06 Aug नमामि गंगे अभियान: गंगा संरक्षण में 4,263 एमएलडी सीवेज क्षमता का सृजन
✎ नमामि गंगे अभियान गंगा नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक और बहुआयामी कार्यक्रम है, जिसमें सीवरेज उपचार, जल गुणवत्ता सुधार और जैव-विविधता संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (नदी प्रणालियाँ) | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (नदी प्रदूषण से संबंधित आपदाएँ)
- Prelims: नमामि गंगे अभियान, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG), सीवरेज उपचार संयंत्र (STP), जैविक जल गुणवत्ता (BWQ), गंगा डॉल्फ़िन, घड़ियाल, रेड-क्राउंड रूफ़्ड टर्टल (बटागुर कचुगा), रिवर रैंचिंग, आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017
- Essay: नदी संरक्षण और सतत विकास: चुनौतियाँ और समाधान, भारत में पर्यावरण शासन और जनभागीदारी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: नमामि गंगे अभियान गंगा नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक और बहुआयामी कार्यक्रम है, जिसमें सीवरेज उपचार, जल गुणवत्ता सुधार और जैव-विविधता संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
जल शक्ति मंत्रालय ने नमामि गंगे अभियान-II (Namami Gange Mission-II) के अंतर्गत हुई प्रगति पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं (sewerage infrastructure projects) के क्रियान्वयन, सीवेज उपचार क्षमता के सृजन, गंगा की मुख्यधारा के प्रदूषित खंडों में सुधार, जैविक जल गुणवत्ता (Biological Water Quality) में बेहतरी और जैव-विविधता संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। यह रिपोर्ट गंगा नदी के समग्र कायाकल्प के प्रयासों की वर्तमान स्थिति को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- नमामि गंगे कार्यक्रम एक एकीकृत संरक्षण मिशन है, जिसे जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा ‘फ्लैगशिप कार्यक्रम’ के रूप में अनुमोदित किया गया था, जिसका उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी ढंग से कम करना और उसका संरक्षण तथा कायाकल्प करना है।
- इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – NMCG) और इसके राज्य समकक्ष संगठनों यानी राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूहों (State Programme Management Groups – SPMGs) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
- यह कार्यक्रम गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें सीवरेज उपचार अवसंरचना, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, नदी-सतह की सफाई, जैव-विविधता संरक्षण, वनीकरण और जन-जागरूकता जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
- नमामि गंगे अभियान-II को वर्ष 2026 तक के लिए बढ़ाया गया है, जिसमें गंगा और उसकी सहायक नदियों के प्रदूषण को नियंत्रित करने तथा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी प्रदूषित नदी खंडों (Polluted River Stretches – PRS) की रिपोर्ट गंगा नदी में प्रदूषण के स्तर का आकलन करने और सुधार की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
- कार्यक्रम के तहत ‘गंगा प्रहरियों’ जैसे सामुदायिक भागीदारी मॉडल को अपनाया गया है, जो स्थानीय समुदायों को नदी संरक्षण प्रयासों में शामिल करते हैं।
नमामि गंगे अभियान के प्रमुख घटक और प्रगति
- सीवरेज अवसंरचना: वर्ष 2025 के दौरान 70 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया, जिनमें 25 सीवरेज उपचार संयंत्र (Sewage Treatment Plants – STPs) चालू किए गए। जून 2026 तक 4,263 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता का सृजन किया गया है।
- प्रदूषण नियंत्रण: CPCB की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2025 में गंगा की मुख्यधारा के प्रदूषित खंडों में सुधार देखा गया है, विशेषकर उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में। उत्तर प्रदेश और बिहार में आंशिक सुधार दर्ज किया गया है।
