22 Sep तेलंगाना में बच्चों की अवैध गोद लेने और तस्करी: उच्च न्यायालय ने लिया स्वतः संज्ञान

✎ अवैध दत्तक ग्रहण और मानव तस्करी बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, जिसके लिए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और CARA दिशानिर्देशों का सख्त कार्यान्वयन आवश्यक है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: बाल तस्करी, अवैध दत्तक ग्रहण, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015, जनहित याचिका (PIL), स्वतः संज्ञान (Suo Motu), केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA)
- Essay: भारत में बच्चों के अधिकार और उनका संरक्षण, सामाजिक न्याय और कानून का शासन
त्वरित पुनरावृत्ति: अवैध दत्तक ग्रहण और मानव तस्करी बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, जिसके लिए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और CARA दिशानिर्देशों का सख्त कार्यान्वयन आवश्यक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य में शिशुओं और छोटे बच्चों के अवैध दत्तक ग्रहण और मानव तस्करी की व्यापक प्रकृति को दर्शाने वाली रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) दायर की है। न्यायालय ने इस मामले को बड़े जनहित का विषय मानते हुए, राज्य में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी कार्यान्वयन का भी आकलन करने का निर्देश दिया है। यह मामला एक किसान द्वारा अपनी दत्तक बेटी की हिरासत मांगने वाली एक रिट अपील से जुड़ा है, जिसे पुलिस ने कथित तौर पर तस्करी किए गए बच्चों में से एक बताया था।
पृष्ठभूमि
- तेलंगाना उच्च न्यायालय ने एक रिट अपील में प्रस्तुत रिपोर्टों का अवलोकन किया, जिसमें राज्य में अवैध दत्तक ग्रहण और बच्चों की मानव तस्करी की व्यापकता का संकेत मिला।
- न्यालय ने इस मामले को बड़े जनहित का मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और इसे एक जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया।
- कई शिशु और छोटे बच्चे ऐसे हैं जिनके जैविक माता-पिता का पता नहीं चल पा रहा है और इसमें शामिल बिचौलिए फरार हैं।
- यह मामला एक किसान द्वारा दायर रिट अपील से उत्पन्न हुआ, जिसने अपनी दत्तक बेटी की हिरासत मांगी थी, जिसे पुलिस ने तस्करी का शिकार बताया था।
- एकल न्यायाधीश ने किसान की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि बच्चे को केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (Central Adoption Resource Authority – CARA) के दिशानिर्देशों के अनुसार नहीं अपनाया गया था।
- उच्च न्यायालय ने गृह विभाग के प्रधान सचिव, महिला विकास और बाल कल्याण निदेशक, तेलंगाना राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (TSLSA) के सचिव और DGP, सुरक्षा विंग को इस स्वतः संज्ञान जनहित याचिका में प्रतिवादी बनाया है।
किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और दत्तक ग्रहण
- किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 भारत में बच्चों से संबंधित कानूनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बच्चों की देखभाल, संरक्षण, विकास और उपचार सुनिश्चित करना है।
- यह अधिनियम बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देता है और उन्हें कानूनी प्रक्रियाओं से बचाने का प्रयास करता है।
- अधिनियम विशेष रूप से देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (Children in Need of Care and Protection – CNCP) और कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों (Children in Conflict with Law – CCL) से संबंधित प्रावधानों को शामिल करता है।
- दत्तक ग्रहण (Adoption) के संबंध में, अधिनियम केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) को नोडल निकाय के रूप में मान्यता देता है, जो देश में दत्तक ग्रहण को विनियमित करता है।
- CARA दिशानिर्देशों का पालन करना भारत में कानूनी दत्तक ग्रहण के लिए अनिवार्य है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।
- अधिनियम में बाल कल्याण समितियों (Child Welfare Committees – CWC) और किशोर न्याय बोर्डों (Juvenile Justice Boards – JJB) की स्थापना का प्रावधान है, जो बच्चों के मामलों को संभालने के लिए जिम्मेदार हैं।
- मानव तस्करी (Human Trafficking) एक गंभीर अपराध है, जिसमें बच्चों का शोषण, बिक्री और अवैध दत्तक ग्रहण शामिल है, और यह अधिनियम ऐसे अपराधों से बच्चों की रक्षा के लिए मजबूत प्रावधान प्रदान करता है।
