सुपर एल नीनो: 4.51 लाख अतिरिक्त मौतों के अनुमान की गणना कैसे हुई?

Super El Nino report: Co-author explains methodology behind '451,000 excess deaths' estimate — diagram

सुपर एल नीनो: 4.51 लाख अतिरिक्त मौतों के अनुमान की गणना कैसे हुई?

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El Niño impact chain

✎ अल नीनो प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य गर्म होने की एक घटना है जो वैश्विक मौसम पैटर्न, विशेषकर भारत में मानसूनी वर्षा और तापमान को प्रभावित करती है, जिसके गंभीर सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल, जलवायु विज्ञान)  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, आपदा प्रबंधन)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (कृषि पर प्रभाव)  |  GS Paper II — स्वास्थ्य (सार्वजनिक स्वास्थ्य)
  • Prelims: अल नीनो, ला नीना, ENSO, प्रशांत महासागर, तापमान-मृत्यु दर संबंध, जलवायु परिवर्तन, मानसूनी वर्षा, कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा
  • Essay: जलवायु परिवर्तन: वैश्विक चुनौतियाँ और भारत की प्रतिक्रिया, भारत में आपदा प्रबंधन: चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास और पर्यावरणीय स्थिरता

त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य गर्म होने की एक घटना है जो वैश्विक मौसम पैटर्न, विशेषकर भारत में मानसूनी वर्षा और तापमान को प्रभावित करती है, जिसके गंभीर सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

इस रिपोर्ट के सह-लेखक ने इस अनुमान के पीछे की कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया है, जिसमें मौसमी तापमान पूर्वानुमान और तापमान-मृत्यु दर संबंधों का उपयोग किया गया है। यह रिपोर्ट अल नीनो के संभावित गंभीर प्रभावों और भारत के लिए इसके निहितार्थों पर प्रकाश डालती है।

पृष्ठभूमि

  • अल नीनो (El Niño) एक जटिल मौसम पैटर्न है जो प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से उत्पन्न होता है।
  • यह घटना वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है, जिसमें भारत में मानसूनी वर्षा पर भी इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
  • अल नीनो-दक्षिणी दोलन (El Niño-Southern Oscillation – ENSO) चक्र का गर्म चरण है, जबकि ला नीना (La Niña) इसका ठंडा चरण है।
  • ऐतिहासिक रूप से, अल नीनो की घटनाओं को भारत में कम मानसूनी वर्षा और सूखे से जोड़ा गया है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है।
  • जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में, अल नीनो जैसी चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने की आशंका है, जिससे उनके सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव और भी गंभीर हो सकते हैं。
  • वर्तमान रिपोर्ट तापमान में वृद्धि और मानव स्वास्थ्य, विशेषकर मृत्यु दर पर इसके प्रभावों के बीच संबंध को उजागर करती है।

अल नीनो क्या है?

