27 Jul पंचायती राज को मजबूत बनाने हेतु आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम और समर्थ पोर्टल लॉन्च
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और आधारभूत संरचना | GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
- Prelims: पंचायती राज संस्थाएँ (PRIs), आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ पंचायत पोर्टल, राजस्व के स्वयं के स्रोत (OSR), सोलहवाँ वित्त आयोग, पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI), स्थानीय स्वशासन, 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
- Essay: विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में स्थानीय स्वशासन की भूमिका, भारत में समावेशी ग्रामीण विकास हेतु पंचायती राज संस्थाओं का वित्तीय सशक्तिकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम और समर्थ पंचायत पोर्टल पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय रूप से सशक्त और तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने भारत में पंचायती राज संस्थाओं (Panchayati Raj Institutions – PRIs) को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ और ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही, पंचायती राज संस्थाओं के लिए राजस्व के स्वयं के स्रोत (Own Source Revenue – OSR) नियमों का एक मॉडल भी जारी किया गया। ये पहलें विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप वित्तीय रूप से सशक्त, तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर पंचायतों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में पंचायती राज संस्थाएँ ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की प्रणाली हैं, जिन्हें 73वें संविधान संशोधन अधिनियम (73rd Constitutional Amendment Act), 1992 द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया।
- इस संशोधन ने संविधान में भाग IX जोड़ा, जिसमें अनुच्छेद 243 से 243-O तक पंचायतें शामिल हैं, और ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के 29 कार्यात्मक विषय सूचीबद्ध किए गए हैं।
- पंचायती राज संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना, ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना और नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
- इन संस्थाओं को अक्सर वित्तीय स्वायत्तता की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे वे अपने अनिवार्य कार्यों और विकास परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से निष्पादित करने में असमर्थ रहती हैं।
- राजस्व के स्वयं के स्रोत (OSR) पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये उन्हें केंद्रीय और राज्य सरकारों से मिलने वाले अनुदानों पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं।
- सोलहवें वित्त आयोग (Sixteenth Finance Commission) ने भी पंचायती राज संस्थाओं के राजस्व के स्वयं के स्रोतों को मजबूत करने की सिफारिशें की हैं, जिससे यह पहलें इन सिफारिशों के अनुरूप हैं।
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम और समर्थ पंचायत पोर्टल क्या हैं?
- **आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम:** यह पंचायती राज मंत्रालय की एक अनूठी पहल है, जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों और ब्लॉक पंचायतों को स्थानीय संसाधनों और अवसरों की पहचान करने तथा उन्हें स्थायी राजस्व-सृजन परियोजनाओं में परिवर्तित करने में सक्षम बनाना है।
- इसका लक्ष्य ऐसी परियोजनाएँ विकसित करना है जो स्थायी परिचालन राजस्व (Own Sustainable Operational Revenue – OSSR) का निर्माण करती हैं और ऋण योग्य हों।
- वित्तपोषण सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility – CSR) योगदान, अन्य योजनाओं के समन्वय और बैंक वित्त (नाबार्ड एवं HUDCO जैसे संस्थागत भागीदारों के माध्यम से) द्वारा सुगम बनाया जाएगा।
- चार वर्षों में कुल 350 परियोजनाएँ विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें पहले वर्ष में 50 और अगले तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष 100 परियोजनाएँ शामिल हैं।
- कम से कम 50 लाख रुपये की OSSR वाली ग्राम पंचायतें और कम से कम 1 करोड़ रुपये की OSSR वाली ब्लॉक पंचायतें, जिनका कार्यकाल कम से कम तीन वर्ष शेष हो, आवेदन करने के लिए पात्र हैं। विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए सीमा में छूट दी गई है।
- **समर्थ पंचायत पोर्टल:** यह पंचायती राज मंत्रालय की एक डिजिटल पहल है, जिसे प्रौद्योगिकी-आधारित राजस्व के स्वयं के स्रोत (OSR) प्रबंधन के माध्यम से ग्राम पंचायतों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- यह एक एकीकृत, विन्यास योग्य राष्ट्रीय मंच है जो पंचायत राजस्व के सुचारू और पारदर्शी कराधान, भुगतान और निगरानी को सुगम बनाएगा।
- **मॉडल ओएसआर नियम:** ये नियम राज्यों को पंचायत राजस्व को मजबूत करने के लिए एक मार्गदर्शक ढाँचा प्रदान करेंगे, जिससे पंचायती राज संस्थाओं के लिए स्वयं के राजस्व स्रोतों को विकसित करने में मदद मिलेगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम | स्थानीय संपत्तियों को सतत राजस्व सृजन परियोजनाओं में परिवर्तित करना, ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना। |
