हिमाचल में टैक्स राजस्व दोगुना, फिर भी बजट लक्ष्य से 2,328 करोड़ रुपये पीछे: सीएजी रिपोर्ट

वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट: दोगुना हुआ टैक्स राजस्व, फिर भी बजट लक्ष्य से पीछे रहा हिमाचल — diagram

हिमाचल में टैक्स राजस्व दोगुना, फिर भी बजट लक्ष्य से 2,328 करोड़ रुपये पीछे: सीएजी रिपोर्ट

कर राजस्व बनाम बजट लक्ष्यवास्तविक राजस्वबजट अनुमान2020-2112,837.23 करोड़12,837.23 करोड़2024-2512,772 करोड़15,100.68 करोड़अंतर2,328.68 करोड़प्राप्ति%84.57%100%
कर राजस्व बनाम बजट लक्ष्य

✎ राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट, जो CAG द्वारा प्रस्तुत की जाती है, राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य और बजटीय प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो राजकोषीय संघवाद के सिद्धांतों को बनाए रखने में सहायक है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ
  • Prelims: राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), कर राजस्व, बजटीय लक्ष्य, SGST, केंद्र से सहायता अनुदान (Grant-in-Aid), राजकोषीय संघवाद, राजस्व घाटा
  • Essay: राजकोषीय संघवाद: चुनौतियाँ और अवसर, भारत में राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट, जो CAG द्वारा प्रस्तुत की जाती है, राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य और बजटीय प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो राजकोषीय संघवाद के सिद्धांतों को बनाए रखने में सहायक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में जारी राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश का कुल कर राजस्व पिछले पाँच वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है। वर्ष 2020-21 में यह 12,837.23 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 23,453.24 करोड़ रुपये हो गया। हालाँकि, इस महत्वपूर्ण वृद्धि के बावजूद, राज्य अपने स्वयं के कर राजस्व के बजटीय लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल रहा, जिससे राज्य के वित्तीय प्रबंधन और राजस्व अनुमानों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा तैयार की जाती है, जो राज्य सरकारों के वित्तीय खातों की जाँच करती है।
  • रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024-25 में हिमाचल प्रदेश का अपने करों से 15,100.68 करोड़ रुपये जुटाने का बजटीय अनुमान था, लेकिन वास्तविक प्राप्ति 12,772 करोड़ रुपये रही।
  • यह बजटीय लक्ष्य से 2,328.68 करोड़ रुपये कम है, जो लक्ष्य का केवल 84.57 प्रतिशत है।
  • राज्य के अपने कर राजस्व में SGST का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिससे 5,816.61 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
  • राज्य आबकारी और बिक्री, व्यापार आदि करों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो कुल अपने कर राजस्व का लगभग 81 प्रतिशत था।
  • केंद्रीय करों में प्रदेश की हिस्सेदारी 2020-21 के 4,753.92 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 10,681.24 करोड़ रुपये हो गई, जबकि केंद्र से मिलने वाली सहायता अनुदान (Grant-in-Aid) में कमी आई है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और राजकोषीय संघवाद

  • नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक संवैधानिक प्राधिकरण है।
  • CAG का मुख्य कार्य केंद्र और राज्य सरकारों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के खातों का लेखापरीक्षण करना है।
  • CAG की रिपोर्टें संसद और राज्य विधानमंडलों के समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं, जो सार्वजनिक धन के व्यय में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती हैं।
  • राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) भारतीय संघीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जहाँ केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों और उत्तरदायित्वों का विभाजन होता है।
  • राज्यों का अपना कर राजस्व, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और केंद्र से सहायता अनुदान राज्यों के वित्तीय संसाधनों के प्रमुख स्रोत हैं।
  • SGST (राज्य वस्तु एवं सेवा कर) राज्यों के अपने कर राजस्व का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो GST व्यवस्था के तहत लगाया जाता है।
  • बजटीय लक्ष्य और वास्तविक प्राप्ति के बीच का अंतर राज्यों के वित्तीय नियोजन और राजस्व अनुमानों की सटीकता को दर्शाता है।
  • सहायता अनुदान (Grant-in-Aid) केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को विशेष उद्देश्यों या सामान्य वित्तीय सहायता के लिए दी जाने वाली धनराशि है, जो अक्सर वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित होती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
कर राजस्व में वृद्धि हिमाचल प्रदेश का कुल कर राजस्व पाँच वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है, जो राज्य की आर्थिक गतिविधियों में विस्तार और कर संग्रह क्षमता में सुधार को दर्शाता है।
बजट लक्ष्य से विचलन राज्य अपने स्वयं के कर राजस्व के बजट लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल रहा, जिससे राजकोषीय प्रबंधन और अनुमानों की सटीकता पर सवाल उठते हैं।
SGST का प्रमुख योगदान राज्य के अपने कर राजस्व में SGST (राज्य वस्तु एवं सेवा कर) का सबसे बड़ा योगदान रहा, जो GST (वस्तु एवं सेवा कर) व्यवस्था के तहत राज्यों के लिए इसके महत्व को रेखांकित करता है।
केंद्रीय करों में हिस्सेदारी में वृद्धि केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी दोगुनी से अधिक हो गई है, जो केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों और राज्यों के लिए केंद्रीय हस्तांतरण के महत्व को दर्शाता है।
केंद्र से अनुदान-सहायता में कमी केंद्र से मिलने वाली ग्रांट-इन-एड (अनुदान-सहायता) में गिरावट आई है, जो राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और केंद्र पर निर्भरता के बदलते स्वरूप को इंगित करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कर राजस्व में वृद्धि राज्य की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और कर आधार के विस्तार का संकेत है, जो भविष्य के विकास के लिए संसाधन जुटाने की क्षमता को दर्शाता है।
  • बजट लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफलता राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) और प्रभावी संसाधन नियोजन की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है, ताकि विकासात्मक परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्त सुनिश्चित किया जा सके।

राजकोषीय प्रबंधन

  • यह रिपोर्ट राज्य के राजकोषीय स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो नीति निर्माताओं को राजस्व संग्रह, व्यय प्रबंधन और बजट अनुमानों की सटीकता का मूल्यांकन करने में मदद करती है।
  • SGST जैसे प्रमुख कर स्रोतों की पहचान राज्य की राजस्व रणनीति को अनुकूलित करने और कर संग्रह दक्षता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।

संघीय वित्त

  • केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी और केंद्र से अनुदान-सहायता संघीय वित्त (Federal Finance) के महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो राज्यों की वित्तीय स्थिति को सीधे प्रभावित करते हैं।
  • अनुदान-सहायता में कमी राज्यों को अपने स्वयं के राजस्व स्रोतों पर अधिक निर्भर रहने और वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।

चुनौतियाँ

1. राजस्व अनुमानों की सटीकता

  • बजट अनुमानों और वास्तविक प्राप्तियों के बीच बड़ा अंतर भविष्य के लिए विश्वसनीय राजकोषीय नियोजन को बाधित करता है।
  • गलत अनुमानों के कारण या तो अवास्तविक व्यय लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं या फिर आवश्यक विकासात्मक परियोजनाओं के लिए धन की कमी हो सकती है।

2. राजकोषीय घाटा प्रबंधन

  • यदि राजस्व लक्ष्य पूरे नहीं होते हैं, तो राज्य को अपने व्यय को पूरा करने के लिए उधार लेना पड़ सकता है, जिससे राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ सकता है।
  • बढ़ता राजकोषीय घाटा राज्य के ऋण भार को बढ़ाता है और भविष्य में ब्याज भुगतान पर अधिक संसाधनों को मोड़ सकता है।

