आंध्र प्रदेश में 52.4% वर्षा की कमी, सभी जिलों में सूखे के आसार

All districts in Andhra Pradesh report deficient rainfall — diagram

आंध्र प्रदेश में 52.4% वर्षा की कमी, सभी जिलों में सूखे के आसार

Map of Andhra Pradesh highlighted on the map of India — Andhra Pradesh rainfall deficit 2026 UPSC
मानचित्र व माइंड-मैप: अण्डमान प्रदेश में वर्षा कमी का मानचित्र

✎ आंध्र प्रदेश में गंभीर वर्षा की कमी अल नीनो के खतरे के बीच कृषि और जल सुरक्षा के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग करती है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारतीय भूगोल, जलवायु विज्ञान)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन, कृषि, भारतीय अर्थव्यवस्था
  • Prelims: वर्षा की कमी, अल नीनो, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), सूखा, खरीफ फसलें, बंगाल की खाड़ी में अवदाब
  • Essay: जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि पर इसके प्रभाव, भारत में जल संकट: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: आंध्र प्रदेश में गंभीर वर्षा की कमी अल नीनो के खतरे के बीच कृषि और जल सुरक्षा के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग करती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

जुलाई के अंत तक आंध्र प्रदेश में 52.4% वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिसमें एक भी जिले में सामान्य वर्षा नहीं हुई है। प्रकासम, पूर्वी गोदावरी, विशाखापत्तनम, अन्नामय्या और चित्तूर जिलों में भारी वर्षा की कमी देखी गई है, जबकि शेष जिलों में भी कमी दर्ज की गई है। इस स्थिति ने राज्य में सूखे की आशंकाओं को बढ़ा दिया है और किसानों के लिए व्यापक समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत की कृषि अर्थव्यवस्था काफी हद तक दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) पर निर्भर करती है, जो देश की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 75% प्रदान करता है।
  • वर्षा की कमी से कृषि उत्पादन पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आय और समग्र आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) प्रभावित होती है।
  • अल नीनो (El Niño) जैसी वैश्विक जलवायु घटनाएँ भारतीय मानसून को कमजोर कर सकती हैं, जिससे देश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) देश भर में वर्षा पैटर्न की निगरानी और पूर्वानुमान के लिए जिम्मेदार प्रमुख एजेंसी है।
  • राज्य सरकारें वर्षा की कमी की स्थिति में किसानों को राहत प्रदान करने और सूखे से निपटने के लिए विभिन्न योजनाएँ और उपाय लागू करती हैं।
  • बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में बनने वाले गहरे अवदाब (Deep Depression) अक्सर पूर्वी और मध्य भारत में वर्षा लाते हैं, लेकिन कभी-कभी उनका प्रभाव कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रहता है।

