24 Oct धान पराली प्रबंधन: सीएक्यूएम दल ने पंजाब का दौरा कर उठाए कदम
✎ CAQM एक सांविधिक निकाय है जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता का समन्वित प्रबंधन करता है, और पराली प्रबंधन में इन-सीटू (खेत में) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर, जैसे को-फायरिंग और सीबीजी) दोनों उपाय शामिल हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण (वायु प्रदूषण, जैव-ऊर्जा, फसल अवशेष प्रबंधन) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (चक्रीय अर्थव्यवस्था, जैव-ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन) | GS Paper II — शासन (सांविधिक निकाय, केंद्र-राज्य समन्वय, अंतर-राज्यीय पर्यावरण प्रशासन)
- Prelims: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और उसका क्षेत्राधिकार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्र, को-फायरिंग (ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास का मिश्रण), सीबीजी (कम्प्रेस्ड बायोगैस) संयंत्र और SATAT योजना, फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें, जैसे हैप्पी सीडर और सुपर सीडर, इन-सीटू और एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन का अंतर, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और ICAR की भूमिका
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और किसान की आजीविका के बीच संतुलन: क्या प्रदूषण नियंत्रण में प्रोत्साहन-आधारित उपाय दंड-आधारित उपायों से अधिक प्रभावी हैं?, सहकारी संघवाद और अंतर-राज्यीय पर्यावरण प्रशासन: साझा वायु-क्षेत्र में समन्वित शासन की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: CAQM एक सांविधिक निकाय है जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता का समन्वित प्रबंधन करता है, और पराली प्रबंधन में इन-सीटू (खेत में) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर, जैसे को-फायरिंग और सीबीजी) दोनों उपाय शामिल हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
23 अक्टूबर 2026 को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management, CAQM) के अध्यक्ष के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल ने पंजाब के रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर का दौरा किया। दल ने ताप विद्युत संयंत्रों, सीबीजी संयंत्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि क्षेत्रों और एक बायोमास संयंत्र का निरीक्षण किया। धान की कटाई के मौसम में पराली के प्रभावी प्रबंधन और पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए लागू उपायों की समीक्षा की गई। दल ने राज्य अधिकारियों को ताप विद्युत संयंत्रों में को-फायरिंग के निर्धारित लक्ष्य पूरे करने और उत्सर्जन मानकों के अनुपालन का निर्देश दिया। साथ ही, कटाई के चरम समय में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की पर्याप्त और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने, विभिन्न प्राधिकरणों में समन्वय बढ़ाने और खेतों में सक्रिय निगरानी रखने पर बल दिया गया। यह समीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पराली जलाना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शीतकालीन वायु प्रदूषण का एक प्रमुख मौसमी स्रोत माना जाता है, और इसका समाधान स्रोत पर ही खोजना आवश्यक है।
पृष्ठभूमि
- वायु प्रदूषण की समस्या का अंतर-राज्यीय स्वरूप: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में होने वाली पराली जलाने की घटनाएँ भी योगदान देती हैं, इसलिए इसे किसी एक राज्य की समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता।
- धान-गेहूँ फसल चक्र: उत्तर-पश्चिमी भारत में धान की कटाई और गेहूँ की बुवाई के बीच कम समय होने के कारण किसान प्रायः खेत की सफाई के लिए अवशेष जलाते हैं, जिससे यह समस्या मौसमी रूप लेती है।
- कानूनी ढाँचा: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 द्वारा CAQM की स्थापना हुई, जिसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन का अधिकार दिया गया। इससे पहले विभिन्न राज्यों और केंद्र की एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी एक बड़ी चुनौती थी।
- नीति-पूर्व पृष्ठभूमि: वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत प्रदूषण नियंत्रण के ढाँचे विकसित हुए, जबकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) भी पराली जलाने से जुड़े मामलों में निर्देश देता रहा है।
- तकनीकी और वित्तीय हस्तक्षेप: केंद्र सरकार की फसल अवशेष प्रबंधन योजना के अंतर्गत मशीनों की खरीद पर सहायता और कस्टम हायरिंग केंद्रों (CHC) के माध्यम से किसानों को मशीनें उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
CAQM और पराली प्रबंधन का तंत्र क्या है?
