08 Aug नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व में एक और बाघ की मौत, कारणों की जांच का आदेश
✎ भारत में बाघ संरक्षण के लिए 'प्रोजेक्ट टाइगर' और NTCA जैसे प्रयास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में बाघों की हालिया मृत्यु अवैध शिकार और संरक्षण चुनौतियों को उजागर करती है, जिसके लिए गहन निगरानी और…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता | GS Paper III — आपदा प्रबंधन
- Prelims: नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR), बाघ संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), प्रोजेक्ट टाइगर, जैव-विविधता हॉटस्पॉट
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, मानव-वन्यजीव संघर्ष: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत में बाघ संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ और NTCA जैसे प्रयास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में बाघों की हालिया मृत्यु अवैध शिकार और संरक्षण चुनौतियों को उजागर करती है, जिसके लिए गहन निगरानी और सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य (NSTR) में कुछ दिनों के भीतर दो बाघों के मृत पाए जाने से वन्यजीव संरक्षण पर चिंताएँ बढ़ गई हैं। इस घटना ने वन्यजीव अपराध और संरक्षण प्रयासों की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं, जिसके बाद आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने गहन जाँच के आदेश दिए हैं।
पृष्ठभूमि
- नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में फैला हुआ है।
- यह अभयारण्य कृष्णा नदी बेसिन में स्थित है और नल्लामाला पहाड़ियों के एक बड़े हिस्से को कवर करता है, जो अपनी समृद्ध जैव-विविधता के लिए जाना जाता है।
- भारत में बाघों की आबादी दुनिया में सबसे बड़ी है, और देश ने ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ जैसे विभिन्न संरक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बाघों के संरक्षण में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) भारत में बाघ संरक्षण प्रयासों की निगरानी और समन्वय के लिए एक वैधानिक निकाय है, जो बाघों की मृत्यु के मामलों में मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का पालन सुनिश्चित करता है।
- बाघों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष, आवास का नुकसान, बीमारियों और प्राकृतिक कारण शामिल हैं।
- बाघ पारिस्थितिकी तंत्र के शीर्ष शिकारी होते हैं और उनकी उपस्थिति एक स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेतक होती है।
भारत में बाघ संरक्षण के प्रयास
- प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger): 1973 में शुरू किया गया, यह भारत सरकार का एक प्रमुख संरक्षण कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देश में बाघों की व्यवहार्य आबादी सुनिश्चित करना है।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA): वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत 2005 में स्थापित एक वैधानिक निकाय, जो बाघ अभयारण्यों के प्रबंधन और बाघ संरक्षण नीतियों के कार्यान्वयन की देखरेख करता है।
- बाघ जनगणना: हर चार साल में एक बार अखिल भारतीय बाघ अनुमान (All India Tiger Estimation) आयोजित किया जाता है, जो बाघों की आबादी और उनके वितरण का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: यह अधिनियम शिकार, अवैध व्यापार और वन्यजीवों के आवासों को नुकसान पहुँचाने पर प्रतिबंध लगाकर बाघों सहित विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
- M-STrIPES (Monitoring System for Tigers – Intensive Protection and Ecological Status): यह NTCA द्वारा विकसित एक सॉफ्टवेयर-आधारित निगरानी प्रणाली है जो गश्त की प्रभावशीलता और बाघ अभयारण्यों में पारिस्थितिक स्थिति की निगरानी में मदद करती है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: भारत बाघ संरक्षण के लिए वैश्विक मंचों जैसे ग्लोबल टाइगर फोरम (Global Tiger Forum) और CITES (लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन) में सक्रिय रूप से भाग लेता है।
- आवास संरक्षण और गलियारे: बाघों के आवासों को संरक्षित करना और विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों के बीच वन्यजीव गलियारों को बनाए रखना बाघों की आनुवंशिक विविधता और फैलाव के लिए महत्वपूर्ण है।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी: बाघ संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को शामिल करना, जैसे कि इको-टूरिज्म और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों के माध्यम से, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और संरक्षण के प्रति समर्थन बढ़ाने में मदद करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बाघों की मृत्यु | नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) में दो बाघों की लगातार मृत्यु चिंता का विषय है। |
| मानव हस्तक्षेप की संभावना | मृत बाघों के शरीर से पंजे गायब होना अवैध शिकार (Poaching) या अन्य मानव हस्तक्षेप की ओर संकेत करता है। |
| जांच का आदेश | उपमुख्यमंत्री और वन मंत्री ने घटना की व्यापक और पारदर्शी जांच के आदेश दिए हैं। |
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 | इस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है। |
