जनगणना 2027: ट्रांसजेंडर प्रमुख वाले परिवारों का होगा रिकॉर्ड, जानिए पूरा विवरण

Census 2027 to also include transgender-headed households, Rajya Sabha told — concept mind map

जनगणना 2027: ट्रांसजेंडर प्रमुख वाले परिवारों का होगा रिकॉर्ड, जानिए पूरा विवरण

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2027 Census Structure

✎ जनगणना 2027 में पहली बार ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों का डेटा एकत्र किया जाएगा, जो समावेशी नीति निर्माण और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय समाज, जनसंख्या एवं संबंधित मुद्दे, सामाजिक सशक्तिकरण  |  GS Paper II — सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप, कमजोर वर्गों का कल्याण, सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय
  • Prelims: जनगणना 2027, ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवार, स्व-गणना, जनसांख्यिकीय डेटा, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR), भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त (RGI)
  • Essay: समावेशी विकास और डेटा का महत्व, सामाजिक न्याय और हाशिए पर पड़े समुदायों का सशक्तिकरण

त्वरित पुनरावृत्ति: जनगणना 2027 में पहली बार ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों का डेटा एकत्र किया जाएगा, जो समावेशी नीति निर्माण और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

राज्यसभा को सूचित किया गया है कि आगामी जनगणना 2027 में ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों (transgender-headed households) से संबंधित डेटा भी एकत्र किया जाएगा। यह कदम जनगणना प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने और ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर ढंग से समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें पहले चरण में आवास सूचीकरण और आवास जनगणना शामिल होगी, और इसमें परिवार के मुखिया के लिंग के रूप में ‘पुरुष’, ‘महिला’ और ‘ट्रांसजेंडर’ तीनों श्रेणियों का डेटा एकत्र किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • भारत में जनगणना प्रत्येक 10 वर्ष पर आयोजित की जाती है, जो देश की जनसंख्या, जनसांख्यिकी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण डेटा का एक व्यापक स्नैपशॉट प्रदान करती है।
  • पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना COVID-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी और अब 2027 में होने वाली है।
  • भारत में जनगणना का संचालन भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त (Registrar General and Census Commissioner of India – RGI) के कार्यालय द्वारा किया जाता है, जो गृह मंत्रालय के अधीन आता है।
  • जनगणना अधिनियम, 1948 जनगणना के संचालन के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • ऐतिहासिक रूप से, जनगणना में परिवार के मुखिया के लिंग के रूप में केवल ‘पुरुष’ और ‘महिला’ श्रेणियों को ही शामिल किया जाता रहा है, जिससे ट्रांसजेंडर समुदाय का डेटा अदृश्य रहता था।
  • यह पहली बार होगा जब जनगणना में ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों का विशिष्ट डेटा एकत्र किया जाएगा, जो नीति निर्माण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण होगा।
  • जनगणना 2027 पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसमें नागरिकों को स्व-गणना (self-enumeration) का विकल्प भी मिलेगा।

जनगणना क्या है और इसका महत्व क्या है?

  • जनगणना एक देश की जनसंख्या के बारे में व्यवस्थित रूप से जानकारी एकत्र करने, संकलित करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने की प्रक्रिया है। यह एक निश्चित समय पर देश के सभी व्यक्तियों को शामिल करती है।
  • भारत में जनगणना का आयोजन संवैधानिक रूप से अनिवार्य है और यह जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत संचालित होती है तथा संघ सूची की प्रविष्टि 69 के अंतर्गत आती है।
  • जनगणना डेटा सरकार को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यक्रमों और नीतियों को तैयार करने और लागू करने में मदद करता है, जैसे कि खाद्य सुरक्षा, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा।
  • यह जनसंख्या वृद्धि, साक्षरता दर, लिंगानुपात, शहरीकरण, प्रवासन पैटर्न और अन्य जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।
  • जनगणना डेटा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (delimitation) और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में सीटों के आवंटन का आधार भी बनता है।
  • यह अनुसंधानकर्ताओं, शिक्षाविदों और व्यवसायों के लिए भी एक मूल्यवान संसाधन है जो सामाजिक-आर्थिक प्रवृत्तियों का अध्ययन करते हैं।
  • ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को शामिल करने से इस समुदाय की वास्तविक संख्या, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा का स्तर, रोजगार की स्थिति और आवास की उपलब्धता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
  • यह डेटा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा, उनके लिए विशिष्ट कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण और उनके सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने में सहायक होगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों का समावेश सामाजिक समावेशन और सटीक डेटा संग्रह को बढ़ावा
दो चरणों में जनगणना आवास सूचीकरण और जनसंख्या गणना के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण
स्व-गणना की सुविधा नागरिकों के लिए डेटा जमा करने में सुविधा और पहुंच
पूरी तरह से डिजिटल अभ्यास दक्षता, सटीकता और डेटा सुरक्षा में वृद्धि
जाति गणना का समावेश सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करना
प्रवासन के कारणों पर प्रश्न मानव गतिशीलता के पैटर्न और चालकों को समझना

