खान मंत्रालय का ई-कचरा अभियान: चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की पहल

खान मंत्रालय का ई-कचरा अभियान: चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की पहल

खान मंत्रालय का ई-कचरा अभियान: चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की पहल

ई-कचरा पुनर्चक्रण प्रक्रियाउत्पादनइलेक्ट्रॉनिक उत्पादअप्रचलनत्यागे गए उपकरणसंग्रहणई-कचरा संग्रहपृथक्करणधातुओं/खनिजों अलगपुनर्चक्रणमूल्यवान संसाधननया उत्पादचक्रीय अर्थव्यवस्था
ई-कचरा पुनर्चक्रण प्रक्रिया

✎ खान मंत्रालय का ई-कचरा संग्रहण अभियान, ‘विशेष अभियान 6’ के तहत, जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (JNARDDC) के समन्वय से, जिम्मेदार ई-कचरा प्रबंधन, महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और चक्रीय…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (संसाधन जुटाना, वृद्धि और विकास)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (दैनिक जीवन में प्रौद्योगिकी)
  • Prelims: ई-कचरा प्रबंधन नियम, चक्रीय अर्थव्यवस्था, महत्वपूर्ण खनिज, जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (JNARDDC), विशेष अभियान 6, संसाधन पुनर्प्राप्ति
  • Essay: सतत विकास के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था का महत्व, ई-कचरा प्रबंधन: एक चुनौती और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: खान मंत्रालय का ई-कचरा संग्रहण अभियान, ‘विशेष अभियान 6’ के तहत, जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (JNARDDC) के समन्वय से, जिम्मेदार ई-कचरा प्रबंधन, महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केन्द्रीय खान मंत्रालय (Ministry of Mines) ‘विशेष अभियान 6’ के तहत अपने ई-कचरा संग्रहण अभियान को सुदृढ़ कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य जिम्मेदार ई-कचरा प्रबंधन, मूल्यवान संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देना है। नागपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (JNARDDC) इस अभियान के समन्वय और कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है, जो मटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) के सहयोग से कार्य कर रहा है।

पृष्ठभूमि

  • ई-कचरा (E-waste) या इलेक्ट्रॉनिक कचरा, त्यागे गए इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों को संदर्भित करता है। यह आधुनिक समाज में तेजी से बढ़ती अपशिष्ट धारा है।
  • ई-कचरे में सीसा, पारा, कैडमियम जैसे हानिकारक पदार्थ हो सकते हैं, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
  • हालांकि, इसमें सोना, चांदी, तांबा और पैलेडियम जैसे मूल्यवान धातुएँ और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) भी होते हैं, जिनकी पुनर्प्राप्ति आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
  • भारत में ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2016 और उसके बाद के संशोधन ई-कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करते हैं, जिसमें उत्पादक उत्तरदायित्व विस्तार (Extended Producer Responsibility – EPR) का सिद्धांत शामिल है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था एक आर्थिक मॉडल है जो संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करने और अपशिष्ट को कम करने पर केंद्रित है, जिसमें उत्पादों को उनके जीवन चक्र के अंत में पुनर्चक्रित (Recycled) किया जाता है और नए उत्पादों में बदल दिया जाता है।
  • महत्वपूर्ण खनिज वे खनिज होते हैं जो आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक होते हैं, लेकिन जिनकी आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का उच्च जोखिम होता है। ई-कचरे से इनकी पुनर्प्राप्ति आपूर्ति सुरक्षा में योगदान कर सकती है।

खान मंत्रालय का ई-कचरा संग्रहण अभियान क्या है?