3. संसाधन जुटाना

  • अपने स्वयं के कर राजस्व लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफलता राज्य की अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता पर सवाल उठाती है।
  • यह राज्य को केंद्रीय हस्तांतरण और अनुदान पर अधिक निर्भर बना सकता है, जिससे उसकी वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।

4. केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध

  • केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और अनुदान-सहायता में बदलाव राज्यों की वित्तीय स्थिरता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।
  • अनुदान-सहायता में कमी राज्यों के लिए विकासात्मक कार्यक्रमों को वित्तपोषित करने में चुनौतियां पैदा कर सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
बजट लक्ष्य से पीछे रहना राजकोषीय नियोजन में कमी और संभावित रूप से विकासात्मक व्यय पर नकारात्मक प्रभाव।
राजस्व अनुमानों की सटीकता भविष्य के बजटों के लिए विश्वसनीय आधार की कमी, जिससे अनिश्चितता बढ़ती है।
अनुदान-सहायता में कमी केंद्र पर निर्भरता कम करने और अपने स्वयं के राजस्व स्रोतों को मजबूत करने की आवश्यकता।
कर आधार का पूर्ण दोहन राज्य की अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता का उपयोग करने और कर संग्रह दक्षता में सुधार की आवश्यकता।

आगे की राह

  • राजस्व अनुमानों की सटीकता में सुधार के लिए एक मजबूत डेटा-संचालित मॉडल विकसित करना।
  • कर संग्रह दक्षता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना और कर चोरी को कम करने के उपाय करना।
  • SGST, आबकारी और बिक्री कर जैसे प्रमुख राजस्व स्रोतों के प्रबंधन और निगरानी को मजबूत करना।
  • गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) स्रोतों की पहचान करना और उनका दोहन करना, जैसे कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से लाभांश या सेवाओं के लिए शुल्क।
  • राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के सिद्धांतों का पालन करते हुए राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करना।
  • केंद्र सरकार के साथ प्रभावी ढंग से समन्वय स्थापित करना ताकि केंद्रीय करों में उचित हिस्सेदारी और आवश्यकतानुसार अनुदान-सहायता सुनिश्चित की जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राजकोषीय प्रबंधन · राजस्व घाटा · बजट लक्ष्य · नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) · राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट · कर राजस्व · केंद्रीय करों में हिस्सेदारी · केंद्र से अनुदान (ग्रांट-इन-एड) · राजकोषीय संघवाद · राजकोषीय उत्तरदायित्व

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 268-279’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों का प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग का गठन एवं कार्य’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘केंद्र सरकार द्वारा उधार लेने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 293’, ‘note’: ‘राज्य सरकार द्वारा उधार लेने की शक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट जारी  →  कर राजस्व में वृद्धि, लेकिन बजट लक्ष्य से पीछे  →  राजकोषीय घाटा बढ़ने का जोखिम  →  विकासात्मक परियोजनाओं पर संभावित प्रभाव  →  राजकोषीय प्रबंधन और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट संसद और राज्य विधानमंडलों के समक्ष रखी जाती है।
2. CAG राज्य सरकारों के वित्त का लेखा-परीक्षण करता है, लेकिन केंद्र सरकार के वित्त का नहीं।
3. CAG की रिपोर्टों की जांच लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। CAG की रिपोर्टें केंद्र के लिए राष्ट्रपति और राज्यों के लिए राज्यपाल द्वारा संबंधित विधानमंडलों के समक्ष रखी जाती हैं। कथन 2 गलत है। CAG केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के वित्त का लेखा-परीक्षण करता है। कथन 3 सही है। CAG की रिपोर्टों की जांच लोक लेखा समिति द्वारा की जाती है, जो संसद की एक महत्वपूर्ण समिति है।

Q2. राज्यों के अपने कर राजस्व (Own Tax Revenue) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा कर राज्य के लिए सबसे बड़ा राजस्व स्रोत हो सकता है?

