31 Aug टाटा-रेयथॉन-लॉकहीड मार्टिन संयुक्त उद्यम के साथ जेवलिन मिसाइल उत्पादन समझौता
✎ जेवलिन मिसाइल प्रणाली के सह-उत्पादन का समझौता भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: जेवलिन मिसाइल प्रणाली, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, रेथियॉन, लॉकहीड मार्टिन, रक्षा विनिर्माण, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा अधिग्रहण, भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग
- Essay: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: चुनौतियाँ और अवसर, भारत की विदेश नीति में रणनीतिक साझेदारी का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: जेवलिन मिसाइल प्रणाली के सह-उत्पादन का समझौता भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (Tata Advanced Systems Ltd) और जेवलिन जॉइंट वेंचर (Javelin Joint Venture – JJV), जो रेथियॉन (Raytheon) और लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) की साझेदारी है, ने भारत में जेवलिन मिसाइल प्रणालियों के सह-उत्पादन (co-production) के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (self-reliance) प्राप्त करने के प्रयासों के अनुरूप देखा जा रहा है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय सेना ने हाल ही में अमेरिकी मूल की जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणालियों (anti-tank guided missile systems) की खरीद के लिए एक समझौते पर मुहर लगाई थी।
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड को जेवलिन जॉइंट वेंचर द्वारा भविष्य के इन-कंट्री सह-उत्पादन प्रयासों के लिए मुख्य भागीदार के रूप में चुना गया है।
- समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) के तहत, दोनों पक्ष भारत में जेवलिन ऑल अप राउंड (All Up Round – AUR) के लिए एक अंतिम असेंबली और एकीकरण सुविधा (final assembly and integration facility) तथा घटक उत्पादन क्षमताओं (component production capabilities) की स्थापना की संभावनाओं का पता लगाएंगे।
- यह समझौता भारत के रक्षा औद्योगिक आधार (defense industrial base) को मजबूत करेगा, उच्च-तकनीकी रोजगार (high-tech jobs) सृजित करेगा और स्थानीय विनिर्माण विशेषज्ञता (local manufacturing expertise) को आगे बढ़ाएगा।
- यह साझेदारी हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा (regional security) को भी बढ़ाएगी, जिससे भागीदार देशों के लिए सिद्ध जेवलिन हथियार प्रणाली की विश्वसनीय, स्थानीय रूप से प्राप्त आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- यह भारत-अमेरिका साझेदारी के लिए भी फायदेमंद होगा, क्योंकि यह भारत में एक मजबूत रक्षा कार्यबल का निर्माण करेगा और अमेरिकी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला में नौकरियों को बनाए रखेगा।
जेवलिन मिसाइल प्रणाली क्या है?
- जेवलिन एक पोर्टेबल, फायर-एंड-फॉरगेट (fire-and-forget) एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली है।
- इसे पैदल सेना द्वारा उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह बख्तरबंद वाहनों, बंकरों और हेलीकॉप्टरों सहित विभिन्न लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है।
- यह एक इन्फ्रारेड सीकर (infrared seeker) का उपयोग करती है जो लक्ष्य को लॉक करता है और मिसाइल को लॉन्च के बाद स्वयं-निर्देशित होने की अनुमति देता है, जिससे ऑपरेटर को तुरंत कवर लेने का मौका मिलता है।
- जेवलिन मिसाइल प्रणाली में एक लॉन्च ट्यूब असेंबली (launch tube assembly), एक कमांड लॉन्च यूनिट (command launch unit – CLU) और मिसाइल स्वयं शामिल होती है।
- CLU एक थर्मल इमेजिंग साइट प्रदान करता है जिसका उपयोग दिन और रात दोनों में लक्ष्य का पता लगाने और उस पर निशाना साधने के लिए किया जा सकता है।
- यह मिसाइल टॉप-अटैक (top-attack) मोड में काम कर सकती है, जो टैंकों के सबसे कमजोर ऊपरी हिस्से को निशाना बनाती है, या डायरेक्ट-अटैक (direct-attack) मोड में, जिसका उपयोग इमारतों या अन्य लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है।
- जेवलिन का उपयोग संयुक्त राज्य अमेरिका और कई अन्य मित्र देशों की सेनाओं द्वारा किया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| जेवलिन मिसाइल प्रणाली का सह-उत्पादन | भारत में उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और विनिर्माण क्षमता में वृद्धि को दर्शाता है। |
| टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और जेवलिन जॉइंट वेंचर (JJV) के बीच समझौता | यह साझेदारी ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देती है। |
