11 Aug झारखंड: सीएजी रिपोर्ट में 1.60 लाख करोड़ के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित, जवाबदेही पर उठे सवाल
✎ CAG भारत में सार्वजनिक वित्त का संरक्षक है, और उपयोगिता प्रमाण पत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया गया है, जिससे वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन प्रणाली और सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास
- Prelims: CAG, उपयोगिता प्रमाण पत्र, सार्वजनिक वित्त, वित्तीय जवाबदेही, लेखा परीक्षा, अनुच्छेद 148, राजकोषीय प्रबंधन, एसी बिल, डीसी बिल
- Essay: सार्वजनिक धन का प्रभावी उपयोग और सुशासन, भारत में वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: CAG भारत में सार्वजनिक वित्त का संरक्षक है, और उपयोगिता प्रमाण पत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया गया है, जिससे वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट में झारखंड राज्य में 1.60 लाख करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificates) लंबित होने का खुलासा हुआ है। यह स्थिति राज्य के वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है, क्योंकि इतनी बड़ी राशि के व्यय का उचित हिसाब-किताब उपलब्ध नहीं है। यह मुद्दा सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
- CAG रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक झारखंड में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये की सरकारी राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित हैं।
- उपयोगिता प्रमाण पत्र यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होते हैं कि सरकारी योजनाओं या कार्यों के लिए जारी की गई राशि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया गया है जिसके लिए उसे आवंटित किया गया था।
- उपयोगिता प्रमाण पत्रों का लंबित होना सीधे तौर पर राशि के दुरुपयोग का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था में खामियों को दर्शाता है।
- वित्तीय नियमों के अनुसार, किसी भी वित्तीय वर्ष में खर्च की गई सरकारी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र संबंधित विभाग या एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
- इतनी बड़ी राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रहने से सरकारी खर्च की निगरानी और वित्तीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते हैं, जो सुशासन के लिए चिंता का विषय है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और उपयोगिता प्रमाण पत्र क्या हैं?
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण है, जो भारत सरकार और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण (Audit) करता है।
- CAG सार्वजनिक धन का संरक्षक होता है और इसका मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा स्वीकृत धन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया गया है जिसके लिए उसे आवंटित किया गया था।
- उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) एक वित्तीय दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि किसी विशेष योजना या परियोजना के लिए जारी की गई सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य और नियमों के अनुसार किया गया है।
- यह प्रमाण पत्र संबंधित विभाग या कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा व्यय के बाद लेखा-परीक्षण प्राधिकरण को प्रस्तुत किया जाता है।
- उपयोगिता प्रमाण पत्र वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र है, जो सार्वजनिक धन के दुरुपयोग या गबन को रोकने में मदद करता है。
- उपयोगिता प्रमाण पत्रों का लंबित होना यह दर्शाता है कि संबंधित विभागों ने खर्च की गई राशि का उचित लेखा-जोखा या उसके उपयोग का प्रमाण अभी तक प्रस्तुत नहीं किया है, जिससे वित्तीय निगरानी में कमी आती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificates – UC) का लंबित होना | सरकारी धन के उचित उपयोग और वित्तीय जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। |
| ₹1.60 लाख करोड़ की राशि | झारखंड राज्य के गठन के बाद से 31 मार्च 2025 तक की अवधि में इतनी बड़ी राशि के UC लंबित हैं, जो वित्तीय कुप्रबंधन की व्यापकता दर्शाते हैं। |
| CAG की चिंता | भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करना, इसकी गंभीरता और संभावित वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। |
| AC बिल और DC बिल का उल्लेख | अग्रिम निकासी (AC बिल) के बाद वास्तविक खर्च का विवरण (DC बिल) प्रस्तुत न करना, वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाता है। |
| निगरानी व्यवस्था पर सवाल | लंबे समय से UC लंबित रहने से सरकारी खर्च की निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता की मौजूदा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर संदेह उत्पन्न होता है। |
महत्व
वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता
- उपयोगिता प्रमाण पत्रों का लंबित होना सरकारी विभागों द्वारा प्राप्त धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।
- यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि सार्वजनिक धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया गया है, जिससे जनता का विश्वास बना रहे।
राजकोषीय अनुशासन
- बड़ी मात्रा में UC का लंबित होना राज्य के राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
- यह भविष्य की योजनाओं के लिए धन आवंटन और बजटीय नियंत्रण को भी प्रभावित कर सकता है।
शासन और सुशासन
- यह रिपोर्ट सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों, विशेषकर वित्तीय प्रबंधन और निगरानी के क्षेत्र में कमजोरियों को दर्शाती है।
- प्रभावी वित्तीय प्रबंधन प्रणाली एक पारदर्शी और जवाबदेह शासन के लिए आवश्यक है।
नीति निर्माण और कार्यान्वयन
- जब खर्च किए गए धन का उचित हिसाब नहीं होता, तो सरकार के लिए प्रभावी नीतियां बनाना और उनका सफल कार्यान्वयन सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है।
- यह योजनाओं के प्रभाव आकलन को भी बाधित करता है।
चुनौतियाँ
1. वित्तीय कुप्रबंधन
- राज्य सरकार द्वारा ₹1.60 लाख करोड़ की राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत न कर पाना वित्तीय कुप्रबंधन का एक बड़ा उदाहरण है।
- यह धन के संभावित दुरुपयोग या अक्षम उपयोग की ओर संकेत करता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. जवाबदेही की कमी
- संबंधित विभागों और एजेंसियों द्वारा समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा न करना वित्तीय जवाबदेही की गंभीर कमी को दर्शाता है।
- इससे यह सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है कि धन का उपयोग सही उद्देश्य के लिए हुआ है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
3. निगरानी तंत्र की कमजोरी
- इतनी बड़ी राशि के UC का लंबे समय तक लंबित रहना राज्य के वित्तीय निगरानी तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है।
- प्रभावी निगरानी के अभाव में वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बढ़ जाती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
4. AC/DC बिलों का अनुपालन
- AC बिल के माध्यम से अग्रिम निकासी के बाद DC बिल के माध्यम से वास्तविक खर्च का विवरण प्रस्तुत न करना वित्तीय नियमों के उल्लंघन को दर्शाता है।
- यह सरकारी धन के उपयोग में अनुशासनहीनता का प्रतीक है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
5. सार्वजनिक विश्वास का क्षरण
- वित्तीय अनियमितताओं और जवाबदेही की कमी से जनता का सरकार और उसकी संस्थाओं पर विश्वास कम होता है।
- यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति उदासीनता को बढ़ावा दे सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ₹1.60 लाख करोड़ के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित | सरकारी धन के दुरुपयोग या अक्षम उपयोग की संभावना, वित्तीय जवाबदेही का अभाव। |
| वित्तीय पारदर्शिता की कमी | जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके करों का उपयोग कैसे किया जा रहा है, जो UC के अभाव में संभव नहीं। |
| कमजोर निगरानी प्रणाली | राज्य के वित्तीय निगरानी तंत्र की अक्षमता, जिससे अनियमितताओं को बढ़ावा मिलता है। |
| राजकोषीय अनुशासन का अभाव | बजटीय नियंत्रण और प्रभावी वित्तीय प्रबंधन पर नकारात्मक प्रभाव। |
| AC/DC बिलों का अनुपालन न होना | सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन, जिससे वित्तीय अनुशासनहीनता बढ़ती है। |
| सुशासन पर प्रश्नचिह्न | एक पारदर्शी और जवाबदेह शासन प्रणाली के लिए वित्तीय प्रबंधन में दक्षता आवश्यक है। |
आगे की राह
- उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और डिजिटल किया जाए ताकि समयबद्धता सुनिश्चित हो सके।
- लंबित UC के लिए जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।
- वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (FMIS) को मजबूत किया जाए ताकि धन के प्रवाह और उपयोग की वास्तविक समय पर निगरानी हो सके।