- CAQM एक सांविधिक निकाय है, जिसकी स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत हुई। इसका कार्यक्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे उन क्षेत्रों तक फैला है, जिनका वायु गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है।
- CAQM को वायु गुणवत्ता से जुड़े निर्देश जारी करने, नियामक एजेंसियों के बीच समन्वय करने और उद्योगों व ताप विद्युत संयंत्रों पर उत्सर्जन मानकों के पालन को सुनिश्चित करने की शक्ति प्राप्त है।
- पराली प्रबंधन के दो मुख्य रूप हैं: इन-सीटू प्रबंधन, जिसमें अवशेष को खेत में ही मिट्टी में मिलाया जाता है (जैसे हैप्पी सीडर और सुपर सीडर द्वारा बुवाई), और एक्स-सीटू प्रबंधन, जिसमें अवशेष को खेत से हटाकर ऊर्जा या अन्य उपयोग में लाया जाता है।
- को-फायरिंग में कोयले के साथ बायोमास (जैसे पराली की गोलियाँ) को ताप विद्युत संयंत्र में मिलाकर जलाया जाता है, जिससे कोयले की खपत घटती है और पराली का उपयोग होता है।
- सीबीजी (कम्प्रेस्ड बायोगैस) संयंत्र कृषि अवशेष और जैविक कचरे से बायोगैस बनाकर उसे संपीड़ित करते हैं। इसे सतत वैकल्पिक परिवहन ईंधन योजना (SATAT, Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) के अंतर्गत प्रोत्साहित किया गया है।
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तंत्र का हिस्सा हैं, किसानों को मशीनों के प्रदर्शन, प्रशिक्षण और तकनीकी परामर्श के माध्यम से पराली प्रबंधन में सहायता करते हैं।
- GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) प्रदूषण के स्तर के आधार पर चरणबद्ध कार्रवाई तय करता है, जबकि पराली प्रबंधन दीर्घकालिक स्रोत-नियंत्रण का उपाय है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संस्थागत स्वरूप | वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से जुड़े समन्वय और नियंत्रण के लिए एक वैधानिक निकाय है। इसे राज्यों को निर्देश देने की शक्ति प्राप्त है, इसलिए पंजाब के ज़िलों में उसका दौरा पराली प्रबंधन के क्रियान्वयन की निगरानी का एक प्रभावी माध्यम है। |
| दौरे के स्थल | रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर में ताप विद्युत संयंत्र, सीबीजी संयंत्र, कृषि विज्ञान केन्द्र (KVK), कृषि क्षेत्र और बायोमास संयंत्र शामिल थे। इससे पराली के आंतरिक (खेत में) और बाहरी (उद्योगों में उपयोग) दोनों प्रबंधन मार्गों का एक साथ मूल्यांकन हुआ। |
| सह-दहन (Co-firing) | ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के साथ बायोमास या पराली जैसे कृषि अवशेष का मिश्रित दहन किया जाता है। इससे कोयले की खपत घटती है और फसल अवशेष का बड़े पैमाने पर उपयोग संभव होता है। आयोग ने इसके निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति पर बल दिया। |
| फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें | सुपर सीडर, हैप्पी सीडर जैसी मशीनें पराली को मिट्टी में मिलाने या निकालने का काम करती हैं। इनकी समय पर उपलब्धता ही कटाई के चरम काल में पराली जलाने की रोकथाम का मूल आधार है। |
| उत्सर्जन मानकों का अनुपालन | ताप विद्युत संयंत्रों में सह-दहन के दौरान उत्सर्जन मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि प्रदूषण का स्थान बदलने के बजाय उसमें वास्तविक कमी आए। |
| बाहरी प्रबंधन तंत्र | पराली को खेत से उठाकर ताप विद्युत संयंत्रों, बायोमास संयंत्रों और सीबीजी संयंत्रों तक पहुँचाने की व्यवस्था और उसके स्थापित तंत्र इस रणनीति की रीढ़ हैं। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- पराली जलाने से निकलने वाले कणिका पदार्थ (PM) और दूसरे प्रदूषक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं। इसलिए स्रोत पर ही इसके प्रबंधन को प्राथमिकता देना वायु प्रदूषण नियंत्रण की मूल रणनीति है।
- फसल अवशेष को खेत में जलाने के बजाय मिट्टी में मिलाने से मृदा के जैविक कार्बन और सूक्ष्मजीवी गतिविधि को बनाए रखने में सहायता मिलती है।
आर्थिक महत्व
- बायोमास और सीबीजी के रूप में पराली का उपयोग किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर पैदा कर सकता है।
- ताप विद्युत संयंत्रों में सह-दहन से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कुछ हद तक घटती है, जो ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता के दृष्टिकोण से भी उपयोगी है।
ऊर्जा संक्रमण और नवीकरणीय ऊर्जा से संबंध