सूखा और इसके प्रभाव

  • सूखा (Drought) एक ऐसी स्थिति है जहाँ किसी क्षेत्र में लंबे समय तक सामान्य से कम वर्षा होती है, जिससे जल संसाधनों की कमी हो जाती है।
  • भारत में सूखे को आमतौर पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: मौसम संबंधी सूखा, कृषि संबंधी सूखा और जल विज्ञान संबंधी सूखा।
  • मौसम संबंधी सूखा तब होता है जब वर्षा सामान्य से काफी कम होती है। कृषि संबंधी सूखा तब होता है जब मिट्टी में नमी की कमी के कारण फसलें प्रभावित होती हैं। जल विज्ञान संबंधी सूखा तब होता है जब नदियों, झीलों और भूजल स्तर में कमी आती है।
  • सूखे के प्रत्यक्ष प्रभावों में फसल बर्बादी, पशुधन हानि, पेयजल की कमी और ग्रामीण आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव शामिल हैं।
  • अप्रत्यक्ष प्रभावों में खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation), ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और सामाजिक अशांति शामिल हो सकती हैं।
  • भारत सरकार ने सूखा प्रबंधन (Drought Management) के लिए विभिन्न नीतियाँ और योजनाएँ बनाई हैं, जिनमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • सूखे से निपटने के लिए जल संरक्षण (Water Conservation), वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), कुशल सिंचाई तकनीकें और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आंध्र प्रदेश में वर्षा की कमी राज्य के सभी जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
जुलाई के अंत तक 52.4% वर्षा की कमी यह एक महत्वपूर्ण कमी है जो राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है, विशेषकर खरीफ फसलों के लिए।
एल नीनो (El Niño) का खतरा एल नीनो प्रशांत महासागर में एक मौसमी घटना है जो भारत सहित विश्व के कई हिस्सों में सूखे और अनियमित वर्षा का कारण बनती है। यह वर्तमान वर्षा की कमी को और बढ़ा सकता है।
गहरे दबाव का ओडिशा और छत्तीसगढ़ पर केंद्रित होना बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव से आंध्र प्रदेश को अपेक्षित वर्षा नहीं मिली, जिससे राज्य में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है।
किसानों के लिए व्यापक समर्थन का निर्देश मुख्यमंत्री द्वारा किसानों को सहायता प्रदान करने का निर्देश स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है और संकट से निपटने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता को उजागर करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव: आंध्र प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, और वर्षा की कमी से धान, मक्का, कपास और अन्य खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे किसानों की आय कम होगी और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ेगा।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव: कृषि क्षेत्र में गिरावट से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर कम होंगे, जिससे गरीबी और असमानता बढ़ सकती है।
  • मुद्रास्फीति (Inflation) का दबाव: कृषि उत्पादों की कमी से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम जनता पर मुद्रास्फीति का बोझ पड़ेगा।

सामाजिक महत्व

  • पेयजल संकट: वर्षा की कमी से भूजल स्तर गिरेगा और सतही जल स्रोतों में पानी कम होगा, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता प्रभावित होगी।
  • स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे: जल संकट से स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • प्रवासन (Migration): कृषि संकट और रोजगार की कमी के कारण ग्रामीण आबादी का शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवासन बढ़ सकता है, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे पर दबाव पड़ेगा।

पर्यावरणीय महत्व

  • पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव: सूखे की स्थिति से वनस्पति और वन्यजीव प्रभावित होते हैं, जिससे जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है।
  • भूजल स्तर में गिरावट: कम वर्षा के कारण भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) नहीं हो पाता, जिससे भूजल स्तर में और गिरावट आती है, जो दीर्घकालिक पर्यावरणीय चिंता का विषय है।

चुनौतियाँ

1. कृषि उत्पादकता में कमी

  • वर्षा आधारित कृषि पर निर्भरता: आंध्र प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर हैं, जिससे कम वर्षा सीधे उनकी फसलों को प्रभावित करती है।
  • सिंचाई सुविधाओं की अपर्याप्तता: कई क्षेत्रों में आधुनिक और कुशल सिंचाई सुविधाओं की कमी है, जिससे वे वर्षा पर अधिक निर्भर रहते हैं।

2. जल प्रबंधन का अभाव

  • जल संरक्षण तकनीकों की कमी: वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और अन्य जल संरक्षण तकनीकों का व्यापक रूप से उपयोग नहीं किया जाता है।
  • भूजल का अत्यधिक दोहन: कृषि और अन्य जरूरतों के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया जाता है, जिससे संकट और गहराता है।

3. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

  • अनियमित मानसूनी वर्षा: जलवायु परिवर्तन के कारण मानसूनी वर्षा का पैटर्न अनियमित हो गया है, जिससे सूखे और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं।
  • एल नीनो जैसी घटनाओं की आवृत्ति: एल नीनो जैसी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता सूखे की स्थिति को और गंभीर बना सकती है।

4. किसानों की ऋणग्रस्तता और आत्महत्या

  • फसल बर्बादी: वर्षा की कमी से फसलें बर्बाद हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है और वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
  • सरकारी सहायता की अपर्याप्तता: मौजूदा सरकारी सहायता योजनाएं अक्सर किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए अपर्याप्त होती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वर्षा की कमी कृषि उत्पादन में गिरावट, खाद्य सुरक्षा पर खतरा, ग्रामीण आय में कमी।
एल नीनो का खतरा भविष्य में और अधिक सूखे की संभावना, मानसूनी वर्षा में अनियमितता।
पेयजल संकट भूजल स्तर में गिरावट, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, दैनिक जीवन पर प्रभाव।
किसानों की आजीविका फसल बर्बादी, ऋणग्रस्तता, आर्थिक संकट, प्रवासन।
राज्य सरकार पर दबाव राहत कार्यों और सहायता कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ।