| NTCA SOPs का पालन | राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के अनुसार पोस्टमार्टम किया गया है। |
| गश्त और निगरानी में वृद्धि | भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वन क्षेत्रों में गश्त और क्षेत्र-स्तरीय निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर स्थित होते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के स्वास्थ्य के संकेतक हैं। इनकी कमी से जैव विविधता (Biodiversity) और पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- बाघों का संरक्षण वन क्षेत्रों की अखंडता और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जिससे अन्य वन्यजीव प्रजातियों को भी लाभ होता है।
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- बाघ संरक्षण से संबंधित पर्यटन स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करता है, जिससे उन्हें संरक्षण प्रयासों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
- अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों पर नियंत्रण स्थानीय समुदायों और वन विभाग के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देता है।
शासन और कानून का शासन
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का प्रभावी कार्यान्वयन कानून के शासन को बनाए रखने और वन्यजीव अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- उच्च-स्तरीय जांच का आदेश और पारदर्शिता की मांग सरकारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो संरक्षण प्रयासों में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. अवैध शिकार और वन्यजीव अपराध
- बाघों के अंगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च मांग के कारण अवैध शिकार एक बड़ा खतरा बना हुआ है।
- अपराधियों द्वारा उन्नत तकनीकों का उपयोग और स्थानीय मिलीभगत वन्यजीव अपराधों को रोकना चुनौतीपूर्ण बनाती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आंतरिक सुरक्षा
2. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- वन्यजीव आवासों के सिकुड़ने और मानव बस्तियों के विस्तार से मानव-बाघ संघर्ष बढ़ रहा है, जिससे कभी-कभी प्रतिशोधात्मक हत्याएं होती हैं।
- फसलों और मवेशियों को नुकसान होने पर स्थानीय समुदायों में वन्यजीवों के प्रति नकारात्मक धारणा विकसित होती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
3. पर्यावास का विखंडन और नुकसान
- विकास परियोजनाओं, जैसे सड़क निर्माण, खनन और कृषि विस्तार के कारण बाघों के आवासों का विखंडन हो रहा है, जिससे उनकी आवाजाही और आनुवंशिक विविधता प्रभावित होती है।
- पर्यावास के नुकसान से बाघों के लिए शिकार की उपलब्धता कम हो जाती है, जिससे वे मानव बस्तियों की ओर आकर्षित होते हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, भूमि संसाधन
4. वन कर्मचारियों की क्षमता और संसाधन
- वन विभाग के पास अक्सर पर्याप्त जनशक्ति, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण की कमी होती है, जिससे बड़े वन क्षेत्रों की प्रभावी ढंग से निगरानी करना मुश्किल हो जाता है।
- अपर्याप्त वित्तीय संसाधन संरक्षण प्रयासों को कमजोर करते हैं, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
यूपीएससी लिंक: शासन, आंतरिक सुरक्षा
5. प्रभावी अभियोजन का अभाव
- वन्यजीव अपराधों में शामिल अपराधियों के खिलाफ अक्सर सबूतों की कमी या कानूनी प्रक्रिया में देरी के कारण प्रभावी अभियोजन नहीं हो पाता है, जिससे उन्हें प्रोत्साहन मिलता है।
- न्यायिक प्रणाली में वन्यजीव अपराधों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता की कमी भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, न्यायपालिका
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अवैध शिकार | बाघों के अंगों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च मांग। |
| मानव-वन्यजीव संघर्ष | वन्यजीव आवासों के सिकुड़ने से मानव बस्तियों में बाघों का प्रवेश और प्रतिशोधात्मक हत्याएं। |
| पर्यावास का नुकसान | विकास परियोजनाओं और अतिक्रमण के कारण बाघों के प्राकृतिक आवासों का विखंडन। |
| वन विभाग की क्षमता | पर्याप्त जनशक्ति, उपकरण और प्रशिक्षण की कमी के कारण प्रभावी निगरानी में बाधा। |
| कानूनी प्रवर्तन की कमजोरी | वन्यजीव अपराधों में प्रभावी अभियोजन और सजा की दर कम होना। |
| स्थानीय समुदायों की भागीदारी | संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को पूरी तरह से शामिल करने में चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के SOPs और दिशानिर्देश
आगे की राह
- वन क्षेत्रों में गश्त और निगरानी को आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन, थर्मल इमेजिंग) का उपयोग करके मजबूत किया जाए।
- वन्यजीव अपराधों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किए जाएं और अपराधियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में भागीदार बनाया जाए और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएं ताकि अवैध शिकार पर निर्भरता कम हो।
- वन कर्मचारियों को उन्नत प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और पर्याप्त जनशक्ति प्रदान की जाए ताकि वे प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ विकसित की जाएं, जिसमें त्वरित मुआवजा तंत्र और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हों।
