27 Jul नागरिक भागीदारी से नीति निर्माण: माईगॉव प्लेटफॉर्म की उपलब्धियां और प्रभाव
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही एवं संस्थागत तथा अन्य उपाय। | GS Paper IV — लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नैतिकता: स्थिति एवं समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोत के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; जवाबदेही एवं नैतिक शासन; शासन व्यवस्था में ईमानदारी: लोक सेवा की अवधारणा; शासन व्यवस्था और ईमानदारी का दार्शनिक आधार, सूचना का आदान-प्रदान और सरकार में पारदर्शिता, सूचना का अधिकार, आचार संहिता, नागरिक घोषणा पत्र, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता, लोक निधि का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।
- Prelims: माईगॉव प्लेटफॉर्म, ई-गवर्नेंस, नागरिक सहभागिता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, आधार प्रमाणीकरण नियम, सुशासन
- Essay: नागरिक सहभागिता के माध्यम से सुशासन की स्थापना: चुनौतियाँ और संभावनाएँ।, डिजिटल इंडिया: शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही का नया आयाम।
त्वरित पुनरावृत्ति: माईगॉव प्लेटफॉर्म भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस पहल है जो नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया में सीधे भाग लेने और सुशासन को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार के माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म ने नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई 2026 तक 6.32 करोड़ से अधिक नागरिक इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हो चुके हैं, जो विभिन्न राष्ट्रीय पहलों जैसे बजट परामर्श, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022 और आधार सुधारों पर सार्वजनिक परामर्श में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह प्लेटफॉर्म चर्चाओं, पोल और सर्वेक्षणों के माध्यम से नागरिकों के विचारों और सुझावों को एकत्रित कर उन्हें संबंधित मंत्रालयों और विभागों तक पहुँचाता है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
पृष्ठभूमि
- माईगॉव प्लेटफॉर्म को नागरिक सहभागिता मंच के रूप में केंद्र सरकार द्वारा लॉन्च किया गया था।
- इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी निकायों और मंत्रालयों के साथ मिलकर नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
- यह जनहित और लोक कल्याण से जुड़े विषयों पर नागरिकों के विचार और सुझाव प्राप्त करता है।
- प्लेटफॉर्म चर्चा, रचनात्मक गतिविधियों, पोल, सर्वेक्षण और जमीनी स्तर की गतिविधियों जैसी अनेक सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
- पिछले पाँच वर्षों (11.07.2021-10.07.2026) में 4.48 करोड़ से अधिक नए नागरिक पंजीकृत हुए हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
- प्लेटफॉर्म पर संकलित राय और सुझाव संबंधित मंत्रालय/विभाग के साथ नीतियों, योजनाओं या कार्यक्रमों को तैयार करने या उनकी समीक्षा करने के दौरान विचारार्थ साझा किए जाते हैं।
माईगॉव प्लेटफॉर्म क्या है?
- माईगॉव भारत सरकार का एक नागरिक सहभागिता मंच है।
- इसका उद्देश्य नागरिकों को शासन प्रक्रिया में सीधे भाग लेने और विभिन्न सरकारी नीतियों, कार्यक्रमों और पहलों पर अपने विचार और सुझाव साझा करने का अवसर प्रदान करना है।
- यह प्लेटफॉर्म चर्चा मंच, ऑनलाइन पोल, सर्वेक्षण, रचनात्मक प्रतियोगिताएँ और जमीनी स्तर की गतिविधियों के माध्यम से नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देता है।
- माईगॉव बहुभाषी सहायता प्रदान करता है, जो अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं सहित कुल 12 भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे भाषाई बाधाएँ दूर होती हैं।
- मोबाइल उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए एक समर्पित माईगॉव मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया गया है।
- यह प्लेटफॉर्म नागरिकों की प्रतिक्रियाओं को संकलित करता है और उन्हें आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित मंत्रालयों/विभागों को भेजता है।
- हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022 और केंद्रीय बजट परामर्श जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्वजनिक परामर्श आयोजित किए गए हैं।
- स्वतंत्र तृतीय-पक्ष प्रभाव आकलन अध्ययनों ने माईगॉव की जन-भागीदारी के दायरे को उल्लेखनीय रूप से विस्तारित करने की पुष्टि की है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नागरिक सहभागिता मंच | नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिकों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करता है। |
