28 Jul पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण पर नवीनतम रिपोर्ट और चुनौतियाँ 2026


मानचित्र व माइंड-मैप: Panchayati Raj Institutions Empowerment
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, संघवाद, स्थानीय स्वशासन, शक्तियों का पृथक्करण | GS Paper III — सरकारी बजट, वित्तीय समावेशन, योजना
- Prelims: पंचायती राज संस्थाएँ (PRI), अनुच्छेद 243(छ), ग्यारहवीं अनुसूची, 15वां वित्त आयोग, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA), ईग्रामस्वराज, ऑडिटऑनलाइन, राज्य सूची
- Essay: भारत में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका, संघवाद और स्थानीय स्वशासन: चुनौतियाँ और आगे की राह
त्वरित पुनरावृत्ति: पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने, जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को बढ़ावा देने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय, प्रशासनिक और कार्यात्मक स्वायत्तता प्रदान करने की एक सतत प्रक्रिया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पंचायती राज मंत्रालय ने फरवरी 2025 में ‘राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग, 2024’ नामक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के वित्तीय और प्रशासनिक सशक्तिकरण की स्थिति का मूल्यांकन करती है, जिसमें अंतरण की प्रभावशीलता और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने में स्थानीय सरकारों की भूमिका का आकलन किया गया है। यह रिपोर्ट संविधान के भाग-9 के अंतर्गत आने वाले राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को छह आयामों पर आधारित समग्र स्कोर और रैंक प्रदान करती है, जिससे पंचायतों के सशक्तिकरण की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश पड़ता है।
पृष्ठभूमि
- ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय सूचीबद्ध हैं जिन पर पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपे जा सकते हैं, जिनमें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ तैयार करना और उनका क्रियान्वयन शामिल है।
- संविधान का अनुच्छेद 243(छ) राज्य विधानमंडलों को कानून द्वारा पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है, जिसमें ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषय भी शामिल हैं।
- ‘पंचायत’ और ‘स्थानीय सरकार’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची के विषय हैं, जिसका अर्थ है कि इनसे संबंधित सभी मामले राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
- पंचायतों को अक्सर अपर्याप्त वित्तीय संसाधनों, कर्मचारियों की कमी और सीमित प्रशासनिक अधिकारों के कारण स्थानीय विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और वित्त आयोगों के माध्यम से पंचायतों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जैसे 15वें वित्त आयोग और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत निधि का आवंटन।
पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण
- पंचायती राज संस्थाओं (PRI) का सशक्तिकरण उन्हें स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से कार्य करने, विकास योजनाओं को लागू करने और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वित्तीय, प्रशासनिक और कार्यात्मक स्वायत्तता प्रदान करने की प्रक्रिया है।
- संविधान के अनुच्छेद 243(छ) के तहत, राज्य विधानमंडलों को पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने और लागू करने की शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार है, जिसमें ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषय शामिल हैं।
- वित्तीय सशक्तिकरण में पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना शामिल है, जिसमें केंद्रीय वित्त आयोगों (जैसे 15वें वित्त आयोग) द्वारा अनुशंसित अनुदान और राज्य सरकारों द्वारा हस्तांतरित निधियाँ शामिल हैं।
- प्रशासनिक सशक्तिकरण का अर्थ है पंचायतों को आवश्यक जनशक्ति, प्रशासनिक अधिकार और निर्णय लेने की स्वायत्तता प्रदान करना ताकि वे अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक कर सकें।
- क्षमता निर्माण (Capacity Building) पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने पर केंद्रित है ताकि वे अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझ सकें और उनका निर्वहन कर सकें।
- जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, पंचायती राज मंत्रालय ने ‘ईग्रामस्वराज’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं, जो नियोजन, बजटन, लेखांकन और ऑनलाइन भुगतान में मदद करते हैं।
- ईग्रामस्वराज का सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS), सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) और ऑडिटऑनलाइन के साथ एकीकरण निधि प्रवाह, खरीद, भुगतान और लेखापरीक्षण में पारदर्शिता लाता है।
- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाएँ पंचायतों की क्षमता निर्माण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं, जिससे जमीनी स्तर पर शासन मजबूत होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अंतरण सूचकांक रिपोर्ट, 2024 | पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के वित्तीय और प्रशासनिक सशक्तिकरण का आकलन, जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने में स्थानीय सरकारों की भूमिका का मूल्यांकन। |
| छह आयामों पर रैंकिंग | रूपरेखा, कार्य, वित्त, पदाधिकारी, क्षमता में वृद्धि और जवाबदेही के आधार पर राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को समग्र स्कोर और रैंक प्रदान करना। |
| 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें | पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक कुल 2,97,555 करोड़ रुपये का आवंटन, स्थानीय विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता। |
| संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) | पंचायतों की क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और सशक्तिकरण के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना। |
| ईग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म | पंचायतों में नियोजन, बजटन, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान को एकीकृत करना, पारदर्शिता और कुशल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देना। |
| PFMS, GeM और AuditOnline के साथ एकीकरण | निधि प्रवाह में पारदर्शिता, खरीद में दक्षता और लेखापरीक्षण में जवाबदेही सुनिश्चित करना, जमीनी स्तर पर शासन और वित्तीय निरीक्षण को मजबूत करना। |
महत्व
लोकतांत्रिक सशक्तिकरण
- पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करता है, जिससे शासन में नागरिकों की भागीदारी बढ़ती है।
- स्थानीय स्वशासन को प्रभावी बनाकर, यह रिपोर्ट शासन को अधिक समावेशी और जवाबदेह बनाने में मदद करती है।
आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय
- पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार मिलने से वे आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू कर पाती हैं।
- स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन संभव होता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार आता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही
- ईग्रामस्वराज और ऑडिटऑनलाइन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाते हैं।
- निधियों के कुशल उपयोग और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है, जिससे सार्वजनिक विश्वास बढ़ता है।
संघवाद को सुदृढ़ करना
- राज्यों और केंद्र सरकार के बीच सहयोग से पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त किया जाता है, जो भारत के संघीय ढांचे को मजबूत करता है।
- स्थानीय स्तर पर प्रभावी शासन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. अपर्याप्त वित्तीय संसाधन
- कई ग्राम पंचायतों को स्थानीय विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अपर्याप्त वित्तीय संसाधनों का सामना करना पड़ता है।
- राज्यों द्वारा पंचायतों को निधियों के अंतरण में असमानता और देरी एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय संघवाद, स्थानीय स्वशासन
2. कर्मचारियों की कमी
- पंचायतों में कर्मचारियों की कमी प्रशासनिक कार्यों और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा डालती है।
- तकनीकी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की अनुपलब्धता योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: स्थानीय प्रशासन, मानव संसाधन
3. सीमित प्रशासनिक अधिकार
- पंचायतों के पास स्थानीय विकास कार्यों को लागू करने के लिए सीमित प्रशासनिक अधिकार होते हैं।
- राज्य सरकारों पर अत्यधिक निर्भरता पंचायतों की स्वायत्तता को कम करती है।
यूपीएससी लिंक: शक्तियों का विकेंद्रीकरण, स्थानीय स्वशासन
4. क्षमता निर्माण का अभाव
- पंचायती राज संस्थाओं के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की कमी है।
- डिजिटल उपकरणों और नई तकनीकों के उपयोग में दक्षता का अभाव भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, क्षमता निर्माण
5. राज्य सरकारों पर निर्भरता
- संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘पंचायत’ राज्य का विषय होने के कारण, पंचायतों की स्थापना और संचालन राज्य के पंचायती राज अधिनियमों के अंतर्गत आता है।
- यह राज्य सरकारों को पंचायतों को शक्तियों और उत्तरदायित्वों के अंतरण में व्यापक विवेक प्रदान करता है, जिससे एकरूपता का अभाव होता है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, राज्य सूची
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वित्तीय स्वायत्तता का अभाव | पंचायतों को राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से प्राप्त अनुदानों पर अत्यधिक निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। |
| कार्यात्मक स्वायत्तता की कमी | ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों में से कई पर पंचायतों को पूर्ण अधिकार नहीं दिए गए हैं, जिससे वे अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से नहीं निभा पाती हैं। |
| मानव संसाधन की कमी | पंचायतों में पर्याप्त और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक दक्षता में बाधा डालती है। |
| डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी | ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट कनेक्टिविटी का अभाव ईग्रामस्वराज जैसे प्लेटफॉर्म के पूर्ण उपयोग में चुनौती पैदा करता है। |
| जवाबदेही तंत्र का कमजोर होना | कुछ मामलों में, पंचायतों के भीतर और बाहर जवाबदेही तंत्र कमजोर होते हैं, जिससे भ्रष्टाचार और अक्षमता की संभावना बढ़ जाती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA)
- ईग्रामस्वराज (eGramSwaraj)
आगे की राह
- पंचायतों को 11वीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी 29 विषयों पर पूर्ण कार्यात्मक और वित्तीय अधिकार प्रदान किए जाएं।
- पंचायतों के अपने राजस्व स्रोतों को बढ़ाने के लिए तंत्र विकसित किए जाएं और उन्हें स्थानीय कर लगाने एवं एकत्र करने की अधिक शक्तियां दी जाएं।
- पंचायती राज संस्थाओं के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियमित और व्यापक क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- पंचायतों में तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए पर्याप्त भर्ती की जाए।
- ईग्रामस्वराज जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता तथा इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार किया जाए।
- राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन मिल सकें।
- पंचायतों के प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहन और दंड का एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पंचायती राज संस्थाएँ · स्थानीय स्वशासन · वित्तीय हस्तांतरण · ग्राम स्वराज अभियान · ई-ग्रामस्वराज · 15वां वित्त आयोग · ग्यारहवीं अनुसूची · अनुच्छेद 243(छ)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243(छ): पंचायतों की शक्तियां और उत्तरदायित्व
- ग्यारहवीं अनुसूची: पंचायतों के 29 विषय
- सातवीं अनुसूची: ‘पंचायत’ राज्य सूची का विषय
अवधारणा प्रवाह
पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण → अंतरण सूचकांक रिपोर्ट का प्रकाशन → वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियों की पहचान → 15वें वित्त आयोग और RGSA से निधि आवंटन → ईग्रामस्वराज जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग → पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल प्रबंधन में सुधार → जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और विकास का सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘पंचायत’ और ‘स्थानीय सरकार’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची के विषय हैं।
2. अनुच्छेद 243(छ) राज्य विधानमंडल को पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा उन्हें लागू करने हेतु शक्तियाँ और उत्तरदायित्व हस्तांतरित करने का अधिकार देता है।
3. 15वें वित्त आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि ‘पंचायत’ और ‘स्थानीय सरकार’ राज्य सूची के विषय हैं। कथन 2 सही है, अनुच्छेद 243(छ) राज्य विधानमंडल को पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व हस्तांतरित करने का अधिकार देता है, जिसमें ग्यारहवीं अनुसूची के विषय भी शामिल हैं। कथन 3 सही है, 15वें वित्त आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं को महत्वपूर्ण वित्तीय आवंटन किए हैं।
Q2. पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ‘ई-ग्रामस्वराज’ प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण
- पंचायतों में पारदर्शिता और कुशल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देना
- ग्रामीण युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करना
- कृषि उत्पादों के विपणन के लिए एक मंच प्रदान करना
उत्तर: पंचायतों में पारदर्शिता और कुशल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देना — ई-ग्रामस्वराज एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे पंचायतों में नियोजन, बजटन, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान में पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के सशक्तिकरण में वित्तीय हस्तांतरण और डिजिटल पहलों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, ‘राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग, 2024’ रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण में वित्तीय हस्तांतरण (जैसे 15वें वित्त आयोग और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान) और डिजिटल पहलों (जैसे ई-ग्रामस्वराज) के महत्व पर चर्चा करें। दूसरे भाग में, ‘राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति’ रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों का उल्लेख करें, जिसमें अंतरण सूचकांक के आयाम और पंचायतों के सामने आने वाली चुनौतियों (जैसे अपर्याप्त वित्तीय संसाधन, कर्मचारियों की कमी) को शामिल करें। अंत में, इन पहलों के बावजूद स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने में आने वाली बाधाओं और आगे के मार्ग पर संक्षिप्त टिप्पणी करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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