- जल गुणवत्ता: वर्ष 2024-25 के दौरान गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे 50 स्थलों और यमुना नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे 26 स्थलों पर की गई जैव निगरानी (bio-monitoring) के अनुसार, जैविक जल गुणवत्ता (Biological Water Quality – BWQ) ज्यादातर ‘अच्छा’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में पाई गई है।
- जैव-विविधता संरक्षण: यह कार्यक्रम जैव-विविधता संरक्षण को एक प्रमुख घटक के रूप में शामिल करता है, जिसमें वैज्ञानिक शोध, प्राकृतिक आवास की बहाली, प्रजातियों के संरक्षण, मत्स्य पालन संरक्षण, आर्द्रभूमि (wetland) की बहाली और वृक्षारोपण शामिल हैं।
- जलीय जीव संरक्षण: ‘राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना’ तैयार की गई है, और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है। चार जलीय जीव बचाव और पुनर्वास केंद्रों के साथ-साथ भारत की पहली डॉल्फ़िन बचाव एम्बुलेंस ने 6,800 से अधिक जलीय जीवों को बचाया और पुनर्वासित किया है।
- प्रजाति संवर्धन: संरक्षण एवं प्रजनन कार्यक्रमों के माध्यम से ताजे पानी के कछुओं के 1,500 से अधिक नवजात कछुए पैदा किए गए हैं, और 711 कछुओं को गंगा नदी में छोड़ा गया है। 893 घड़ियाल के बच्चों और 1,899 कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। गंभीर रूप से लुप्तप्राय ‘रेड-क्राउंड रूफ़्ड टर्टल’ (बटागुर कचुगा) के संरक्षण में भी मदद की जा रही है।
- मत्स्य संवर्धन: ICAR-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CIFRI) के सहयोग से ‘रिवर रैंचिंग’ (नदी में मछलियाँ छोड़ने का कार्य) शुरू किया गया है, जिसके तहत गंगा और उसकी सहायक नदियों में लगभग 2.05 करोड़ मछली के बीज छोड़े गए हैं।
- वनीकरण और आर्द्रभूमि प्रबंधन: NMCG ने आर्द्रभूमियों की वैज्ञानिक पहचान, प्रबंधन योजनाएँ तैयार करने और आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचना जारी करने में सहायता की है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सीवरेज अवसंरचना परियोजनाएँ | नदी प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण, सीवेज उपचार क्षमता में वृद्धि। |
| जैविक जल गुणवत्ता (BWQ) निगरानी | नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का आकलन, जलीय जीवन के लिए अनुकूलता का संकेतक। |
| जैव-विविधता संरक्षण | घड़ियाल, कछुए, डॉल्फ़िन और मछली प्रजातियों का संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली। |
| नदी रैंचिंग (River Ranching) | देशी मछली प्रजातियों की संख्या में वृद्धि, मत्स्य पालन को बढ़ावा। |
| आर्द्रभूमि (Wetland) बहाली और प्रबंधन | पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, जल शुद्धिकरण और जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण। |
| गंगा प्रहरी | सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से नदी संरक्षण और जागरूकता। |
महत्व
पर्यावरणिक महत्व
- गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के जल की गुणवत्ता में सुधार, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होता है।
- जैव-विविधता का संरक्षण, जिसमें घड़ियाल, गंगा डॉल्फ़िन, कछुए और विभिन्न मछली प्रजातियाँ शामिल हैं, जो नदी के स्वास्थ्य का प्रतीक हैं।
- आर्द्रभूमि की बहाली और प्रबंधन से प्राकृतिक जल शुद्धिकरण और बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिलती है।
सामाजिक महत्व
- स्वच्छ गंगा से लाखों लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका में सुधार, जो नदी पर निर्भर हैं।
- गंगा प्रहरियों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से स्थानीय समुदायों को नदी संरक्षण से जोड़ना, जिससे जागरूकता और स्वामित्व की भावना बढ़ती है।
- पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा, क्योंकि गंगा भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का अभिन्न अंग है।
आर्थिक महत्व
- मत्स्य पालन की बहाली और नदी रैंचिंग के माध्यम से मछुआरों की आजीविका में सुधार।
- स्वच्छ जल संसाधनों की उपलब्धता से कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों को लाभ।
- सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश से रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।
शासनिक महत्व
