इराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में लुप्तप्राय रेस्प्लेन्डेंट श्रूब मेंढक की बढ़ती आबादी

Eravikulam National Park has emerged as a thriving habitat for the endangered Resplendent Shrub Frog — labelled illustration

इराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में लुप्तप्राय रेस्प्लेन्डेंट श्रूब मेंढक की बढ़ती आबादी

✎ एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग की स्वस्थ आबादी का पाया जाना उच्च ऊंचाई वाले शोला घास के मैदानों के संरक्षण और पारिस्थितिकी बहाली परियोजनाओं की सफलता का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है, जो पश्चिमी घाट की अद्वितीय…

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी, जैव-विविधता, वन्यजीव संरक्षण  |  GS Paper I — भूगोल (भारत का भौतिक भूगोल)
  • Prelims: एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान, रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग, पश्चिमी घाट, मुन्नार वन्यजीव प्रभाग, शोला वन, IUCN रेड लिस्ट, स्थानिक प्रजातियाँ, पारिस्थितिकी बहाली परियोजनाएँ, अनामुडी शोला राष्ट्रीय उद्यान, कुंजीमाला अभयारण्य
  • Essay: जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास, जलवायु परिवर्तन का वन्यजीवों पर प्रभाव और अनुकूलन रणनीतियाँ, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और मानव कल्याण

त्वरित पुनरावृत्ति: एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग की स्वस्थ आबादी का पाया जाना उच्च ऊंचाई वाले शोला घास के मैदानों के संरक्षण और पारिस्थितिकी बहाली परियोजनाओं की सफलता का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है, जो पश्चिमी घाट की अद्वितीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में मुन्नार वन्यजीव प्रभाग के संरक्षित क्षेत्रों में किए गए एक व्यापक उभयचर और सरीसृप सर्वेक्षण से पता चला है कि इडुक्की स्थित एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (Eravikulam National Park – ENP) लुप्तप्राय रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग (Resplendent Shrub Frog) के लिए एक thriving habitat (फलते-फूलते आवास) के रूप में उभरा है। यह प्रजाति जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है और मुन्नार क्षेत्र की स्थानिक है। सर्वेक्षण में इस मेंढक की स्वस्थ आबादी दर्ज की गई है, जो उच्च ऊंचाई वाले घास के मैदानों के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर बल देता है।

पृष्ठभूमि

  • एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान केरल के इडुक्की जिले में स्थित है और पश्चिमी घाट (Western Ghats) के अनामुडी (Anamudi) पर्वत के पास स्थित है।
  • यह राष्ट्रीय उद्यान नीलगिरि तहर (Nilgiri Tahr) के संरक्षण के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो एक लुप्तप्राय पर्वतीय बकरी प्रजाति है।
  • रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग को पहली बार अनामुडी में और बाद में मीसापुलिमाला (Meesapulimala) व एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान के घास के मैदानों में पाया गया था।
  • यह मेंढक ठंडी जलवायु के अनुकूल है और पहले से ही उच्चतम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहता है, जिससे तापमान वृद्धि के कारण इसके लिए और ऊपर जाने का कोई विकल्प नहीं बचता।
  • मुन्नार वन्यजीव प्रभाग के तहत एराविकुलम, अनामुडी शोला, पंपादुम शोला (Pampadum Shola) और मथिकट्टन शोला (Mathikettan Shola) राष्ट्रीय उद्यान, साथ ही कुंजीमाला अभयारण्य (Kurinjimala Sanctuary) जैसे संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।
  • सर्वेक्षण में 54 उभयचर और 52 सरीसृप प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया, जिनमें से 19 प्रजातियाँ IUCN रेड लिस्ट (IUCN Red List) में लुप्तप्राय (endangered) श्रेणी में सूचीबद्ध हैं।

रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग और पारिस्थितिकी बहाली

  • रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग (Raorchestes resplendens) पश्चिमी घाट के मुन्नार क्षेत्र के लिए स्थानिक (endemic) है, जिसका अर्थ है कि यह केवल इसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में पाया जाता है।
  • यह प्रजाति IUCN रेड लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध है, जो इसके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरों को इंगित करता है।
  • यह मेंढक उच्च ऊंचाई वाले शोला घास के मैदानों (Shola grasslands) और शोला वनों में निवास करता है, जो पश्चिमी घाट के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान इसके आवास के लिए एक बड़ा खतरा हैं, क्योंकि यह प्रजाति पहले से ही अपनी अधिकतम ऊंचाई पर रहती है और आगे अनुकूलन के लिए कोई जगह नहीं है।
  • सर्वेक्षण में एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में 1,938 से अधिक रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग देखे गए, जो इस प्रजाति के लिए इस आवास को एक महत्वपूर्ण गढ़ के रूप में स्थापित करता है।
  • पारिस्थितिकी बहाली परियोजनाएँ (Eco-restoration projects) शोला राष्ट्रीय उद्यानों में सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं, जिससे कई देशी प्रजातियों की वापसी हुई है।
  • घास के मैदानों के आवासों की बहाली से अनामालाई स्पाइनी लिजार्ड (Anamalai Spiny Lizard), कोडाइकनाल बुश फ्रॉग (Kodaikanal Bush Frog) और शोला नाइट फ्रॉग (Shola Night Frog) जैसी प्रजातियों की उल्लेखनीय वापसी हुई है, जो पारिस्थितिकीय सुधार का एक मजबूत संकेतक है।
  • सर्वेक्षण में दर्ज की गई उभयचर प्रजातियों में से 51 पश्चिमी घाट के लिए स्थानिक हैं, जो इस क्षेत्र के गहरे पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (Eravikulam National Park) लुप्तप्राय रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग (Resplendent Shrub Frog) के लिए एक महत्वपूर्ण आवास।
रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग मुन्नार क्षेत्र में स्थानिक (endemic) प्रजाति, जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील।
हालिया सर्वेक्षण मुन्नार वन्यजीव प्रभाग के संरक्षित क्षेत्रों में उभयचरों और सरीसृपों का व्यापक सर्वेक्षण, जिसमें 1,938 रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग देखे गए।
पारिस्थितिक-पुनर्स्थापन परियोजनाएँ (Eco-restoration projects) शोला राष्ट्रीय उद्यानों में सफल रही हैं, जिससे कई देशी प्रजातियों की वापसी हुई है।
उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदान रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग का एकमात्र निवास स्थान, जिनके विनाश से प्रजाति का विलुप्त होना तय है।
पश्चिमी घाट (Western Ghats) सर्वेक्षण में दर्ज 51 उभयचर प्रजातियाँ पश्चिमी घाट के लिए स्थानिक हैं, जो इस क्षेत्र के गहरे पारिस्थितिक महत्व को दर्शाती हैं।

महत्व

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

  • यह सर्वेक्षण पश्चिमी घाट की जैव विविधता (biodiversity) के महत्व को रेखांकित करता है, विशेषकर उभयचर और सरीसृप प्रजातियों के लिए जो इस क्षेत्र में स्थानिक हैं।
  • रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों की स्वस्थ आबादी का पता चलना संरक्षण प्रयासों की सफलता और इन प्रजातियों के लिए एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान के ‘अंतिम गढ़’ के रूप में महत्व को दर्शाता है।
  • पारिस्थितिक-पुनर्स्थापन परियोजनाओं की सफलता, जैसे कि शोला राष्ट्रीय उद्यानों में, यह दर्शाती है कि सक्रिय हस्तक्षेप से आवासों को बहाल किया जा सकता है और देशी प्रजातियों की वापसी हो सकती है।

जलवायु परिवर्तन

  • रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग का जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होना इस बात पर प्रकाश डालता है कि उच्च-ऊंचाई वाले पारिस्थितिक तंत्र (ecosystems) वैश्विक तापमान वृद्धि से कितने खतरे में हैं।
  • ठंडी जलवायु के अनुकूल मेंढकों का ऊंचे स्थानों पर चले जाना, और इन मेंढकों का पहले से ही उच्चतम ऊंचाई पर रहना, यह दर्शाता है कि उनके पास जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए और कहीं जाने की जगह नहीं है।

संरक्षण नीति और प्रबंधन

  • यह रिपोर्ट संरक्षित क्षेत्रों के प्रभावी प्रबंधन और वन्यजीव प्रभागों द्वारा किए गए नियमित सर्वेक्षणों के महत्व को उजागर करती है, जो प्रजातियों की स्थिति और आवासों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए आवश्यक हैं।
  • उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदानों की सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है, क्योंकि ये कई स्थानिक और लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास हैं।

चुनौतियाँ

1. जलवायु परिवर्तन का खतरा

  • रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग जैसी प्रजातियाँ, जो पहले से ही उच्चतम ऊंचाई पर रहती हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान से सीधे खतरे में हैं, क्योंकि उनके पास और ऊपर जाने के लिए कोई जगह नहीं है।
  • जलवायु परिवर्तन से इन नाजुक उच्च-ऊंचाई वाले पारिस्थितिक तंत्रों में वर्षा पैटर्न, आर्द्रता और वनस्पति संरचना में बदलाव आ सकता है, जिससे इन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