- आंतरिक लेखा परीक्षा (Internal Audit) और बाहरी लेखा परीक्षा (External Audit) तंत्र को अधिक प्रभावी बनाया जाए।
- वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं के बारे में सरकारी अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- सार्वजनिक व्यय की निगरानी में नागरिक समाज संगठनों और मीडिया की भूमिका को प्रोत्साहित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उपयोगिता प्रमाण पत्र · भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) · वित्तीय जवाबदेही · राजकोषीय अनुशासन · सरकारी व्यय की निगरानी · वित्तीय पारदर्शिता · लोक लेखा समिति · संसद की भूमिका · राज्य वित्त · सुशासन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 148’, ‘note’: ‘CAG की नियुक्ति और कर्तव्य’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 149’, ‘note’: ‘CAG के कर्तव्य और शक्तियाँ’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 150’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के खातों का प्रारूप’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 151’, ‘note’: ‘CAG की लेखा परीक्षा रिपोर्ट’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘राज्यों की वित्तीय शक्तियाँ’}
अवधारणा प्रवाह
सरकारी योजनाओं के लिए धन का आवंटन → विभागों/एजेंसियों द्वारा धन की निकासी → धन का वास्तविक उपयोग और खर्च → उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जमा करने की आवश्यकता → UC का लंबित होना और CAG की रिपोर्ट → वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल → सुशासन और सार्वजनिक विश्वास पर प्रभाव
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का पद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है।
2. CAG केंद्र और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करता है।
3. CAG अपनी रिपोर्ट सीधे संसद को प्रस्तुत करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। CAG का पद अनुच्छेद 148 के तहत एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है और यह केंद्र तथा राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं।
Q2. उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह केवल केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई निधियों के लिए आवश्यक है।
- यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी राशि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया गया है जिसके लिए उसे जारी किया गया था।
- यह एक अग्रिम भुगतान रसीद है जो किसी भी सरकारी व्यय से पहले जारी की जाती है।
- यह केवल निजी संगठनों को दी गई सरकारी सहायता के लिए अनिवार्य है।
उत्तर: यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी राशि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया गया है जिसके लिए उसे जारी किया गया था। — उपयोगिता प्रमाण पत्र यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी राशि का उपयोग उसी कार्य या उद्देश्य के लिए किया गया है जिसके लिए उसे आवंटित किया गया था। यह वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही का एक महत्वपूर्ण साधन है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सरकारी व्यय में वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। उपयोगिता प्रमाण पत्रों के लंबित होने से उत्पन्न चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: CAG की संवैधानिक स्थिति (अनुच्छेद 148) और उसकी भूमिका का संक्षिप्त परिचय।
2. CAG की भूमिका: सरकारी व्यय में वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में CAG के कार्यों का वर्णन करें। इसमें लेखा-परीक्षण, रिपोर्टिंग (राष्ट्रपति के माध्यम से संसद को), और लोक लेखा समिति (PAC) के साथ संबंध शामिल होने चाहिए।
3. उपयोगिता प्रमाण पत्र (UCs): UCs का महत्व और उनका लंबित होना क्यों चिंता का विषय है, इसे स्पष्ट करें। वित्तीय कुप्रबंधन, धन के दुरुपयोग की संभावना, और निगरानी तंत्र की विफलता जैसे बिंदुओं पर प्रकाश डालें।
4. चुनौतियाँ और सीमाएँ: CAG की सिफारिशों को लागू करने में देरी, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, और विभागों द्वारा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न कराने जैसी चुनौतियों का उल्लेख करें।
5. निष्कर्ष: वित्तीय अनुशासन और सुशासन के लिए CAG की भूमिका को मजबूत करने तथा UCs के समय पर निपटान के महत्व पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: amarujala.com
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