| समर्थ पंचायत पोर्टल | पंचायत राजस्व के कराधान, भुगतान और निगरानी को सुगम बनाना, वित्तीय पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना। |
| मॉडल ओएसआर नियम | राज्यों को पंचायत राजस्व के स्वयं के स्रोत (OSR) को मजबूत करने के लिए एक मार्गदर्शक ढाँचा प्रदान करना। |
| वित्तपोषण तंत्र | सार्वजनिक-निजी भागीदारी, CSR योगदान, अन्य योजनाओं का समन्वय और नाबार्ड, HUDCO जैसे संस्थागत भागीदारों के माध्यम से बैंक वित्त। |
| पात्रता मानदंड | कम से कम 50 लाख रुपये की OSSR वाली ग्राम पंचायतें और 1 करोड़ रुपये की OSSR वाली ब्लॉक पंचायतें (विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए छूट)। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह पहल पंचायतों को अपनी वित्तीय आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद करेगी, जिससे वे केंद्र और राज्य सरकारों पर अपनी निर्भरता कम कर सकेंगी।
- स्थानीय संपत्तियों को राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- समर्थ पोर्टल के माध्यम से राजस्व संग्रह में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने से वित्तीय कुप्रबंधन कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
शासन और लोकतांत्रिक महत्व
- पंचायती राज संस्थाओं (Panchayati Raj Institutions – PRIs) को सशक्त बनाने से जमीनी स्तर पर शासन में सुधार होगा और समावेशी ग्रामीण विकास को गति मिलेगी।
- ये पहलें सहभागी लोकतंत्र को मजबूत करेंगी, क्योंकि पंचायतों के पास अपने विकास के लिए अधिक संसाधन और अधिकार होंगे।
- डिजिटल उपकरणों का उपयोग नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देगा और नागरिकों को सेवाओं की बेहतर पहुँच सुनिश्चित करेगा।
सामाजिक महत्व
- स्थानीय स्तर पर विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण से शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी बुनियादी सेवाओं में सुधार होगा, जिससे ग्रामीण आबादी के जीवन स्तर में वृद्धि होगी।
- पंचायतों की वित्तीय स्वतंत्रता उन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय लेने और विकास प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में सक्षम बनाएगी, जिससे सामाजिक समानता और समावेशिता बढ़ेगी।
चुनौतियाँ
1. क्षमता निर्माण और जागरूकता
- पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को इन नई पहलों और डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना एक चुनौती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी समर्थ पोर्टल के व्यापक उपयोग में बाधा बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. राजस्व सृजन और वित्तीय प्रबंधन
- स्थानीय संपत्तियों की पहचान करना और उन्हें व्यवहार्य राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलना एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है, जिसके लिए विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी।
- पंचायतों में वित्तीय प्रबंधन और लेखा-जोखा के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: स्थानीय वित्त, ग्रामीण विकास
3. राज्यों का सहयोग और एकरूपता
- मॉडल ओएसआर नियमों को राज्यों द्वारा अपनाने और उनके कार्यान्वयन में एकरूपता सुनिश्चित करना एक चुनौती है, क्योंकि पंचायती राज राज्य का विषय है।
- विभिन्न राज्यों में पंचायतों की वित्तीय स्थिति और क्षमता में भिन्नता के कारण इन पहलों का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: राजव्यवस्था: संघवाद, स्थानीय स्वशासन
4. सार्वजनिक-निजी भागीदारी और संस्थागत वित्त
- ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) को आकर्षित करना और उसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- नाबार्ड (NABARD) और HUDCO जैसे संस्थागत भागीदारों से वित्तपोषण प्राप्त करने के लिए पंचायतों को आवश्यक प्रक्रियाओं और मानदंडों को पूरा करने में कठिनाई हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश मॉडल, ग्रामीण ऋण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल साक्षरता और पहुँच | ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल उपकरणों तक पहुँच की कमी समर्थ पोर्टल के प्रभावी उपयोग में बाधा बन सकती है। |
| मानव संसाधन और विशेषज्ञता | पंचायतों में कुशल कर्मचारियों और वित्तीय प्रबंधन विशेषज्ञों की कमी राजस्व सृजन परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन को बाधित कर सकती है। |
| राज्यों की इच्छाशक्ति और कार्यान्वयन | पंचायती राज राज्य का विषय होने के कारण, राज्यों द्वारा मॉडल ओएसआर नियमों को अपनाने और लागू करने की गति और गुणवत्ता भिन्न हो सकती है। |
| स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप | राजस्व सृजन परियोजनाओं के चयन और कार्यान्वयन में स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप पारदर्शिता और दक्षता को प्रभावित कर सकता है। |
| पर्यावरणीय स्थिरता | राजस्व सृजन के लिए स्थानीय संपत्तियों के उपयोग में पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम
आगे की राह
- पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए व्यापक क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे और इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाए ताकि समर्थ पोर्टल की पहुँच बढ़ाई जा सके।