2. आवास का नुकसान और विखंडन

  • मानवीय गतिविधियों जैसे कृषि विस्तार, बुनियादी ढांचा विकास और पर्यटन के कारण उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदानों और शोला वनों का नुकसान और विखंडन इन प्रजातियों के लिए एक गंभीर चुनौती है।
  • आवासों का विखंडन प्रजातियों की आबादी को अलग कर सकता है, जिससे आनुवंशिक विविधता कम हो सकती है और वे स्थानीय विलुप्त होने के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।

3. प्रजातियों की भेद्यता

  • सर्वेक्षण में दर्ज की गई कई प्रजातियाँ IUCN रेड लिस्ट (Red List) में लुप्तप्राय, कमजोर या निकट-संकटग्रस्त के रूप में सूचीबद्ध हैं, जो उनकी अंतर्निहित भेद्यता और संरक्षण की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती हैं।
  • उभयचर विशेष रूप से पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनकी त्वचा पारगम्य होती है और वे अपने जीवन चक्र के लिए पानी पर निर्भर करते हैं।

4. प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन

  • संरक्षित क्षेत्रों के भीतर और आसपास मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रबंधित करना एक चुनौती है, खासकर जब स्थानीय समुदायों की आजीविका पर विचार किया जाता है।
  • पर्याप्त धन, प्रशिक्षित कर्मियों और वैज्ञानिक अनुसंधान की कमी प्रभावी संरक्षण रणनीतियों को लागू करने में बाधा डाल सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जलवायु परिवर्तन उच्च-ऊंचाई वाले आवासों में तापमान वृद्धि से स्थानिक प्रजातियों का विलुप्त होने का खतरा।
आवास विखंडन मानवीय गतिविधियों के कारण महत्वपूर्ण घास के मैदानों और शोला वनों का नुकसान, जिससे प्रजातियों की आबादी अलग-थलग पड़ जाती है।
सीमित निवास स्थान रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग जैसी प्रजातियों के लिए उच्चतम ऊंचाई पर सीमित निवास स्थान, जिससे जलवायु परिवर्तन से बचने की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
संरक्षण निधि और क्षमता प्रभावी संरक्षण प्रयासों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी।

आगे की राह

  • उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदानों और शोला वनों सहित महत्वपूर्ण आवासों की सुरक्षा और बहाली के लिए मौजूदा संरक्षित क्षेत्रों को मजबूत करना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन करने और अनुकूलन रणनीतियों को विकसित करने के लिए इन नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों में दीर्घकालिक निगरानी और अनुसंधान को बढ़ावा देना।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके।
  • लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए प्रजनन कार्यक्रमों (breeding programs) और आनुवंशिक विविधता के संरक्षण पर विचार करना, विशेषकर उन प्रजातियों के लिए जिनके पास सीमित निवास स्थान हैं।
  • पारिस्थितिक-पुनर्स्थापन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन और तकनीकी सहायता सुनिश्चित करना ताकि आवासों की बहाली और देशी प्रजातियों की वापसी को जारी रखा जा सके।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नीतियों और कार्यों को मजबूत करना, क्योंकि यह इन प्रजातियों के लिए एक मूलभूत खतरा है।
  • जैव विविधता हॉटस्पॉट (biodiversity hotspots) के रूप में पश्चिमी घाट के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण के लिए सार्वजनिक समर्थन जुटाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान · संकटग्रस्त प्रजातियाँ · रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग · पश्चिमी घाट · पारिस्थितिक बहाली · जैव विविधता संरक्षण · जलवायु परिवर्तन · आईयूसीएन रेड लिस्ट · उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदान · शोल वन · स्थानिक प्रजातियाँ · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करेगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा’}

अवधारणा प्रवाह

एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग की स्वस्थ आबादी का पता चला।  →  यह प्रजाति मुन्नार क्षेत्र में स्थानिक और जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील है।  →  उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदान इस प्रजाति का एकमात्र निवास स्थान हैं।  →  जलवायु परिवर्तन और आवास का नुकसान इनके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा हैं।  →  पारिस्थितिक-पुनर्स्थापन परियोजनाएँ आवासों को बहाल करने में सफल रही हैं।  →  पश्चिमी घाट की जैव विविधता और स्थानिक प्रजातियों के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग पश्चिमी घाट के मुन्नार क्षेत्र की एक स्थानिक प्रजाति है।
2. एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान इस प्रजाति के लिए एक महत्वपूर्ण आवास के रूप में उभरा है।
3. आईयूसीएन रेड लिस्ट में ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी में आने वाली प्रजातियों में रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग शामिल है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है क्योंकि रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग मुन्नार क्षेत्र की स्थानिक प्रजाति है। कथन 2 सही है क्योंकि हालिया सर्वेक्षणों ने एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान को इस प्रजाति के लिए एक संपन्न आवास बताया है। कथन 3 सही है क्योंकि रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग को आईयूसीएन रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय उद्यान केरल में स्थित नहीं है?

