26 Sep संयुक्त राष्ट्र में भारत ने वैश्विक महामारी तैयारी की प्रतिबद्धता दोहराई
✎ भारत वैश्विक महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य' के सिद्धांत पर आधारित न्यायसंगत तथा समावेशी दृष्टिकोण का समर्थन करता है, जिसमें WHO महामारी समझौते के तहत निष्पक्ष रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper II — स्वास्थ्य | GS Paper III — आपदा प्रबंधन
- Prelims: संयुक्त राष्ट्र उच्च-स्तरीय बैठक, WHO महामारी समझौता, एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य, ग्लोबल साउथ, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण (PABS)
- Essay: वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भारत की भूमिका, महामारी से निपटने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत वैश्विक महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ के सिद्धांत पर आधारित न्यायसंगत तथा समावेशी दृष्टिकोण का समर्थन करता है, जिसमें WHO महामारी समझौते के तहत निष्पक्ष रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण पर विशेष जोर दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘महामारी की रोकथाम, तैयारियों और प्रतिक्रिया’ विषय पर आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने वैश्विक महामारी की तैयारियों और उससे निपटने की क्षमता को मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और कोविड-19 महामारी से मिले सबक को सतत निवेश, संस्थागत क्षमता तथा लचीली स्वास्थ्य प्रणालियों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया।
पृष्ठभूमि
- कोविड-19 महामारी ने वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों की कमजोरियों को उजागर किया और भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
- भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ (One Earth, One Health) के सिद्धांत का पालन करते हुए लगभग 100 देशों को 30 करोड़ वैक्सीन खुराकें और 150 से अधिक देशों को चिकित्सा सहायता प्रदान की।
- मई 2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) महामारी समझौता (Pandemic Accord) अपनाया गया, जिसका उद्देश्य भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए एक वैश्विक ढाँचा तैयार करना है।
- भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) को वैश्विक सार्वजनिक वस्तु के रूप में मान्यता देने की वकालत की है, क्योंकि इसने महामारी के दौरान निगरानी, टीकाकरण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- वैश्विक एकजुटता और आवश्यक स्वास्थ्य उत्पादों तक न्यायसंगत पहुँच महामारी प्रतिक्रिया के प्रमुख स्तंभ हैं, जिन पर भारत लगातार जोर देता रहा है।
WHO महामारी समझौता और भारत का दृष्टिकोण
- WHO महामारी समझौता एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी उपकरण है जिसका उद्देश्य भविष्य की महामारियों की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है।
- भारत ने इस समझौते को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण (Pathogen Access and Benefit-Sharing – PABS) की एक न्यायसंगत प्रणाली पर निर्भर करती है।
- PABS प्रणाली का अर्थ है कि जिन देशों से रोगजनक और जैविक संसाधन प्राप्त होते हैं, उन्हें राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए, टीकों, निदान संबंधी साधनों, उपचारों और प्रौद्योगिकियों जैसे लाभों तक समयबद्ध पहुँच मिलनी चाहिए।
- भारत ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक घोषणा-पत्र में PABS पर चल रही वार्ताओं के परिणाम का पूर्वानुमान नहीं लगाया जाना चाहिए और इसे राष्ट्रीय परिस्थितियों एवं क्षमताओं के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को वैश्विक सार्वजनिक वस्तु के रूप में मान्यता देने की भारत की मांग वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में डिजिटल समाधानों की क्षमता को दर्शाती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता | यह दर्शाता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। |
| महामारी से निपटने की तैयारी में समानता और वैश्विक एकजुटता | यह सुनिश्चित करता है कि महामारी प्रतिक्रिया में सभी देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ, को समान अवसर और संसाधन मिलें। |
| डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को वैश्विक सार्वजनिक वस्तु के रूप में मान्यता | डिजिटल समाधानों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करता है, जो निगरानी, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं में सहायक हैं। |