| बहुभाषी सहायता | भाषाई बाधाओं को दूर कर व्यापक समावेशिता और पहुंच सुनिश्चित करता है (12 भाषाओं में उपलब्ध)। |
| मोबाइल पहुंच | समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से देश के बड़े मोबाइल उपयोगकर्ता आधार तक पहुंच बढ़ाता है। |
| विस्तारित डिजिटल उपस्थिति | डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यम से शासन प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख बनाता है। |
| विविध सहभागिता प्रणालियाँ | चर्चाओं, पोल, सर्वेक्षणों और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से जन-भागीदारी के दायरे का विस्तार करता है। |
महत्व
शासन और नीति-निर्माण
- माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म सरकार को नागरिकों के विचारों और सुझावों को प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करने में सक्षम बनाता है, जिससे नीतियों और कार्यक्रमों को अधिक जन-केंद्रित बनाया जा सकता है।
- यह मंच राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेजों पर सार्वजनिक परामर्श की सुविधा प्रदान करता है, जो लोकतांत्रिक निर्णय-निर्माण को मजबूत करता है।
- नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ती है, जिससे सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों को बढ़ावा मिलता है।
सामाजिक और नागरिक सशक्तिकरण
- माईगॉव नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया में अपनी राय व्यक्त करने का अवसर प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाता है, जिससे उनमें स्वामित्व की भावना विकसित होती है।
- यह मंच विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के नागरिकों को एक साथ लाता है, जिससे विविध दृष्टिकोणों को नीतिगत चर्चाओं में शामिल किया जा सकता है।
- डिजिटल साक्षरता और नागरिक जुड़ाव को बढ़ावा देता है, जिससे नागरिक शासन के मामलों में अधिक जागरूक और सक्रिय भागीदार बनते हैं।
प्रशासनिक दक्षता
- नागरिकों से सीधे प्रतिक्रिया प्राप्त करके, सरकार नीतियों और योजनाओं की कमियों को समय रहते पहचान सकती है और उनमें सुधार कर सकती है।
- यह मंच मंत्रालयों और विभागों को विशिष्ट नीतियों के लिए लक्षित परामर्श आयोजित करने में मदद करता है, जिससे निर्णय-निर्माण प्रक्रिया अधिक कुशल बनती है।
- स्वतंत्र तृतीय-पक्ष प्रभाव आकलन अध्ययनों से पता चला है कि माईगॉव ने जन-भागीदारी के दायरे का उल्लेखनीय विस्तार किया है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक समावेशी हुई हैं।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल विभाजन
- देश में अभी भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसके पास इंटरनेट या स्मार्टफोन तक पहुंच नहीं है, जिससे उनकी भागीदारी सीमित हो जाती है।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल साक्षरता में अंतर भी सभी नागरिकों की समान भागीदारी में बाधा डालता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, शासन
2. प्रतिक्रिया का कार्यान्वयन
- नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों और प्रतिक्रियाओं को नीतिगत निर्णयों में कितनी प्रभावी ढंग से शामिल किया जाता है, यह एक चुनौती है।
- संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा कार्रवाई प्रतिवेदन (Action Taken Report) की पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
3. प्रतिनिधित्व की गुणवत्ता
- यह सुनिश्चित करना कि मंच पर प्राप्त प्रतिक्रियाएं वास्तव में समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करती हैं, एक चुनौती है।
- कुछ विशेष हित समूह या अधिक मुखर नागरिक प्रतिक्रियाओं पर हावी हो सकते हैं, जिससे संतुलित दृष्टिकोण प्राप्त करना कठिन हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, लोकतंत्र
4. डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
- नागरिकों द्वारा साझा की गई व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, खासकर जब डेटा संरक्षण विधेयक पर परामर्श किया जा रहा हो।
- साइबर सुरक्षा खतरों से मंच को बचाना और डेटा उल्लंघनों को रोकना एक निरंतर चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, आंतरिक सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल पहुंच का अभाव | इंटरनेट और स्मार्टफोन तक पहुंच न होने के कारण सभी नागरिकों की समान भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पाती। |
| प्रतिक्रियाओं का प्रभावी एकीकरण | नागरिकों के सुझावों को नीति-निर्माण में कितनी गंभीरता से और प्रभावी ढंग से शामिल किया जाता है, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। |