- स्वतः संज्ञान (Suo Motu) का अर्थ है कि न्यायालय स्वयं किसी मामले का संज्ञान लेता है, बिना किसी पक्ष द्वारा याचिका दायर किए, विशेषकर जब जनहित का कोई बड़ा मुद्दा शामिल हो।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अवैध गोद लेने और शिशु तस्करी | यह बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है, जो समाज में कमजोर वर्गों के शोषण को दर्शाता है। |
| तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान | यह न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है, विशेषकर जब सार्वजनिक हित और मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा हो। |
| जनहित याचिका (PIL) | यह न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण साधन है। |
| किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 | यह बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, जिसके प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है। |
| केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) दिशानिर्देश | यह वैध और सुरक्षित दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने के लिए मानक निर्धारित करता है, जिससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह घटना बच्चों के शोषण और तस्करी के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, जिससे समाज में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठते हैं।
- अवैध दत्तक ग्रहण और तस्करी से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है, उन्हें पहचान, शिक्षा और उचित पालन-पोषण से वंचित कर दिया जाता है।
- यह समाज में नैतिक मूल्यों के पतन को दर्शाता है और कमजोर बच्चों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को उजागर करता है।
कानूनी और शासन संबंधी महत्व
- उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लेना न्यायिक सक्रियता का एक उदाहरण है, जो कार्यपालिका को अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है।
- यह घटना किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर देती है, विशेषकर दत्तक ग्रहण और बाल संरक्षण के प्रावधानों के संबंध में।
- यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका और उनकी जवाबदेही को भी रेखांकित करता है, विशेषकर मानव तस्करी के मामलों की जांच और रोकथाम में।
नैतिक महत्व
- यह घटना मानव जीवन की पवित्रता और बच्चों के अधिकारों के प्रति समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है।
- अवैध दत्तक ग्रहण और तस्करी में शामिल बिचौलियों का कृत्य घोर अनैतिक है और मानवीय गरिमा का उल्लंघन है।
चुनौतियाँ
1. अवैध दत्तक ग्रहण और मानव तस्करी
- यह बच्चों के मौलिक अधिकारों, जैसे जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है।
- यह बच्चों को शोषण, दुर्व्यवहार और उपेक्षा के प्रति संवेदनशील बनाता है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, बच्चों से संबंधित मुद्दे
2. कानून प्रवर्तन और निगरानी में कमी
- अवैध गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें रोकने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की अक्षमता या निष्क्रियता एक बड़ी चुनौती है।
- केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) दिशानिर्देशों का उल्लंघन और निगरानी तंत्र की कमजोरी इस समस्या को और बढ़ाती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, कानून और व्यवस्था
3. जैविक माता-पिता का पता लगाने में कठिनाई
- कई मामलों में, तस्करी किए गए बच्चों के जैविक माता-पिता का पता लगाना मुश्किल होता है, जिससे बच्चों के पुनर्वास और उनकी पहचान स्थापित करने में बाधा आती है।
- यह बच्चों के अधिकारों को और जटिल बनाता है, क्योंकि उन्हें अपने परिवार और विरासत से वंचित कर दिया जाता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, बाल कल्याण
4. जागरूकता और शिक्षा की कमी
- अवैध दत्तक ग्रहण के खतरों और वैध प्रक्रियाओं के बारे में जनता में जागरूकता की कमी इस समस्या को बढ़ावा देती है।
- गरीबी और अशिक्षा अक्सर माता-पिता को अपने बच्चों को बिचौलियों को सौंपने के लिए मजबूर करती है, जिससे तस्करी का खतरा बढ़ जाता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सशक्तिकरण, शिक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अवैध दत्तक ग्रहण | बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन, शोषण का खतरा, पहचान का नुकसान। |
| शिशु तस्करी | मानव गरिमा का हनन, संगठित अपराध का विस्तार, बच्चों का दुरुपयोग। |
