31 Aug केरल में हाथी मृत्यु एवं मानव हताहत के गंभीर स्थलों की पहचान: वन्य जीव संस्थान की रिपोर्ट
✎ मानव-हाथी संघर्ष (HEC) आवास के नुकसान और मानव अतिक्रमण के कारण उत्पन्न होता है, जिससे हाथी और मनुष्य दोनों प्रभावित होते हैं, और इसके समाधान के लिए एकीकृत तथा सामुदायिक-आधारित दृष्टिकोण आवश्यक हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता
- Prelims: मानव-हाथी संघर्ष (HEC), वन्यजीव संस्थान भारत (WII), हाथी मृत्यु दर, विद्युत-आघात से हाथियों की मौत, अरिकोम्बन हाथी, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
- Essay: मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व: चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण
त्वरित पुनरावृत्ति: मानव-हाथी संघर्ष (HEC) आवास के नुकसान और मानव अतिक्रमण के कारण उत्पन्न होता है, जिससे हाथी और मनुष्य दोनों प्रभावित होते हैं, और इसके समाधान के लिए एकीकृत तथा सामुदायिक-आधारित दृष्टिकोण आवश्यक हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India – WII) द्वारा जारी एक रिपोर्ट ‘केरल राज्य में मानव-हाथी संघर्ष 2008-2025: रुझान, चुनौतियाँ और अंतर्दृष्टि’ में केरल के कुछ गाँवों को हाथी मृत्यु दर और मानव हताहतों के लिए लगातार हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। इस रिपोर्ट में मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict – HEC) के उच्च घटनाओं वाले 21 गाँवों को भी वर्गीकृत किया गया है, जहाँ 20 से अधिक मानव हताहतों की सूचना मिली है।
पृष्ठभूमि
- रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन अवधि (2008-2025) के दौरान मानव मृत्यु और चोट की घटनाओं वाले 214 गाँवों में से 175 को कम घटना (0-10 घटनाएँ), 18 को मध्यम घटना (10-20 घटनाएँ) और 21 गाँवों को उच्च घटना (20 से अधिक घटनाएँ) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- रानी वन प्रभाग को 169 HEC मामलों के साथ सबसे अधिक प्रभावित प्रभाग के रूप में पहचाना गया, जिसके बाद मुन्नार प्रभाग (144 मामले) और मुन्नार वन्यजीव तथा नीलांबुर उत्तर प्रभाग (क्रमशः 138 और 108 मामले) थे।
- नीलांबुर, पलक्कड़-मन्नारक्काड, मुन्नार-मनकुलम और कोथमंगलम-पेरियार परिदृश्य को HEC के प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में पहचाना गया है।
- हाथियों की मृत्यु का प्रमुख मानवजनित कारण विद्युत-आघात (Electrocution) पाया गया, जिससे 154 हाथियों की मौत हुई। इसके अतिरिक्त, विस्फोटक चारे से 12 और प्रतिशोधात्मक हत्याओं से 11 हाथियों की जान गई।
- अकेले वयस्क नर हाथी HEC की अधिकांश घटनाओं के लिए जिम्मेदार पाए गए, विशेष रूप से फसलों को नुकसान पहुँचाने और संपत्तियों को क्षति पहुँचाने में।
मानव-हाथी संघर्ष (HEC) क्या है?
