तमिलनाडु विधानसभा में शराब पर पर्यावरण और कल्याण उपकर विधेयक पेश

Tamil Nadu introduces Bill to levy environmental and social welfare cess on liquor sales — diagram

तमिलनाडु विधानसभा में शराब पर पर्यावरण और कल्याण उपकर विधेयक पेश

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Liquor cess revenue cycle

✎ उपकर एक विशेष उद्देश्य के लिए लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर है, जिसकी आय को केवल उसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है जिसके लिए इसे लगाया गया है, और यह राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, संघवाद से संबंधित मुद्दे  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय, पर्यावरण संरक्षण
  • Prelims: उपकर (Cess), अधिभार (Surcharge), राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism), संविधान का अनुच्छेद 269A, शराब पर कर, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक कल्याण
  • Essay: राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में कराधान की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: उपकर एक विशेष उद्देश्य के लिए लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर है, जिसकी आय को केवल उसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है जिसके लिए इसे लगाया गया है, और यह राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2006 (Tamil Nadu Value Added Tax Act, 2006) में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य शराब की बिक्री पर एक नया ‘पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर’ (Environmental and Social Welfare Cess) लगाना है। सरकार का तर्क है कि यह उपकर शराब के सेवन से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक परिणामों, विशेष रूप से अपशिष्ट प्रबंधन और शराब की लत से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए धन उपलब्ध कराएगा।

पृष्ठभूमि

  • भारत में शराब पर कर लगाना राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है, क्योंकि यह राज्य सूची का विषय है।
  • उपकर एक विशेष उद्देश्य के लिए लगाया जाने वाला कर होता है, जिसकी आय केवल उसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए उपयोग की जाती है जिसके लिए इसे लगाया गया है। यह केंद्र या राज्य सरकार द्वारा लगाया जा सकता है।
  • अधिभार (Surcharge) भी एक अतिरिक्त कर होता है, लेकिन इसकी आय समेकित निधि (Consolidated Fund) का हिस्सा बन जाती है और किसी विशिष्ट उद्देश्य तक सीमित नहीं होती।
  • शराब की बोतलों और कंटेनरों के अनुचित निपटान से पारिस्थितिकीय क्षरण होता है, जो वन्यजीवों और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है।
  • शराब की लत भारत में एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जिसके कारण परिवारों पर आर्थिक और सामाजिक बोझ पड़ता है।
  • राज्यों को अक्सर सामाजिक कल्याण और पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने की आवश्यकता होती है, विशेषकर GST (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने के बाद उनके राजस्व स्रोतों में आए बदलावों के कारण।

उपकर (Cess) क्या है?

  • उपकर एक प्रकार का कर है जो किसी विशेष उद्देश्य के लिए लगाया जाता है। इसकी आय को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) या राज्य की संचित निधि में जमा करने के बजाय एक अलग निधि में रखा जाता है।
  • इसका उपयोग केवल उसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए किया जा सकता है जिसके लिए इसे लगाया गया है, जैसे शिक्षा उपकर, स्वच्छ भारत उपकर या कृषि कल्याण उपकर।
  • उपकर की प्रकृति अस्थायी होती है और जब इसका उद्देश्य पूरा हो जाता है तो इसे समाप्त किया जा सकता है।
  • यह कर आधार (Tax Base) पर एक अतिरिक्त कर के रूप में लगाया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी उत्पाद पर 10% कर है और 1% उपकर लगाया जाता है, तो कुल कर 11% हो जाएगा।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 270 के तहत, उपकर और अधिभार से प्राप्त आय को राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है, जब तक कि संसद कानून द्वारा अन्यथा प्रदान न करे।
  • तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रस्तावित यह उपकर शराब की बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण, सुरक्षित निपटान और पुन: उपयोग के साथ-साथ शराब की लत से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों के लिए करेगी।
  • इसके अतिरिक्त, उपकर से प्राप्त राजस्व का उपयोग शराब की लत से प्रभावित परिवारों के लिए कल्याणकारी उपायों और आजीविका सहायता के साथ-साथ शराब के हानिकारक प्रभावों के बारे में जन जागरूकता अभियानों के वित्तपोषण के लिए भी किया जाएगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर (Cess) शराब की बिक्री पर अतिरिक्त कर, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दों का समाधान करना है।
निधियों का उपयोग शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण, सुरक्षित निपटान, नशामुक्ति कार्यक्रमों और शराब से प्रभावित परिवारों के कल्याण के लिए।
कानूनी आधार तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2006 में संशोधन के माध्यम से प्रस्तावित।
उद्देश्य शराब के सेवन से उत्पन्न सामाजिक और पर्यावरणीय परिणामों को कम करना, जैसे कचरा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम।
जागरूकता अभियान शराब के हानिकारक प्रभावों और अनुचित निपटान से होने वाले पर्यावरणीय खतरों पर जन जागरूकता बढ़ाने के लिए निधियों का उपयोग।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह उपकर शराब की लत से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, जिससे समाज में स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा मिलेगा।
  • शराब की लत से प्रभावित परिवारों के लिए कल्याणकारी उपायों और आजीविका सहायता को वित्तपोषित करके सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करेगा।
  • शराब के हानिकारक प्रभावों और इसके अनुचित निपटान से होने वाले पर्यावरणीय खतरों के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाकर सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करेगा।

