सुप्रीम कोर्ट का लाइव स्ट्रीमिंग नियम: क्या बदल जाएगा न्यायिक प्रक्रिया?

Supreme Court of India Order in WP(Civil) No. 751/2026 DATED 24-07-2026 regarding adoption of the Model Rules for live s — diagram

सुप्रीम कोर्ट का लाइव स्ट्रीमिंग नियम: क्या बदल जाएगा न्यायिक प्रक्रिया?

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Supreme Court Live Streaming Model

✎ अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के मॉडल नियम न्यायिक पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता तक न्याय की पहुँच बढ़ाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देश हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: महत्वपूर्ण प्रावधान, कार्यप्रणाली, सरकार के विभिन्न अंगों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थाएँ  |  GS Paper II — शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू
  • Prelims: न्यायिक पारदर्शिता, अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग, न्यायिक जवाबदेही, खुला न्याय सिद्धांत, अनुच्छेद 145, ई-कोर्ट परियोजना
  • Essay: डिजिटल युग में न्यायपालिका की भूमिका: चुनौतियाँ और अवसर, पारदर्शिता और जवाबदेही सुशासन के आधार स्तंभ हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति: अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के मॉडल नियम न्यायिक पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता तक न्याय की पहुँच बढ़ाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देश हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

यह निर्णय न्यायपालिका में पारदर्शिता और जनता तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • न्यायपालिका में पारदर्शिता का विचार ‘खुले न्याय’ (Open Justice) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए।
  • भारत में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का विचार पहली बार 2018 में स्वप्निल त्रिपाठी बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उठाया गया था, जहाँ न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति दी थी।
  • ई-कोर्ट परियोजना (e-Courts Project) के तहत भारतीय न्यायपालिका के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है, जिसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और कुशल बनाना है।
  • कई उच्च न्यायालयों (High Courts) ने पहले ही अपनी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू कर दी है, जिससे इस दिशा में प्रगति हुई है और अनुभव प्राप्त हुए हैं।
  • लाइव स्ट्रीमिंग से न्यायिक प्रणाली में जनता का विश्वास बढ़ने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और कानूनी शिक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
  • सर्वोच्च न्यायालय के नियम बनाने की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत निहित है, जो न्यायालय को अपनी प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को विनियमित करने के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है।

अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के मॉडल नियम क्या हैं?

  • ये मॉडल नियम अदालती कार्यवाही को जनता के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए दिशानिर्देशों का एक समूह हैं, जिसमें लाइव वीडियो प्रसारण और रिकॉर्डिंग शामिल है।
  • इन नियमों का प्राथमिक उद्देश्य न्यायिक पारदर्शिता (Judicial Transparency) बढ़ाना, जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना और न्यायिक जवाबदेही (Judicial Accountability) को मजबूत करना है।
  • नियमों में उन मामलों की पहचान की गई है जिनकी लाइव स्ट्रीमिंग की जा सकती है और उन मामलों की भी, जिनकी गोपनीयता या संवेदनशीलता के कारण लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी (जैसे वैवाहिक मामले, यौन अपराध, बाल-संबंधित मामले)।
  • इन नियमों में कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के भंडारण, पहुँच और उपयोग के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल शामिल हैं, ताकि डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके।
  • लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान गोपनीयता के अधिकार (Right to Privacy) और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार (Right to Fair Trial) जैसे मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।
  • इन नियमों में यह भी बताया गया है कि कौन सी अदालतें (सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, अधीनस्थ न्यायालय) और किस प्रकार की कार्यवाही (अंतिम सुनवाई, अंतरिम आवेदन) लाइव स्ट्रीम की जा सकती है।
  • इन नियमों के तहत, न्यायालयों को लाइव स्ट्रीमिंग के लिए आवश्यक तकनीकी बुनियादी ढाँचा स्थापित करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रसारण सुचारू और सुरक्षित हो।
  • मॉडल नियम यह भी स्पष्ट करते हैं कि लाइव स्ट्रीम की गई सामग्री का उपयोग कैसे किया जा सकता है और इसके अनधिकृत उपयोग या दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या उपाय किए जाएंगे।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लाइव स्ट्रीमिंग का प्रावधान न्यायिक कार्यवाही में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
कार्यवाही की रिकॉर्डिंग भविष्य के संदर्भ और अनुसंधान के लिए एक स्थायी अभिलेख प्रदान करता है।
मॉडल नियम देश भर की अदालतों के लिए एक समान और मानकीकृत प्रक्रिया स्थापित करता है।
न्याय तक पहुंच में वृद्धि जनता को अदालती कार्यवाही देखने की अनुमति देकर न्यायपालिका में विश्वास बढ़ाता है।
न्यायिक शिक्षा और अनुसंधान कानून के छात्रों, शोधकर्ताओं और अधिवक्ताओं के लिए मूल्यवान शिक्षण सामग्री प्रदान करता है।

