उपराष्ट्रपति ने शिलांग में 1,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखी, विकास पर जोर दिया

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शिलांग में सार्वजनिक स्वागत समारोह में भाग लिया; 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं — diagram

उपराष्ट्रपति ने शिलांग में 1,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखी, विकास पर जोर दिया

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✎ उपराष्ट्रपति की मेघालय यात्रा ने 'विकसित भारत @ 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आधारभूत संरचना विकास, समावेशी प्रगति और पूर्वोत्तर राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन एवं कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय  |  GS Paper III — आधारभूत संरचना: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि
  • Prelims: उपराष्ट्रपति के कार्य, विकसित भारत @ 2047, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास योजनाएँ, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), जल जीवन मिशन, PM-DevINE योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
  • Essay: विकसित भारत @ 2047: राज्यों की भूमिका और समावेशी विकास, पूर्वोत्तर भारत का विकास: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: उपराष्ट्रपति की मेघालय यात्रा ने ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आधारभूत संरचना विकास, समावेशी प्रगति और पूर्वोत्तर राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने हाल ही में मेघालय का दौरा किया, जहाँ उन्होंने राज्य सरकार और जनता द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक स्वागत समारोह में भाग लिया। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की पाँच प्रमुख विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और एक मातृत्व एवं बाल अस्पताल का उद्घाटन किया। उन्होंने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समावेशी विकास और प्रत्येक राज्य, गाँव तथा नागरिक के सशक्तिकरण पर जोर दिया।

पृष्ठभूमि

  • उपराष्ट्रपति का पद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 के तहत स्थापित है, जो देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद का प्रतिनिधित्व करता है।
  • उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करते हैं और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति या पद रिक्त होने पर उनके कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
  • ‘विकसित भारत @ 2047’ भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण है, जिसका उद्देश्य भारत को स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है।
  • पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के विकास को केंद्र सरकार द्वारा विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिसके लिए विभिन्न योजनाएँ और पहल शुरू की गई हैं।
  • मेघालय अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और अद्वितीय सामाजिक संस्थाओं, विशेषकर मातृसत्तात्मक परंपराओं के लिए जाना जाता है।
  • कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा और जल आपूर्ति जैसी आधारभूत संरचनाएँ पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास के लिए महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

उपराष्ट्रपति के पद और संबंधित विकास पहलों के बारे में

  • उपराष्ट्रपति का पद: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार, भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। वह राष्ट्रपति के बाद देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद धारण करता है।
  • कार्य एवं भूमिका: उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं और राष्ट्रपति के पद रिक्त होने, अनुपस्थिति या बीमारी की स्थिति में राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं।
  • विकसित भारत @ 2047: यह भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का एक राष्ट्रीय दृष्टिकोण है, जिसमें आर्थिक संवृद्धि, सामाजिक प्रगति और सुशासन के सभी आयाम शामिल हैं।
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY): यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सभी मौसमों में सड़कों के माध्यम से कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।
  • PM-DevINE योजना: यह ‘प्रधानमंत्री की पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विकास पहल’ है, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में आधारभूत संरचना और सामाजिक विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करना है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): यह भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य सार्वभौमिक पहुंच, सामर्थ्य और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करके देश में स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना है।
  • आधारशिला रखी गई परियोजनाएँ: इनमें नई शिलांग जल आपूर्ति योजना चरण II, NESIDS के तहत सड़क संपर्क परियोजनाएँ, आयुष केंद्र और 132/33 केवी सबस्टेशन शामिल हैं, जो मेघालय में जल, संपर्क, स्वास्थ्य और बिजली अवसंरचना को मजबूत करेंगे।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
1,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला मेघालय में जल आपूर्ति, संपर्क, स्वास्थ्य सेवा और बिजली अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।
शहरी चुनौती कोष के तहत नई शिलांग जल आपूर्ति योजना चरण II, भाग ए (850.58 करोड़ रुपये) शहरी क्षेत्रों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करना और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार।
NESIDS के तहत दो सड़क संपर्क परियोजनाएँ पूर्वोत्तर क्षेत्र में संपर्क में सुधार, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच।
शिलांग सिविल अस्पताल में 30 बिस्तरों वाला आयुष केंद्र पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देना और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना।
PM-DevINE के तहत मावखानू में 132/33 केवी सबस्टेशन राज्य में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और पहुंच में सुधार, औद्योगिक और घरेलू जरूरतों को पूरा करना।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नोंगस्टोइन स्थित प्रसूति एवं बाल अस्पताल का उद्घाटन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • परियोजनाओं से मेघालय में अवसंरचना विकास को गति मिलेगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
  • बेहतर संपर्क और बिजली आपूर्ति से निवेश आकर्षित होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सामाजिक महत्व

  • जल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण संपर्क में सुधार से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होगा और समावेशी विकास सुनिश्चित होगा।
  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से समाज के कमजोर वर्गों को लाभ होगा।

सामरिक महत्व

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवसंरचना विकास भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति (Act East Policy) के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर अवसंरचना राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

शासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय से परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का उदाहरण है।
  • उपराष्ट्रपति की यात्रा और परियोजनाओं का उद्घाटन केंद्र सरकार की पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. भौगोलिक चुनौतियाँ

  • मेघालय का पहाड़ी और वर्षा-प्रचुर इलाका अवसंरचना परियोजनाओं के निर्माण और रखरखाव में बाधाएँ उत्पन्न करता है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच और सामग्री परिवहन एक बड़ी चुनौती है।

