08 Aug तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया
✎ केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का आधार हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के विभाजन को नियंत्रित करते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
- Prelims: केंद्र-राज्य संबंध, संघवाद, सरकारी आयोग, पुंछी आयोग, राजमन्नार समिति, अनुच्छेद 245, अनुच्छेद 256, समवर्ती सूची
- Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और भविष्य, सहकारी संघवाद: एक आदर्श या आवश्यकता?
त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का आधार हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के विभाजन को नियंत्रित करते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित अपनी उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के भाग-I के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का निर्देश दिया है। यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिपोर्ट को व्यापक पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जैसा कि इसके तमिल संस्करण के साथ किया गया था। सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण के लिए विशेष कॉपीराइट को भी रद्द करने का निर्देश दिया है।
पृष्ठभूमि
- केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की एक मूलभूत विशेषता है, जो देश की संघीय संरचना को परिभाषित करती है।
- समय-समय पर, विभिन्न समितियों और आयोगों का गठन केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों की समीक्षा और सुधार के लिए किया गया है। इनमें प्रमुख हैं सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission)।
- इस समिति का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों, प्रशासनिक प्रथाओं और वित्तीय संबंधों का अध्ययन करना और सुधारों का सुझाव देना था।
भारत में केंद्र-राज्य संबंध
- भारतीय संविधान देश में एक संघीय शासन प्रणाली स्थापित करता है, जहाँ केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है।
- संविधान के भाग XI और XII में केंद्र और राज्यों के बीच विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों का विस्तृत वर्णन किया गया है।
- विधायी संबंध: अनुच्छेद 245 से 255 तक केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित हैं, जिसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं।
- प्रशासनिक संबंध: अनुच्छेद 256 से 263 तक केंद्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक समन्वय और सहयोग को परिभाषित करते हैं, जिसमें राज्यों पर केंद्र का नियंत्रण भी शामिल है।
- वित्तीय संबंध: अनुच्छेद 268 से 293 तक केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के वितरण, कराधान शक्तियों और ऋण लेने की क्षमता से संबंधित हैं।
- भारत में संघवाद सहकारी (Co-operative Federalism) और प्रतिस्पर्धी (Competitive Federalism) दोनों प्रकृति का है, जहाँ केंद्र और राज्य एक-दूसरे के साथ सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों करते हैं।
- विभिन्न आयोगों और समितियों, जैसे कि सरकारी आयोग (1983) और पुंछी आयोग (2007), ने केंद्र-राज्य संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च-स्तरीय समिति का गठन | केंद्र-राज्य संबंधों की जटिलताओं का अध्ययन करने और सुधारों का सुझाव देने हेतु विशेषज्ञ दृष्टिकोण |
| रिपोर्ट का सार्वजनिक डोमेन में जारी होना | शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है, जिससे आम जनता और हितधारक जानकारी तक पहुँच सकें |
| कॉपीराइट का निरस्तीकरण | रिपोर्ट की व्यापक पहुँच और उपयोग को बढ़ावा देता है, जिससे शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को लाभ होता है |
| भाग I रिपोर्ट का अंग्रेजी संस्करण | राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक दर्शकों तक पहुँच सुनिश्चित करता है, विभिन्न राज्यों और केंद्र के बीच संवाद को सुगम बनाता है |
| केंद्र-राज्य संबंधों पर ध्यान | भारत के संघीय ढांचे की मजबूती और कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण, सहयोगात्मक संघवाद को बढ़ावा देता है |
महत्व
शासन और पारदर्शिता
- रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का तमिलनाडु सरकार का निर्णय शासन में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) के सिद्धांतों को दर्शाता है।
