16 Sep औषध विभाग ने मनाया ‘स्वच्छता पखवाड़ा’, स्वच्छ भारत अभियान को मिला बल
✎ स्वच्छता पखवाड़ा भारत सरकार की एक पहल है जो विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को 15 दिनों की अवधि के लिए स्वच्छता से संबंधित गहन गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिसका उद्देश्य 'स्वच्छ भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करना…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, नागरिक चार्टर | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
- Prelims: स्वच्छ भारत अभियान, स्वच्छता पखवाड़ा, रसायन और उर्वरक मंत्रालय, औषध विभाग, राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU), जन औषधि केंद्र
- Essay: स्वच्छता: राष्ट्र निर्माण का आधार, सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक सहभागिता
त्वरित पुनरावृत्ति: स्वच्छता पखवाड़ा भारत सरकार की एक पहल है जो विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को 15 दिनों की अवधि के लिए स्वच्छता से संबंधित गहन गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिसका उद्देश्य ‘स्वच्छ भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग ने 1 से 15 सितंबर, 2026 तक ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ का आयोजन किया। इस पहल में विभाग के अधिकारियों, राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसका उद्देश्य ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप स्वच्छता और साफ-सफाई के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना था।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार द्वारा ‘स्वच्छ भारत अभियान’ (Swachh Bharat Abhiyan) का शुभारंभ 2 अक्टूबर, 2014 को किया गया था, जिसका लक्ष्य महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक (2019) ‘स्वच्छ भारत’ के उनके सपने को साकार करना था।
- इस अभियान का मुख्य उद्देश्य खुले में शौच मुक्त (ODF) भारत बनाना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना और नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना था।
- ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ सरकारी मंत्रालयों और विभागों द्वारा आयोजित एक विशेष पहल है, जिसके तहत 15 दिनों की अवधि के लिए स्वच्छता से संबंधित गहन गतिविधियाँ और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
- यह पखवाड़ा सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों और समुदायों में स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करता है और कर्मचारियों तथा नागरिकों को इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करता है।
- औषध विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है और देश में फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र के विकास और विनियमन के लिए जिम्मेदार है। इसमें NIPER जैसे अनुसंधान संस्थान और फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ़ इंडिया जैसे सार्वजनिक उपक्रम शामिल हैं।
- स्वच्छता केवल भौतिक वातावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, कार्यस्थल की उत्पादकता और समग्र जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है।
स्वच्छता पखवाड़ा क्या है?
- ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसके तहत विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को अपने अधिकार क्षेत्र में 15 दिनों की अवधि के लिए स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों को आयोजित करने के लिए कहा जाता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक संस्थानों और समुदायों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसे एक जन आंदोलन बनाना है।
- इस पखवाड़े के दौरान, अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यस्थलों, परिसरों और आसपास के क्षेत्रों की सफाई के लिए ‘श्रमदान’ (स्वैच्छिक श्रम) करते हैं।
- इसमें जागरूकता कार्यक्रम, निबंध प्रतियोगिताएं, चित्रकला प्रतियोगिताएं और स्वच्छता शपथ जैसे विभिन्न कार्यक्रम शामिल होते हैं ताकि सभी हितधारकों को शामिल किया जा सके।
- यह पहल ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के व्यापक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है, जो देश भर में स्वच्छता और साफ-सफाई के उच्च मानकों को बनाए रखने पर केंद्रित है।
- औषध विभाग के संदर्भ में, इस पखवाड़े में NIPER परिसरों में सफाई अभियान, पुराने फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान का निपटान, कीट-नियंत्रण और जन औषधि केंद्रों तक स्वच्छता संदेश का विस्तार शामिल था।
- यह सरकारी संस्थानों की जवाबदेही को दर्शाता है कि वे न केवल अपने मुख्य कार्यों को पूरा करें, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्वों, जैसे स्वच्छता, में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्वच्छता पखवाड़ा | यह एक विशेष अवधि है जिसमें स्वच्छता और साफ-सफाई पर केंद्रित गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। |
| सामूहिक भागीदारी | इसमें सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्रों और संकाय सदस्यों सहित विभिन्न हितधारकों की सक्रिय भागीदारी शामिल है। |
| जागरूकता कार्यक्रम | स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। |
| अपशिष्ट प्रबंधन | पुराने और बेकार हो चुके फर्नीचर, फिक्स्चर और इलेक्ट्रॉनिक सामान के निपटान और प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। |
| श्रमदान | सार्वजनिक स्थानों पर सफाई के लिए स्वैच्छिक श्रमदान किया जाता है, जो सामुदायिक भागीदारी को दर्शाता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने में मदद करता है, जो नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए आवश्यक है।
- सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देता है, जिससे स्वच्छता एक सामूहिक जिम्मेदारी बनती है।
- स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाता है और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करता है।
प्रशासनिक महत्व
- सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में स्वच्छ कार्य वातावरण सुनिश्चित करता है, जिससे उत्पादकता और दक्षता बढ़ती है।
- सरकारी संपत्तियों के उचित प्रबंधन और निपटान को बढ़ावा देता है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है।
- सरकारी विभागों को अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।
पर्यावरणीय महत्व
- अपशिष्ट के उचित प्रबंधन और निपटान से पर्यावरणीय प्रदूषण कम होता है।
- पेड़ लगाने जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से हरित आवरण और जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।
- स्वच्छता से संबंधित कीट-नियंत्रण अभियान सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
चुनौतियाँ
1. व्यवहार परिवर्तन में निरंतरता
- स्वच्छता पखवाड़े के बाद भी लोगों के व्यवहार में स्वच्छता के प्रति निरंतरता बनाए रखना एक चुनौती है।
- स्वच्छता को एक आदत के रूप में विकसित करने के लिए लगातार प्रयासों और प्रेरणा की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, शासन
2. बुनियादी ढांचे का अभाव
- कुछ क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे (जैसे कूड़ेदान, अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयाँ) की कमी हो सकती है।
- विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, शासन
3. संसाधनों का आवंटन
- स्वच्छता अभियानों के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का आवंटन और उनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- पुराने सामान के निपटान और नए के प्रबंधन के लिए उचित प्रक्रियाओं और संसाधनों की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, संसाधन जुटाना
4. निगरानी और मूल्यांकन
- स्वच्छता अभियानों की प्रभावशीलता की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना ताकि कमियों की पहचान की जा सके और सुधार किए जा सकें।
- स्वच्छता मानकों को बनाए रखने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र का अभाव एक चुनौती हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, नीति कार्यान्वयन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जागरूकता की कमी | स्वच्छता के प्रति स्थायी आदतों को अपनाने में जनता की उदासीनता। |
| अपशिष्ट निपटान की समस्या | अव्यवस्थित शहरीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट के उचित निपटान की कमी। |
| संस्थागत क्षमता | स्वच्छता कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्थानीय निकायों की सीमित क्षमता। |
| निगरानी का अभाव | स्वच्छता मानकों के अनुपालन की नियमित और कठोर निगरानी की कमी। |
| तकनीकी प्रगति का उपयोग | अपशिष्ट प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों (जैसे रीसाइक्लिंग, अपशिष्ट-से-ऊर्जा) को अपनाने में धीमी गति। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission)
आगे की राह
- स्वच्छता पखवाड़े जैसे अभियानों को केवल एक अवधि तक सीमित न रखकर, स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
- स्वच्छता के प्रति व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों को स्कूलों और समुदायों में व्यापक रूप से लागू किया जाना चाहिए।
- अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र शामिल हों।
- स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को स्वच्छता कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सशक्त और प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
- स्वच्छता मानकों के अनुपालन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए, जिसमें सार्वजनिक भागीदारी को भी शामिल किया जा सके।
- सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में ‘कबाड़ से कंचन’ (Waste to Wealth) अवधारणा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे अनुपयोगी वस्तुओं का पुनः उपयोग या पुनर्चक्रण हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छ भारत अभियान · स्वच्छता पखवाड़ा · जनभागीदारी · सार्वजनिक स्वास्थ्य · शासन में नैतिकता · सतत विकास लक्ष्य · नागरिक केंद्रित शासन · अपशिष्ट प्रबंधन · पर्यावरण स्वच्छता · कार्यस्थल स्वच्छता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 47’: ‘राज्य का कर्तव्य: पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करना तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करना।’}
अवधारणा प्रवाह
स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन → सामूहिक भागीदारी और जागरूकता कार्यक्रम → स्वच्छता अभियानों का संचालन → अपशिष्ट प्रबंधन और निपटान → स्वच्छ और स्वस्थ परिवेश का निर्माण → सार्वजनिक स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. स्वच्छ भारत अभियान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उद्देश्य भारत को खुले में शौच मुक्त (ODF) बनाना है।
2. यह केवल ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित है।
3. ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ इस अभियान का एक अभिन्न अंग है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, स्वच्छ भारत अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य खुले में शौच मुक्त भारत का निर्माण करना है। कथन 2 गलत है, यह अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर केंद्रित है। कथन 3 सही है, ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ जैसे कार्यक्रम स्वच्छ भारत अभियान के तहत जनभागीदारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किए जाते हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय ‘औषध विभाग’ के अंतर्गत आता है?
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
- रसायन और उर्वरक मंत्रालय
- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
उत्तर: रसायन और उर्वरक मंत्रालय — औषध विभाग (Department of Pharmaceuticals) रसायन और उर्वरक मंत्रालय (Ministry of Chemicals and Fertilizers) के अंतर्गत कार्य करता है। यह औषधि क्षेत्र से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों के लिए जिम्मेदार है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सार्वजनिक स्वच्छता को बढ़ावा देने में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनभागीदारी सुनिश्चित करने में इसकी सफलता का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्यों और शुरुआत का उल्लेख।
2. स्वच्छ भारत अभियान की भूमिका (सकारात्मक पक्ष):
– खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति प्राप्त करने में योगदान।
– ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) में सुधार।
– व्यवहार परिवर्तन और जागरूकता में वृद्धि।
– सार्वजनिक स्वास्थ्य संकेतकों पर प्रभाव।
– स्वच्छता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना।
3. चुनौतियाँ और सीमाएँ (समालोचनात्मक पक्ष):
– स्थायी व्यवहार परिवर्तन की चुनौती।
– अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना की कमी।
– शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में असमान प्रगति।
– वित्तीय और तकनीकी बाधाएँ।
– निगरानी और मूल्यांकन तंत्र की प्रभावशीलता।
4. ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ और जनभागीदारी:
– ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य और कार्यप्रणाली।
– इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनभागीदारी की सफलता के उदाहरण (जैसे सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों की भागीदारी)।
– जनभागीदारी बढ़ाने में चुनौतियाँ (जैसे निरंतरता का अभाव, केवल प्रतीकात्मक भागीदारी)।
5. निष्कर्ष: अभियान की समग्र सफलता का मूल्यांकन, आगे की राह और सतत स्वच्छता प्रयासों के महत्व पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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