरिक-केंद्रित अवधारणा जिसे द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (Second Administrative Reforms Commission) ने रेखांकित किया।
3. संस्थागत ढाँचा: सीपीग्राम (CPGRAMS), प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) की निगरानी, और मिशन कर्मयोगी (2020) के अंतर्गत क्षमता-निर्माण।
4. अभियान के पक्ष: जन-सहभागिता और लक्ष्य-आधारित गति; दृश्य परिणाम (स्वच्छता, लंबित मामलों में कमी); कार्यस्थल के वातावरण में तत्काल सुधार; कबाड़ निपटान से राजस्व (₹67.56 लाख) जैसे प्रोत्साहन।
5. आलोचनात्मक पक्ष: मैक्स वेबर का नौकरशाही का आदर्श-प्रारूप (नियम-आधारित, निरंतर प्रक्रिया) बनाम अभियान-मोड की अस्थायी ऊर्जा; गुडहार्ट का नियम (लक्ष्य मापदंड बनते ही मापदंड का लक्ष्य में बदल जाना) — संख्यात्मक लक्ष्यों के कारण गुणवत्ता पर असर; माइकल लिप्स्की की ‘स्ट्रीट-लेवल ब्यूरोक्रेसी’ अवधारणा के अनुसार अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी (डाक कर्मचारी) पर अतिरिक्त कार्यभार; अभियान समाप्ति के बाद शिथिलता का जोखिम।
6. सन्तुलित निष्कर्ष: अभियान उत्प्रेरक का कार्य करते हैं, पर टिकाऊ परिवर्तन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), कार्य-निष्पादन मूल्यांकन में स्वच्छता और शिकायत-निवारण के संकेतक, डिजिटल निगरानी और नियमित प्रशिक्षण आवश्यक हैं।
7. दूसरा भाग (परिणामी तर्क): नियमित प्रणाली में अपील-निवारण की समय-सीमा, जवाबदेही-तंत्र और आंतरिक ऑडिट को स्थायी रूप से शामिल करना; ई-अपशिष्ट के मामले में ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के EPR संकेतकों की भूमिका तथा CPCB द्वारा निगरानी का उदाहरण देना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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