पर्यावरणीय महत्व

  • शराब की बोतलों और कंटेनरों के पुनर्चक्रण, सुरक्षित निपटान और पुन: उपयोग के लिए धन उपलब्ध कराकर पर्यावरणीय क्षरण को कम करने में मदद करेगा।
  • वनों, वन्यजीवों और व्यापक पारिस्थितिकी की सुरक्षा और बहाली के लिए संसाधनों का आवंटन करेगा, जिससे जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बना रहेगा।
  • कचरा प्रबंधन में सुधार करके, विशेष रूप से कांच और प्लास्टिक के शराब कंटेनरों के अनुचित निपटान से होने वाले जोखिमों को कम करेगा, जो वन्यजीवों और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं।

राजकोषीय महत्व

  • राज्य सरकार के लिए राजस्व का एक नया स्रोत उत्पन्न करेगा, जिसका उपयोग विशिष्ट सामाजिक और पर्यावरणीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
  • यह एक ‘उपकर’ (Cess) होने के कारण, इसका उपयोग केवल उन्हीं उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है जिनके लिए इसे लगाया गया है, जिससे निधियों के लक्षित उपयोग को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  • यह ‘पाप कर’ (Sin Tax) के समान है, जो हानिकारक उत्पादों पर लगाया जाता है, जिससे उनके उपभोग को हतोत्साहित करने और उनसे उत्पन्न नकारात्मक बाहरी कारकों को आंतरिक बनाने में मदद मिलती है।

चुनौतियाँ

1. राजस्व का कुशल उपयोग

  • यह सुनिश्चित करना कि उपकर से प्राप्त राजस्व का उपयोग वास्तव में उन पर्यावरणीय और सामाजिक कल्याण पहलों के लिए किया जाए जिनके लिए इसे एकत्र किया गया है।
  • निधियों के दुरुपयोग या अन्य मदों में विचलन को रोकना, जिससे उपकर का मूल उद्देश्य विफल हो सकता है।

2. प्रशासनिक चुनौतियाँ

  • उपकर के संग्रह और उसके वितरण के लिए एक कुशल और पारदर्शी प्रशासनिक तंत्र स्थापित करना।
  • विभिन्न कार्यक्रमों (पुनर्चक्रण, नशामुक्ति, जागरूकता) के बीच निधियों के आवंटन और उनके कार्यान्वयन की निगरानी करना।

3. शराब उद्योग पर प्रभाव

  • उपकर के कारण शराब की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे अवैध शराब के व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना हो सकती है।
  • शराब उद्योग पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का आकलन करना और यह सुनिश्चित करना कि यह अत्यधिक बोझ न बने।

4. अंतर-राज्यीय तुलना

  • अन्य राज्यों में इसी तरह के उपकरों की सफलता और चुनौतियों का अध्ययन करना ताकि तमिलनाडु में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जा सके।
  • शराब पर कर लगाने के संबंध में राज्यों के बीच संभावित ‘दौड़’ (Race to the bottom) से बचना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
निधियों का लक्षित उपयोग यह सुनिश्चित करना कि एकत्र किया गया उपकर केवल निर्दिष्ट पर्यावरणीय और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए ही उपयोग किया जाए।
प्रशासनिक दक्षता उपकर के संग्रह, प्रबंधन और वितरण के लिए एक मजबूत और पारदर्शी प्रणाली का अभाव।
अवैध शराब का व्यापार शराब की कीमतों में वृद्धि से अवैध शराब के उत्पादन और बिक्री को बढ़ावा मिल सकता है।
जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन केवल उपकर लगाने से ही सामाजिक व्यवहार में वांछित परिवर्तन नहीं आ सकता, इसके लिए व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है।
डेटा संग्रह और मूल्यांकन उपकर के प्रभाव को मापने और कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए विश्वसनीय डेटा की कमी।