- यह कदम नागरिकों को केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित महत्वपूर्ण नीतिगत चर्चाओं और सिफारिशों तक पहुँचने में सक्षम बनाता है, जिससे सूचित सार्वजनिक बहस को बढ़ावा मिलता है।
- कॉपीराइट का निरस्तीकरण यह सुनिश्चित करता है कि रिपोर्ट का व्यापक रूप से अध्ययन, विश्लेषण और उपयोग किया जा सके, जिससे नीति निर्माण और अकादमिक अनुसंधान को लाभ होगा।
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- यह घटना भारत के संघीय ढांचे में केंद्र-राज्य संबंधों के महत्व को रेखांकित करती है।
- उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशें संघवाद (Federalism) को मजबूत करने, राज्यों की स्वायत्तता (Autonomy) को बढ़ावा देने और केंद्र तथा राज्यों के बीच सहयोग को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
- रिपोर्ट का सार्वजनिक होना विभिन्न राज्यों और केंद्र के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा दे सकता है, जिससे संघीय तनावों को कम करने में मदद मिल सकती है।
नीति निर्माण और अनुसंधान
- यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में कार्य करती है, जो उन्हें केंद्र-राज्य संबंधों की जटिलताओं को समझने में मदद करती है।
- सार्वजनिक पहुँच से रिपोर्ट में निहित सिफारिशों पर व्यापक चर्चा हो सकेगी, जिससे भविष्य की नीतियों और सुधारों को सूचित किया जा सकेगा।
- यह भारत में संघीय शासन के विभिन्न पहलुओं पर आगे के शोध और विश्लेषण को प्रोत्साहित करता है।
चुनौतियाँ
1. संघीय तनाव
- केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों, विधायी शक्तियों और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर अक्सर तनाव बना रहता है।
- राज्यों द्वारा अधिक स्वायत्तता की मांग और केंद्र द्वारा राष्ट्रीय एकता व अखंडता बनाए रखने की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघवाद की चुनौतियाँ
2. राजकोषीय संबंध
- राज्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और केंद्र पर उनकी निर्भरता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
- राजकोषीय हस्तांतरण (Fiscal Transfers) और केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) के डिजाइन को लेकर अक्सर राज्यों की ओर से चिंताएं व्यक्त की जाती हैं।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
3. प्रशासनिक संबंध
- अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के अधिकारियों की भूमिका और केंद्र द्वारा राज्यों पर प्रशासनिक नियंत्रण के विभिन्न साधनों को लेकर विवाद उत्पन्न होते हैं।
- कानून और व्यवस्था जैसे राज्य सूची के विषयों में केंद्र के हस्तक्षेप को लेकर भी चुनौतियाँ हैं।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध
4. विधायी संबंध
- समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषयों पर कानून बनाने में केंद्र और राज्यों के बीच टकराव की संभावना रहती है।
- राज्यपाल की भूमिका और राज्य विधेयकों पर उनकी सहमति को लेकर भी अक्सर विवाद होते हैं।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य विधायी संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संसाधन वितरण | राज्यों को पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी और केंद्र पर अत्यधिक निर्भरता। |
| विधायी क्षेत्राधिकार | समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्यों के बीच कानून बनाने में टकराव। |
| राज्यपाल की भूमिका | राज्यपाल के कार्यालय का राजनीतिकरण और राज्य सरकारों के मामलों में कथित हस्तक्षेप। |
| अखिल भारतीय सेवाएँ | अधिकारियों की तैनाती और नियंत्रण को लेकर केंद्र तथा राज्यों के बीच मतभेद। |
| एकल पार्टी प्रभुत्व | केंद्र और राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकार होने पर नीतिगत समन्वय में कठिनाई। |
आगे की राह
- केंद्र-राज्य संबंधों पर विभिन्न आयोगों (जैसे सरकारी आयोग, पुंछी आयोग) की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करना।
- अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) और राष्ट्रीय विकास परिषद (National Development Council) जैसे मंचों को सक्रिय और प्रभावी बनाना।
- राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना और राजकोषीय हस्तांतरण के तंत्र को अधिक पारदर्शी व न्यायसंगत बनाना।
- राज्यपाल के पद की निष्पक्षता और संवैधानिक भूमिका सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित करना।
- समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाते समय राज्यों के साथ अधिक परामर्श और सहमति का तंत्र विकसित करना।
