25 Oct आरबीआई के भुवनेश्वर केंद्र से भारत में डिजिटल बैंकिंग क्रांति की शुरुआत
✎ वित्तीय समावेशन के लिए डिजिटल पहुंच जितनी आवश्यक है, उतनी ही आवश्यक उसकी डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा है, क्योंकि ग्राहक का भरोसा ही वित्तीय प्रणाली की स्थिरता का आधार है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन व्यवस्था, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, संवैधानिक एवं वैधानिक संस्थाएं | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र, वित्तीय समावेशन), आंतरिक सुरक्षा (साइबर सुरक्षा की चुनौतियां)
- Prelims: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के कार्य और उद्देश्य, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949, बैंकों का राष्ट्रीयकरण (1969 और 1980), गैर-निष्पादित आस्तियां (NPA), CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70B, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, प्रधानमंत्री जन धन योजना (2014)
- Essay: वित्तीय समावेशन का वास्तविक अर्थ: पहुंच से आगे बढ़कर भरोसा और सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था में वित्तीय संस्थाओं की साइबर सुरक्षा और डेटा संप्रभुता
त्वरित पुनरावृत्ति: वित्तीय समावेशन के लिए डिजिटल पहुंच जितनी आवश्यक है, उतनी ही आवश्यक उसकी डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा है, क्योंकि ग्राहक का भरोसा ही वित्तीय प्रणाली की स्थिरता का आधार है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री ने भुवनेश्वर में भारतीय रिज़र्व बैंक के डेटा केंद्र और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान के उद्घाटन के अवसर पर संबोधन दिया। इन दोनों सुविधाओं का महत्व इसलिए है कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं अब बड़े पैमाने पर डिजिटल प्रणालियों पर चलती हैं, जिससे डेटा का संग्रह, भंडारण और प्रसंस्करण संवेदनशील हो गया है। संबोधन में सरकारी शासन के दृष्टिकोण में बदलाव, छोटे शहरों और दूर-दराज़ के क्षेत्रों तक सेवाओं के विस्तार, तथा बैंकिंग क्षेत्र में पहुंच बढ़ाने के प्रयासों की चर्चा भी की गई। परीक्षा की दृष्टि से यह समाचार वित्तीय संस्थाओं की डेटा सुरक्षा, साइबर क्षमता निर्माण और वित्तीय समावेशन के परस्पर संबंध को समझने का अवसर देता है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत हुई। इसे मौद्रिक नीति, मुद्रा प्रबंधन और बैंकिंग विनियमन की प्रमुख जिम्मेदारी दी गई।
- बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 ने बैंकों के लाइसेंसिंग, नियमन और पर्यवेक्षण का कानूनी ढांचा दिया। इसी के तहत रिज़र्व बैंक बैंकों की निगरानी करता है।
- 1969 में 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों और 1980 में 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। इसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं को व्यापक जनसंख्या और कृषि, लघु उद्योग जैसे क्षेत्रों तक पहुंचाना था।
- प्रधानमंत्री जन धन योजना 28 अगस्त 2014 को शुरू हुई, जिसका लक्ष्य हर परिवार के लिए बैंक खाता सुनिश्चित करना और वित्तीय समावेशन को बढ़ाना था। डिजिटल भुगतान और लेन-देन के बढ़ने के साथ साइबर जोखिम भी बढ़े हैं।
- भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) की स्थापना 2004 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई। रिज़र्व बैंक ने भी बैंकों के लिए साइबर सुरक्षा ढांचा जारी किया है, जिसके अनुपालन की अपेक्षा संस्थाओं से की जाती है।
आरबीआई की डेटा और साइबर सुरक्षा सुविधाएं क्या हैं?