महत्व

सामाजिक समावेशन

  • ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को शामिल करना भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान और मान्यता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • यह कदम नीति निर्माण और संसाधन आवंटन में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों को संबोधित करने में मदद करेगा, जिससे अधिक समावेशी समाज का निर्माण होगा।
  • सटीक डेटा संग्रह सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों को बढ़ावा देता है, जो संविधान के मूल में निहित हैं।

नीति निर्माण और शासन

  • जनगणना द्वारा एकत्र किया गया विस्तृत डेटा सरकार को विभिन्न सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर सटीक जानकारी प्रदान करता है, जो प्रभावी नीति निर्माण के लिए आवश्यक है।
  • ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित विशिष्ट डेटा लक्षित योजनाओं और कार्यक्रमों को डिजाइन करने में मदद करेगा, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार के अवसरों में।
  • जाति गणना का समावेश विभिन्न सामाजिक समूहों की स्थिति को समझने और उनके उत्थान के लिए उचित नीतियां बनाने में सहायक होगा।

डेटा सटीकता और विश्वसनीयता

  • डिजिटल जनगणना और स्व-गणना की सुविधा डेटा संग्रह की प्रक्रिया को अधिक कुशल और सटीक बनाएगी, जिससे त्रुटियों की संभावना कम होगी।
  • पर्यवेक्षकों द्वारा डेटा की निगरानी और सत्यापन यह सुनिश्चित करेगा कि एकत्र की गई जानकारी विश्वसनीय और उपयोग योग्य है।
  • प्रवासन के कारणों पर डेटा विभिन्न क्षेत्रों में आबादी के वितरण और गतिशीलता को समझने में मदद करेगा, जो शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने से डेटा उल्लंघनों और दुरुपयोग का जोखिम बढ़ जाता है।
  • यह सुनिश्चित करना कि सभी डेटा एन्क्रिप्टेड हैं और अनधिकृत पहुंच से सुरक्षित हैं, एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

2. डिजिटल साक्षरता और पहुंच

  • स्व-गणना विकल्प का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए नागरिकों के बीच पर्याप्त डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट पहुंच की आवश्यकता होगी।
  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जहां डिजिटल पहुंच सीमित है, वहां डेटा संग्रह में चुनौतियां आ सकती हैं।

3. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

  • जनगणना कार्यकर्ताओं को नए डिजिटल उपकरणों और ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों सहित विभिन्न प्रकार के डेटा को सटीक रूप से एकत्र करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी।
  • यह सुनिश्चित करना कि सभी कार्यकर्ता संवेदनशील और समावेशी तरीके से डेटा एकत्र करें, एक महत्वपूर्ण पहलू है।

4. जाति गणना की संवेदनशीलता

  • जाति गणना एक संवेदनशील मुद्दा है और इसके डेटा का उपयोग सावधानीपूर्वक और निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए ताकि सामाजिक सद्भाव बना रहे।
  • डेटा के संभावित दुरुपयोग या राजनीतिकरण को रोकना एक चुनौती हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डेटा सुरक्षा व्यक्तिगत जानकारी का संभावित दुरुपयोग या उल्लंघन
डिजिटल विभाजन स्व-गणना तक पहुंच में असमानता
कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण डेटा संग्रह में सटीकता और संवेदनशीलता सुनिश्चित करना
जाति डेटा का उपयोग सामाजिक और राजनीतिक संवेदनशीलता
समावेशन की चुनौतियां यह सुनिश्चित करना कि कोई भी समूह छूट न जाए
तकनीकी खराबी डिजिटल प्लेटफॉर्म में संभावित तकनीकी समस्याएं