- राज्यों को मॉडल ओएसआर नियमों को अपनाने और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रोत्साहित करने हेतु वित्तीय प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए।
- राजस्व सृजन परियोजनाओं की पहचान और कार्यान्वयन में विशेषज्ञ सहायता प्रदान करने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर तकनीकी सहायता इकाइयों की स्थापना की जाए।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility – CSR) योगदान को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाया जाए।
- पंचायतों में वित्तीय प्रबंधन और लेखा-जोखा प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने के लिए मानकीकृत सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
- पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए, जिसमें नागरिक भागीदारी को भी शामिल किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पंचायती राज संस्थाएँ · आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम · समर्थ पंचायत पोर्टल · राजस्व के स्वयं के स्रोत (OSR) · विकसित भारत-2047 · सोलहवाँ वित्त आयोग · स्थानीय स्वशासन · ग्राम पंचायतें
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘Article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘Note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘Article’: ‘अनुच्छेद 243H’, ‘Note’: ‘पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति’}
- {‘Article’: ‘अनुच्छेद 243I’, ‘Note’: ‘राज्य वित्त आयोग का गठन’}
- {‘Article’: ‘ग्यारहवीं अनुसूची’, ‘Note’: ‘पंचायतों के कार्यक्षेत्र के 29 विषय’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम और समर्थ पोर्टल का शुभारंभ → पंचायतों को स्थानीय संपत्तियों की पहचान करने और राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलने में सक्षम बनाना → समर्थ पोर्टल के माध्यम से पंचायत राजस्व संग्रह में पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि → मॉडल ओएसआर नियमों के माध्यम से राज्यों को राजस्व के स्वयं के स्रोतों को मजबूत करने हेतु मार्गदर्शन → पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता में वृद्धि और ग्रामीण विकास को गति → विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम और समर्थ पंचायत पोर्टल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय संपत्तियों को स्थायी राजस्व सृजन परियोजनाओं में परिवर्तित करने में सक्षम बनाना है।
2. समर्थ पंचायत पोर्टल केवल ग्राम पंचायतों के लिए राजस्व संग्रह को सुगम बनाने हेतु डिज़ाइन किया गया है।
3. ये पहलें सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संपत्तियों और अवसरों को स्थायी राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलना है। कथन 2 गलत है क्योंकि समर्थ पंचायत पोर्टल को ग्राम पंचायतों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन यह व्यापक रूप से पंचायत राजस्व प्रबंधन को सुगम बनाता है। कथन 3 सही है क्योंकि केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि ये पहलें सोलहवें वित्त आयोग की स्वयं के राजस्व (OSR) को मजबूत करने की सिफारिशों के अनुरूप हैं।
Q2. पंचायती राज संस्थाओं के लिए राजस्व के स्वयं के स्रोत (OSR) नियमों के मॉडल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह मॉडल राज्यों को पंचायत राजस्व को मजबूत करने के लिए एक मार्गदर्शक ढाँचा प्रदान करता है।
2. इसका उद्देश्य पंचायतों को केवल केंद्र सरकार से प्राप्त अनुदानों पर निर्भर रहने के लिए प्रोत्साहित करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है क्योंकि मॉडल OSR नियम राज्यों को पंचायत राजस्व को मजबूत करने के लिए एक मार्गदर्शक ढाँचा प्रदान करते हैं, जिससे वे अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार कर सकें। कथन 2 गलत है क्योंकि इन नियमों का उद्देश्य पंचायतों को अपने स्वयं के राजस्व स्रोतों को विकसित करने और केंद्र सरकार के अनुदानों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है, न कि केवल उन पर निर्भर रहना।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ पंचायत पोर्टल और मॉडल ओएसआर नियमों की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। क्या ये पहलें विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगी? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ पंचायत पोर्टल और मॉडल ओएसआर नियमों के मुख्य उद्देश्यों और कार्यान्वयन तंत्र की व्याख्या करें। बताएं कि ये पहलें पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय स्वायत्तता कैसे प्रदान कर सकती हैं। दूसरे भाग में, इन पहलों की क्षमता और सीमाओं का मूल्यांकन करें। चर्चा करें कि ये पहलें जमीनी स्तर पर शासन में सुधार और समावेशी ग्रामीण विकास को कैसे बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता मिलेगी। साथ ही, संभावित चुनौतियों जैसे कि राज्यों के सहयोग, तकनीकी क्षमता और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका पर भी संक्षेप में प्रकाश डालें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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