- डेटा केंद्र वह भौतिक और तकनीकी अवसंरचना है जहां बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली के बड़े पैमाने के डेटा संग्रहीत और संसाधित किए जाते हैं। इसकी सुरक्षा, निरंतरता और आपदा-पुनर्प्राप्ति क्षमता वित्तीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।
- साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना है, ताकि साइबर हमलों की पहचान, रोकथाम और प्रतिक्रिया की क्षमता बढ़े।
- वित्तीय क्षेत्र में साइबर जोखिम के मुख्य रूप हैं: फिशिंग, मैलवेयर, रैंसमवेयर, ग्राहक डेटा की चोरी और भुगतान प्रणालियों में घुसपैठ।
- डेटा सुरक्षा के लिए स्थानीय डेटा भंडारण, सूचना सुरक्षा नीतियां और नियामक निगरानी महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।
- वित्तीय समावेशन में डिजिटल पहुंच बढ़ने से सेवाएं दूर-दराज़ के क्षेत्रों तक पहुंचती हैं, परंतु इसके साथ ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए सुरक्षित प्रणालियां अनिवार्य हैं।
- बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता के लिए गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) पर नियंत्रण, पारदर्शी ऋण प्रक्रिया और मजबूत पर्यवेक्षण भी उतने ही आवश्यक हैं, जितनी तकनीकी सुरक्षा।
- भारत में साइबर सुरक्षा का संस्थागत ढांचा CERT-In, राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र जैसी संस्थाओं और क्षेत्रीय नियामकों के समन्वय से बनता है। क्षेत्र-विशेष के नियामक अपने क्षेत्र के लिए दिशानिर्देश जारी करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भुवनेश्वर में RBI का डेटा सेंटर | वित्तीय आंकड़ों के भंडारण, प्रबंधन और निरंतर सेवा (Business Continuity) के लिए क्षेत्रीय स्तर पर अतिरिक्त आधारभूत ढांचा मिलता है, जिससे किसी एक केंद्र पर निर्भरता घटती है। |
| साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट | बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के कर्मचारियों को साइबर खतरों, सूचना सुरक्षा और घटना-प्रतिक्रिया (Incident Response) का प्रशिक्षण देकर मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाता है। |
| क्षेत्रीय स्थान का चयन | पूर्वी भारत में संस्थागत उपस्थिति बढ़ने से विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय संतुलन को बल मिलता है, तथा वित्तीय संस्थानों के महानगर-केंद्रित होने की प्रवृत्ति कम होती है। |
| वित्तीय सूचना-तंत्र की सुरक्षा | डिजिटल भुगतान और बैंकिंग लेन-देन के बढ़ते दायरे में आंकड़ों की गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रणालीगत स्थिरता (Systemic Stability) के लिए आवश्यक है। |
| डिजिटल बैंकिंग का विस्तार | 24 घंटे की बैंकिंग सेवाओं और दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच के लिए मजबूत तकनीकी आधार चाहिए, जो इन सुविधाओं से तैयार होता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- वित्तीय प्रणाली की परिचालन निरंतरता सुनिश्चित होने से बैंकिंग और भुगतान तंत्र में जनता का विश्वास मजबूत होता है।
- डिजिटल लेन-देन में बढ़ोतरी के साथ सुरक्षित आधारभूत ढांचा मौद्रिक नीति के संचरण (Transmission) और वित्तीय समावेशन की गति को सहारा देता है।
- साइबर धोखाधड़ी से होने वाली वित्तीय हानि घटाकर बैंकों की पूंजी और जमाकर्ताओं के हित दोनों की रक्षा होती है।
रणनीतिक और सुरक्षा महत्व
- वित्तीय ढांचे पर साइबर हमले राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बन सकते हैं, इसलिए महत्वपूर्ण वित्तीय आंकड़ों की सुरक्षा राज्य की प्राथमिकता है।
- आंकड़ों के स्थानीय भंडारण से डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) की अवधारणा को व्यावहारिक आधार मिलता है।
शासन और प्रशासनिक महत्व
- केंद्रीय वित्तीय संस्था का क्षेत्रीय विस्तार सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप है, क्योंकि राज्य की राजधानी में संस्थागत उपस्थिति बढ़ती है।
- प्रशिक्षण संस्थान से पारदर्शी और जवाबदेह बैंकिंग संस्कृति तथा पेशेवर क्षमता का विकास होता है।