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को दर्शाता है, जो एक बड़े और जटिल कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी पर जोर, जिससे नीति निर्माण और हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता बढ़ती है।
- विभिन्न मंत्रालयों और संस्थानों (जैसे भारतीय वन्यजीव संस्थान) के बीच सहयोग का एक मॉडल प्रस्तुत करता है।
चुनौतियाँ
1. निरंतर प्रदूषण का दबाव
- तेजी से शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट का निरंतर प्रवाह।
- कृषि अपवाह और ठोस कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ जो नदी को प्रदूषित करती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
2. पर्याप्त अवसंरचना का अभाव
- सभी शहरी क्षेत्रों में पर्याप्त सीवेज उपचार संयंत्रों (STP) और उनके संचालन तथा रखरखाव की कमी।
- मौजूदा अवसंरचना का पुराना होना और उसकी क्षमता का अपर्याप्त होना।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे आदि
3. जैव-विविधता पर खतरा
- प्रदूषण, आवास विनाश और अवैध शिकार के कारण जलीय जीवों (जैसे डॉल्फ़िन, घड़ियाल) की आबादी में गिरावट।
- जलवायु परिवर्तन और जल स्तर में बदलाव का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव।
यूपीएससी लिंक: जैव-विविधता और उसका संरक्षण
4. सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता
- नदी संरक्षण में स्थानीय समुदायों की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।
- नदी में कचरा न फेंकने और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के प्रति व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: शासन के महत्वपूर्ण पहलू, पारदर्शिता और जवाबदेही
5. वित्तीय और तकनीकी बाधाएँ
- नदी संरक्षण परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण की आवश्यकता।
- नवीनतम उपचार प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उनके प्रभावी संचालन के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की कमी।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजटिंग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सीवेज उपचार क्षमता | बढ़ती शहरी आबादी के कारण उत्पन्न सीवेज की मात्रा को पूरी तरह से संसाधित करने में मौजूदा क्षमता की अपर्याप्तता। |
| प्रदूषित नदी खंड | कुछ खंडों में अभी भी प्रदूषण का उच्च स्तर, विशेषकर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में, जो निरंतर प्रयासों की आवश्यकता को दर्शाता है। |
| जैव-विविधता का संरक्षण | जलीय जीवों के आवासों का क्षरण, प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों के कारण प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा। |
| आर्द्रभूमि का प्रबंधन | आर्द्रभूमि की पहचान, अधिसूचना और प्रभावी प्रबंधन में चुनौतियाँ, जो पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। |
| अंतर-राज्यीय समन्वय | गंगा बेसिन के राज्यों के बीच प्रदूषण नियंत्रण और जल संसाधन प्रबंधन के लिए प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नमामि गंगे अभियान (Namami Gange Abhiyan)
आगे की राह
- सीवेज उपचार अवसंरचना का विस्तार और आधुनिकीकरण, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ प्रदूषण का स्तर अभी भी अधिक है।
- औद्योगिक अपशिष्टों के सख्त विनियमन और उनके उपचार के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों को अनिवार्य करना।
- जैव-विविधता संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना, जिसमें आवास बहाली, प्रजाति-विशिष्ट संरक्षण कार्यक्रम और अवैध शिकार पर नियंत्रण शामिल है।
- आर्द्रभूमि (Wetland) संरक्षण और प्रबंधन योजनाओं को प्राथमिकता देना, उनके पारिस्थितिक महत्व को पहचानना और उन्हें बहाल करना।
- गंगा प्रहरियों जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता को और बढ़ाना, ताकि स्थानीय स्तर पर स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी को जारी रखना, ताकि कार्यक्रम की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके और आवश्यकतानुसार रणनीतियों में संशोधन किया जा सके।