| प्रतिनिधित्व का असंतुलन | मंच पर कुछ वर्गों या विचारों का अधिक प्रतिनिधित्व होने से व्यापक जनमत का अभाव हो सकता है। |
| डेटा सुरक्षा और गोपनीयता | नागरिकों द्वारा साझा की गई संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा और दुरुपयोग को रोकना एक बड़ी चुनौती है। |
| जागरूकता और साक्षरता | मंच के उपयोग और नीति-निर्माण प्रक्रिया में भागीदारी के महत्व के बारे में नागरिकों में जागरूकता की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020
आगे की राह
- डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार करना और ग्रामीण तथा दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच में सुधार करना।
- नागरिकों द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर की गई कार्रवाई के संबंध में मंत्रालयों/विभागों द्वारा नियमित और पारदर्शी ‘कार्रवाई प्रतिवेदन’ (Action Taken Report) प्रकाशित करना।
- मंच पर भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए लक्षित अभियान चलाना, विशेष रूप से उन समूहों के लिए जिनकी भागीदारी कम रही है।
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता प्रोटोकॉल को मजबूत करना तथा नागरिकों को उनकी व्यक्तिगत जानकारी के उपयोग के बारे में स्पष्ट जानकारी प्रदान करना।
- नागरिकों की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करना ताकि अधिक सार्थक अंतर्दृष्टि प्राप्त की जा सके।
- स्थानीय भाषाओं में सामग्री और इंटरफ़ेस को और बेहतर बनाना ताकि भाषाई विविधता का सम्मान हो सके और अधिक लोग जुड़ सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नागरिक सहभागिता · ई-शासन · लोक नीति निर्माण · माईगॉव प्लेटफॉर्म · डिजिटल इंडिया · पारदर्शिता · जवाबदेही · सुशासन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा माईगॉव प्लेटफॉर्म की शुरुआत → नागरिकों द्वारा विभिन्न नीतियों पर परामर्श में भागीदारी → नागरिकों के विचारों और सुझावों का संकलन → संबंधित मंत्रालयों/विभागों को सुझावों का प्रेषण → नीति-निर्माण और समीक्षा में सुझावों पर विचार → अधिक समावेशी और जन-केंद्रित नीतियों का निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह केंद्र सरकार द्वारा नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था।
2. यह केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है ताकि एकरूपता बनी रहे।
3. इस प्लेटफॉर्म पर प्राप्त सुझावों को संबंधित मंत्रालय/विभाग द्वारा नीतियों में शामिल करना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है क्योंकि माईगॉव प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह प्लेटफॉर्म 12 भाषाओं (अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाएं) में उपलब्ध है। कथन 3 गलत है क्योंकि नागरिकों के सुझावों को नीतियों में शामिल करना संबंधित मंत्रालयों/विभागों का विशेषाधिकार है, अनिवार्य नहीं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी पहल भारत में ई-शासन (e-governance) और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने में सहायक है/हैं?
1. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम
2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020
3. माईगॉव प्लेटफॉर्म
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है, जिसमें ई-शासन एक प्रमुख घटक है। माईगॉव प्लेटफॉर्म सीधे तौर पर नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा क्षेत्र में सुधार से संबंधित है, हालांकि इसके निर्माण में सार्वजनिक परामर्श का उपयोग किया गया था, यह स्वयं ई-शासन या नागरिक सहभागिता की पहल नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने में माईगॉव (MyGov) जैसे प्लेटफॉर्म की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। क्या ये प्लेटफॉर्म वास्तव में सुशासन (Good Governance) सुनिश्चित करने में प्रभावी हैं? चर्चा कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में माईगॉव प्लेटफॉर्म की भूमिका का विश्लेषण करना है, जिसमें इसकी कार्यप्रणाली, नागरिक भागीदारी के आंकड़े और बहुभाषी तथा मोबाइल पहुंच जैसे सुधारों का उल्लेख किया जा सकता है। दूसरे भाग में यह मूल्यांकन करना है कि क्या ये प्लेटफॉर्म वास्तव में सुशासन सुनिश्चित करने में प्रभावी हैं। इसमें प्लेटफॉर्म की सफलताओं के साथ-साथ इसकी सीमाओं, जैसे कि सुझावों को नीतियों में शामिल करने का विशेषाधिकार, पर भी प्रकाश डाला जा सकता है। निष्कर्ष में, नागरिक सहभागिता के महत्व और इन प्लेटफॉर्मों की भविष्य की संभावनाओं पर संतुलित राय प्रस्तुत करनी है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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