महत्व

शासन और पारदर्शिता

  • न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग से न्यायपालिका में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) बढ़ती है।
  • यह नागरिकों को न्यायिक प्रक्रिया को सीधे देखने का अवसर प्रदान करता है, जिससे न्यायपालिका में उनका विश्वास मजबूत होता है।

न्याय तक पहुंच

  • यह दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों सहित व्यापक दर्शकों तक न्याय तक पहुंच (Access to Justice) का विस्तार करता है, जो व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हो सकते हैं।
  • यह न्यायिक प्रणाली को अधिक समावेशी और सुलभ बनाता है।

कानून का शासन

  • खुली अदालत की कार्यवाही न्याय के प्रशासन में निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करती है, जो कानून के शासन (Rule of Law) के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह मनमानी और भ्रष्टाचार की संभावना को कम करता है।

न्यायिक सुधार

  • यह न्यायिक सुधारों (Judicial Reforms) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आधुनिक तकनीक का लाभ उठाकर न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करता है।
  • यह न्यायपालिका को डिजिटल युग के अनुरूप ढालने में मदद करता है।

चुनौतियाँ

1. गोपनीयता संबंधी चिंताएँ

  • गवाहों, पीड़ितों और संवेदनशील मामलों में शामिल अन्य व्यक्तियों की गोपनीयता (Privacy) की रक्षा करना एक चुनौती है।
  • संवेदनशील जानकारी के अनजाने में प्रकटीकरण का जोखिम मौजूद है।

2. तकनीकी अवसंरचना

  • देश भर की सभी अदालतों में आवश्यक तकनीकी अवसंरचना (Technical Infrastructure) और उपकरण स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है।
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की आपूर्ति में असमानताएँ भी एक बाधा हैं।

3. सुरक्षा और डेटा प्रबंधन

  • रिकॉर्ड की गई कार्यवाही के डेटा की सुरक्षा (Security) और उसके उचित प्रबंधन को सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों का जोखिम मौजूद है।

4. न्यायिक प्रक्रिया पर प्रभाव

  • लाइव स्ट्रीमिंग से न्यायिक कार्यवाही के माहौल पर अनपेक्षित प्रभाव पड़ सकता है, जैसे कि वकीलों और न्यायाधीशों पर अतिरिक्त दबाव।
  • यह कार्यवाही की गंभीरता को प्रभावित कर सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
गोपनीयता का अधिकार संवेदनशील मामलों में शामिल व्यक्तियों की पहचान और जानकारी का संरक्षण।
तकनीकी असमानता ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अदालतों में पर्याप्त इंटरनेट और उपकरण की कमी।
डेटा भंडारण और सुरक्षा रिकॉर्ड की गई कार्यवाही के विशाल डेटा को सुरक्षित रूप से संग्रहीत और प्रबंधित करना।
न्यायिक कार्यवाही की अखंडता सार्वजनिक प्रदर्शन के कारण न्यायिक प्रक्रिया में संभावित व्यवधान या पूर्वाग्रह।
संसाधन आवंटन लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग प्रणाली को लागू करने और बनाए रखने के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की आवश्यकता।

आगे की राह

  • गोपनीयता अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल विकसित करना, विशेष रूप से संवेदनशील मामलों में।
  • पूरे देश में अदालतों में आवश्यक तकनीकी अवसंरचना और उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करना।
  • रिकॉर्ड की गई कार्यवाही के लिए एक सुरक्षित और केंद्रीकृत डेटा भंडारण और प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना।
  • न्यायिक अधिकारियों, वकीलों और कर्मचारियों के लिए लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के प्रभावी उपयोग पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • लाइव स्ट्रीमिंग के दायरे और प्रतिबंधों के बारे में जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना।
  • नियमित रूप से मॉडल नियमों की समीक्षा करना और उभरती चुनौतियों और तकनीकी प्रगति के अनुरूप उन्हें अद्यतन करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