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) दोनों को बढ़ावा देना ताकि राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सहयोग बना रहे।
- विभिन्न क्षेत्रों में केंद्र और राज्यों के बीच सूचना साझाकरण और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केंद्र-राज्य संबंध · संघवाद · राज्यों की स्वायत्तता · सरकारी आयोग · पुंछी आयोग · राजमन्नार समिति · अनुच्छेद 246 · सातवीं अनुसूची · सहकारी संघवाद · प्रतिस्पर्धी संघवाद · न्यायिक समीक्षा · उच्च स्तरीय समिति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- [‘अनुच्छेद 245-255’, ‘केंद्र-राज्य विधायी संबंध’]
- [‘अनुच्छेद 256-263’, ‘केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध’]
- [‘अनुच्छेद 268-281’, ‘केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध’]
- [‘अनुच्छेद 356’, ‘राज्य में राष्ट्रपति शासन’]
- [‘अनुच्छेद 263’, ‘अंतर-राज्यीय परिषद का गठन’]
अवधारणा प्रवाह
तमिलनाडु सरकार ने उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया। → समिति ने केंद्र-राज्य संबंधों पर रिपोर्ट का भाग I प्रस्तुत किया। → सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का आदेश दिया। → कॉपीराइट निरस्त किया गया, जिससे व्यापक पहुँच सुनिश्चित हुई। → यह कदम शासन में पारदर्शिता और संघीय संबंधों को मजबूत करता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का संविधान केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों को सातवीं अनुसूची के तहत तीन सूचियों में विभाजित करता है।
2. अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary powers) राज्यों के पास निहित हैं।
3. अनुच्छेद 246 संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियों से संबंधित है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं, जो केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन करती हैं। कथन 2 गलत है। भारत में अवशिष्ट शक्तियाँ संसद के पास निहित हैं, न कि राज्यों के पास (अनुच्छेद 248)। कथन 3 सही है। अनुच्छेद 246 संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित है, जिसमें विभिन्न सूचियों में विषयों पर कानून बनाने की शक्ति शामिल है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी समितियाँ/आयोग केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित हैं?
1. सरकारी आयोग
2. राजमन्नार समिति
3. पुंछी आयोग
4. एल.एम. सिंघवी समिति
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 2 और 3
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — सरकारी आयोग (1983), राजमन्नार समिति (1969) और पुंछी आयोग (2007) सभी केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा और सुधार के लिए गठित किए गए थे। एल.एम. सिंघवी समिति (1986) पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित थी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की प्रकृति पर चर्चा कीजिए। तमिलनाडु सरकार द्वारा हाल ही में केंद्र-राज्य संबंधों पर एक रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखने का निर्णय संघवाद के सिद्धांतों को कैसे सुदृढ़ करता है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की संवैधानिक प्रकृति और गतिशीलता का संक्षिप्त परिचय देकर करें। पहले भाग में, विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों का उल्लेख करते हुए केंद्र-राज्य संबंधों की विभिन्न विशेषताओं पर चर्चा करें। इसमें संविधान के अनुच्छेद 245-255 (विधायी), अनुच्छेद 256-263 (प्रशासनिक) और अनुच्छेद 268-281 (वित्तीय) का संदर्भ शामिल होना चाहिए। सहकारी संघवाद, प्रतिस्पर्धी संघवाद और राज्यों की स्वायत्तता की अवधारणाओं को भी शामिल करें। दूसरे भाग में, तमिलनाडु सरकार के हालिया निर्णय (केंद्र-राज्य संबंधों पर उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करना) का उल्लेख करें। बताएं कि यह निर्णय पारदर्शिता को कैसे बढ़ावा देता है और संघवाद के सिद्धांतों, विशेष रूप से जवाबदेही और सूचना के अधिकार को कैसे मजबूत करता है। इस बात पर प्रकाश डालें कि कैसे ऐसी रिपोर्टों को सार्वजनिक करना केंद्र और राज्यों के बीच संवाद और समझ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जिससे संघवाद की भावना मजबूत होती है। निष्कर्ष में, केंद्र-राज्य संबंधों में निरंतर सुधार की आवश्यकता और ऐसे कदमों के महत्व पर जोर दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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