16 Sep विश्व ओजोन दिवस 2026: भारत ने लॉन्च किए नेट जीरो पोर्टल और एनएपीसीसी डैशबोर्ड
✎ भारत का नेट जीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड देश की जलवायु कार्रवाई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने, पारदर्शिता बढ़ाने और विभिन्न संस्थाओं द्वारा स्वैच्छिक नेट जीरो लक्ष्यों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (सूचना प्रौद्योगिकी) | GS Paper II — शासन (ई-गवर्नेंस)
- Prelims: नेट जीरो पोर्टल, NAPCC डैशबोर्ड, विश्व ओजोन दिवस, नेट जीरो उत्सर्जन, जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC), स्कोप 1, 2, 3 उत्सर्जन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- Essay: जलवायु परिवर्तन: चुनौतियाँ और भारत की प्रतिक्रिया, सतत विकास और प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत का नेट जीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड देश की जलवायु कार्रवाई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने, पारदर्शिता बढ़ाने और विभिन्न संस्थाओं द्वारा स्वैच्छिक नेट जीरो लक्ष्यों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने विश्व ओजोन दिवस 2026 के अवसर पर भारत के नेट जीरो पोर्टल और जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) डैशबोर्ड का शुभारंभ किया। ये दोनों डिजिटल पहलें भारत की जलवायु कार्रवाई प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ करने, पारदर्शिता बढ़ाने और विभिन्न संस्थाओं द्वारा स्वैच्छिक नेट जीरो लक्ष्यों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
पृष्ठभूमि
- भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net Zero Emission) का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे ग्लासगो में COP26 शिखर सम्मेलन में घोषित किया गया था।
- जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) को 2008 में लॉन्च किया गया था, जिसमें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आठ राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं।
- भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) और आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) जैसी वैश्विक पहलों में सक्रिय भागीदार रहा है।
- देश ने अपनी राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions – NDCs) को अद्यतन किया है, जिसमें 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 50% संचयी विद्युत शक्ति स्थापित क्षमता प्राप्त करने और उत्सर्जन तीव्रता को 45% तक कम करने का लक्ष्य शामिल है।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और अनुकूलन के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को अपनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
नेट जीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड क्या हैं?
- नेट जीरो पोर्टल एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है जो विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय संस्थाओं द्वारा शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्रतिबद्धताओं के स्वैच्छिक पंजीकरण और प्रकटीकरण की सुविधा प्रदान करता है।
- यह पोर्टल भाग लेने वाली संस्थाओं को अपने ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse Gas) उत्सर्जन का विवरण देने, नेट जीरो लक्ष्य घोषित करने और वार्षिक प्रगति संबंधी जानकारी अपडेट करने की अनुमति देता है।
- संस्थाओं को स्कोप 1 (प्रत्यक्ष उत्सर्जन) और स्कोप 2 (खरीदी गई ऊर्जा से अप्रत्यक्ष उत्सर्जन) उत्सर्जन की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि स्कोप 3 (मूल्य श्रृंखला में अन्य अप्रत्यक्ष उत्सर्जन) उत्सर्जन की रिपोर्टिंग स्वैच्छिक है।
- NAPCC डैशबोर्ड जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के अंतर्गत राष्ट्रीय मिशनों के कार्यान्वयन और प्रगति का एक समेकित डिजिटल दृश्य प्रस्तुत करता है।
- यह डैशबोर्ड मिशन से संबंधित सूचनाओं और संकेतकों को एक साझा मंच पर एकत्र करता है, जिससे संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा व्यवस्थित निगरानी संभव होती है।
- इसका उद्देश्य अंतर-मंत्रालयी समन्वय को मजबूत करना, साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन में सहायता करना और कार्यान्वयन संबंधी कमियों की पहचान करना है।
- ये पहलें पारदर्शिता बढ़ाती हैं, विश्वसनीय दीर्घकालिक जलवायु नियोजन को प्रोत्साहित करती हैं और भारत की घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच संबंधों को सुदृढ़ करती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भारत का नेट ज़ीरो पोर्टल | विभिन्न भारतीय संस्थाओं द्वारा स्वैच्छिक नेट ज़ीरो प्रतिबद्धताओं के पंजीकरण और प्रकटीकरण के लिए केंद्रीकृत डिजिटल मंच। |