  1. एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान
  2. अनामुडी शोला राष्ट्रीय उद्यान
  3. पम्पादुम शोला राष्ट्रीय उद्यान
  4. मुदुमलाई राष्ट्रीय उद्यान

उत्तर: मुदुमलाई राष्ट्रीय उद्यान — मुदुमलाई राष्ट्रीय उद्यान तमिलनाडु में स्थित है, जबकि अन्य तीनों राष्ट्रीय उद्यान केरल में स्थित हैं।

Q3. कथन (A): उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदानों का संरक्षण रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग जैसी प्रजातियों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है।
कारण (R): ये प्रजातियाँ पहले से ही उच्चतम ऊँचाई पर रहती हैं और जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान वृद्धि से बचने के लिए आगे नहीं बढ़ सकतीं।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है क्योंकि रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग जैसी ठंडी जलवायु के अनुकूल प्रजातियों के लिए उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदान महत्वपूर्ण आवास हैं। कारण (R) भी सही है और (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि ये मेंढक पहले से ही उच्चतम ऊँचाई पर रहते हैं और तापमान वृद्धि की स्थिति में इनके पास और ऊपर जाने का कोई विकल्प नहीं होता, जिससे उनके आवास का विनाश उनकी विलुप्ति का कारण बन सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पश्चिमी घाट में जैव विविधता के संरक्षण में राष्ट्रीय उद्यानों और पारिस्थितिक बहाली परियोजनाओं की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, जलवायु परिवर्तन से संकटग्रस्त स्थानिक प्रजातियों के संरक्षण के लिए भारत के प्रयासों का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पश्चिमी घाट को जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में संक्षिप्त परिचय और उसके महत्व पर प्रकाश।
2. **राष्ट्रीय उद्यानों की भूमिका:**
* एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान जैसे उदाहरणों का उल्लेख, जहाँ रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण हो रहा है।
* इन उद्यानों द्वारा प्रदान किए जाने वाले सुरक्षित आवास, अवैध शिकार से सुरक्षा और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के रखरखाव पर चर्चा।
* वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कानूनी ढाँचे का उल्लेख।
3. **पारिस्थितिक बहाली परियोजनाओं की भूमिका:**
* शोला राष्ट्रीय उद्यानों में घास के मैदानों की बहाली और उसके सकारात्मक प्रभावों का उदाहरण (जैसे अनामालाई स्पाइनी लिजर्ड, कोडाईकनाल बुश फ्रॉग की वापसी)।
* क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों को पुनर्जीवित करने और देशी प्रजातियों के लिए आवास बनाने में इन परियोजनाओं की प्रभावशीलता।
4. **जलवायु परिवर्तन और स्थानिक प्रजातियों का संरक्षण:**
* रेस्प्लेंडेंट श्रब फ्रॉग जैसी प्रजातियों पर जलवायु परिवर्तन के विशिष्ट प्रभावों की व्याख्या (उच्चतम ऊँचाई पर रहने के कारण अनुकूलन की सीमित क्षमता)।
* भारत सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का मूल्यांकन: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसे जलवायु परिवर्तन शमन कार्यक्रम, राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजना, वन्यजीव आवास का एकीकृत विकास (Integrated Development of Wildlife Habitats) जैसी योजनाएँ।
* आईयूसीएन रेड लिस्ट के महत्व और उसके आधार पर संरक्षण रणनीतियों का विकास।
5. **चुनौतियाँ और आगे की राह:**
* जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव, मानव-वन्यजीव संघर्ष, आवास विखंडन जैसी चुनौतियाँ।
* सामुदायिक भागीदारी, सतत पर्यटन और अनुसंधान एवं विकास पर जोर देने की आवश्यकता।
6. **निष्कर्ष:** पश्चिमी घाट की अनूठी जैव विविधता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय उद्यानों, बहाली परियोजनाओं और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियों के एकीकृत दृष्टिकोण का महत्व।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment