03 Sep आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने ₹759 करोड़ अमरावती संगमम परियोजना को दी मंजूरी, जानिए पूरी डिटेल
✎ आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने अमरावती संगमम परियोजना, इनर रिंग रोड के लिए भूमि पूलिंग और कुक्कुट क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक नई विकास नीति को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य राज्य के बुनियादी ढांचे और कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय | GS Paper III — आर्थिक विकास, कृषि, पर्यावरण
- Prelims: अमरावती संगमम परियोजना, भूमि पूलिंग योजना, आंध्र प्रदेश कुक्कुट विकास नीति, पर्यावरण नियंत्रित कुक्कुट शेड, पशुधन मिशन (NLM), ग्रामीण आजीविका मिशन (SERP), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
- Essay: स्थानीय शासन और समावेशी विकास, कृषि क्षेत्र का विविधीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने अमरावती संगमम परियोजना, इनर रिंग रोड के लिए भूमि पूलिंग और कुक्कुट क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक नई विकास नीति को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य राज्य के बुनियादी ढांचे और कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश मंत्रिमंडल ने हाल ही में अमरावती संगमम परियोजना के लिए ₹759 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इसके साथ ही, राजधानी के प्रस्तावित इनर रिंग रोड प्रणाली के लिए 6,212 एकड़ भूमि पूलिंग योजना और आंध्र प्रदेश कुक्कुट विकास नीति 2025-2029 के मसौदे को भी मंजूरी दी गई है। इन निर्णयों का उद्देश्य राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और सुशासन को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के बाद अमरावती को आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया था।
- राजधानी क्षेत्र के विकास के लिए आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (APCRDA) का गठन किया गया था।
- भूमि पूलिंग योजना (Land Pooling Scheme) एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ किसान अपनी भूमि को स्वेच्छा से एक विकास प्राधिकरण को देते हैं, और प्राधिकरण भूमि को विकसित करके, उन्हें विकसित भूखंडों का एक हिस्सा वापस करता है।
- कुक्कुट पालन (Poultry farming) आंध्र प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बड़ी संख्या में लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
- राज्य सरकारें विभिन्न क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां बनाती हैं।
- बुनियादी ढांचा परियोजनाएं जैसे सड़कें और सार्वजनिक भवन आर्थिक विकास और सुशासन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अमरावती संगमम परियोजना, भूमि पूलिंग योजना और कुक्कुट विकास नीति क्या हैं?
- अमरावती संगमम परियोजना: यह ₹759 करोड़ की लागत से साखामुरु में स्थापित की जाएगी। इसमें आंध्र प्रदेश राज्य सार्वजनिक पुस्तकालय, एक सभागार और ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ गुड गवर्नेंस शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सुशासन और ज्ञान के केंद्र स्थापित करना है।
- भूमि पूलिंग योजना: अमरावती में प्रस्तावित इनर रिंग रोड प्रणाली के लिए 6,212 एकड़ भूमि के लिए इस योजना को मंजूरी दी गई है। यह योजना किसानों के अनुरोध पर शुरू की गई है और इसमें एर्रुपालेम-नंबुरु नई ब्रॉड-गेज रेलवे लाइन के लिए 100 मीटर का बफर और ग्रिड सड़कों का विस्तार भी शामिल है।
- आंध्र प्रदेश कुक्कुट विकास नीति 2025-2029: इस नीति का उद्देश्य उत्पादन लागत को कम करना, पर्यावरण नियंत्रित कुक्कुट शेड (Environment Controlled Poultry Sheds) को बढ़ावा देना, रोग निगरानी और जैव-सुरक्षा को मजबूत करना है।
- नीति ग्रामीण और पिछवाड़े कुक्कुट पालन (Rural and backyard poultry) को विकसित करने तथा प्रसंस्करण, मूल्य वर्धित उत्पादों और निर्यात को प्रोत्साहित करने पर भी केंद्रित है।
- इस नीति के तहत विभिन्न घटकों के लिए कुल ₹657 करोड़ के वित्तीय प्रोत्साहन प्रस्तावित हैं, जिसमें ब्याज सब्सिडी और पर्यावरण नियंत्रित कुक्कुट शेड के लिए ₹120 करोड़ शामिल हैं।