- सीबीजी संयंत्र और बायोमास ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा के उस भाग में आते हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की दिशा में योगदान देता है।
- सीबीजी उत्पादन में कृषि अवशेष को कच्चे माल के रूप में उपयोग करने से चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा व्यावहारिक रूप लेती है।
शासन और समन्वय के दृष्टिकोण से महत्व
- इस दौरे में केंद्रीय आयोग, राज्य प्राधिकरणों, कृषि विभाग, ऊर्जा संयंत्रों और कृषि विज्ञान केन्द्रों के बीच समन्वय पर बल दिया गया। यह बहु-हितधारक शासन का व्यावहारिक उदाहरण है।
- आयोग द्वारा जमीनी निगरानी और परिचालन कमियों को समय पर दूर करने का निर्देश प्रशासनिक जवाबदेही को सुदृढ़ करता है।
चुनौतियाँ
1. मशीनों की समयबद्ध उपलब्धता
- धान की कटाई के चरम समय में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की माँग अचानक बढ़ जाती है। यदि मशीनें समय पर उपलब्ध न हों, तो किसान पराली जलाने की ओर लौट सकते हैं।
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए महँगी मशीनें खरीदना कठिन होता है, इसलिए सहकारी या किराये पर मशीन उपलब्ध कराने का तंत्र आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कृषि क्षेत्र की समस्याएँ और कृषि यंत्रीकरण
2. सह-दहन के लक्ष्य और उत्सर्जन मानकों का संतुलन
- ताप विद्युत संयंत्रों में सह-दहन के लक्ष्य पूरे करने का दबाव रहता है, किंतु इससे उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन न हो, यह सुनिश्चित करना चुनौती है।
- पराली की नमी, आपूर्ति की निरंतरता और उसकी ऊर्जा सघनता में अंतर के कारण संयंत्रों के संचालन में तकनीकी कठिनाइयाँ आती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: ऊर्जा संसाधन, पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण
3. पराली का आर्थिक मूल्य और लॉजिस्टिक्स
- पराली का संग्रहण, परिवहन और भंडारण महँगा है। यदि उसका बाज़ार मूल्य किसानों की लागत से कम हो, तो बाहरी प्रबंधन में भागीदारी घटती है।
- बायोमास और सीबीजी संयंत्रों तक आपूर्ति श्रृंखला का अभाव होने पर पराली का उपयोग सीमित रह जाता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कृषि विपणन और ग्रामीण अवसंरचना
4. राज्य और केंद्र के बीच समन्वय
- वायु प्रदूषण नियंत्रण में केंद्रीय आयोग, राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग की भूमिकाएँ आपस में जुड़ी हैं। इनमें समन्वय की कमी से निगरानी और क्रियान्वयन दोनों प्रभावित होते हैं।
- जमीनी स्तर पर परिचालन कमियों की पहचान और उनका शीघ्र समाधान तभी संभव है जब सूचना का प्रवाह तेज़ और पारदर्शी हो।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संघीय व्यवस्था, केंद्र-राज्य समन्वय और सांविधिक निकाय
5. किसानों की जागरूकता और व्यवहारिक बाधाएँ
- कई किसान पराली जलाने को समय और लागत बचाने का सस्ता तरीका मानते हैं। इस व्यवहार को बदलने के लिए केवल दंडात्मक उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
- फसल चक्र में बदलाव की अल्पकालिक लागत और बाज़ार की अनिश्चितता किसानों के निर्णय को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कृषि और पर्यावरण के बीच संतुलन; GS-2: सामाजिक क्षेत्र में जन-जागरूकता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता का विषय |
|---|---|
| मशीनों की कमी | कटाई के चरम समय में मशीनें न मिलने पर खेत में पराली जलाने का खतरा बढ़ता है। |
| सह-दहन के लक्ष्य | लक्ष्य पूरा करने के दबाव में उत्सर्जन मानकों की अनदेखी हो सकती है। |
| आपूर्ति श्रृंखला | पराली के संग्रहण और परिवहन की लागत अधिक होने से बाहरी प्रबंधन सीमित रहता है। |
| किसानों का आर्थिक दबाव | सीमित आय वाले किसानों के लिए मशीन और परिवहन का खर्च उठाना कठिन है। |
| प्रशासनिक समन्वय | केंद्र, राज्य और ज़मीनी एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी से क्रियान्वयन धीमा होता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- फसल अवशेष के स्व-स्थाने प्रबंधन हेतु कृषि यंत्रीकरण संवर्धन योजना (Promotion of Agricultural Mechanisation for In-situ Management of Crop Residue)
- सतत (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation – SATAT)
आगे की राह