आगे की राह

  • डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन और डेटा संरक्षण प्रोटोकॉल लागू करना।
  • डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और स्व-गणना विकल्प तक पहुंच बढ़ाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
  • जनगणना कार्यकर्ताओं के लिए व्यापक और संवेदनशील प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, जिसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति संवेदनशीलता भी शामिल हो।
  • जाति गणना डेटा के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल स्थापित करना ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके।
  • जनगणना प्रक्रिया के दौरान तकनीकी सहायता और समस्या-समाधान तंत्र को मजबूत करना।
  • डेटा संग्रह में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली स्थापित करना।
  • जनगणना के परिणामों का उपयोग लक्षित सामाजिक-आर्थिक विकास नीतियों और कार्यक्रमों को तैयार करने के लिए करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जनगणना 2027 · ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवार · समावेशी नीति · सामाजिक-आर्थिक डेटा · नीति निर्माण · डिजिटल जनगणना · स्व-गणना · डेटा सुरक्षा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 14’, ‘note’: ‘कानून के समक्ष समानता’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘भेदभाव का निषेध’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में जनगणना’}

अवधारणा प्रवाह

जनगणना 2027 की घोषणा  →  ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों का समावेश  →  सटीक और समावेशी डेटा संग्रह  →  नीति निर्माण और संसाधन आवंटन  →  सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. जनगणना 2027 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह स्वतंत्रता के बाद की 16वीं जनगणना होगी।
2. यह पूरी तरह से डिजिटल अभ्यास होगा और इसमें नागरिकों के लिए स्व-गणना का विकल्प होगा।
3. जनगणना के पहले चरण में आवास की स्थिति, परिवार के मुखिया का लिंग और उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि स्वतंत्रता के बाद की 16वीं जनगणना 2021 में होनी थी, जिसे COVID-19 के कारण स्थगित कर दिया गया था। 2027 की जनगणना 16वीं जनगणना होगी, लेकिन यह स्वतंत्रता के बाद की 16वीं जनगणना नहीं है। कथन 2 और 3 सही हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन जनगणना के महत्व का सबसे अच्छा वर्णन करता है?

  1. यह केवल देश की जनसंख्या का अनुमान लगाने का एक तरीका है।
  2. यह सरकार को चुनाव कराने में मदद करता है।
  3. यह सामाजिक-आर्थिक डेटा एकत्र करने, नीतियों और कार्यक्रमों की योजना बनाने और संसाधनों के आवंटन के लिए महत्वपूर्ण है।
  4. यह केवल ऐतिहासिक रिकॉर्ड रखने के लिए किया जाता है।

उत्तर: यह सामाजिक-आर्थिक डेटा एकत्र करने, नीतियों और कार्यक्रमों की योजना बनाने और संसाधनों के आवंटन के लिए महत्वपूर्ण है। — जनगणना का प्राथमिक उद्देश्य व्यापक सामाजिक-आर्थिक डेटा एकत्र करना है, जिसका उपयोग सरकार द्वारा विभिन्न नीतियों और कार्यक्रमों की योजना बनाने और संसाधनों को प्रभावी ढंग से आवंटित करने के लिए किया जाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जनगणना 2027 में ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को शामिल करने के निर्णय के निहितार्थों का परीक्षण करें। यह समावेशी नीति निर्माण और सामाजिक न्याय को कैसे बढ़ावा दे सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: जनगणना 2027 में ट्रांसजेंडर-प्रधान परिवारों को शामिल करने के निर्णय का संक्षिप्त उल्लेख करें।
2. निहितार्थों का परीक्षण:
a. डेटा की सटीकता और समग्रता: ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित सटीक और व्यापक डेटा की उपलब्धता।
b. दृश्यता और पहचान: इस समुदाय को आधिकारिक रूप से मान्यता और दृश्यता प्रदान करना।
c. नीति निर्माण: ट्रांसजेंडर समुदाय की विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों को संबोधित करने वाली लक्षित नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण में सहायता।
d. सामाजिक-आर्थिक संकेतक: शिक्षा, रोजगार, आवास और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उनकी स्थिति का आकलन।
e. भेदभाव का उन्मूलन: डेटा-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से भेदभाव और बहिष्कार को कम करने में मदद।
3. समावेशी नीति निर्माण और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना:
a. लक्षित योजनाएँ: ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019’ जैसे मौजूदा कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक डेटा प्रदान करना।
b. संसाधन आवंटन: शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए विशिष्ट योजनाओं के लिए उचित संसाधन आवंटन।
c. मानवाधिकारों की पुष्टि: समानता और गैर-भेदभाव के संवैधानिक सिद्धांतों को मजबूत करना।
d. सामाजिक स्वीकृति: समुदाय के बारे में जागरूकता बढ़ाना और सामाजिक स्वीकृति को बढ़ावा देना।
e. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ: सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सहायता।
4. चुनौतियाँ और आगे का रास्ता: डेटा संग्रह में संवेदनशीलता, गोपनीयता सुनिश्चित करना और समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देना।
5. निष्कर्ष: समावेशी विकास और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में इस कदम के महत्व पर बल दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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