- मानव-हाथी संघर्ष (HEC) तब होता है जब मनुष्य और हाथी एक ही स्थान पर सह-अस्तित्व में होते हैं और एक-दूसरे के संसाधनों या सुरक्षा के लिए खतरा बन जाते हैं।
- यह संघर्ष अक्सर हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुँचाने, घरों को तोड़ने और कभी-कभी मनुष्यों को घायल या मार डालने के रूप में प्रकट होता है। इसके जवाब में, मनुष्य भी हाथियों को घायल करते या मारते हैं।
- HEC के मुख्य कारणों में आवास का नुकसान और विखंडन, मानव बस्तियों का विस्तार, कृषि का अतिक्रमण, कॉरिडोर का अवरुद्ध होना और हाथियों के भोजन तथा पानी के स्रोतों में कमी शामिल हैं।
- जलवायु परिवर्तन भी HEC को बढ़ा सकता है, क्योंकि यह सूखे और भोजन की कमी को बढ़ावा देता है, जिससे हाथी भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों में प्रवेश करते हैं।
- भारत में, हाथी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) की अनुसूची I के तहत संरक्षित हैं, जो उन्हें उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है।
- HEC के प्रबंधन के लिए विभिन्न रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं, जिनमें बाड़ लगाना, खाई खोदना, चेतावनी प्रणालियाँ, फसल पैटर्न में बदलाव, सामुदायिक भागीदारी और संघर्ष वाले हाथियों का स्थानांतरण शामिल हैं।
- हालांकि, रिपोर्ट में पाया गया कि संघर्ष वाले हाथियों का स्थानांतरण (Translocation) शायद ही कभी दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है, क्योंकि उनमें से कई अपने मूल निवास स्थान पर लौटने का प्रयास करते हैं या नए क्षेत्रों में भी संघर्ष जारी रखते हैं, जैसा कि केरल में अरिकोम्बन हाथी के मामले में देखा गया था।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मानव-हाथी संघर्ष (HEC) हॉटस्पॉट | केरल के कनान देवन हिल्स, कुट्टमपुझा, चित्तर, मनकुलम, पदावयाल और पीची जैसे गाँव हाथी मृत्यु दर और मानव हताहतों के लिए लगातार हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किए गए हैं। यह संघर्ष की उच्च सांद्रता वाले क्षेत्रों को इंगित करता है। |
| उच्च घटना वाले गाँव | 21 गाँवों को मानव-हाथी संघर्ष की उच्च घटना वाले क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जहाँ 20 या अधिक मानव हताहतों की सूचना मिली है। यह समस्या की गंभीरता और स्थानीय समुदायों पर इसके प्रभाव को दर्शाता है। |
| हाथी मृत्यु का मुख्य कारण | बिजली का झटका (इलेक्ट्रोक्यूशन) हाथियों की मृत्यु का प्रमुख मानवजनित कारक पाया गया है, जिससे 154 हाथियों की जान गई है। यह अवैध बिजली के तारों और मानव-हाथी इंटरफेस पर सुरक्षा उपायों की कमी पर प्रकाश डालता है। |
| संघर्ष के लिए जिम्मेदार हाथी | अकेले वयस्क नर हाथियों को मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं के उच्चतम अनुपात के लिए जिम्मेदार पाया गया है, विशेष रूप से फसल भूमि पर छापा मारने और संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने के लिए। |
| स्थानांतरण की प्रभावशीलता | संघर्ष वाले हाथियों का स्थानांतरण (translocation) शायद ही कभी दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है, क्योंकि उनमें से कई अपने मूल आवास क्षेत्रों में लौटने का प्रयास करते हैं या नए क्षेत्रों में संघर्ष जारी रखते हैं। यह प्रबंधन रणनीतियों की जटिलता को दर्शाता है। |
महत्व
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण
- यह रिपोर्ट मानव-हाथी संघर्ष के बढ़ते मुद्दे पर प्रकाश डालती है, जो भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
- हाथी एक प्रमुख प्रजाति (keystone species) हैं और उनके संरक्षण से पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिलती है।
- हाथी मृत्यु दर के कारणों की पहचान, जैसे बिजली का झटका और विस्फोटक चारा, संरक्षण प्रयासों को लक्षित करने में मदद करती है।
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
- मानव हताहतों (मृत्यु और चोटें) और संपत्ति के नुकसान की उच्च घटनाएँ ग्रामीण समुदायों, विशेषकर कृषि पर निर्भर लोगों के लिए गंभीर सामाजिक-आर्थिक बोझ पैदा करती हैं।
- संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे गरीबी और विस्थापन हो सकता है।
- यह रिपोर्ट स्थानीय समुदायों और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व के लिए प्रभावी नीतियों और हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल देती है।
शासन और नीति निर्माण
- रिपोर्ट में पहचाने गए हॉटस्पॉट और संघर्ष के पैटर्न नीति निर्माताओं को लक्षित हस्तक्षेपों और संसाधन आवंटन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
- वन्यजीव संस्थान जैसे वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा प्रदान किए गए डेटा-संचालित अंतर्दृष्टि प्रभावी संरक्षण रणनीतियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- स्थानांतरण जैसे मौजूदा प्रबंधन उपायों की सीमाओं को समझना, अधिक टिकाऊ और व्यापक समाधानों की खोज को प्रोत्साहित करता है।
चुनौतियाँ
1. मानव-हाथी संघर्ष का प्रबंधन
- संघर्ष वाले क्षेत्रों में मानव और हाथियों दोनों के लिए हताहतों को कम करना एक जटिल चुनौती है।
- हाथियों के प्राकृतिक आवासों का अतिक्रमण और मानव बस्तियों का विस्तार संघर्ष को बढ़ाता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी; आपदा प्रबंधन
2. हाथी गलियारों का संरक्षण
- हाथी गलियारों (elephant corridors) का विखंडन और अतिक्रमण हाथियों को मानव-बहुल क्षेत्रों में धकेलता है।
- गलियारों की सुरक्षा और बहाली हाथियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी; जैव विविधता
3. अवैध शिकार और मानवजनित खतरे
- बिजली का झटका, विस्फोटक चारा और प्रतिशोधी हत्याएँ हाथियों की मृत्यु के प्रमुख कारण हैं।
- इन अवैध गतिविधियों को रोकना और अपराधियों को दंडित करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी; कानून प्रवर्तन
4. प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों का अभाव
- संघर्ष वाले हाथियों के स्थानांतरण जैसे मौजूदा उपाय अक्सर दीर्घकालिक समाधान प्रदान करने में विफल रहते हैं।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ नवीन और टिकाऊ रणनीतियों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन; पर्यावरण नीति
5. जागरूकता और क्षमता निर्माण
- स्थानीय समुदायों में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के तरीकों के बारे में जागरूकता की कमी है।
- वन विभाग के कर्मियों और स्थानीय लोगों के लिए क्षमता निर्माण की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय; पर्यावरण शिक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आवास का विखंडन | मानव बस्तियों और बुनियादी ढाँचे के विकास के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं और खंडित हो रहे हैं, जिससे वे भोजन और पानी की तलाश में मानव क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं। |
| फसल क्षति और संपत्ति का नुकसान | हाथी अक्सर फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं और घरों को तोड़ते हैं, जिससे किसानों और ग्रामीण निवासियों को भारी आर्थिक नुकसान होता है, जो संघर्ष का एक प्रमुख कारण है। |
| प्रतिशोधी हत्याएँ | फसल क्षति या मानव हताहतों के जवाब में, स्थानीय समुदाय कभी-कभी हाथियों को जहर देकर, बिजली का झटका देकर या अन्य तरीकों से मार देते हैं, जिससे संरक्षण प्रयासों को नुकसान पहुँचता है। |
| अवैध बिजली के तार और विस्फोटक | अवैध रूप से लगाए गए बिजली के तार और विस्फोटक चारा (जैसे ‘अनानास बम’) हाथियों की मृत्यु के प्रमुख कारण हैं, जो मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता को बढ़ाते हैं। |
| प्रभावी निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का अभाव | कई क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधियों की निगरानी और मानव बस्तियों में उनके प्रवेश के बारे में प्रारंभिक चेतावनी देने के लिए पर्याप्त प्रणालियों की कमी है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रोजेक्ट एलिफेंट (Project Elephant)
आगे की राह
- मानव-हाथी संघर्ष हॉटस्पॉट में लक्षित हस्तक्षेपों को लागू करना, जिसमें बेहतर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया दल शामिल हों।
- हाथी गलियारों की पहचान, सुरक्षा और बहाली, ताकि हाथियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके और आवास का विखंडन कम हो।
- अवैध बिजली के तारों और विस्फोटक चारे के उपयोग को रोकने के लिए सख्त कानून प्रवर्तन और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम।
- स्थानीय समुदायों को संघर्ष शमन रणनीतियों में शामिल करना, जैसे कि फसल सुरक्षा के लिए बाड़ लगाना, ध्वनि-आधारित अवरोधक और वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
- वन विभाग के कर्मियों और स्थानीय समुदायों के लिए मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन में क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- संघर्ष वाले हाथियों के स्थानांतरण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना और दीर्घकालिक समाधानों के लिए वैकल्पिक रणनीतियों, जैसे कि आवास संवर्धन और व्यवहार संशोधन, पर विचार करना।
- मानव-हाथी संघर्ष के डेटा संग्रह, विश्लेषण और साझाकरण में सुधार करना ताकि साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और प्रबंधन निर्णय लिए जा सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मानव-हाथी संघर्ष · हाथी गलियारे · वन्यजीव संरक्षण · पर्यावास विखंडन · संरक्षण रणनीतियाँ · इलेक्ट्रोक्यूशन · वन्यजीव संस्थान · मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व · वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम · परियोजना हाथी · पारिस्थितिक संतुलन · जलवायु परिवर्तन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों के प्रति दया रखना’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची)’, ‘note’: ‘वन्यजीवों का संरक्षण’}