| कानून का अप्रभावी कार्यान्वयन | किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और CARA दिशानिर्देशों का उल्लंघन, जवाबदेही की कमी। |
| जैविक माता-पिता का पता न चलना | बच्चों के पुनर्वास में बाधा, कानूनी जटिलताएँ, भावनात्मक आघात। |
| बिचौलियों की भूमिका | संगठित अपराध को बढ़ावा, कमजोर परिवारों का शोषण, कानूनी खामियों का लाभ उठाना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015
आगे की राह
- किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) दिशानिर्देशों का कठोरता से कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
- अवैध दत्तक ग्रहण और बाल तस्करी के मामलों की जांच के लिए विशेष पुलिस इकाइयों का गठन किया जाए और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना की जाए।
- दत्तक ग्रहण की वैध प्रक्रियाओं और अवैध दत्तक ग्रहण के खतरों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएं।
- बाल कल्याण समितियों (CWC) और जिला बाल संरक्षण इकाइयों (DCPU) को मजबूत किया जाए ताकि वे बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित कर सकें।
- सीमा पार तस्करी को रोकने के लिए अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाए।
- अनाथ और परित्यक्त बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय गृहों और देखभाल सुविधाओं की संख्या बढ़ाई जाए।
- गरीबी और अशिक्षा जैसे मूल कारणों को संबोधित करने के लिए सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए, जो अक्सर बच्चों की तस्करी का कारण बनते हैं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अवैध दत्तक ग्रहण · मानव तस्करी · जनहित याचिका (PIL) · न्यायिक सक्रियता · किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 · केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) · बाल संरक्षण · राज्य की भूमिका · मौलिक अधिकार · न्यायिक समीक्षा · अमीकस क्यूरी · बाल कल्याण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 23’, ‘note’: ‘मानव दुर्व्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 24’, ‘note’: ‘कारखानों आदि में बच्चों के नियोजन का प्रतिषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
अवधारणा प्रवाह
तेलंगाना में अवैध दत्तक ग्रहण/शिशु तस्करी की खबरें → उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान और जनहित याचिका → किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के कार्यान्वयन की समीक्षा → CARA दिशानिर्देशों का उल्लंघन और बिचौलियों की भूमिका → बच्चों के अधिकारों का हनन और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ → न्यायपालिका द्वारा सरकार से जवाबदेही की मांग
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में दत्तक ग्रहण (Adoption) केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार होता है, जो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय है।
2. किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015, बच्चों के दत्तक ग्रहण और संरक्षण से संबंधित प्राथमिक कानून है।
3. जनहित याचिका (PIL) केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही दायर की जा सकती है, उच्च न्यायालयों में नहीं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। CARA दत्तक ग्रहण के लिए नोडल एजेंसी है और दिशानिर्देश निर्धारित करती है। कथन 2 सही है। किशोर न्याय अधिनियम, 2015 बच्चों के दत्तक ग्रहण और संरक्षण के लिए एक व्यापक कानून है। कथन 3 गलत है। जनहित याचिका सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ उच्च न्यायालयों में भी दायर की जा सकती है (अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के तहत)।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘अमीकस क्यूरी’ (Amicus Curiae) शब्द का सबसे सटीक वर्णन करता है?
- यह एक ऐसा व्यक्ति होता है जिसे अदालत द्वारा किसी मामले में गवाह के रूप में बुलाया जाता है।
- यह एक कानूनी विशेषज्ञ होता है जिसे अदालत द्वारा किसी मामले में सहायता करने के लिए नियुक्त किया जाता है, भले ही वह उस मामले में पक्षकार न हो।
- यह एक सरकारी वकील होता है जो राज्य का प्रतिनिधित्व करता है।
- यह एक न्यायिक अधिकारी होता है जो निचली अदालतों में मामलों की सुनवाई करता है।