क्षेत्रीय विकास महत्व
- ओडिशा जैसे राज्य में उच्च-स्तरीय तकनीकी संस्थान से रोजगार के अवसर और कौशल-आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिल सकता है।
- वित्तीय और तकनीकी संस्थानों का विकेंद्रीकरण विकास के असमान वितरण की समस्या को संबोधित करने की दिशा में एक कदम है।
चुनौतियाँ
1. साइबर सुरक्षा के खतरों का बदलता स्वरूप
- रैनसमवेयर, फिशिंग और सप्लाई-चेन हमले लगातार जटिल हो रहे हैं, इसलिए सुरक्षा ढांचे को निरंतर अद्यतन करना पड़ता है।
- छोटे सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग संस्थाओं की साइबर क्षमता असमान है, जिससे पूरी प्रणाली की कमजोर कड़ी बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा और साइबर सुरक्षा; GS-3
2. कुशल मानव संसाधन की कमी
- साइबर विशेषज्ञों की मांग आपूर्ति से अधिक है, और सर्वोत्तम प्रतिभा निजी क्षेत्र की ओर आकर्षित होती है।
- प्रशिक्षण का प्रभाव तभी दिखता है जब उसे नियमित पुनर्प्रशिक्षण और मूल्यांकन से जोड़ा जाए।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास और कौशल विकास; GS-3
3. आंकड़ा गोपनीयता और डेटा संरक्षण
- वित्तीय आंकड़ों के स्थानीय भंडारण के साथ नागरिकों की निजता का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
- सरकारी पहुंच, निजी कंपनियों की भूमिका और सीमा-पार डेटा प्रवाह के बीच संतुलन बनाना नीतिगत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: डिजिटल अधिकार और डेटा संरक्षण; GS-2 और GS-3
4. गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) की विरासत और ऋण-विवेक
- बैंकिंग प्रणाली में NPA की समस्या का समाधान दिवालियापन संहिता और परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा जैसे सुधारों से हुआ, परंतु इसकी जड़ों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए पारदर्शी ऋण-मूल्यांकन आवश्यक है।
- संबंध-आधारित ऋण वितरण या अपर्याप्त निगरानी से जोखिम जमा होता है, इसलिए आंतरिक नियंत्रण मजबूत रखना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: बैंकिंग सुधार और वित्तीय स्थिरता; GS-3
5. क्षेत्रीय असंतुलन और पहुंच की सीमाएं
- संस्थागत विकेंद्रीकरण के बावजूद ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना, बिजली और इंटरनेट की गुणवत्ता असमान है।
- डिजिटल सेवाओं की पहुंच तभी सार्थक होगी जब डिजिटल साक्षरता और वित्तीय साक्षरता भी साथ बढ़े।
यूपीएससी लिंक: समावेशी विकास और ग्रामीण अवसंरचना; GS-2 और GS-3
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| साइबर खतरे | हमलों की गति और जटिलता पारंपरिक सुरक्षा उपायों से आगे निकल रही है। |
| प्रतिभा का अभाव | विशेषज्ञ कर्मियों की कमी और निजी क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा संस्थागत क्षमता पर दबाव डालती है। |
| डेटा गोपनीयता | आंकड़ों के भंडारण में सुरक्षा और निजता के बीच संतुलन बनाना कठिन है। |
| NPA की पुनरावृत्ति | ऋण-मूल्यांकन और निगरानी में कमी से पुराने जोखिम दोबारा उभर सकते हैं। |
| क्षेत्रीय अंतर | ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल और वित्तीय सेवाओं की गुणवत्ता असमान है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री जन धन योजना (Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana)
आगे की राह
- साइबर सुरक्षा ढांचे को नियमित मूल्यांकन, स्ट्रेस टेस्टिंग और अंतर-संस्थागत सूचना साझाकरण से लगातार मजबूत किया जाए।
- छोटे सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए साइबर सुरक्षा मानकों का अनुपालन सरल और सहायता-आधारित बनाया जाए।
- प्रशिक्षण संस्थान में विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और निजी विशेषज्ञों के साथ साझेदारी से कौशल-आधारित पाठ्यक्रम विकसित किए जाएं।
- डेटा संरक्षण के ढांचे को व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रावधानों के अनुरूप रखा जाए, ताकि सुरक्षा और निजता दोनों सुनिश्चित हों।