अवधारणा प्रवाह
मानव बस्तियों का विस्तार और आवास का विखंडन → हाथियों का भोजन और पानी की तलाश में मानव क्षेत्रों में प्रवेश → फसल क्षति, संपत्ति का नुकसान और मानव हताहत → स्थानीय समुदायों द्वारा प्रतिशोधी कार्रवाई और अवैध तरीके (बिजली का झटका, विस्फोटक) → हाथी मृत्यु दर में वृद्धि और मानव-हाथी संघर्ष का बढ़ना → पारिस्थितिक असंतुलन और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में हाथियों की सबसे अधिक आबादी कर्नाटक राज्य में पाई जाती है।
2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत हाथी एक संरक्षित प्रजाति है।
3. प्रोजेक्ट एलिफेंट (Project Elephant) का उद्देश्य मानव-हाथी संघर्ष को कम करना और हाथियों के आवासों की रक्षा करना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 गलत है। भारत में हाथियों की सबसे अधिक आबादी कर्नाटक में नहीं, बल्कि केरल में पाई जाती है। कथन 2 सही है। हाथी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में शामिल हैं, जो उन्हें उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है। कथन 3 सही है। प्रोजेक्ट एलिफेंट का मुख्य उद्देश्य हाथियों, उनके आवासों और गलियारों की रक्षा करना तथा मानव-हाथी संघर्ष को कम करना है।
Q2. भारत में मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict – HEC) के प्रमुख कारणों में से एक है:
- हाथियों की आबादी में अत्यधिक कमी
- वन्यजीव संरक्षण कानूनों का अभाव
- मानव बस्तियों का वन क्षेत्रों में अतिक्रमण
- हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान न पहुँचाना
उत्तर: मानव बस्तियों का वन क्षेत्रों में अतिक्रमण — मानव-हाथी संघर्ष का एक प्रमुख कारण मानव बस्तियों का वन क्षेत्रों में अतिक्रमण और कृषि भूमि का विस्तार है, जिससे हाथियों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ जाते हैं और वे भोजन की तलाश में मानव बस्तियों में प्रवेश करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ केरल में मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict – HEC) के बढ़ते मामलों के आलोक में, इस समस्या के मूल कारणों का विश्लेषण कीजिए और इसके समाधान के लिए प्रभावी संरक्षण रणनीतियों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** केरल में मानव-हाथी संघर्ष की वर्तमान स्थिति और वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) की रिपोर्ट का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **मूल कारण:**
* **पर्यावास विखंडन और अतिक्रमण:** वनों की कटाई, कृषि विस्तार, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (सड़कें, रेलवे) के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवासों का सिकुड़ना और गलियारों का बाधित होना।
* **खाद्य संसाधनों की कमी:** वन क्षेत्रों में भोजन की कमी के कारण हाथियों का मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों की ओर आकर्षित होना।
* **मानवीय गतिविधियाँ:** बिजली के तारों से इलेक्ट्रोक्यूशन, विस्फोटक चारा, प्रतिशोधात्मक हत्याएं, अवैध शिकार।
* **जलवायु परिवर्तन:** बदलती वर्षा पैटर्न और तापमान से हाथियों के भोजन और पानी के स्रोतों पर प्रभाव।
* **जनसंख्या वृद्धि:** मानव और हाथी दोनों की आबादी में वृद्धि से संसाधनों पर दबाव।
3. **प्रभावी संरक्षण रणनीतियाँ:**
* **हाथी गलियारों का संरक्षण और पुनर्स्थापन:** महत्वपूर्ण गलियारों की पहचान, सुरक्षा और अतिक्रमण हटाना।
* **वैज्ञानिक प्रबंधन:** हाथियों की आबादी का वैज्ञानिक अध्ययन, व्यवहार का विश्लेषण और संघर्ष-ग्रस्त हाथियों का प्रबंधन (जैसे कि ‘अरीकोम्बन’ का मामला)।
* **सामुदायिक भागीदारी:** स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना, जागरूकता कार्यक्रम और वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
* **तकनीकी हस्तक्षेप:** बाड़ लगाना (सौर ऊर्जा से चलने वाली बाड़), प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, ड्रोन निगरानी।
* **क्षतिपूर्ति तंत्र:** फसलों और संपत्ति के नुकसान के लिए त्वरित और पर्याप्त मुआवजा।
* **कानूनी और नीतिगत उपाय:** वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का प्रभावी कार्यान्वयन, प्रोजेक्ट एलिफेंट जैसी योजनाओं को मजबूत करना।
* **अंतर-राज्यीय सहयोग:** सीमावर्ती क्षेत्रों में संघर्ष के प्रबंधन के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय।
4. **निष्कर्ष:** मानव-हाथी सह-अस्तित्व के महत्व पर जोर देते हुए एक संतुलित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण की आवश्यकता।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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