उत्तर: यह एक कानूनी विशेषज्ञ होता है जिसे अदालत द्वारा किसी मामले में सहायता करने के लिए नियुक्त किया जाता है, भले ही वह उस मामले में पक्षकार न हो। — अमीकस क्यूरी (Amicus Curiae) का अर्थ ‘अदालत का मित्र’ है। यह एक ऐसा व्यक्ति या संगठन होता है जो किसी मामले में पक्षकार न होते हुए भी, अदालत को कानूनी या तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करके सहायता करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अवैध दत्तक ग्रहण और मानव तस्करी की बढ़ती घटनाओं के आलोक में, भारत में बाल संरक्षण के लिए कानूनी और संस्थागत ढाँचे का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, जनहित याचिका (PIL) और न्यायिक सक्रियता की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अवैध दत्तक ग्रहण और मानव तस्करी की समस्या का संक्षिप्त परिचय और बाल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश।
2. **भारत में बाल संरक्षण का कानूनी ढाँचा:**
* **किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015:** इसके प्रमुख प्रावधान, जैसे दत्तक ग्रहण प्रक्रिया, बाल कल्याण समितियाँ (CWC), किशोर न्याय बोर्ड (JJB) और बाल गृह।
* **केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA):** इसकी भूमिका, दिशानिर्देश और कानूनी दत्तक ग्रहण प्रक्रिया।
* **संविधान के प्रावधान:** अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार), अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार), अनुच्छेद 23 (मानव तस्करी पर रोक), अनुच्छेद 24 (बाल श्रम पर रोक) और अनुच्छेद 39(f) (बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर)।
* **अन्य संबंधित कानून:** POCSO अधिनियम, अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, आदि।
3. **संस्थागत ढाँचा:**
* राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR)।
* बाल कल्याण समितियाँ (CWC) और किशोर न्याय बोर्ड (JJB)।
* पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ।
* NGOs और नागरिक समाज संगठनों की भूमिका।
4. **ढाँचे का समालोचनात्मक परीक्षण:**
* **सकारात्मक पक्ष:** मजबूत कानूनी आधार, विशेष एजेंसियों का गठन, बाल अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता।
* **चुनौतियाँ/कमियाँ:** कानूनों का अपर्याप्त कार्यान्वयन, संस्थागत क्षमता की कमी, जागरूकता का अभाव, भ्रष्टाचार, अंतर-एजेंसी समन्वय की कमी, सीमा पार तस्करी की समस्या, डेटा की कमी।
5. **जनहित याचिका (PIL) और न्यायिक सक्रियता की भूमिका:**
* **PIL की अवधारणा:** सार्वजनिक हित के मामलों में न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करना।
* **न्यायिक सक्रियता:** न्यायपालिका द्वारा कार्यपालिका और विधायिका के क्षेत्रों में हस्तक्षेप कर जनहित को बढ़ावा देना।
* **बाल संरक्षण में भूमिका:** अवैध दत्तक ग्रहण और तस्करी जैसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेना (suo motu), सरकार को जवाबदेह ठहराना, दिशानिर्देश जारी करना, कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना। उदाहरण के तौर पर तेलंगाना उच्च न्यायालय का हालिया मामला।
* **सकारात्मक प्रभाव:** त्वरित न्याय, नीतिगत बदलावों को प्रेरित करना, अधिकारों की रक्षा।
* **आलोचना/सीमाएँ:** शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन, न्यायिक अतिरेक का आरोप, विशेषज्ञता की कमी।
6. **निष्कर्ष:** बाल संरक्षण के लिए एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढाँचे की आवश्यकता पर बल, जिसमें प्रभावी कार्यान्वयन, अंतर-एजेंसी समन्वय और न्यायिक सक्रियता का संतुलित उपयोग शामिल हो।
स्रोत: The Hindu
Telangana PCS (TGPSC (TSPSC)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लिया गया ‘बच्चों के अवैध गोद लेने एवं तस्करी’ से संबंधित जनहित याचिका (PIL) में मुख्य चिंता का विषय क्या है?
- A. राज्य में बाल कल्याण योजनाओं की कमी
- B. राज्य में नवजात शिशुओं एवं बच्चों की व्यापक अवैध गोद लेने एवं तस्करी की घटनाएं
- C. राज्य में गोद लेने की प्रक्रिया में सरकारी हस्तक्षेप का अभाव
- D. राज्य में बाल संरक्षण कानूनों का पूर्णतः लागू न होना
उत्तर: B. राज्य में नवजात शिशुओं एवं बच्चों की व्यापक अवैध गोद लेने एवं तस्करी की घटनाएं — हाई कोर्ट ने राज्य में नवजात शिशुओं एवं बच्चों की व्यापक अवैध गोद लेने एवं तस्करी की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।
Mains: तर्कसंगत विश्लेषण सहित स्पष्ट कीजिए कि तेलंगाना राज्य में बच्चों की अवैध गोद लेने एवं तस्करी की समस्या के प्रमुख कारण क्या हैं? साथ ही, इस समस्या के निराकरण हेतु न्यायालय द्वारा उठाए गए कदमों का मूल्यांकन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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