- ट्रेसबिलिटी, रोग निगरानी और जैव-सुरक्षा अनुपालन में सुधार के लिए कुक्कुट फार्मों का अनिवार्य पंजीकरण (Mandatory registration) शुरू किया जाएगा।
- मातृ कुक्कुट इकाइयां और ग्रामीण/पिछवाड़े कुक्कुट गतिविधियों को पशुधन मिशन (NLM), ग्रामीण आजीविका मिशन (SERP) और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) जैसे कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अमरावती संगमम परियोजना | आंध्र प्रदेश राज्य सार्वजनिक पुस्तकालय, एक सभागार और ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ गुड गवर्नेंस का निर्माण; शासन-प्रशासन में सुधार और ज्ञान के प्रसार का लक्ष्य। |
| भूमि पूलिंग योजना (6,212 एकड़) | अमरावती के प्रस्तावित इनर रिंग रोड सिस्टम और रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण। यह शहरी नियोजन और बुनियादी ढाँचा विकास के लिए आवश्यक है। |
| आंध्र प्रदेश कुक्कुट विकास नीति 2025-2029 | उत्पादन लागत कम करना, पर्यावरण नियंत्रित कुक्कुट शेड को बढ़ावा देना, रोग निगरानी मजबूत करना, ग्रामीण कुक्कुट पालन को बढ़ावा देना और मूल्य वर्धित उत्पादों तथा निर्यात को प्रोत्साहित करना। |
| वित्तीय प्रोत्साहन (कुक्कुट नीति) | कुक्कुट क्षेत्र को ₹657 करोड़ का वित्तीय प्रोत्साहन, जिसमें ब्याज सब्सिडी और पर्यावरण नियंत्रित शेड के लिए ₹120 करोड़ शामिल हैं, जिससे क्षेत्र का विकास होगा। |
| कुक्कुट फार्मों का अनिवार्य पंजीकरण | पता लगाने की क्षमता (traceability), रोग निगरानी और जैव-सुरक्षा अनुपालन में सुधार, जिससे क्षेत्र में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ेगी। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- कुक्कुट विकास नीति से राज्य के कुक्कुट क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
- बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं (इनर रिंग रोड) से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, निवेश आकर्षित होगा और परिवहन दक्षता में सुधार होगा।
सामाजिक महत्व
- अमरावती संगमम परियोजना के तहत सार्वजनिक पुस्तकालय और सभागार जैसी सुविधाओं से शिक्षा, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा।
- ग्रामीण और पिछवाड़े कुक्कुट पालन को बढ़ावा देने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे और पोषण सुरक्षा में सुधार होगा।
शासन और अवसंरचना
- ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ गुड गवर्नेंस की स्थापना से सुशासन के सिद्धांतों को बढ़ावा मिलेगा और प्रशासनिक क्षमताओं में वृद्धि होगी।
- इनर रिंग रोड और रेलवे लाइन जैसी अवसंरचना परियोजनाएँ राजधानी क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और नियोजित विकास सुनिश्चित करेंगी।
पर्यावरणीय महत्व
- पर्यावरण नियंत्रित कुक्कुट शेड को बढ़ावा देने से कुक्कुट पालन में पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा और संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग होगा।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास
- भूमि पूलिंग योजना के तहत किसानों की सहमति प्राप्त करना और उन्हें उचित मुआवजा तथा पुनर्वास प्रदान करना एक चुनौती हो सकती है।
- भूमि के मूल्य निर्धारण और स्वामित्व संबंधी विवादों का समाधान करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, भूमि सुधार
2. वित्तीय प्रबंधन और कार्यान्वयन
- परियोजनाओं के लिए अनुमानित ₹759 करोड़ और कुक्कुट नीति के लिए ₹657 करोड़ सहित बड़ी धनराशि का कुशल प्रबंधन और समय पर वितरण सुनिश्चित करना।
- परियोजनाओं का समय पर और लागत प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, योजना
3. कुक्कुट क्षेत्र में चुनौतियाँ
- रोग निगरानी और जैव-सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना, विशेषकर ग्रामीण और पिछवाड़े कुक्कुट पालन में।
- छोटे किसानों को पर्यावरण नियंत्रित शेड जैसी नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी लिंक: कृषि, पशुपालन
4. समन्वय और क्षमता निर्माण
- विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।
- ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ गुड गवर्नेंस के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों की क्षमता निर्माण करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, संस्थागत विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि पूलिंग में किसानों की सहमति | किसानों को उनकी भूमि के लिए उचित प्रतिफल और पुनर्वास सुनिश्चित करना, विवादों से बचना। |
| परियोजनाओं का वित्तीयन | ₹759 करोड़ और ₹657 करोड़ जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए धन की उपलब्धता और कुशल उपयोग सुनिश्चित करना। |
| कुक्कुट क्षेत्र में रोग नियंत्रण | प्रभावी रोग निगरानी और जैव-सुरक्षा उपायों को लागू करना, विशेषकर छोटे और ग्रामीण फार्मों में। |
| बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का समय पर पूरा होना | इनर रिंग रोड जैसी बड़ी परियोजनाओं को बिना देरी के और बजट के भीतर पूरा करना। |
| ग्रामीण कुक्कुट पालन का एकीकरण | ग्रामीण और पिछवाड़े कुक्कुट गतिविधियों को राष्ट्रीय कार्यक्रमों (NLM, SERP, PMEGP) से प्रभावी ढंग से जोड़ना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM)
- सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी (SERP)
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
आगे की राह
- भूमि पूलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, जिसमें उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज शामिल हों।
- परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों का कुशल प्रबंधन और समय पर आवंटन किया जाए, साथ ही नियमित ऑडिट और निगरानी की जाए।
- कुक्कुट विकास नीति के तहत रोग निगरानी और जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू किया जाए, जिसमें छोटे और ग्रामीण फार्मों पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- पर्यावरण नियंत्रित कुक्कुट शेड जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए।
- विभिन्न सरकारी विभागों और हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए ताकि परियोजनाओं का सुचारु और एकीकृत कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
- ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ गुड गवर्नेंस के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- कुक्कुट उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा और विपणन सहायता प्रदान की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भूमि अधिग्रहण · भूमि पूलिंग योजना · आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम · कृषि नीति · पशुधन विकास · बुनियादी ढांचा परियोजनाएं · राज्य मंत्रिमंडल · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · ग्रामीण विकास · आर्थिक संवृद्धि · शासन · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
- राज्य सूची (सातवीं अनुसूची): भूमि, कृषि, पशुधन और स्थानीय शासन
अवधारणा प्रवाह
राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति → अमरावती संगमम परियोजना और इनर रिंग रोड के लिए भूमि पूलिंग → कुक्कुट विकास नीति का अनुमोदन → बुनियादी ढाँचा विकास और कुक्कुट क्षेत्र का संवर्धन → आर्थिक संवृद्धि, रोजगार सृजन और सुशासन को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूमि पूलिंग योजना (Land Pooling Scheme) में सरकार किसानों से सीधे भूमि का अधिग्रहण करती है और उन्हें मौद्रिक मुआवजा देती है।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
3. भारत के संविधान का अनुच्छेद 300A संपत्ति के अधिकार को एक संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। भूमि पूलिंग योजना में, किसान स्वेच्छा से अपनी भूमि को विकास के लिए एकत्रित करते हैं और विकसित भूखंडों का एक हिस्सा वापस प्राप्त करते हैं, न कि सीधे मौद्रिक मुआवजा। कथन 2 सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात में अग्रणी बनाना है। कथन 3 सही है। 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत एक संवैधानिक अधिकार बनाया गया था।
Q2. कथन A (Assertion): राज्य सरकारें कृषि और पशुधन क्षेत्र के विकास के लिए नीतियां बनाती हैं।
कारण R (Reason): भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत कृषि और पशुधन राज्य सूची के विषय हैं।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — कथन A सही है क्योंकि राज्य सरकारें अपने अधिकार क्षेत्र में कृषि और पशुधन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बनाती हैं, जैसा कि आंध्र प्रदेश पोल्ट्री विकास नीति के मामले में देखा गया है। कारण R भी सही है क्योंकि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में कृषि (प्रविष्टि 14) और पशुधन (प्रविष्टि 15) शामिल हैं, जो राज्य सरकारों को इन विषयों पर कानून बनाने और नीतियां बनाने का अधिकार देता है। इसलिए, R, A का सही स्पष्टीकरण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भूमि पूलिंग योजना (Land Pooling Scheme) क्या है? यह भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 से किस प्रकार भिन्न है? भारत में शहरी और ग्रामीण विकास में भूमि पूलिंग योजना के महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भूमि पूलिंग योजना की परिभाषा दें, जिसमें यह बताया जाए कि यह भूमि मालिकों से स्वेच्छा से भूमि एकत्र करने और उन्हें विकसित भूखंडों का हिस्सा वापस देने की एक प्रक्रिया है।
2. **भूमि पूलिंग बनाम भूमि अधिग्रहण:**
* **भूमि पूलिंग:** स्वैच्छिक भागीदारी, भूखंडों का पुनर्विकास और वापसी, सरकार की भूमिका सुविधाकर्ता की।
* **भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013):** अनिवार्य अधिग्रहण, उचित मुआवजा और पुनर्वास, सरकार की भूमिका अधिग्रहित करने वाली इकाई की।
* मुख्य अंतर: स्वैच्छिकता बनाम अनिवार्यता, मौद्रिक मुआवजा बनाम विकसित भूखंडों की वापसी, भूमि मालिक का विकास प्रक्रिया में भागीदार बनना।
3. **शहरी और ग्रामीण विकास में महत्व (सकारात्मक पहलू):**
* **तेजी से बुनियादी ढांचा विकास:** सड़कों, आवास और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
* **भूमि मालिकों के लिए लाभ:** उन्हें विकसित भूखंडों का हिस्सा मिलता है, जिससे उनकी भूमि का मूल्य बढ़ जाता है।
* **कम मुकदमेबाजी:** स्वैच्छिक प्रकृति के कारण विवाद कम होते हैं।
* **योजनाबद्ध विकास:** अनियोजित शहरीकरण को रोकता है और सतत विकास को बढ़ावा देता है।
* **राजकोषीय बोझ में कमी:** सरकार पर भूमि अधिग्रहण के लिए भारी मुआवजे का बोझ कम होता है।
4. **आलोचनात्मक परीक्षण (चुनौतियाँ और सीमाएँ):**
* **सर्वसम्मति प्राप्त करने में कठिनाई:** सभी भूमि मालिकों को एक साथ लाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
* **छोटे और सीमांत किसानों पर प्रभाव:** छोटे भूखंडों वाले किसानों को विकसित भूखंडों में कम हिस्सा मिल सकता है।
* **पारदर्शिता और जवाबदेही:** प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी से भ्रष्टाचार और अनुचित लाभ हो सकता है।
* **विलंब:** लंबी बातचीत और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण परियोजनाओं में देरी हो सकती है।
* **बाजार की अस्थिरता:** संपत्ति बाजार में उतार-चढ़ाव से भूमि मालिकों के हितों पर असर पड़ सकता है।
5. **निष्कर्ष:** भूमि पूलिंग योजना एक प्रभावी उपकरण हो सकती है यदि इसे उचित कानूनी ढांचे, पारदर्शिता और सभी हितधारकों के हितों की सुरक्षा के साथ लागू किया जाए। यह सतत शहरी और ग्रामीण विकास के लिए एक व्यवहार्य विकल्प प्रदान करती है।
स्रोत: The Hindu
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकृत ‘अमरावती संगमम परियोजना’ किस उद्देश्य से शुरू की गई है?
- अमरावती को नई राजधानी के रूप में विकसित करना
- राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना
- कृषि उत्पादन बढ़ाना
- औद्योगिक क्षेत्रों का विकास करना
उत्तर: अमरावती को नई राजधानी के रूप में विकसित करना — अमरावती संगमम परियोजना का उद्देश्य अमरावती को राज्य की नई राजधानी के रूप में विकसित करना है।
Mains: अमरावती संगमम परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित 6,212 एकड़ भूमि पूलिंग योजना के प्रमुख लाभों और चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए, राज्य के विकास में इसके संभावित योगदान पर चर्चा कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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