  • यह अभियान खान मंत्रालय की एक पहल है जिसका उद्देश्य ई-कचरे के जिम्मेदार संग्रहण, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और उससे मूल्यवान सामग्रियों की पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देना है।
  • इसका समन्वय जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (JNARDDC) द्वारा किया जा रहा है, जिसे इस अभियान के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है।
  • यह अभियान ‘विशेष अभियान 6’ का एक हिस्सा है, जो व्यापक रूप से सतत संसाधन प्रबंधन, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और चक्रीय अर्थव्यवस्था के उद्देश्यों को सुदृढ़ करता है।
  • देशभर में 44 से अधिक कार्यालय स्थलों को ई-कचरा संग्रहण के लिए चिन्हित किया गया है, जिसमें खान मंत्रालय के अधीन विभिन्न संगठन जैसे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), भारतीय खान ब्यूरो (IBM) आदि शामिल हैं।
  • अभियान के तहत एकत्रित ई-कचरे को जिम्मेदार पुनर्चक्रण और संसाधन पुनर्प्राप्ति के लिए उपयुक्त तंत्र के माध्यम से भेजा जाएगा।
  • इसका मुख्य लक्ष्य मूल्यवान द्वितीयक संसाधनों की पुनर्प्राप्ति करके प्राथमिक खनिज संसाधनों पर निर्भरता को कम करना और संसाधन दक्षता में सुधार करना है।
  • यह अभियान कर्मचारियों और हितधारकों के बीच ई-कचरे के जिम्मेदार निपटान और पुन: उपयोग, पुन: प्रयोजन एवं पुनर्चक्रण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ, अभियान और प्रतियोगिताएँ भी आयोजित कर रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ई-कचरा संग्रहण अभियान खान मंत्रालय द्वारा ‘विशेष अभियान 6’ के तहत ई-कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन और संसाधन पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देना।
नोडल एजेंसी नागपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी) समन्वय और कार्यान्वयन के लिए।
सहयोगी संगठन मटेरियल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) के सहयोग से अभियान का संचालन।
व्यापक भागीदारी देशभर में 44 से अधिक कार्यालय स्थलों पर ई-कचरा संग्रहण और जागरूकता गतिविधियाँ, जिसमें महाराष्ट्र में 28 से अधिक स्थान शामिल।
मूल्यवान संसाधन ई-कचरे को मूल्यवान द्वितीयक संसाधनों का स्रोत मानना, जिसमें आधुनिक प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण खनिज और धातुएँ शामिल हैं।
जागरूकता गतिविधियाँ कर्मचारियों और हितधारकों के बीच ई-कचरे के जिम्मेदार निपटान, पुन: उपयोग, पुन: प्रयोजन और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए अभियान और प्रतियोगिताएँ।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों और धातुओं की पुनर्प्राप्ति से आयात पर निर्भरता कम होती है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
  • पुनर्चक्रण उद्योग को बढ़ावा मिलता है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को गति मिलती है।
  • संसाधन दक्षता में सुधार होता है, जिससे प्राथमिक खनिज संसाधनों पर दबाव कम होता है और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।

पर्यावरणीय महत्व

  • ई-कचरे के उचित प्रबंधन से खतरनाक पदार्थों के मिट्टी और जल स्रोतों में रिसाव को रोका जा सकता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
  • पुनर्चक्रण से नए उत्पादों के निर्माण में लगने वाली ऊर्जा की बचत होती है, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आती है।
  • प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को कम करके जैव विविधता के संरक्षण में मदद मिलती है।

सामरिक महत्व

  • महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित होती है, जो उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
  • भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक लचीलापन प्राप्त होता है, जिससे भू-राजनीतिक जोखिम कम होते हैं।
  • तकनीकी नवाचार और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिलता है, जिससे ई-कचरा प्रबंधन और संसाधन पुनर्प्राप्ति में आत्मनिर्भरता आती है।

चुनौतियाँ

1. संग्रहण और पृथक्करण

  • देशभर में ई-कचरे के कुशल संग्रहण के लिए एक मजबूत बुनियादी ढाँचे का अभाव है।
  • उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों द्वारा ई-कचरे को सामान्य कचरे के साथ मिलाना एक बड़ी चुनौती है, जिससे पृथक्करण (Segregation) मुश्किल हो जाता है।

2. अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभुत्व

  • ई-कचरा पुनर्चक्रण में अनौपचारिक क्षेत्र की बड़ी भूमिका है, जहाँ असुरक्षित तरीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे श्रमिकों और पर्यावरण को खतरा होता है।
  • औपचारिक पुनर्चक्रण इकाइयों की सीमित क्षमता और उच्च परिचालन लागत एक चुनौती है।

3. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन

  • ई-कचरे के खतरों और जिम्मेदार निपटान के तरीकों के बारे में आम जनता में जागरूकता की कमी है।
  • उपभोक्ताओं को अपने पुराने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को पुनर्चक्रण के लिए सौंपने हेतु प्रोत्साहित करना एक चुनौती है।

4. प्रौद्योगिकी और निवेश

  • महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए उन्नत और लागत प्रभावी पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है।
  • इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए पर्याप्त निवेश की कमी है।

