ईरान ने अमेरिका को दिया 6 दिन का अल्टीमेटम, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोले जाने की शर्तें पूरी करें

Iran gives US six days to meet conditions for reopening Strait of Hormuz: Report — diagram

ईरान ने अमेरिका को दिया 6 दिन का अल्टीमेटम, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोले जाने की शर्तें पूरी करें

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Strait of Hormuz choke point

✎ होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, और इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनावों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: होर्मुज जलडमरूमध्य, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य, वैश्विक तेल व्यापार, ईरान-अमेरिका संबंध, लाल सागर, ऊर्जा सुरक्षा
  • Essay: वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में समुद्री मार्गों की भूमिका, भू-राजनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर उनका प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, और इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनावों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के सामने कुछ शर्तें रखी हैं, जिसके लिए अमेरिका को छह दिनों के भीतर जवाब देना होगा। इन शर्तों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी और प्रतिबंधों को हटाना, जमे हुए ईरानी धन को जारी करना और क्षेत्र में सैन्य अभियानों को समाप्त करना शामिल है। यह घटनाक्रम इस महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग को लेकर बढ़ते तनाव के बीच आया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर संभावित प्रभावों के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं।

पृष्ठभूमि

  • होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और अरब सागर से जोड़ता है।
  • यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स (Chokepoints) में से एक है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है।
  • ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव ने इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा को एक संवेदनशील मुद्दा बना दिया है।
  • अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।
  • हाल ही में, लाल सागर (Red Sea) और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab al-Mandab Strait) में हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) के हमलों ने भी समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है?

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया में एक संकीर्ण, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग है।
  • यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और इस प्रकार हिंद महासागर तक पहुंच प्रदान करता है।
  • यह जलडमरूमध्य ईरान के दक्षिण-पश्चिमी तट और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तथा ओमान के उत्तरी तट के बीच स्थित है।
  • इसकी चौड़ाई लगभग 39 किलोमीटर (21 समुद्री मील) है, लेकिन नौवहन योग्य चैनल केवल 10 किलोमीटर (6.2 मील) चौड़ा है।
  • विश्व के कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के एक महत्वपूर्ण हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह क्षेत्र भू-राजनीतिक तनावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, और इस मार्ग में किसी भी व्यवधान का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
  • यह जलडमरूमध्य कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों, जैसे सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के लिए समुद्री निर्यात का एकमात्र मार्ग है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
ईरान की शर्तें अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी समाप्त करना, जमे हुए ईरानी परिसंपत्तियों को जारी करना और क्षेत्र में सैन्य अभियानों को समाप्त करना।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव जलडमरूमध्य में व्यवधान से तेल आपूर्ति, शिपिंग और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab al-Mandab Strait) लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाला एक अन्य महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग, जो हाल ही में यमन के हौथी विद्रोहियों के नियंत्रण में है।
कूटनीतिक समाधान ब्रिटेन और अमेरिका दोनों ही इस गतिरोध के लिए कूटनीतिक समाधान की वकालत कर रहे हैं, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट्स (Chokepoints) में से एक है, जिससे वैश्विक तेल का लगभग एक-तिहाई और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का एक-चौथाई हिस्सा गुजरता है।
  • इस मार्ग में किसी भी व्यवधान से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता आ सकती है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
  • ईरान पर लगे प्रतिबंधों और उसकी परिसंपत्तियों के जमे होने से उसकी अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है, और वह इन्हें हटवाना चाहता है।

सामरिक और भू-राजनीतिक महत्व

  • यह क्षेत्र वैश्विक शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें अमेरिका, ईरान और अन्य खाड़ी देशों के हित शामिल हैं।
  • बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में हौथी विद्रोहियों की गतिविधियाँ लाल सागर और हिंद महासागर के बीच एक और महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग को बाधित कर रही हैं, जिससे वैश्विक शिपिंग पर दोहरा दबाव पड़ रहा है।
  • ईरान की शर्तें क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को मजबूत करने और अमेरिकी प्रभाव को कम करने की उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

  • यह घटनाक्रम अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और वार्ता की जटिलता को दर्शाता है, जहाँ विभिन्न देशों के राष्ट्रीय हित टकराते हैं।
  • ब्रिटेन जैसे देशों की भूमिका मध्यस्थता और ‘स्वतंत्र नौवहन’ (Freedom of Navigation) के सिद्धांत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
  • यह संकट संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी चर्चा का विषय बन सकता है।

चुनौतियाँ

1. ऊर्जा सुरक्षा

  • होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित होंगी, जिससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ेंगी और आयात पर निर्भर देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा जोखिम पैदा होंगे।
  • भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों के लिए यह एक गंभीर चुनौती है, क्योंकि इससे उनकी अर्थव्यवस्था पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