| निष्पक्ष रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण (PABS) | यह सुनिश्चित करता है कि रोगजनकों में योगदान करने वाले देशों को टीकों, निदान और उपचार तक समयबद्ध पहुँच मिले। |
| एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य सिद्धांत | यह दर्शाता है कि मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य परस्पर जुड़े हुए हैं और इन्हें समग्र रूप से संबोधित किया जाना चाहिए। |
महत्व
अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं कूटनीति
- भारत की वैश्विक नेतृत्व की भूमिका को सुदृढ़ करता है, विशेषकर स्वास्थ्य कूटनीति में।
- ग्लोबल साउथ के देशों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जैसा कि कोविड-19 के दौरान वैक्सीन और चिकित्सा सहायता प्रदान करने से स्पष्ट है।
स्वास्थ्य एवं सार्वजनिक नीति
- महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय विजन प्रस्तुत करता है।
- लचीली स्वास्थ्य प्रणालियों, प्रयोगशाला नेटवर्क और आपातकालीन समन्वय के विस्तार पर जोर देता है।
आर्थिक एवं सामाजिक
- महामारी के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए वैश्विक सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के उपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता और दक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
चुनौतियाँ
1. वैश्विक असमानता
- टीकों, निदान और उपचार तक पहुँच में असमानता बनी हुई है, जिससे कमजोर देशों को अधिक नुकसान होता है।
- महामारी से निपटने की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधनों और क्षमताओं में देशों के बीच भारी अंतर है।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य, गरीबी और विकास
2. डेटा साझाकरण और संप्रभुता
- रोगजनकों और जैविक संसाधनों के डेटा साझाकरण पर राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान को बनाए रखना एक चुनौती है।
- लाभ-साझाकरण प्रणाली को राष्ट्रीय परिस्थितियों और क्षमताओं के अनुरूप लागू करने में जटिलताएँ आती हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और संप्रभुता
3. वित्तीयन और निवेश
- महामारी की तैयारी के लिए सतत निवेश और घरेलू वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, खासकर विकासशील देशों के लिए।
- अंतर्राष्ट्रीय सहायता को राष्ट्रीय जिम्मेदारी का पूरक बनाने के लिए प्रभावी तंत्र की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विकासशील देशों का वित्तपोषण
4. डब्ल्यूएचओ महामारी समझौते का कार्यान्वयन
- समझौते के तहत निष्पक्ष रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।
- राजनीतिक घोषणा-पत्र में चल रही वार्ताओं के परिणामों का पूर्वानुमान न लगाने और राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्यान्वयन की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और उनका कार्यान्वयन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वैश्विक स्वास्थ्य असमानता | टीकों, उपचारों और नैदानिक साधनों तक पहुँच में धनी और गरीब देशों के बीच बड़ा अंतर। |
| रोगजनक डेटा साझाकरण | राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए रोगजनकों और जैविक संसाधनों की जानकारी साझा करने में हिचकिचाहट। |
| महामारी तैयारी का वित्तपोषण | सतत निवेश और घरेलू वित्तपोषण की कमी, जिससे स्वास्थ्य प्रणालियों की लचीलापन प्रभावित होता है। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का अभाव | महामारी प्रतिक्रिया में वैश्विक एकजुटता और समन्वय की कमी, जिससे प्रयासों में दोहराव या अंतराल हो सकता है। |
| डिजिटल डिवाइड | डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तक पहुँच में असमानता, जिससे कुछ देश डिजिटल समाधानों का पूरा लाभ नहीं उठा पाते। |
आगे की राह
- वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सतत निवेश और संस्थागत क्षमता निर्माण को प्राथमिकता देना।
- डब्ल्यूएचओ महामारी समझौते के तहत निष्पक्ष रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करना।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को वैश्विक सार्वजनिक वस्तु के रूप में मान्यता देना और इसके विकास एवं पहुँच को बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना और स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए लचीली प्रणालियों का निर्माण करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को बढ़ावा देना, विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों के साथ, ताकि सभी को समान पहुँच और संसाधन मिल सकें।
- ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ सिद्धांत को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप लागू करना, जिसमें मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एकीकृत किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वैश्विक महामारी तैयारी · स्वास्थ्य सुरक्षा · डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना · एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य · WHO महामारी समझौता · रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · लचीली स्वास्थ्य प्रणालियाँ · ग्लोबल साउथ · राष्ट्रीय संप्रभुता
अवधारणा प्रवाह
वैश्विक महामारी का खतरा → अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता → भारत की प्रतिबद्धता और पहलें (वैक्सीन मैत्री, डिजिटल समाधान) → डब्ल्यूएचओ महामारी समझौता और PABS का महत्व → भविष्य की महामारियों के लिए वैश्विक तैयारी और प्रतिक्रिया
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान लगभग 100 देशों को 30 करोड़ वैक्सीन की खुराकें उपलब्ध कराईं।
2. ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ सिद्धांत भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण घटक है, विशेषकर स्वास्थ्य कूटनीति के क्षेत्र में।
3. WHO महामारी समझौता मई 2025 में अपनाया गया था और इसका उद्देश्य रोगजनकों तक निष्पक्ष पहुँच सुनिश्चित करना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। भारत ने कोविड-19 के दौरान लगभग 100 देशों और संयुक्त राष्ट्र की दो संस्थाओं को 30 करोड़ वैक्सीन की खुराकें प्रदान कीं। कथन 2 सही है। ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ सिद्धांत भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, विशेषकर ग्लोबल साउथ के प्रति। कथन 3 सही है। WHO महामारी समझौता मई 2025 में अपनाया गया था और इसका उद्देश्य रोगजनक तक निष्पक्ष पहुँच और लाभ-साझाकरण की एक न्यायसंगत प्रणाली स्थापित करना है।
Q2. WHO महामारी समझौते के संदर्भ में, ‘निष्पक्ष रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण (PABS)’ का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- महामारी के दौरान विकसित टीकों के लिए पेटेंट अधिकारों को समाप्त करना।
- रोगजनकों और जैविक संसाधनों का योगदान करने वाले देशों को टीकों, निदान संबंधी साधनों और उपचारों तक समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित करना।
- केवल विकसित देशों के बीच महामारी से संबंधित प्रौद्योगिकियों का आदान-प्रदान करना।
- महामारी की तैयारी के लिए केवल राष्ट्रीय वित्तपोषण पर निर्भर रहना।
उत्तर: रोगजनकों और जैविक संसाधनों का योगदान करने वाले देशों को टीकों, निदान संबंधी साधनों और उपचारों तक समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित करना। — निष्पक्ष रोगजनक पहुँच और लाभ-साझाकरण (PABS) का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोगजनकों और जैविक संसाधनों का योगदान करने वाले देशों को राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए, टीकों, निदान संबंधी साधनों, उपचारों, प्रौद्योगिकियों और अन्य लाभों तक समयबद्ध पहुँच मिले।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ वैश्विक महामारी की तैयारियों और प्रतिक्रिया को मजबूत करने में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की भूमिका का परीक्षण कीजिए। ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ सिद्धांत के संदर्भ में भारत के योगदान पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: वैश्विक महामारी की तैयारियों और प्रतिक्रिया के महत्व को संक्षेप में बताएं।
2. डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की भूमिका:
– निगरानी, टीकाकरण, जोखिम संचार में डिजिटल समाधानों का महत्व।
– आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने में भूमिका।
– भारत के अनुभव (जैसे CoWIN) का उल्लेख।
– इसे एक ‘वैश्विक सार्वजनिक वस्तु’ के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता।
3. ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ सिद्धांत:
– इस सिद्धांत का अर्थ और व्यापक दृष्टिकोण (मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य का अंतर्संबंध)।
– भारत की प्रतिबद्धता और ग्लोबल साउथ के प्रति इसकी भूमिका।
– कोविड-19 के दौरान भारत द्वारा वैक्सीन और चिकित्सा सहायता प्रदान करने के उदाहरण (लगभग 100 देशों को 30 करोड़ वैक्सीन, 150 से अधिक देशों को चिकित्सा सहायता)।
– अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता पर भारत का जोर।
4. निष्कर्ष: वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए डिजिटल अवसंरचना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व को दोहराते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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