- फसल कटाई के चरम काल से पहले मशीनों की पर्याप्त उपलब्धता के लिए ज़िलावार मांग का आकलन किया जाए और उसी के अनुसार आपूर्ति की योजना बने।
- सहकारी समितियों, कृषि विज्ञान केन्द्रों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से मशीनों का साझा उपयोग और किराये पर उपलब्धता बढ़ाई जाए।
- ताप विद्युत संयंत्रों में सह-दहन के लिए पराली की गुणवत्ता, नमी और आपूर्ति के मानक तय किए जाएँ, ताकि उत्सर्जन मानकों का पालन सुनिश्चित हो।
- पराली के संग्रहण, परिवहन और भंडारण के लिए आपूर्ति श्रृंखला विकसित की जाए, जिससे बायोमास और सीबीजी संयंत्रों तक निरंतर कच्चा माल पहुँचे।
- पराली के बाज़ार मूल्य को स्थिर रखने के लिए न्यूनतम खरीद या अनुबंध आधारित खरीद जैसे विकल्पों पर विचार किया जाए।
- खेतों में नियमित निगरानी के लिए उपग्रह आधारित और ज़मीनी निरीक्षण को जोड़ा जाए तथा शिकायत निवारण तंत्र को सक्रिय किया जाए।
- केंद्र, राज्य और स्थानीय प्रशासन के बीच नियमित समन्वय बैठकें और साझा डेटा प्रणाली विकसित की जाए।
- किसानों में जागरूकता के लिए प्रदर्शन आधारित प्रशिक्षण और फसल विविधीकरण के विकल्पों का प्रचार किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) · इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन · को-फायरिंग (Co-firing) · सीबीजी (CBG) और सतत वैकल्पिक परिवहन · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) · कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) · पर्यावरण संरक्षण हेतु राज्य नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 48A)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार का मौलिक कर्तव्य
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ वायु सहित जीवन का अधिकार
अवधारणा प्रवाह
धान की कटाई के साथ खेतों में बड़ी मात्रा में फसल अवशेष (पराली) बचता है। → समय पर मशीनें न मिलने पर किसान पराली जलाते हैं, जिससे प्रदूषक उत्सर्जित होकर वायु गुणवत्ता बिगड़ती है। → आयोग द्वारा निगरानी के माध्यम से आंतरिक प्रबंधन (मशीनों से खेत में प्रबंधन) और बाहरी प्रबंधन (ताप विद्युत संयंत्र, बायोमास और सीबीजी संयंत्र) को सुदृढ़ किया जाता है। → पराली का सह-दहन और बायोमास या सीबीजी उत्पादन में उपयोग होने से वह अपशिष्ट से संसाधन में बदलती है। → उत्सर्जन मानकों का पालन और परिचालन कमियों का समय पर निवारण होने से प्रदूषण में वास्तविक कमी आती है। → इस प्रक्रिया से वायु गुणवत्ता में सुधार, किसानों की आय में वृद्धि और ऊर्जा संक्रमण को बल मिलता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की स्थापना संसद द्वारा पारित अधिनियम के अंतर्गत की गई है।
2. पंजाब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक घटक राज्य है।
3. आयोग का कार्यक्षेत्र आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने से उत्पन्न प्रदूषण से संबंधित विषयों तक विस्तारित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि CAQM को वर्ष 2021 के अधिनियम द्वारा वैधानिक दर्जा दिया गया है। कथन 2 गलत है, क्योंकि पंजाब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का घटक नहीं है, परंतु पराली-जनित प्रदूषण के कारण इसे आसपास के क्षेत्रों के संदर्भ में शामिल किया गया है। कथन 3 सही है, इसलिए उत्तर ‘केवल दो’ है।
Q2. कथन (A): राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धान की पराली के एक्स-सीटू (Ex-situ) प्रबंधन, अर्थात पराली को ताप विद्युत या बायोमास संयंत्रों तक पहुँचाने से खेतों में खुली आग से होने वाला प्रदूषण घट सकता है।
कारण (R): धान की पराली को बिजली उत्पादन और पेलेटीकरण जैसे उपयोगों के लिए ईंधन-स्रोत के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
विकल्प:
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — एक्स-सीटू प्रबंधन में पराली खेत से बाहर निकलकर ऊर्जा उपयोग में जाती है, इसलिए खेत में जलाने की आवश्यकता घटती है। पराली का बिजली, बायोमास और पेलेटीकरण में उपयोग इसी तर्क पर आधारित है, अतः (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन (Match) कीजिए:
सूची-I (अवधारणा/संस्था)
1. इन-सीटू (In-situ) प्रबंधन
2. एक्स-सीटू (Ex-situ) प्रबंधन
3. सीबीजी (CBG)
4. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
सूची-II (अर्थ/विवरण)
a. पराली को खेत से बाहर ले जाकर बिजली या बायोमास संयंत्र में उपयोग करना