आगे की राह

  • उपकर से प्राप्त राजस्व के कुशल और पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित कोष और निगरानी समिति का गठन किया जाना चाहिए।
  • शराब की बोतलों और कंटेनरों के पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और सुरक्षित निपटान के लिए एक व्यापक नीति और बुनियादी ढाँचा विकसित किया जाना चाहिए।
  • नशामुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रमों को मजबूत किया जाना चाहिए, जिसमें परामर्श, चिकित्सा सहायता और सामाजिक एकीकरण शामिल हो।
  • शराब के हानिकारक प्रभावों और पर्यावरणीय खतरों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर और प्रभावी अभियान चलाए जाने चाहिए।
  • शराब उद्योग और नागरिक समाज संगठनों के साथ सहयोग स्थापित किया जाना चाहिए ताकि उपकर के उद्देश्यों को प्राप्त करने में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
  • उपकर के कार्यान्वयन के प्रभावों का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए और आवश्यकतानुसार नीति में संशोधन किए जाने चाहिए।
  • अवैध शराब के व्यापार को रोकने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों को मजबूत किया जाना चाहिए और कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर · शराब की बिक्री पर उपकर · राजकोषीय संघवाद · कराधान शक्तियाँ · राज्य वित्त · पर्यावरण संरक्षण · सामाजिक कल्याण कार्यक्रम · शराब की लत · पुनर्वास कार्यक्रम · अपशिष्ट प्रबंधन · राजकोषीय नीति · राज्य सूची

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 265’, ‘note’: ‘कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से व्यय’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: “राज्य सूची में ‘शराब’ और ‘कर’ संबंधी प्रविष्टियाँ”}

अवधारणा प्रवाह

शराब की बिक्री पर उपकर का प्रस्ताव  →  उपकर से राजस्व संग्रह  →  पर्यावरण और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का वित्तपोषण  →  शराब के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का शमन  →  सार्वजनिक स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. उपकर (Cess) किसी विशेष उद्देश्य के लिए लगाए गए कर होते हैं और इनकी आय भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) का हिस्सा नहीं होती है।
2. राज्य सरकारें संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य सूची में उल्लिखित विषयों पर उपकर लगाने के लिए अधिकृत हैं।
3. तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रस्तावित पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर का उद्देश्य शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण और नशामुक्ति कार्यक्रमों को वित्तपोषित करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। उपकर की आय भारत की संचित निधि का हिस्सा होती है, लेकिन इसे एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए अलग रखा जाता है। कथन 2 सही है। राज्य सरकारें राज्य सूची के विषयों पर उपकर लगा सकती हैं, जैसे शराब की बिक्री पर। कथन 3 सही है। प्रस्तावित उपकर का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण, विशेष रूप से शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण और नशामुक्ति कार्यक्रमों के लिए धन जुटाना है।

Q2. भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत, ‘शराब के उत्पादन, निर्माण, कब्ज़े, परिवहन, खरीद और बिक्री पर शुल्क’ किस सूची का विषय है?

  1. संघ सूची
  2. राज्य सूची
  3. समवर्ती सूची
  4. अवशिष्ट शक्तियाँ

उत्तर: राज्य सूची — संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 51 ‘शराब के उत्पादन, निर्माण, कब्ज़े, परिवहन, खरीद और बिक्री पर शुल्क’ को राज्य सरकारों के कराधान अधिकार क्षेत्र में रखती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) के संदर्भ में, राज्य सरकारों द्वारा उपकर (Cess) लगाने की शक्ति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। तमिलनाडु द्वारा शराब की बिक्री पर पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर लगाने के हालिया प्रस्ताव के आलोक में इसके निहितार्थों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राजकोषीय संघवाद की संक्षिप्त परिभाषा और भारत में केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों का उल्लेख। उपकर की अवधारणा का परिचय।
2. **राज्य सरकारों द्वारा उपकर लगाने की शक्ति:**
* संविधान के अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची (राज्य सूची की प्रविष्टियाँ, विशेषकर कराधान से संबंधित) का उल्लेख।
* राज्यों को विशिष्ट उद्देश्यों के लिए उपकर लगाने की संवैधानिक अनुमति।
* शराब पर कराधान से संबंधित राज्य की विशेष शक्तियाँ (राज्य सूची, प्रविष्टि 51)।
3. **उपकर लगाने के निहितार्थ (तमिलनाडु के प्रस्ताव के संदर्भ में):**
* **सकारात्मक निहितार्थ:**
* विशिष्ट सामाजिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों के लिए लक्षित वित्तपोषण (जैसे अपशिष्ट प्रबंधन, नशामुक्ति, पुनर्वास)।
* राजस्व सृजन और राज्य के वित्तीय स्वायत्तता में वृद्धि।
* ‘उपयोगकर्ता भुगतान’ सिद्धांत (polluter pays principle) का अनुप्रयोग।
* शराब के उपभोग से उत्पन्न नकारात्मक बाह्यताओं (negative externalities) को आंतरिक करना।
* **नकारात्मक निहितार्थ/चुनौतियाँ:**
* कराधान में जटिलता और अनुपालन बोझ।
* राज्यों के बीच कराधान दरों में भिन्नता से संभावित व्यापारिक विसंगतियाँ।
* उपकर के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की चुनौती।
* राजकोषीय संघवाद पर संभावित प्रभाव यदि उपकर का अत्यधिक उपयोग किया जाए।
4. **निष्कर्ष:** राजकोषीय संघवाद के संतुलन को बनाए रखते हुए उपकर के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर बल। विशिष्ट सामाजिक-पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में राज्यों की भूमिका को रेखांकित करना।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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