- बाघों के आवासों के विखंडन को रोकने के लिए विकास परियोजनाओं की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया को मजबूत किया जाए।
- वन्यजीव अपराधों से संबंधित मामलों के त्वरित निपटान के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना पर विचार किया जाए।
- अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाए ताकि वन्यजीव उत्पादों की तस्करी पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बाघ संरक्षण · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) · नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य · बाघों की मृत्यु · मानव-वन्यजीव संघर्ष · पर्यावरण संतुलन · जैव विविधता संरक्षण · वन्यजीव अपराध · संरक्षण रणनीतियाँ
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 48A’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘अनुच्छेद 51A(g)’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन’}
- {‘सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची)’: ‘वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण’}
अवधारणा प्रवाह
बाघों की मृत्यु → अवैध शिकार/मानव हस्तक्षेप की आशंका → वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मामला → जांच का आदेश और NTCA SOPs का पालन → गश्त और निगरानी में वृद्धि के निर्देश → बाघ संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन का महत्व
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में बाघों की सर्वाधिक संख्या नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में पाई जाती है।
2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय है।
3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध प्रजातियों को उच्चतम स्तर का संरक्षण प्राप्त है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। भारत में बाघों की सर्वाधिक संख्या मध्य प्रदेश में है, और नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है, लेकिन इसमें सर्वाधिक बाघ नहीं हैं। कथन 2 सही है। NTCA वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत स्थापित एक सांविधिक निकाय है। कथन 3 सही है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध प्रजातियों को पूर्ण सुरक्षा और उच्चतम दंड प्राप्त है।
Q2. अभिकथन (A): बाघों का संरक्षण पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
कारण (R): बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर होते हैं और शाकाहारी जीवों की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, जिससे वनस्पति पर अत्यधिक दबाव कम होता है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि बाघ एक प्रमुख प्रजाति (Keystone species) है और इसका संरक्षण पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि बाघ शीर्ष शिकारी होने के नाते शाकाहारी जीवों की संख्या को नियंत्रित करते हैं, जिससे वनों के स्वास्थ्य और जैव विविधता को बनाए रखने में मदद मिलती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बाघों के संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में हाल ही में हुई बाघों की मृत्यु के आलोक में इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कदमों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में बाघों के संरक्षण का महत्व और उनकी वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख।
2. बाघ संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ (समालोचनात्मक परीक्षण):
क. पर्यावास का नुकसान और विखंडन: शहरीकरण, कृषि विस्तार, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण।
ख. अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार: बाघ के अंगों की अंतर्राष्ट्रीय मांग।
ग. मानव-वन्यजीव संघर्ष: वन क्षेत्रों के पास बढ़ती मानव आबादी और चारागाहों के अतिक्रमण के कारण।
घ. जलवायु परिवर्तन: बदलते मौसम पैटर्न और प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव।
ङ. अपर्याप्त निगरानी और प्रवर्तन: वन कर्मचारियों की कमी, तकनीकी संसाधनों का अभाव।
च. आनुवंशिक विविधता का नुकसान: छोटे, अलग-थलग आबादी के कारण।
3. नागार्जुनसागर-श्रीशैलम बाघ अभयारण्य में हाल की घटनाओं के आलोक में आवश्यक कदम:
क. गहन और पारदर्शी जांच: मृत्यु के कारणों का पता लगाना (प्राकृतिक, शिकार, जहर)।
ख. गश्त और निगरानी में वृद्धि: वन क्षेत्रों में नियमित गश्त, ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग।
ग. स्थानीय समुदायों की भागीदारी: संरक्षण प्रयासों में स्थानीय लोगों को शामिल करना, वैकल्पिक आजीविका प्रदान करना।
घ. वन्यजीव अपराधों पर सख्त कार्रवाई: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दोषियों को दंडित करना।
ङ. पर्यावास सुधार: शिकार आधार को मजबूत करना (जैसे गौर को लाना), जल स्रोतों का प्रबंधन।
च. क्षमता निर्माण: वन अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान करना।
छ. अंतर-राज्यीय समन्वय: वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए राज्यों के बीच सहयोग।
4. निष्कर्ष: बाघ संरक्षण के लिए एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जिसमें सरकार, स्थानीय समुदाय और नागरिक समाज सभी की भूमिका हो।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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