2. क्षेत्रीय अस्थिरता

  • ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से मध्य पूर्व में क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे संघर्ष और प्रॉक्सी युद्धों का खतरा बढ़ जाएगा।
  • यमन में हौथी विद्रोहियों की गतिविधियाँ और सऊदी अरब पर उनके हमले पहले से ही अस्थिर क्षेत्र को और अधिक जटिल बना रहे हैं।

3. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर प्रभाव

  • जलडमरूमध्य के बंद होने या शिपिंग लागत में वृद्धि से वैश्विक व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी और आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित होंगी।
  • यह वैश्विक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को धीमा कर सकता है और मुद्रास्फीति (Inflation) को बढ़ा सकता है।

4. कूटनीतिक गतिरोध

  • ईरान और अमेरिका के बीच शर्तों को लेकर असहमति से कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है, जिससे समाधान तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
  • दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी और पिछली वार्ताओं की विफलताएं वर्तमान प्रयासों को और जटिल बना रही हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में भारी व्यवधान, कीमतों में वृद्धि।
अमेरिकी प्रतिबंध और ईरानी परिसंपत्तियाँ ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव, वार्ता में मुख्य बाधा।
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में व्यवधान लाल सागर-हिंद महासागर व्यापार मार्ग पर अतिरिक्त दबाव, शिपिंग लागत में वृद्धि।
क्षेत्रीय सैन्य अभियान मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने का जोखिम, मानवीय संकट का खतरा।
कूटनीतिक समाधान की धीमी गति लंबी अवधि के गतिरोध की संभावना, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर निरंतर अनिश्चितता।

आगे की राह

  • ईरान और अमेरिका के बीच सीधे और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना, जिसमें मध्यस्थों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
  • प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और ईरानी परिसंपत्तियों को जारी करने के लिए एक विश्वसनीय रोडमैप (Roadmap) तैयार करना।
  • होर्मुज और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में ‘स्वतंत्र नौवहन’ के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा एकजुट प्रयास करना।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा संवादों को मजबूत करना, जिसमें सभी संबंधित पक्ष शामिल हों, ताकि विश्वास बहाली और तनाव कम किया जा सके।
  • संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को इस संकट के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • भारत जैसे प्रमुख हितधारक देशों को ऊर्जा आपूर्ति विविधीकरण (Diversification) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
  • क्षेत्रीय संघर्षों, जैसे यमन युद्ध, के लिए राजनीतिक समाधान खोजने के प्रयासों को तेज करना, ताकि समग्र क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

होर्मुज जलसंधि · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग · ऊर्जा सुरक्षा · भू-राजनीतिक तनाव · ईरान-अमेरिका संबंध · आर्थिक प्रतिबंध · मुक्त नौवहन · क्षेत्रीय स्थिरता · बाब अल-मंडेब जलसंधि · लाल सागर

अवधारणा प्रवाह

ईरान की होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी  →  वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों पर खतरा  →  अंतर्राष्ट्रीय तेल की कीमतों में वृद्धि और आर्थिक अस्थिरता  →  अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता का दबाव  →  ईरान द्वारा प्रतिबंध हटाने और परिसंपत्तियां जारी करने की मांग  →  क्षेत्रीय अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. होर्मुज जलसंधि फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ती है।
2. यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदुओं में से एक है।
3. बाब अल-मंडेब जलसंधि लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1, 2 और 3 तीनों सही हैं। होर्मुज जलसंधि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बाब अल-मंडेब जलसंधि लाल सागर और हिंद महासागर के बीच एक अन्य महत्वपूर्ण मार्ग है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा देश होर्मुज जलसंधि के तट पर स्थित नहीं है?

  1. ईरान
  2. ओमान
  3. संयुक्त अरब अमीरात
  4. यमन

उत्तर: यमन — यमन होर्मुज जलसंधि के तट पर स्थित नहीं है। ईरान और ओमान जलसंधि के दोनों किनारों पर स्थित हैं, जबकि संयुक्त अरब अमीरात फारस की खाड़ी में स्थित है और जलसंधि से निकटता रखता है। यमन बाब अल-मंडेब जलसंधि के पास स्थित है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ होर्मुज जलसंधि के भू-रणनीतिक महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर इसके बंद होने के संभावित प्रभावों की भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में होर्मुज जलसंधि का भौगोलिक स्थान और इसका वैश्विक व्यापार, विशेषकर तेल व्यापार में महत्व बताया जाना चाहिए। इसके भू-रणनीतिक महत्व का विश्लेषण करते हुए क्षेत्रीय शक्तियों (जैसे ईरान, सऊदी अरब, अमेरिका) के हितों और संघर्षों को उजागर करना होगा। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर इसके बंद होने के संभावित प्रभावों पर चर्चा की जानी चाहिए, जिसमें तेल की कीमतों में वृद्धि, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर असर शामिल है। मुक्त नौवहन के सिद्धांत और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत इसकी स्थिति का भी उल्लेख किया जा सकता है।

स्रोत: Times of India


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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