आगे की राह

  • सूखा-प्रतिरोधी फसलों और किस्मों को बढ़ावा देना: ऐसी फसलों को प्रोत्साहित करना जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकें।
  • कुशल सिंचाई तकनीकों का उपयोग: ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) और स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler Irrigation) जैसी जल-बचत तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाना।
  • वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण: तालाबों, चेक डैम और अन्य संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संचयन और भूजल स्तर को बढ़ाना।
  • फसल बीमा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) जैसी योजनाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाना ताकि किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में समय पर मुआवजा मिल सके।
  • मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली में सुधार: किसानों को मौसम संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध कराना ताकि वे अपनी फसलों की योजना बेहतर तरीके से बना सकें।
  • कृषि विविधीकरण (Agricultural Diversification): किसानों को केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे अन्य कृषि-संबंधित गतिविधियों में संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • जल प्रबंधन नीतियों को मजबूत करना: जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और प्रबंधन के लिए प्रभावी नीतियां बनाना और उनका क्रियान्वयन करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वर्षा की कमी · सूखा · कृषि संकट · अल नीनो · भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) · जलवायु परिवर्तन · आपदा प्रबंधन · कृषि नीतियां · खाद्य सुरक्षा · जल प्रबंधन · राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘राज्य सूची में कृषि और जल’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद’}

अवधारणा प्रवाह

कम मानसूनी वर्षा  →  आंध्र प्रदेश में वर्षा की कमी  →  कृषि उत्पादन में गिरावट  →  किसानों की आय में कमी  →  खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति का खतरा  →  ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. अल नीनो (El Niño) प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से संबंधित एक जलवायु घटना है।
2. अल नीनो आमतौर पर भारत में मानसून की वर्षा को बढ़ाता है।
3. ला नीना (La Niña) की स्थिति अल नीनो के विपरीत होती है और भारत में सामान्य से अधिक वर्षा से जुड़ी होती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अल नीनो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से संबंधित एक जलवायु घटना है। कथन 2 गलत है। अल नीनो आमतौर पर भारत में मानसून की वर्षा को कम करता है, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कथन 3 सही है। ला नीना की स्थिति अल नीनो के विपरीत होती है और भारत में सामान्य से अधिक वर्षा से जुड़ी होती है।

Q2. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. यह देश में मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिए प्रमुख एजेंसी है।
3. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है, IMD पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। कथन 2 सही है, यह देश में मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिए प्रमुख एजेंसी है। कथन 3 सही है, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में वर्षा की कमी के कारण उत्पन्न होने वाले कृषि संकट के विभिन्न आयामों का परीक्षण कीजिए। ऐसे संकटों से निपटने के लिए सरकार द्वारा अपनाए जा सकने वाले उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: परिचय में वर्षा की कमी और कृषि संकट के बीच संबंध स्थापित करें। मुख्य भाग में, कृषि संकट के विभिन्न आयामों को विस्तार से बताएं, जैसे फसल उत्पादन में कमी, किसानों की आय पर प्रभाव, ग्रामीण ऋणग्रस्तता में वृद्धि, खाद्य सुरक्षा पर खतरा, पशुधन पर प्रभाव और जल संसाधनों पर दबाव। इसके बाद, सरकार द्वारा अपनाए जा सकने वाले उपायों पर चर्चा करें, जिसमें सूखा राहत पैकेज, फसल बीमा योजनाएं (जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना), जल संरक्षण और संचयन के उपाय, वैकल्पिक फसल पैटर्न को बढ़ावा देना, कृषि ऋण पुनर्गठन, मनरेगा (MGNREGA) जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण रोजगार सृजन, और दीर्घकालिक जलवायु अनुकूल कृषि रणनीतियाँ शामिल हों। निष्कर्ष में, एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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