- ऋण-वितरण में पारदर्शी मूल्यांकन, स्वतंत्र ऑडिट और जोखिम-आधारित निगरानी को सुदृढ़ किया जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड, बिजली और डिजिटल साक्षरता के साथ बैंकिंग सेवाओं का समन्वित विस्तार हो।
- वित्तीय साक्षरता और साइबर जागरूकता अभियानों से उपभोक्ता स्वयं धोखाधड़ी के प्रति सतर्क बने।
- क्षेत्रीय संस्थानों की स्थापना को स्थानीय रोजगार और कौशल विकास नीति से जोड़ा जाए, ताकि विकेंद्रीकरण के लाभ स्थायी हों।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) · डिजिटल बैंकिंग (Digital Banking) · साइबर सुरक्षा (Cyber Security) · डेटा केंद्र (Data Centre) · डेटा स्थानीयकरण (Data Localisation) · गैर-निष्पादित आस्ति (Non-Performing Asset: NPA) · बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation of Banks) · डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) · सुशासन (Good Governance) · भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India: RBI)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 45: बैंकिंग विषय पर संघ का विधायी अधिकार
- अनुच्छेद 246: संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण
अवधारणा प्रवाह
डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन का तेजी से विस्तार → लेन-देन के आंकड़ों और साइबर जोखिमों में वृद्धि → भुवनेश्वर में डेटा सेंटर से आंकड़ा भंडारण और सेवा-निरंतरता की क्षमता में वृद्धि → साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण से बैंकिंग कर्मियों की दक्षता और घटना-प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार → वित्तीय प्रणाली की स्थिरता, उपभोक्ता विश्वास और वित्तीय समावेशन को सहारा → क्षेत्रीय विकेंद्रीकरण से संतुलित विकास और स्थानीय रोजगार के अवसर
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘बैंकिंग’ विषय संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची (Union List) में आता है।
2. CERT-In को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70B के अंतर्गत राष्ट्रीय एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।
3. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत भुगतान प्रणालियों के विनियमन का अधिकार भारतीय रिज़र्व बैंक को प्राप्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: उपर्युक्त में से कोई नहीं — कथन 1 सही है: ‘बैंकिंग’ संघ सूची की प्रविष्टि 45 है, इसलिए बैंकिंग पर संसद को विधि बनाने की अनन्य शक्ति है। कथन 2 सही है: धारा 70B के अंतर्गत CERT-In भारत की राष्ट्रीय साइबर घटना प्रतिक्रिया एजेंसी है। कथन 3 सही है: 2007 का अधिनियम RBI को भुगतान प्रणालियों के प्राधिकरण और विनियमन की शक्ति देता है। अतः तीनों कथन सही हैं।
Q2. कथन (A): वर्ष 1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाओं का विस्तार हुआ।
कारण (R): अग्रणी बैंक योजना (Lead Bank Scheme) के अंतर्गत प्रत्येक जिले में एक अग्रणी बैंक को उस जिले में बैंकिंग सुविधाओं के समन्वय का दायित्व सौंपा गया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — 1969 के राष्ट्रीयकरण के बाद ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं का विस्तार हुआ, इसलिए (A) सही है। अग्रणी बैंक योजना (1969, गाडगिल अध्ययन समूह की सिफारिश पर) में प्रत्येक जिले के लिए एक अग्रणी बैंक नामित किया गया, जो ऋण और बैंकिंग विस्तार के समन्वय से जुड़ा था। अतः (R) सही है और (A) की व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
सूची-I (अधिनियम/योजना)
A. बैंककारी विनियमन अधिनियम
B. दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता
C. एकीकृत लोकपाल योजना (RBI Integrated Ombudsman Scheme)
सूची-II (वर्ष)
1. 2016
2. 2021
3. 1949
4. 2007
सही सुमेलन चुनिए:
- A-3, B-1, C-2
- A-1, B-3, C-4
- A-2, B-1, C-3
- A-4, B-2, C-3