5. नीति और प्रवर्तन

  • ई-कचरा प्रबंधन नियमों का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना एक चुनौती है, विशेषकर अनौपचारिक क्षेत्र में।
  • उत्पादकों की विस्तारित जिम्मेदारी (Extended Producer Responsibility – EPR) को पूरी तरह से लागू करने में बाधाएँ।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अपर्याप्त संग्रहण ढाँचा ई-कचरे के बड़े पैमाने पर संग्रहण के लिए देशव्यापी व्यवस्थित प्रणाली का अभाव।
असुरक्षित पुनर्चक्रण विधियाँ अनौपचारिक क्षेत्र में खतरनाक रसायनों और प्रक्रियाओं का उपयोग, जिससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान।
जागरूकता की कमी आम जनता और व्यवसायों के बीच ई-कचरा प्रबंधन के महत्व और सही तरीकों के बारे में कम जानकारी।
तकनीकी अंतराल महत्वपूर्ण खनिजों की कुशल पुनर्प्राप्ति के लिए आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों की सीमित उपलब्धता।
नियामक प्रवर्तन ई-कचरा प्रबंधन नियमों का प्रभावी ढंग से पालन न होना, विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में।
वित्तपोषण की कमी ई-कचरा पुनर्चक्रण बुनियादी ढाँचे और अनुसंधान में निवेश के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव।

आगे की राह

  • ई-कचरा संग्रहण के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का मजबूत और सुलभ बुनियादी ढाँचा विकसित करना, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र शामिल हों।
  • ई-कचरे के जिम्मेदार निपटान और पुनर्चक्रण के महत्व के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाना।
  • उत्पादकों की विस्तारित जिम्मेदारी (EPR) को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना और उत्पादकों को पुनर्चक्रण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को औपचारिक पुनर्चक्रण प्रक्रियाओं में एकीकृत करना और उन्हें सुरक्षित तथा कुशल तकनीकों में प्रशिक्षित करना।
  • महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए उन्नत और पर्यावरण-अनुकूल पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना।
  • ई-कचरा प्रबंधन नियमों के प्रभावी प्रवर्तन के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

चक्रीय अर्थव्यवस्था · ई-कचरा प्रबंधन · महत्वपूर्ण खनिज · संसाधन पुनर्प्राप्ति · सतत संसाधन प्रबंधन · पुनर्चक्रण · विशेष अभियान 6 · खनन मंत्रालय · पर्यावरणीय उत्तरदायित्व · अपशिष्ट से धन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का उपयोग और अप्रचलन  →  ई-कचरे का उत्पादन  →  ई-कचरे का संग्रहण और पृथक्करण  →  ई-कचरे का जिम्मेदार पुनर्चक्रण  →  महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति  →  चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा और संसाधन संरक्षण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ई-कचरे में मूल्यवान द्वितीयक संसाधन जैसे महत्वपूर्ण खनिज और धातुएँ हो सकती हैं।
2. भारत में ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2022, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) सिद्धांत पर आधारित हैं।
3. खान मंत्रालय का ‘विशेष अभियान 6’ केवल ई-कचरा संग्रहण पर केंद्रित है, न कि जागरूकता गतिविधियों पर।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ई-कचरा आधुनिक प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों और धातुओं का एक संभावित स्रोत है। कथन 2 सही है क्योंकि भारत के ई-कचरा प्रबंधन नियम EPR सिद्धांत को लागू करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि ‘विशेष अभियान 6’ ई-कचरा संग्रहण के साथ-साथ जागरूकता गतिविधियों पर भी ध्यान केंद्रित करता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा संस्थान खान मंत्रालय के ‘विशेष अभियान 6’ के तहत ई-कचरा संग्रहण अभियान के लिए नोडल एजेंसी है?

  1. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI)
  2. जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (JNARDDC)
  3. भारतीय खान ब्यूरो (IBM)
  4. नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO)

उत्तर: जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (JNARDDC) — नागपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान विकास एवं डिजाइन केंद्र (JNARDDC) को खान मंत्रालय के ‘विशेष अभियान 6’ के तहत ई-कचरा संग्रहण अभियान के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को बढ़ावा देने में ई-कचरा प्रबंधन की भूमिका का परीक्षण कीजिए। भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के संदर्भ में ‘विशेष अभियान 6’ के महत्व पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में चक्रीय अर्थव्यवस्था और ई-कचरा प्रबंधन को परिभाषित करें। मुख्य भाग में, ई-कचरा प्रबंधन कैसे चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों (जैसे संसाधन दक्षता, अपशिष्ट में कमी, पुनर्चक्रण) को बढ़ावा देता है, इसकी विस्तार से व्याख्या करें। इसमें मूल्यवान खनिजों की पुनर्प्राप्ति, प्राथमिक संसाधनों पर निर्भरता कम करना और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना शामिल होगा। दूसरे भाग में, खान मंत्रालय के ‘विशेष अभियान 6’ के उद्देश्यों, कार्यान्वयन और महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति में इसकी विशिष्ट भूमिका पर प्रकाश डालें। JNARDDC, MRAI और अन्य सहभागी संगठनों का उल्लेख करें। निष्कर्ष में, सतत संसाधन प्रबंधन और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के लिए इस अभियान के व्यापक महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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