b. पराली को खेत में ही मिलाना, मल्चिंग या विशेष मशीनों से बिना जलाए प्रबंधन करना
c. संपीड़ित जैव-गैस (Compressed Biogas)
d. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन जिला-स्तरीय प्रसार और प्रदर्शन केंद्र
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-b, 2-a, 3-c, 4-d
- 1-b, 2-a, 3-d, 4-c
- 1-a, 2-c, 3-b, 4-d
- 1-c, 2-a, 3-b, 4-d
उत्तर: 1-b, 2-a, 3-c, 4-d — इन-सीटू प्रबंधन पराली को खेत में ही मिलाने या मशीनों से प्रबंधन से जुड़ा है (1-b)। एक्स-सीटू प्रबंधन पराली को खेत से बाहर उपयोग में लेने को कहता है (2-a)। सीबीजी संपीड़ित जैव-गैस है (3-c) और KVK ICAR के अधीन जिला-स्तरीय संस्था है (4-d)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पंजाब में धान की पराली प्रबंधन के लिए ताप विद्युत संयंत्रों में को-फायरिंग, सीबीजी संयंत्रों और बायोमास संयंत्रों जैसे एक्स-सीटू उपायों के साथ फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की उपलब्धता पर बल दिया जा रहा है। इन उपायों की प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि किसानों को समय पर मशीनें और आर्थिक प्रोत्साहन उपलब्ध नहीं कराए गए, तो वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लक्ष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (कुल ~250 शब्द):
1. भूमिका: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शीतकालीन वायु प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान; CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग, CAQM अधिनियम, 2021) का गठन और उसकी भूमिका; रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर का दौरा।
2. संवैधानिक और विधिक आधार: अनुच्छेद 48A (पर्यावरण संरक्षण का राज्य का दायित्व) और अनुच्छेद 51A(छ) व (ज) (नागरिक कर्तव्य); पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981; सहकारी संघवाद के संदर्भ में केंद्र-राज्य समन्वय।
3. उपायों का विश्लेषण:
(क) इन-सीटू: सीआरएम मशीनें (जैसे हैप्पी सीडर, सुपर SMS); कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) के अंतर्गत अनुदान; कस्टम हायरिंग केंद्र; छोटे और सीमांत किसानों के लिए मशीनों की उपलब्धता और समय-सीमा की चुनौती।
(ख) एक्स-सीटू: ताप विद्युत संयंत्रों में को-फायरिंग (केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के दिशानिर्देश); उत्सर्जन मानकों का अनुपालन; सीबीजी संयंत्र और SATAT योजना (सतत वैकल्पिक परिवहन हेतु सस्ती पहुँच); पराली की परिवहन लागत और भंडारण की समस्या।
4. विधिक सिद्धांत: प्रदूषक भुगतान सिद्धांत और सावधानी सिद्धांत (वेल्लोर सिटिज़न्स वेलफेयर फोरम बनाम भारत संघ, 1996 में स्वीकृत); सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रदूषण नियंत्रण में निगरानी के निर्देश।
5. संतुलित दृष्टिकोण: पर्यावरणीय दृष्टि बनाम कृषक की आर्थिक लागत (मशीन, श्रम, समय-सीमा में बुआई); विकेंद्रीकृत निजी मॉडल बनाम सार्वजनिक अवसंरचना; प्रोत्साहन आधारित बनाम दंड आधारित दृष्टिकोण।
6. निष्कर्ष: समन्वित, समयबद्ध और किसान-केंद्रित क्रियान्वयन की आवश्यकता; निगरानी तंत्र और परिचालन कमियों को समय पर दूर करना; दीर्घकालिक समाधान के रूप में फसल विविधीकरण और बाजार-आधारित पराली उपयोग।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Punjab PCS (PPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: सीएक्यूएम (Commission for Air Quality Management) के अध्यक्ष के नेतृत्व में उच्चस्तरीय दल द्वारा हाल ही में किन तीन पंजाबी जिलों में धान की पराली के प्रबंधन संबंधी उपायों की समीक्षा की गई?
- अमृतसर, लुधियाना और जालंधर
- रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर
- पटiala, मोहाली और गुरदासपुर
- फरीदकोट, बठिंडा और संगरूर
उत्तर: रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर — सीएक्यूएम के अध्यक्ष द्वारा धान की पराली के प्रबंधन के लिए रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर जिलों का दौरा किया गया।
Mains: धान की पराली जलाने से उत्पन्न वायु प्रदूषण के नियंत्रण हेतु पंजाब सरकार द्वारा अपनाए गए किन्हीं तीन प्रमुख उपायों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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