- गंगा बेसिन के राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देना, ताकि प्रदूषण नियंत्रण और जल संसाधन प्रबंधन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नमामि गंगे अभियान · गंगा नदी संरक्षण · जैव-विविधता संरक्षण · सीवेज उपचार संयंत्र · जलीय जीवन बहाली · प्रदूषित नदी खंड · राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना · नदी में मछलियाँ छोड़ने का कार्य · आर्द्रभूमि प्रबंधन · गंगा प्रहरी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
नदी प्रदूषण (सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट) → नमामि गंगे अभियान का क्रियान्वयन (STP, जैव-विविधता संरक्षण) → जल गुणवत्ता में सुधार (जैविक जल गुणवत्ता ‘अच्छा’ से ‘मध्यम’) → जलीय जीवन और जैव-विविधता की बहाली (घड़ियाल, डॉल्फ़िन, मछली) → स्वच्छ और स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. नमामि गंगे अभियान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नमामि गंगे अभियान- II के अंतर्गत वर्ष 2025 के दौरान कुल 70 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया।
2. जून 2026 तक इस कार्यक्रम के अंतर्गत 4,263 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता का सृजन किया गया है।
3. राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा तैयार की गई है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि नमामि गंगे अभियान- II के अंतर्गत वर्ष 2025 के दौरान कुल 70 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया। कथन 2 भी सही है क्योंकि जून 2026 तक इस कार्यक्रम के अंतर्गत 4,263 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता का सृजन किया गया है। कथन 3 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना 7,680 किलोमीटर के क्षेत्र में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के आधार पर तैयार की गई थी, न कि सीधे भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत जैव-विविधता संरक्षण के प्रमुख घटकों में शामिल है/हैं?
1. वैज्ञानिक शोध और प्राकृतिक आवास की बहाली
2. प्रजातियों का संरक्षण और मत्स्य पालन संरक्षण
3. आर्द्रभूमि की बहाली और वृक्षारोपण
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत, वैज्ञानिक शोध, प्राकृतिक आवास की बहाली, प्रजातियों के संरक्षण, मत्स्य पालन संरक्षण, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) की बहाली और वृक्षारोपण के माध्यम से नदी संरक्षण में जैव-विविधता संरक्षण को एक प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया गया है। इसलिए, सभी तीनों कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ नमामि गंगे अभियान गंगा नदी के कायाकल्प में कितना सफल रहा है? इस अभियान के तहत जैव-विविधता संरक्षण के प्रयासों का विस्तार से मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में नमामि गंगे अभियान (Namami Gange Mission) के उद्देश्यों और उसके चरण (जैसे नमामि गंगे अभियान- II) का संक्षिप्त उल्लेख करें। पहले भाग में गंगा नदी के कायाकल्प में अभियान की सफलता का मूल्यांकन करें, जिसमें सीवेज उपचार क्षमता में वृद्धि (4,263 एमएलडी), प्रदूषित नदी खंडों (Polluted River Stretches – PRS) में सुधार (उत्तराखंड में पीआरएस हटाना, उत्तर प्रदेश और बिहार में आंशिक सुधार), और जैविक जल गुणवत्ता (Biological Water Quality – BWQ) में सुधार (‘अच्छा’ से ‘मध्यम’) जैसे विशिष्ट डेटा और उदाहरण शामिल करें। दूसरे भाग में जैव-विविधता संरक्षण के प्रयासों का विस्तार से मूल्यांकन करें। इसमें वैज्ञानिक शोध, प्राकृतिक आवास की बहाली, प्रजातियों के संरक्षण (घड़ियाल, डॉल्फ़िन, कछुए, मछली), राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना, भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र की स्थापना, जलीय जीव बचाव और पुनर्वास केंद्र, डॉल्फ़िन बचाव एम्बुलेंस, ‘रिवर रैंचिंग’ कार्यक्रम (2.05 करोड़ मछली के बीज), गंगा बायोडायवर्सिटी पार्क, वृक्षारोपण (33,024 हेक्टेयर), गंगा प्रहरी (5,500 से अधिक) और आर्द्रभूमि प्रबंधन योजनाओं की चर्चा करें। निष्कर्ष में अभियान की समग्र सफलता और भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डालें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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