पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण पर नवीनतम रिपोर्ट: जानिए राज्यवार रैंकिंग और चुनौतियाँ

पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण पर नवीनतम रिपोर्ट: जानिए राज्यवार रैंकिंग और चुनौतियाँ

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मानचित्र व माइंड-मैप: Panchayati Raj Institutions Empowerment

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, विकास एवं नियोजन
  • Prelims: पंचायती राज संस्थाएँ (PRI), 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, ग्यारहवीं अनुसूची, अनुच्छेद 243(छ), 15वाँ वित्त आयोग, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA), ई-ग्रामस्वराज, ऑडिटऑनलाइन
  • Essay: भारत में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र का सुदृढ़ीकरण, विकेंद्रीकरण और समावेशी विकास में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण भारत में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय, प्रशासनिक और डिजिटल हस्तक्षेपों के माध्यम से एक सतत प्रक्रिया है, जिसे 73वें संविधान संशोधन और विभिन्न सरकारी योजनाओं द्वारा निर्देशित किया जाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

पंचायती राज मंत्रालय ने फरवरी 2025 में “राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग, 2024” नामक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के वित्तीय और प्रशासनिक सशक्तिकरण की स्थिति का मूल्यांकन करती है, जिसमें अंतरण सूचकांक के माध्यम से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को छह आयामों पर रैंक प्रदान की गई है। इस रिपोर्ट में पंचायतों के सामने आने वाली वित्तीय, प्रशासनिक और कर्मचारियों की कमी जैसी चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है, साथ ही उनके सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय सूचीबद्ध हैं, जिन पर राज्य विधानमंडल पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व हस्तांतरित कर सकते हैं।
  • ‘पंचायत’ और ‘स्थानीय सरकार’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय हैं, जिसका अर्थ है कि राज्यों के पास इनके संबंध में कानून बनाने का अधिकार है।
  • कई ग्राम पंचायतों को अपर्याप्त वित्तीय संसाधनों, कर्मचारियों की कमी और सीमित प्रशासनिक अधिकारों के कारण स्थानीय विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • 15वें वित्त आयोग (2020-21 से 2025-26) ने पंचायती राज संस्थाओं के लिए कुल 2,97,555 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिनमें से 2,82,632 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण

  • पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने और स्थानीय विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • संविधान का अनुच्छेद 243(छ) राज्य विधानमंडलों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों सहित ऐसी योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए पंचायतों को शक्तियों और उत्तरदायित्वों के हस्तांतरण हेतु कानून बनाने का अधिकार देता है।
  • मंत्रालय द्वारा जारी “राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग, 2024” रिपोर्ट अंतरण की प्रभावशीलता का आकलन करती है और छह आयामों (रूपरेखा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता में वृद्धि और जवाबदेही) पर राज्यों को रैंक प्रदान करती है।
  • मंत्रालय के संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान ( आरजीएसए ) योजना के तहत वित्त वर्ष 2021-22 से पिछले पाँच वर्षों में इस योजना के तहत राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को कुल 3601.77 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
  • डिजिटल इंडिया पहल के तहत, पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ‘ई-ग्रामस्वराज’ नामक एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह नियोजन, बजटन, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान में सहायता करता है।
  • ई-ग्रामस्वराज का सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS), सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) और ऑडिटऑनलाइन के साथ एकीकरण निधि प्रवाह, खरीद, भुगतान और लेखापरीक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अंतरण सूचकांक रिपोर्ट, 2024 पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के वित्तीय और प्रशासनिक सशक्तिकरण का आकलन, जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने में स्थानीय सरकारों की भूमिका का मूल्यांकन।
छह आयामों पर मूल्यांकन रूपरेखा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता में वृद्धि और जवाबदेही के आधार पर राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को समग्र स्कोर और रैंक प्रदान करना।
15वें वित्त आयोग की सिफारिशें पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना, स्थानीय विकास कार्यों के लिए धन का आवंटन।
संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) पंचायतों की क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और सशक्तिकरण के लिए केंद्र प्रायोजित योजना।
ईग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म पंचायतों में नियोजन, बजटन, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान में पारदर्शिता और दक्षता लाना।
PFMS, GeM और AuditOnline के साथ एकीकरण निधि प्रवाह में पारदर्शिता, खरीद में जवाबदेही और वित्तीय निरीक्षण को मजबूत करना।

महत्व

लोकतांत्रिक सशक्तिकरण

  • पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के माध्यम से जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना, जिससे स्थानीय स्वशासन प्रभावी हो सके।
  • नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें स्थानीय विकास प्रक्रियाओं में शामिल करना।

वित्तीय समावेशन और जवाबदेही

  • 15वें वित्त आयोग और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) जैसी योजनाओं के माध्यम से पंचायतों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना।
  • ईग्रामस्वराज जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना।

शासन में सुधार

  • डिजिटल इंडिया पहल के तहत ई-गवर्नेंस उपकरणों का उपयोग करके पंचायतों की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करना।
  • योजना, बजटन, लेखांकन और ऑडिट प्रक्रियाओं को एकीकृत करके कुशल प्रशासन को बढ़ावा देना।

सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास

  • पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाओं को तैयार करने और लागू करने में सक्षम बनाना।
  • ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों पर स्थानीय स्तर पर कार्य करने की शक्ति प्रदान करना।

चुनौतियाँ

1. अपर्याप्त वित्तीय संसाधन

  • कई ग्राम पंचायतों को स्थानीय विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त धन की कमी का सामना करना पड़ता है।
  • राज्यों द्वारा पंचायतों को वित्तीय अंतरण में असमानता और देरी।