| एनएपीसीसी डैशबोर्ड | जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) के अंतर्गत राष्ट्रीय मिशनों के कार्यान्वयन और प्रगति की समेकित निगरानी। |
| पारदर्शिता और जवाबदेही | संस्थाओं को अपने ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse Gas) उत्सर्जन, नेट ज़ीरो लक्ष्यों और वार्षिक प्रगति की रिपोर्ट करने में सक्षम बनाना। |
| साक्ष्य-आधारित जलवायु कार्रवाई | राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाइयों के मूल्यांकन और कार्यान्वयन संबंधी कमियों की पहचान के लिए डेटा उपलब्ध कराना। |
| अंतर-मंत्रालयी समन्वय | एनएपीसीसी डैशबोर्ड के माध्यम से संबंधित मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में स्वैच्छिक कार्रवाइयों को बढ़ावा देना और उन्हें एक साझा मंच पर लाना।
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ करना।
शासनिक महत्व
- प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन (Technology-enabled Governance) को बढ़ावा देना और जलवायु कार्रवाई में डिजिटल उपकरणों का उपयोग करना।
- विभिन्न संस्थाओं, संगठनों और उद्योगों द्वारा की गई जलवायु प्रतिबद्धताओं का एक समेकित भंडार तैयार करना।
- साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और कार्यान्वयन के लिए आवश्यक डेटा और निगरानी तंत्र प्रदान करना।
आर्थिक महत्व
- स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) की ओर संक्रमण, ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) और कार्बन निष्कासन (Carbon Sequestration) से संबंधित उपायों को प्रोत्साहित करना।
- निम्न कार्बन (Low Carbon) और जलवायु-अनुकूल भविष्य की ओर भारत के संक्रमण में व्यापक भागीदारी को सुगम बनाना।
- जलवायु-संबंधित निवेशों और नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करना।
चुनौतियाँ
1. डेटा की सटीकता और सत्यापन
- स्वैच्छिक रिपोर्टिंग में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
- रिपोर्ट किए गए उत्सर्जन और प्रगति का स्वतंत्र सत्यापन तंत्र स्थापित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण; जलवायु परिवर्तन
2. व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना
- सभी क्षेत्रों और आकार की संस्थाओं को नेट ज़ीरो प्रतिबद्धताएं अपनाने और पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
यूपीएससी लिंक: सतत विकास; समावेशी विकास
3. दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं का पालन
- संस्थाओं द्वारा घोषित नेट ज़ीरो लक्ष्यों के दीर्घकालिक पालन और कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना।
- लक्ष्यों से भटकने वाली संस्थाओं के लिए सुधारात्मक तंत्र विकसित करना।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण नीति; जलवायु शासन
4. तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ
- स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और कार्बन निष्कासन उपायों को अपनाने के लिए आवश्यक तकनीकी और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता।
- विशेषकर विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त (Climate Finance) की कमी।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी; आर्थिक विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डेटा की गुणवत्ता | स्वैच्छिक रिपोर्टिंग में डेटा की सटीकता और सत्यापन की कमी। |
| पहुंच और जागरूकता | छोटे संगठनों और ग्रामीण क्षेत्रों में पोर्टल के बारे में जागरूकता और पहुंच की कमी। |
| संसाधन उपलब्धता | नेट ज़ीरो लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की कमी। |
| अंतर्राष्ट्रीय समन्वय | वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के साथ घरेलू कार्रवाइयों का प्रभावी ढंग से समन्वय। |
| नीतिगत निरंतरता | दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नीतिगत स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC)
आगे की राह
- पोर्टल पर रिपोर्ट किए गए डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत सत्यापन तंत्र विकसित करना।
- छोटे और मध्यम उद्यमों सहित सभी क्षेत्रों की संस्थाओं को नेट ज़ीरो प्रतिबद्धताएं अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- नेट ज़ीरो लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और कार्बन निष्कासन उपायों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