उत्तर: A-3, B-1, C-2 — बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 में बना, इसलिए A-3। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2016 में लागू हुई, इसलिए B-1। RBI की एकीकृत लोकपाल योजना 2021 में प्रारंभ हुई, इसलिए C-2। भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 का है, जो इस सूची में नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में वित्तीय समावेशन और डिजिटल बैंकिंग के विस्तार ने बैंकिंग सेवाओं की पहुँच को गाँवों और छोटे शहरों तक बढ़ाया है, किंतु इसके साथ डेटा केंद्रों और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बढ़े हैं। इस संदर्भ में समीक्षा कीजिए कि क्या विकास के लाभ को सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुँचाने के लिए बैंकिंग क्षेत्र में डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा ढाँचे को उतनी ही प्राथमिकता मिल रही है जितनी वित्तीय समावेशन के विस्तार को। अपने तर्क दीजिए और सुझाव भी प्रस्तुत कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) भूमिका: 1969 (14 बैंक) और 1980 (6 बैंक) के राष्ट्रीयकरण से वित्तीय समावेशन की नींव; 2014 में प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) से खाता-आधारित समावेशन; राष्ट्रीय नीति में बैंकिंग का ‘संघ सूची’ विषय होना (सातवीं अनुसूची, प्रविष्टि 45)। (2) वित्तीय समावेशन के विस्तार के आयाम: रंगराजन समिति (2008) और नचिकेत मोर समिति (2013) की सिफारिशें; अग्रणी बैंक योजना; डिजिटल भुगतान और ऋण पहुँच; गैर-निष्पादित आस्तियों से जुड़े सुधार तथा दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 की भूमिका। (3) डेटा और साइबर जोखिम: CERT-In की भूमिका (IT अधिनियम, 2000, धारा 70B); RBI का साइबर सुरक्षा ढाँचा; भुगतान डेटा के भारत में संग्रह का 2018 का निर्देश (डेटा स्थानीयकरण); के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) में निजता को अनुच्छेद 21 का अंग मानना। (4) विधिक ढाँचा: श्रीकृष्ण समिति (2018) से उपजा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023; उपभोक्ता संरक्षण और RBI एकीकृत लोकपाल योजना (2021) की भूमिका। (5) संतुलित दृष्टिकोण: समावेशन के लिए डिजिटल पहुँच बढ़ाना आवश्यक है, किंतु साइबर धोखाधड़ी से सबसे अधिक प्रभावित वही नए उपभोक्ता होते हैं; सुरक्षा ढाँचा कमज़ोर हो तो समावेशन का लाभ क्षीण होता है। (6) निष्कर्ष: समावेशन और सुरक्षा को परस्पर पूरक मानकर डेटा केंद्र, प्रशिक्षण संस्थान, क्षमता निर्माण और उपभोक्ता जागरूकता को एक साथ आगे बढ़ाना; सुशासन की दृष्टि से सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: भुवनेश्वर में आरबीआई की प्रमुख सुविधाओं के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संबोधन में निम्नलिखित में से किस पर विशेष जोर दिया गया था?
- A. डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन
- B. कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह
- C. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रुपये का उपयोग
- D. ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग अवसंरचना
उत्तर: A. डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन — प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया, जिससे देश में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ सके।
Mains: भुवनेश्वर में आरबीआई की प्रमुख सुविधाओं के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संबोधन के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, ओडिशा राज्य में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का उल्लेख कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- Karnataka to Reform KPSC: Cabinet Panel to Oversee Reforms - October 25, 2026
- विकसित भारत 2047: राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026 में उठे प्रमुख सुधार और नीति सुझाव - October 25, 2026
- PM Modi inaugurates RBI’s new Data Centre & Cyber Security Institute in Bhubaneswar - October 25, 2026

No Comments