| भारत में अंतिम असेंबली और एकीकरण सुविधा की स्थापना | यह भारत को मिसाइल प्रणाली के महत्वपूर्ण घटकों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम है। |
| घटक उत्पादन क्षमताओं का अन्वेषण | स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और उद्योगों के लिए अवसर पैदा करता है, जिससे रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत होता है। |
| भारत-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा | विश्वसनीय, स्थानीय रूप से उत्पादित हथियार प्रणाली की आपूर्ति सुनिश्चित करके क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह समझौता भारत में उच्च-तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा करेगा, जिससे कुशल कार्यबल का विकास होगा।
- स्थानीय विनिर्माण विशेषज्ञता को आगे बढ़ाएगा और भारतीय रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करेगा।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन में योगदान देगा, खासकर बढ़ती वैश्विक मांग के संदर्भ में।
सामरिक महत्व
- यह भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को गहरा करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच अंतर-संचालनीयता (interoperability) और संयुक्त रक्षा पहल मजबूत होंगी।
- भारत-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ाएगा, जिससे इस क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी।
- भारत को उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्रदान करेगा, जिससे देश की रक्षा क्षमताओं में वृद्धि होगी।
तकनीकी महत्व
- जेवलिन मिसाइल प्रणाली के अंतिम असेंबली और एकीकरण से भारत में उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों का विकास होगा।
- घटक उत्पादन क्षमताओं के अन्वेषण से भारतीय उद्योगों को जटिल रक्षा प्रणालियों के निर्माण में विशेषज्ञता हासिल होगी।
- यह साझेदारी भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास को भी अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे सकती है।
चुनौतियाँ
1. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की जटिलताएँ
- उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के पूर्ण हस्तांतरण में अक्सर प्रतिबंध और शर्तें शामिल होती हैं।
- भारतीय कंपनियों को इन जटिल प्रणालियों को आत्मसात करने और अनुकूलित करने में समय लग सकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – रक्षा प्रौद्योगिकी
2. गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण
- अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले रक्षा उत्पादों का उत्पादन सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- घटक आपूर्तिकर्ताओं के बीच मानकीकरण और एकरूपता बनाए रखना आवश्यक होगा।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – औद्योगिक नीति
3. विनिर्माण क्षमता का विकास
- भारत में आवश्यक बुनियादी ढाँचे और कुशल मानव संसाधनों का विकास एक महत्वपूर्ण निवेश और समय की मांग करेगा।
- छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – अवसंरचना
4. भू-राजनीतिक जोखिम
- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बदलाव या क्षेत्रीय तनाव इस तरह की साझेदारी को प्रभावित कर सकते हैं।
- निर्यात नियंत्रण नियम और प्रतिबंध भविष्य के उत्पादन और आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध – रक्षा सहयोग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी आत्मनिर्भरता | क्या यह साझेदारी पूर्ण तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी या भारत विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भर रहेगा? |
| स्थानीयकरण का स्तर | उत्पादन में भारतीय घटकों और श्रम का वास्तविक प्रतिशत कितना होगा, और क्या यह पर्याप्त होगा? |
| लागत-प्रभावशीलता | भारत में सह-उत्पादन की लागत विदेशी खरीद की तुलना में कितनी प्रतिस्पर्धी होगी? |
| निर्यात क्षमता | क्या भारत को इन मिसाइलों के निर्यात की अनुमति होगी, और यदि हाँ, तो किन देशों को? |
| बौद्धिक संपदा अधिकार | साझेदारी में बौद्धिक संपदा अधिकारों का प्रबंधन कैसे किया जाएगा? |
आगे की राह
- रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना ताकि स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा मिल सके।
- घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को प्रोत्साहन देना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से रक्षा विनिर्माण के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल तैयार करना।