- जलवायु वित्त तक पहुंच में सुधार करना और हरित परियोजनाओं के लिए निवेश आकर्षित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय जलवायु समझौतों और लक्ष्यों के साथ घरेलू जलवायु कार्रवाइयों का प्रभावी ढंग से समन्वय करना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक अभियान चलाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नेट ज़ीरो पोर्टल · एनएपीसीसी डैशबोर्ड · जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) · शुद्ध-शून्य उत्सर्जन · कार्बन निष्कासन · स्वैच्छिक जलवायु कार्रवाई · पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय · विश्व ओजोन दिवस · हरितगृह गैस उत्सर्जन · प्रौद्योगिकी-सक्षम गवर्नेंस
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान वृद्धि की चुनौती → भारत द्वारा नेट ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य की घोषणा → नेट ज़ीरो पोर्टल और एनएपीसीसी डैशबोर्ड का शुभारंभ → संस्थाओं द्वारा स्वैच्छिक उत्सर्जन रिपोर्टिंग और लक्ष्य निर्धारण → पारदर्शिता, निगरानी और साक्ष्य-आधारित जलवायु कार्रवाई → निम्न कार्बन और जलवायु-अनुकूल भविष्य की ओर संक्रमण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का नेट ज़ीरो पोर्टल भारतीय संस्थाओं द्वारा शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्रतिबद्धताओं के स्वैच्छिक पंजीकरण और प्रकटीकरण के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है।
2. एनएपीसीसी डैशबोर्ड का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) के अंतर्गत राष्ट्रीय मिशनों के कार्यान्वयन और प्रगति की निगरानी करना है।
3. नेट ज़ीरो पोर्टल पर संस्थाओं को केवल स्कोप 1 उत्सर्जन की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि स्कोप 2 और 3 उत्सर्जन की रिपोर्टिंग स्वैच्छिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि पोर्टल संस्थाओं को स्कोप 1 और स्कोप 2 उत्सर्जन की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जबकि स्कोप 3 उत्सर्जन की रिपोर्टिंग स्वैच्छिक है।
Q2. भारत के नेट ज़ीरो पोर्टल और एनएपीसीसी डैशबोर्ड के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. ये पहलें भारत के ‘निम्न कार्बन और जलवायु-अनुकूल भविष्य’ की ओर संक्रमण में व्यापक भागीदारी को सुगम बनाएंगी।
2. नेट ज़ीरो पोर्टल पर सफलतापूर्वक नेट ज़ीरो लक्ष्यों की घोषणा करने वाली संस्थाओं को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से एक स्वीकृति पत्र प्रदान किया जाएगा।
3. एनएपीसीसी डैशबोर्ड अंतर-मंत्रालयी समन्वय को मजबूत करने में सहायता करेगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी कथन सही हैं। ये डिजिटल पहलें भारत के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और पारदर्शिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के नेट ज़ीरो पोर्टल और जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) डैशबोर्ड का शुभारंभ भारत के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक होगा? इन डिजिटल पहलों के महत्व और संभावित चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: नेट ज़ीरो पोर्टल और एनएपीसीसी डैशबोर्ड का संक्षिप्त परिचय और उनके शुभारंभ का संदर्भ (विश्व ओजोन दिवस 2026)।
2. सहायता के बिंदु (महत्व):
क. पारदर्शिता और जवाबदेही: स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं का केंद्रीकृत प्रकटीकरण, राष्ट्रीय मिशनों की निगरानी।
ख. समन्वय: अंतर-मंत्रालयी समन्वय, साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन।
ग. भागीदारी: विभिन्न संस्थाओं (उद्योग, संगठन) की स्वैच्छिक जलवायु कार्रवाई को प्रोत्साहन।
घ. नीति निर्माण: क्षेत्रवार प्रगति का आकलन, कार्यान्वयन संबंधी कमियों की पहचान।
ङ. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं: भारत की अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं के साथ घरेलू कार्रवाइयों का संबंध।
च. प्रौद्योगिकी-सक्षम गवर्नेंस: डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर जलवायु कार्रवाई को सुदृढ़ करना।
3. संभावित चुनौतियाँ:
क. डेटा की सटीकता और सत्यापन: रिपोर्ट किए गए उत्सर्जन डेटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।
ख. स्वैच्छिक प्रकृति: प्रतिबद्धताओं के पालन को सुनिश्चित करने में सीमाएं।
ग. तकनीकी पहुंच और क्षमता: सभी हितधारकों के लिए प्लेटफॉर्म तक पहुंच और उपयोग की क्षमता।
घ. स्कोप 3 उत्सर्जन: इसकी स्वैच्छिक रिपोर्टिंग से उत्पन्न होने वाली चुनौतियाँ।
ङ. अंतर-मंत्रालयी डेटा एकीकरण: विभिन्न मंत्रालयों से डेटा के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करना।
4. निष्कर्ष: भारत के जलवायु लक्ष्यों की दिशा में इन पहलों का समग्र महत्व और आगे बढ़ने के लिए आवश्यक कदम।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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