  1. कॉर्पोरेट कर (Corporate Tax)
  2. आयकर (Income Tax)
  3. राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST)
  4. सीमा शुल्क (Customs Duty)

उत्तर: राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) — SGST (राज्य वस्तु एवं सेवा कर) राज्यों के अपने कर राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जैसा कि हिमाचल प्रदेश के मामले में भी देखा गया। कॉर्पोरेट कर, आयकर और सीमा शुल्क मुख्य रूप से केंद्र सरकार के राजस्व स्रोत हैं, हालांकि आयकर और कॉर्पोरेट कर में राज्यों को हिस्सेदारी मिलती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्टें राज्यों के राजकोषीय स्वास्थ्य का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस संदर्भ में, राज्यों के अपने कर राजस्व में वृद्धि के बावजूद बजट लक्ष्यों से पीछे रहने के कारणों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, राजकोषीय उत्तरदायित्व को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्टों का महत्व और राज्यों के राजकोषीय स्वास्थ्य के संकेतक के रूप में उनकी भूमिका का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **बजट लक्ष्यों से पीछे रहने के कारण:**
* **यथार्थवादी बजट अनुमानों का अभाव:** अत्यधिक आशावादी राजस्व लक्ष्य निर्धारित करना।
* **आर्थिक गतिविधियों में अप्रत्याशित मंदी:** राज्य-विशिष्ट या राष्ट्रीय आर्थिक कारकों का प्रभाव।
* **कर संग्रह में अक्षमता:** प्रशासनिक कमियां, कर चोरी, या अपर्याप्त प्रवर्तन।
* **नीतिगत परिवर्तन:** कर दरों में कटौती या छूट का प्रभाव।
* **केंद्र से प्राप्तियों में अनिश्चितता:** केंद्रीय करों में हिस्सेदारी या अनुदान-सहायता में कमी/विलंब।
* **व्यय प्रबंधन में चुनौतियां:** अप्रत्याशित व्यय या योजनाओं पर अधिक खर्च।
3. **राजकोषीय उत्तरदायित्व बढ़ाने के उपाय:**
* **यथार्थवादी बजट अनुमान:** पिछले रुझानों और आर्थिक संभावनाओं के आधार पर विवेकपूर्ण लक्ष्य निर्धारण।
* **कर आधार का विस्तार:** नए कर स्रोतों की पहचान और कर योग्य दायरे का विस्तार।
* **कर प्रशासन में सुधार:** डिजिटलीकरण, डेटा एनालिटिक्स का उपयोग, और कर चोरी पर अंकुश।
* **व्यय तर्कसंगतता:** अनावश्यक व्यय में कटौती और उत्पादक निवेश पर ध्यान।
* **राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियमों का प्रभावी कार्यान्वयन:** राज्य-स्तरीय FRBM लक्ष्यों का पालन।
* **पारदर्शिता और जवाबदेही:** वित्तीय डेटा की नियमित सार्वजनिक रिपोर्टिंग और CAG रिपोर्टों पर त्वरित कार्रवाई।
* **अंतर-सरकारी समन्वय:** केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर वित्तीय समन्वय।
4. **निष्कर्ष:** सुदृढ़ राजकोषीय प्रबंधन के महत्व पर बल देते हुए, सतत आर्थिक विकास और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका का उल्लेख।

स्रोत: amarujala.com

Himachal Pradesh PCS (HPPSC (HAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हिमाचchal प्रदेश की हालिया वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में कर राजस्व में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई है?

  1. 100%
  2. 50%
  3. 200%
  4. 75%

उत्तर: 100% — वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट में बताया गया है कि कर राजस्व में दोगुनी वृद्धि हुई है, अर्थात 100% की वृद्धि।

Mains: हिमाचल प्रदेश में कर राजस्व में हुई वृद्धि के बावजूद बजट लक्ष्यों से पीछे रहने के प्रमुख कारणों का विश्लेषण करते हुए, राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का मूल्यांकन कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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