2. कर्मचारियों की कमी

  • पंचायतों में आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी कर्मचारियों का अभाव, जिससे कार्यों के निष्पादन में बाधा आती है।
  • कुशल मानव संसाधन की कमी के कारण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बाधित होता है।

3. सीमित प्रशासनिक अधिकार

  • राज्यों द्वारा पंचायतों को सौंपे गए प्रशासनिक अधिकारों और शक्तियों में भिन्नता और कई मामलों में उनकी कमी।
  • ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषयों पर पूर्ण स्वायत्तता का अभाव।

4. क्षमता निर्माण की आवश्यकता

  • पंचायती राज संस्थाओं के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक शासन और वित्तीय प्रबंधन के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण का अभाव।
  • डिजिटल उपकरणों के उपयोग और डेटा विश्लेषण में कौशल की कमी।

5. राज्य सरकार पर निर्भरता

  • ‘पंचायत’ राज्य सूची का विषय होने के कारण, उनकी स्थापना और संचालन राज्य के पंचायती राज अधिनियमों के अधीन होता है, जिससे उनकी स्वायत्तता प्रभावित होती है।
  • राज्यों द्वारा शक्तियों और उत्तरदायित्वों के हस्तांतरण में भिन्नता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वित्तीय स्वायत्तता पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और उनके उपयोग पर नियंत्रण का अभाव।
मानव संसाधन पंचायतों में प्रशिक्षित और पर्याप्त कर्मचारियों की कमी, जिससे कार्य निष्पादन प्रभावित होता है।
कार्यात्मक स्वायत्तता ग्यारहवीं अनुसूची के विषयों पर पूर्ण शक्ति और निर्णय लेने की स्वतंत्रता का अभाव।
क्षमता निर्माण पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियमित और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रमों की कमी।
डिजिटल साक्षरता ईग्रामस्वराज जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग के लिए डिजिटल कौशल की आवश्यकता।
जवाबदेही तंत्र स्थानीय स्तर पर प्रभावी शिकायत निवारण और जवाबदेही सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • ईग्रामस्वराज
  • सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS)
  • सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM)
  • ऑडिटऑनलाइन

आगे की राह

  • राज्यों द्वारा पंचायतों को वित्तीय संसाधनों का समय पर और पर्याप्त अंतरण सुनिश्चित करना।
  • पंचायतों में आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती और उनकी क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना।
  • ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों पर पंचायतों को पूर्ण कार्यात्मक स्वायत्तता प्रदान करना।
  • ईग्रामस्वराज जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम चलाना।
  • पंचायतों के लिए एक मजबूत जवाबदेही और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना।
  • पंचायती राज संस्थाओं के पदाधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • राज्यों के पंचायती राज अधिनियमों में एकरूपता लाने और पंचायतों को अधिक शक्तियां प्रदान करने पर विचार करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पंचायती राज संस्थाएँ · स्थानीय स्वशासन · वित्तीय हस्तांतरण · ई-ग्रामस्वराज · 11वीं अनुसूची · अनुच्छेद 243(छ) · राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान · जवाबदेही

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • भाग-9: पंचायतों से संबंधित प्रावधान
  • अनुच्छेद 243(छ): पंचायतों की शक्तियां और उत्तरदायित्व
  • सातवीं अनुसूची: ‘पंचायत’ राज्य सूची का विषय
  • ग्यारहवीं अनुसूची: पंचायतों के 29 विषय

अवधारणा प्रवाह

पंचायतों को अपर्याप्त संसाधन  →  स्थानीय विकास कार्यों में बाधा  →  लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण प्रभावित  →  अंतरण सूचकांक रिपोर्ट का प्रकाशन  →  सुधारों की पहचान और कार्यान्वयन  →  पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण  →  जमीनी स्तर पर प्रभावी शासन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘पंचायत’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची के अंतर्गत एक विषय है।
2. अनुच्छेद 243(छ) राज्य विधानमंडल को पंचायतों को 11वीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों पर शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है।
3. 15वें वित्त आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 की अवधि के लिए कुल 2,97,555 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। ‘पंचायत’ राज्य सूची का विषय है, न कि संघ सूची का। कथन 2 सही है। अनुच्छेद 243(छ) राज्य विधानमंडल को 11वीं अनुसूची के 29 विषयों पर पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है। कथन 3 सही है। 15वें वित्त आयोग ने इस अवधि के लिए 2,97,555 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

Q2. ई-ग्रामस्वराज पोर्टल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह पंचायती राज मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020-21 में शुरू किया गया एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
2. इसका उद्देश्य पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
3. यह केवल नियोजन और बजटन प्रक्रियाओं में सहायता करता है, लेखांकन और भुगतान इसमें शामिल नहीं हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। ई-ग्रामस्वराज को पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 2020-21 में एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू किया गया था। कथन 2 सही है। इसका मुख्य उद्देश्य पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देना है। कथन 3 गलत है। ई-ग्रामस्वराज पूर्ण रूप से (एंड-टू-एंड) नियोजन, बजटन, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान में मदद करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के सशक्तिकरण में वित्तीय हस्तांतरण और डिजिटल शासन की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, ‘राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग, 2024’ रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों पर भी प्रकाश डालिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण में वित्तीय हस्तांतरण (जैसे 15वें वित्त आयोग और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान) और डिजिटल शासन (जैसे ई-ग्रामस्वराज) की भूमिका का विश्लेषण करें। चुनौतियों और सफलताओं दोनों को शामिल करें। दूसरे भाग में, ‘राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग, 2024’ रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों और उसके छह आयामों (रूपरेखा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता में वृद्धि और जवाबदेही) का उल्लेख करें। अंत में, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए आगे के उपायों पर सुझाव दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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