  • अल नीनो एक आवर्ती जलवायु पैटर्न है जो पूर्वी और मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की विशेषता है।
  • यह घटना आमतौर पर हर 2 से 7 साल में होती है और 9 से 12 महीने तक चल सकती है, हालांकि कुछ घटनाएँ लंबी भी हो सकती हैं।
  • अल नीनो ‘अल नीनो-दक्षिणी दोलन’ (ENSO) चक्र का गर्म चरण है, जबकि ‘ला नीना’ इसका ठंडा चरण है। ENSO पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • अल नीनो के दौरान, प्रशांत महासागर में व्यापारिक पवनें (Trade Winds) कमजोर पड़ जाती हैं या अपनी दिशा बदल लेती हैं, जिससे गर्म सतही जल पश्चिम से पूर्व की ओर, दक्षिण अमेरिका के तटों की ओर प्रवाहित होता है।
  • यह गर्म जल समुद्री जीवन को प्रभावित करता है, जैसे कि मछलियों की संख्या में कमी, और वैश्विक स्तर पर वर्षा पैटर्न, तापमान और चरम मौसमी घटनाओं को बदल देता है।
  • भारत के संदर्भ में, अल नीनो अक्सर कमजोर मानसूनी वर्षा, सूखे की स्थिति और कृषि उत्पादन में कमी से जुड़ा होता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • इसके अतिरिक्त, अल नीनो की घटनाएँ वैश्विक तापमान में वृद्धि में योगदान कर सकती हैं और गर्मी की लहरों तथा संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकती हैं।
  • वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ शब्द का उपयोग उन अल नीनो घटनाओं के लिए करते हैं जो औसत अल नीनो की तुलना में अधिक तीव्र होती हैं और जिनके वैश्विक प्रभाव अधिक गंभीर होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
अल नीनो (El Niño) यह प्रशांत महासागर में भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि को संदर्भित करता है, जिससे वैश्विक मौसम पैटर्न प्रभावित होते हैं।
सुपर अल नीनो यह अल नीनो का एक अधिक तीव्र रूप है, जिसके परिणामस्वरूप अत्यधिक मौसम की घटनाएँ, जैसे कि तीव्र गर्मी की लहरें और सूखे, अधिक गंभीर हो सकती हैं।
तापमान-मृत्यु दर संबंध यह अध्ययन का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो तापमान में वृद्धि और संबंधित मृत्यु दर के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है।
मौसमी तापमान पूर्वानुमान यह भविष्य के तापमान पैटर्न का अनुमान लगाने में मदद करता है, जिससे संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन किया जा सके।
अतिरिक्त मृत्यु दर अनुमान यह अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं के कारण होने वाली अनुमानित अतिरिक्त मौतों की संख्या को दर्शाता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके गंभीर प्रभाव को उजागर करता है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • अल नीनो जैसी जलवायु घटनाएँ वैश्विक और क्षेत्रीय मौसम पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं, जिससे वर्षा, तापमान और चरम मौसम की घटनाओं में बदलाव आता है।
  • यह रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों और मानव स्वास्थ्य पर इसके प्रत्यक्ष परिणामों को समझने में मदद करती है।

सामाजिक-आर्थिक महत्व

  • उच्च तापमान से संबंधित मृत्यु दर में वृद्धि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव डालती है और कमजोर आबादी (जैसे बुजुर्ग, बच्चे और पुरानी बीमारियों वाले लोग) के लिए जोखिम बढ़ाती है।
  • कृषि उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका प्रभावित हो सकती है।

नीतिगत महत्व

  • यह रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (Climate Change Adaptation) और शमन (Mitigation) रणनीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
  • यह सरकारों को चरम मौसम की घटनाओं के लिए आपदा प्रबंधन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

चुनौतियाँ

1. जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम

  • बढ़ती वैश्विक तापमान और अल नीनो जैसी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि।
  • अत्यधिक गर्मी की लहरें, सूखा और बाढ़ जैसी चरम मौसम की घटनाओं से निपटने में चुनौतियाँ।

2. सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • गर्मी से संबंधित बीमारियों और मृत्यु दर में वृद्धि, विशेषकर कमजोर समूहों में।
  • स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे पर बढ़ता दबाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की असमानता।

3. कृषि और खाद्य सुरक्षा

  • बदलते मौसम पैटर्न के कारण फसल उत्पादन में कमी और जल संसाधनों पर दबाव।
  • खाद्य कीमतों में अस्थिरता और ग्रामीण आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव।

4. डेटा और मॉडलिंग की चुनौतियाँ

  • जलवायु मॉडल की सटीकता और क्षेत्रीय स्तर पर पूर्वानुमानों की विश्वसनीयता।
  • तापमान-मृत्यु दर संबंधों का सटीक आकलन करने के लिए व्यापक और विश्वसनीय डेटा की उपलब्धता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अल नीनो जैसी घटनाओं की बढ़ती तीव्रता और आवृत्ति से मानव जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा।
स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव अत्यधिक गर्मी से संबंधित बीमारियों और मौतों के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ।
कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता मौसम की अनिश्चितता और जल संकट के कारण फसल उत्पादन में गिरावट और किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव।
अनुकूलन और शमन रणनीतियाँ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रभावी नीतियों का अभाव या धीमी गति से कार्यान्वयन।
कमजोर वर्गों पर असमान प्रभाव गरीब, बुजुर्ग और हाशिए पर रहने वाले समुदायों पर चरम मौसम की घटनाओं का अधिक प्रतिकूल प्रभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (National Disaster Management Plan)
  • राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन अनुकूलन निधि (National Adaptation Fund for Climate Change)

आगे की राह

  • जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन रणनीतियों को मजबूत करना, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना शामिल है।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और आपदा प्रबंधन बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना ताकि चरम मौसम की घटनाओं के प्रभावों को कम किया जा सके।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना, विशेषकर गर्मी से संबंधित बीमारियों के प्रबंधन और कमजोर आबादी की सुरक्षा के लिए।
  • कृषि क्षेत्र में जलवायु-स्मार्ट प्रथाओं को बढ़ावा देना, जैसे सूखा-प्रतिरोधी फसलें और कुशल सिंचाई तकनीकें।
  • जलवायु विज्ञान अनुसंधान और मॉडलिंग क्षमताओं में निवेश बढ़ाना ताकि मौसम के पूर्वानुमानों की सटीकता में सुधार हो सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना ताकि जलवायु परिवर्तन से निपटने और साझा समाधान खोजने के लिए वैश्विक प्रयास किए जा सकें।
  • जन जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से समुदायों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और अनुकूलन उपायों के बारे में सूचित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अल नीनो · जलवायु परिवर्तन · अत्यधिक मृत्यु दर · स्वास्थ्य प्रभाव · मौसम पूर्वानुमान · तापमान-मृत्यु संबंध · आपदा प्रबंधन · सार्वजनिक स्वास्थ्य · भारत में जलवायु परिवर्तन · ऊर्जा नीति संस्थान · शिकागो विश्वविद्यालय · वैश्विक तापन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन के अधिकार में स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}

अवधारणा प्रवाह

अल नीनो घटना की उत्पत्ति (प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का गर्म होना)  →  वैश्विक मौसम पैटर्न में बदलाव (भारत में अत्यधिक गर्मी, सूखा)  →  उच्च तापमान-मृत्यु दर संबंध (गर्मी से संबंधित बीमारियों और मौतों में वृद्धि)  →  सार्वजनिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव (अतिरिक्त मृत्यु दर का अनुमान)  →  सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ (कृषि, जल, आजीविका पर असर)  →  नीतिगत प्रतिक्रिया की आवश्यकता (अनुकूलन, शमन, आपदा प्रबंधन)

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. अल नीनो घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से संबंधित है।
2. यह भारत में मानसूनी वर्षा को बढ़ाता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
3. अल नीनो का प्रभाव केवल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र तक ही सीमित रहता है और इसका स्थलीय जलवायु पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है। कथन 2 गलत है। अल नीनो आमतौर पर भारत में मानसूनी वर्षा को कमजोर करता है, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कथन 3 गलत है। अल नीनो का वैश्विक जलवायु पैटर्न पर व्यापक प्रभाव पड़ता है, जिसमें स्थलीय जलवायु भी शामिल है, जैसे तापमान में वृद्धि और वर्षा पैटर्न में बदलाव।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक अल नीनो के कारण होने वाली अत्यधिक गर्मी से संबंधित मौतों के अनुमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?

  1. A. केवल मौसमी तापमान पूर्वानुमान
  2. B. केवल तापमान-मृत्यु संबंध
  3. C. मौसमी तापमान पूर्वानुमान और तापमान-मृत्यु संबंध दोनों
  4. D. समुद्र के स्तर में वृद्धि और तटीय कटाव

उत्तर: C. मौसमी तापमान पूर्वानुमान और तापमान-मृत्यु संबंध दोनों — शिकागो विश्वविद्यालय के ऊर्जा नीति संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, ‘सुपर अल नीनो’ के कारण होने वाली अतिरिक्त गर्मी से संबंधित मौतों का अनुमान लगाने के लिए मौसमी तापमान पूर्वानुमान और तापमान-मृत्यु संबंध दोनों का उपयोग किया गया था।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अल नीनो घटना क्या है और यह भारत की जलवायु तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य पर किस प्रकार प्रभाव डालती है? अत्यधिक गर्मी से संबंधित मौतों के अनुमान में प्रयुक्त कार्यप्रणाली की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: अल नीनो की परिभाषा और इसकी घटना की व्याख्या करें (प्रशांत महासागर, सतही जल का गर्म होना)। भारत की जलवायु पर इसके प्रभावों का विश्लेषण करें (मानसून, वर्षा, सूखा)। सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करें (गर्मी से संबंधित बीमारियाँ, मृत्यु दर)। अत्यधिक मौतों के अनुमान में प्रयुक्त कार्यप्रणाली (मौसमी तापमान पूर्वानुमान और तापमान-मृत्यु संबंध) की व्याख्या करें। इस कार्यप्रणाली की प्रासंगिकता, सीमाओं और नीति निर्माण में इसके उपयोग पर प्रकाश डालें।

स्रोत: Hindustan Times


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