न्यायिक पारदर्शिता · न्यायालयों की लाइव स्ट्रीमिंग · न्याय तक पहुंच · खुला न्याय · सूचना का अधिकार · डिजिटल न्याय · अनुच्छेद 145 · न्यायिक प्रशासन · मॉडल नियम · सर्वोच्च न्यायालय

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 145’, ‘note’: ‘सर्वोच्च न्यायालय के नियम बनाने की शक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

सर्वोच्च न्यायालय का आदेश  →  लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के मॉडल नियमों को अपनाना  →  न्यायिक कार्यवाही में पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि  →  न्याय तक पहुंच का विस्तार  →  न्यायपालिका में सार्वजनिक विश्वास में वृद्धि  →  न्यायिक सुधारों को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए मॉडल नियम जारी किए हैं।
2. इन नियमों का उद्देश्य न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
3. लाइव स्ट्रीमिंग से संवैधानिक अदालतों की कार्यवाही तक जनता की पहुंच में सुधार होगा।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1: सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए मॉडल नियम जारी किए हैं। यह कथन सही है।
कथन 2: इन नियमों का प्राथमिक उद्देश्य न्यायिक पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय तक पहुंच में सुधार करना है। यह कथन सही है।
कथन 3: लाइव स्ट्रीमिंग से संवैधानिक अदालतों की कार्यवाही तक जनता की पहुंच में सुधार होगा, जिससे ‘खुले न्याय’ के सिद्धांत को बढ़ावा मिलेगा। यह कथन सही है।

Q2. भारत में न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा/से लाभ है/हैं?
1. यह न्यायपालिका में जनता के विश्वास को बढ़ाता है।
2. यह दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्तियों के लिए न्याय तक पहुंच में सुधार करता है।
3. यह न्यायिक प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1: लाइव स्ट्रीमिंग से न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता आती है, जिससे जनता का न्यायपालिका में विश्वास बढ़ता है। यह सही है।
कथन 2: लाइव स्ट्रीमिंग से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी कार्यवाही देखने का अवसर मिलता है, जिससे न्याय तक पहुंच में सुधार होता है। यह सही है।
कथन 3: सार्वजनिक जांच के तहत न्यायिक कार्यवाही न्यायाधीशों और वकीलों दोनों को अधिक जवाबदेह बनाती है। यह सही है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपनाए गए मॉडल नियमों के महत्व का परीक्षण कीजिए। ये नियम न्याय तक पहुंच और न्यायिक पारदर्शिता के सिद्धांतों को कैसे सुदृढ़ करते हैं? (15 अंक)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर की रूपरेखा:
1. परिचय: न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मॉडल नियमों को अपनाने का संक्षिप्त उल्लेख। ‘खुले न्याय’ के सिद्धांत पर प्रकाश डालना।
2. मॉडल नियमों का महत्व:
क. न्यायिक पारदर्शिता: न्यायिक प्रक्रिया को जनता के लिए अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाना।
ख. जवाबदेही: न्यायाधीशों और वकीलों दोनों के लिए जवाबदेही बढ़ाना।
ग. न्याय तक पहुंच: भौगोलिक बाधाओं को दूर कर दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को कार्यवाही देखने में सक्षम बनाना।
घ. सूचना का अधिकार: नागरिकों के सूचना के अधिकार को मजबूत करना।
ङ. सार्वजनिक शिक्षा: न्यायिक प्रणाली और कानून के बारे में जनता को शिक्षित करना।
3. न्याय तक पहुंच और न्यायिक पारदर्शिता को सुदृढ़ करना:
क. संवैधानिक अदालतों की कार्यवाही तक सीधी पहुंच प्रदान करना।
ख. न्यायिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को बढ़ावा देना।
ग. न्यायिक निर्णयों और तर्कों की बेहतर समझ विकसित करना।
घ. गलत सूचना और अटकलों को कम करना।
4. चुनौतियाँ और चिंताएँ (संक्षेप में): गोपनीयता, सुरक्षा, कार्यवाही का दुरुपयोग, तकनीकी अवसंरचना।
5. निष्कर्ष: इन नियमों के दूरगामी सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करना और न्यायिक प्रणाली को और अधिक लोकतांत्रिक बनाने में इसकी भूमिका पर बल देना।

स्रोत: aphc.gov.in


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