- अंतर्राष्ट्रीय रक्षा साझेदारियों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण खंडों को मजबूत करना और पूर्ण तकनीकी साझाकरण पर जोर देना।
- रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना ताकि घरेलू उद्योगों को समान अवसर मिल सकें।
- रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक स्पष्ट नीति और रणनीति विकसित करना।
- गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण के लिए एक मजबूत नियामक ढाँचा स्थापित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रक्षा उत्पादन · मेक इन इंडिया · आत्मनिर्भर भारत · रक्षा विनिर्माण · सामरिक साझेदारी · प्रौद्योगिकी हस्तांतरण · संयुक्त उद्यम · जैवलीन मिसाइल प्रणाली · भारत-अमेरिका संबंध · इंडो-पैसिफिक क्षेत्र
अवधारणा प्रवाह
भारत की रक्षा आवश्यकताओं और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर जोर। → टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और जेवलिन जॉइंट वेंचर के बीच समझौता ज्ञापन। → भारत में जेवलिन मिसाइल प्रणाली के सह-उत्पादन की योजना। → अंतिम असेंबली, एकीकरण और घटक उत्पादन क्षमताओं का विकास। → घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार का सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन। → भारत की रक्षा क्षमताओं में वृद्धि और क्षेत्रीय सुरक्षा में योगदान।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘मेक इन इंडिया’ पहल का उद्देश्य भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है।
2. रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रतिबंधित किया गया है।
3. जैवलीन मिसाइल प्रणाली एक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘मेक इन इंडिया’ का मुख्य उद्देश्य भारत को विनिर्माण का केंद्र बनाना है। कथन 2 गलत है क्योंकि रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। कथन 3 सही है क्योंकि जैवलीन एक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के रक्षा क्षेत्र में महत्व को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?
- यह केवल सरकारी रक्षा इकाइयों को बढ़ावा देता है।
- यह रक्षा आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है।
- यह घरेलू रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी विकास को प्रोत्साहित करता है।
- यह केवल विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ संयुक्त अभ्यास पर केंद्रित है।
उत्तर: यह घरेलू रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी विकास को प्रोत्साहित करता है। — ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का रक्षा क्षेत्र में मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों का देश में ही विकास करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के महत्व का परीक्षण कीजिए। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और जैवलीन संयुक्त उद्यम के बीच हुए हालिया समझौते के संदर्भ में इस पहल की सफलता का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. ‘मेक इन इंडिया’ पहल का परिचय और रक्षा क्षेत्र में इसके उद्देश्यों का संक्षिप्त विवरण।
2. रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने में ‘मेक इन इंडिया’ के महत्व पर चर्चा करें: आयात निर्भरता में कमी, स्वदेशीकरण, रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निर्यात क्षमता और सामरिक स्वायत्तता।
3. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और जैवलीन संयुक्त उद्यम (Javelin Joint Venture) के बीच हुए समझौते का संदर्भ दें: यह समझौता कैसे ‘मेक इन इंडिया’ के उद्देश्यों (सह-उत्पादन, अंतिम असेंबली और एकीकरण सुविधा, घटक उत्पादन क्षमता, उच्च-तकनीकी नौकरियां) को पूरा करता है।
4. इस पहल की सफलता का मूल्यांकन करें: समझौते के सकारात्मक प्रभाव (घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार का सुदृढ़ीकरण, क्षेत्रीय सुरक्षा, भारत-अमेरिका साझेदारी) और संभावित चुनौतियों (प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की गति, गुणवत्ता नियंत्रण, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकरण) पर प्रकाश डालें।
5. निष्कर्ष में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए ऐसे समझौतों के दीर्घकालिक महत्व को रेखांकित करें।
स्रोत: orissapost.com
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