2. वित्तीय संसाधन

  • बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।
  • परियोजनाओं के समय पर पूरा होने के लिए धन का कुशल उपयोग महत्वपूर्ण है।

3. पर्यावरणीय स्थिरता

  • विकास परियोजनाओं को लागू करते समय मेघालय की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना आवश्यक है।
  • जीवित जड़ों वाले पुलों और प्राकृतिक परिदृश्यों का संरक्षण विकास के साथ संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।

4. सामाजिक समावेशिता

  • यह सुनिश्चित करना कि विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचें, विशेषकर मातृसत्तात्मक परंपराओं वाले आदिवासी समुदायों तक।
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी और उनकी सांस्कृतिक पहचान का सम्मान विकास प्रक्रिया का अभिन्न अंग होना चाहिए।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पहाड़ी भूभाग और भारी वर्षा सड़क निर्माण और रखरखाव में कठिनाई, भूस्खलन का खतरा।
सीमित स्थानीय संसाधन परियोजनाओं के लिए बाहरी विशेषज्ञता और सामग्री पर निर्भरता।
पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकास परियोजनाओं का पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित नकारात्मक प्रभाव।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी विकास प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन लागत में वृद्धि और लाभों में देरी से बचने के लिए समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission)
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र अवसंरचना विकास योजना (North East Special Infrastructure Development Scheme – NESIDS)
  • प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास पहल (Prime Minister’s Development Initiative for North Eastern Region – PM-DevINE)

आगे की राह

  • मेघालय की विशिष्ट भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए सतत और समावेशी विकास मॉडल अपनाना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग को और मजबूत करना ताकि परियोजनाओं का समय पर और कुशल क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
  • स्थानीय समुदायों, विशेषकर जनजातीय समूहों को विकास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना और उनकी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना।
  • पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) को सख्ती से लागू करना।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में संपर्क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुंच में सुधार के लिए लक्षित निवेश करना।
  • पर्यटन और कृषि जैसे क्षेत्रों में स्थानीय क्षमता का दोहन करके आर्थिक विविधीकरण को बढ़ावा देना।
  • डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना ताकि ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाई जा सके, जिससे पारदर्शिता और दक्षता में सुधार होगा।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

उपराष्ट्रपति का पद · संघवाद · विकसित भारत 2047 · पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास · आधारभूत संरचना परियोजनाएं · समावेशी विकास · जल जीवन मिशन · प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना · राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन · PM-DevINE योजना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 275’, ‘note’: ‘कुछ राज्यों को संघ से अनुदान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा विवेकाधीन अनुदान’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची’}

अवधारणा प्रवाह

उपराष्ट्रपति द्वारा परियोजनाओं की आधारशिला  →  अवसंरचना विकास (जल, सड़क, स्वास्थ्य, बिजली)  →  बेहतर संपर्क और सेवाओं तक पहुंच  →  आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक विकास  →  विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है।
2. उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है।
3. उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। संविधान के अनुच्छेद 64 के अनुसार, उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। कथन 2 गलत है। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों (निर्वाचित और मनोनीत) द्वारा किया जाता है। कथन 3 गलत है। उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्य सभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, जिसे लोकसभा द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए।

Q2. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में बारहमासी सड़क संपर्क प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी।
2. इस योजना का उद्देश्य उन बस्तियों को जोड़ना है जिनकी आबादी मैदानी क्षेत्रों में 500 से अधिक और पहाड़ी/जनजातीय क्षेत्रों में 250 से अधिक है।
3. यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लागत साझा की जाती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। PMGSY ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य पात्र असंबद्ध बस्तियों को बारहमासी सड़क संपर्क प्रदान करना है। यह केंद्र प्रायोजित योजना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के उपराष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका और शक्तियों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत के उपराष्ट्रपति के पद का संक्षिप्त परिचय, जो देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
2. **संवैधानिक भूमिका और शक्तियाँ:**
* **राज्य सभा का पदेन सभापति:** अनुच्छेद 64 और 89(1) के तहत भूमिका, विधायी प्रक्रिया में महत्व।
* **राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना:** अनुच्छेद 65 के तहत राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, मृत्यु, त्यागपत्र या पद से हटाए जाने की स्थिति में कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना।
* **निर्वाचन और पदच्युति:** अनुच्छेद 66 और 67 के तहत प्रक्रिया का उल्लेख।
* **शक्तियों का आलोचनात्मक परीक्षण:** वास्तविक कार्यकारी शक्तियों का अभाव, मुख्य रूप से औपचारिक और प्रतीकात्मक भूमिका, राज्य सभा के सभापति के रूप में निष्पक्षता की अपेक्षा।
3. **पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में केंद्र सरकार की पहलें:**
* **अवसंरचना विकास:** सड़क (PMGSY), रेल, हवाई संपर्क में सुधार।
* **सामाजिक क्षेत्र का विकास:** स्वास्थ्य (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन), शिक्षा, जल आपूर्ति (जल जीवन मिशन)।
* **आर्थिक विकास:** PM-DevINE योजना, NESIDS जैसी विशिष्ट योजनाएँ।
* **पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण:** क्षेत्र की समृद्ध विरासत और पर्यटन क्षमता का दोहन।
* **समावेशी विकास पर जोर:** ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में पूर्वोत्तर की भूमिका।
4. **निष्कर्ष:** उपराष्ट्रपति के पद का संवैधानिक महत्व और पूर्वोत्तर के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का सारांश, जो राष्ट्रीय प्रगति के लिए समावेशी विकास की आवश्यकता को दर्शाता है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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